एक बार फिर हॉट सीट बन सकती है बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/03/31 10:54

जैसलमेर। बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट पर एक बार फिर रोचक मुकाबला होने की उम्मीद जताई जा रही है। कांग्रेस ने 42 साल के लंबे अंतराल के बाद राजपूत उम्मीदवार पर दांव खेलते हुए भाजपा छोड़ कांग्रेस में आये मानवेन्द्र सिंह को चुनावी मैदान में उतारा है तो वही भाजपा अभी तक इस सीट को लेकर असमंजस में है। 

पूरे देश मे लोकसभा चुनावों की रणभेरी बज चुकी है। सभी राष्ट्रीय व क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां चुनावी मैदान में कूद चुकी है। बात करें अगर भारत-पाक बॉर्डर स्थित बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट की तो ये सीट 2014 में प्रदेश में ही नही बल्कि पूरे देश मे हॉट सीट में सुमार थी। भाजपा ने पिछली बार अटल सरकार में वित्त, विदेश व रक्षा मंत्री रहे भाजपा के कद्दावर नेता जसवंत सिंह का टिकट काटकर कांग्रेस छोड़ भाजपा में आये कर्नल सोनाराम चौधरी को टिकट दिया था। उसके बाद जसवंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस सीट को मूंछ का सवाल बनाकर सोनाराम चौधरी को भले ही संसद पहुंचा दिया, लेकिन इससे भाजपा के परंपरागत वोटर्स राजपूत वर्ग का बड़ा हिस्सा भाजपा के हाथ से फिसलता चला गया। जिसका खामियाजा उसे विधानसभा में भुगतना पड़ा। 

अपने पिता का टिकट कटने के बाद पूर्व सांसद तथा विधायक ने काफी संघर्ष के बाद विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा को छोड़ हाथ का दामन थाम लिया। और कांग्रेस ने उन्हें लोकसभा का टिकट थमा दिया। वर्तमान सांसद कर्नल सोनाराम व मानवेन्द्र सिंह पहले 2 बार लोकसभा चुनावों में आमने सामने हो चुके है। जिसमे एक बार सोनाराम व एक बार मानवेन्द्र सिंह विजयी हुए थे। हालांकि उस वक्त परिस्थितियां अलग थी। दोनों बार सोनाराम चौधरी कांग्रेस से तथा मानवेन्द्र सिंह भाजपा से प्रत्याशी थे। अगर इस बार भाजपा फिर से सोनाराम चौधरी को प्रत्यासी बनाती है तो मुकाबला तो पुराना होगा लेकिन दोनों प्रत्याशियों की पार्टियां जुदा होगी। 

आजादी के बाद से बाड़मेर जैसलमेर सीट पर कांग्रेस ने 2 बार राजपूत समुदाय पर चुनावी दाव खेला है लेकिन दोनों बार उसे हार का मुंह देखना पड़ा है। इस बार 42 साल बाद फिर राजपूत को टिकट देकर 2014 में खोई हुई सीट वापिस हथियाने की कोशिश की है। कांग्रेस जिला प्रवक्ता चंद्रशेखर पुरोहित का कहना है कि मानवेन्द्र के परिवार की राजपूतों के अलावा मुस्लिम समुदाय में भी अच्छी पैठ है। ऐसे में कांग्रेस को छत्तीस कौम के वोट मिलेंगे। मानवेन्द्र लाखों वोटों से जीतकर लोकसभा में जाएंगे। 

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