देश के रहस्यमय मंदिरों में शामिल बाड़मेर का किराडू मंदिर, सदियों से ढो रहा श्राप

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/18 09:22

बाड़मेर: जिले का किराडू मंदिर जहां शाम ढलने के बाद जाने से इंसान पत्थर बन जाता है, कई सदियों से किराडू मंदिर इस श्राप के चलते गुमनाम रहा, भले ही श्राप के चलते लोग शाम ढलने के बाद यहां नहीं आते लेकिन भारतीय सभ्यता व कलाकृति को समेटे किराडू मंदिर लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. अब धीरे-धीरे गुमनामी से बाहर निकल कर किराडू मंदिर पर्यटन के रूप में विकसित हो रहा है. 

शाम ढलने के बाद मंदिर में कोई प्रवेश नहीं करता: 
देश के रहस्यमय मंदिरों में से एक बाड़मेर जिले में स्थित किराडू मंदिर, एक हजार साल पूराना किराडू प्रसिद्ध मंदिर कई रहस्यों को दबाए हुए हैं. शाम ढलने के बाद किराडू मंदिर में कोई प्रवेश नहीं करता इतना ही नहीं शाम ढलने के साथ ही मंदिर में खामोशी डर पैदा करती हैं. इसी खामोशी के डर के चलते रात में मंदिर में कोई नहीं रुकता. किराडू मंदिर जितना ही भारतीय संस्कृति सभ्यता और कलाकृति को समेटे हुए हैं उतना ही किराडू मंदिर का इतिहास लोगों में सिहरन पैदा करता है. किराडू मंदिर की सभ्यता कलाकृति एक और जहां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है वहीं शाम ढलने के साथ ही मंदिर में कोई रुकना नहीं चाहता. श्राप के चलते किराडू मंदिर बहुत समय तक गुमनामी की चादर में गुम रहा. इसी श्राप के चलते 900 साल तक किराडू मंदिर वीरान रहा. किराडू मंदिर सदियों से इंसानों के पत्थर बनने, भूत-प्रेत आत्माओं का निवास होने सहित कई रहस्यों को दबाए हुए हैं. 

वीरान होने के चलते किराडू मंदिर गुमनाम रहा: 
पांच मंदिरों की श्रृखंला में स्थित किराडू मंदिर में इतिहास को लेकर स्थानीय लोग बताते हैं कि किराडू मंदिर का निर्माण 11 वीं शताब्दी में हुआ. 11वीं शताब्दी में परमार वंश का राज हुआ करता था. राजा दुलशालराज और उनके वंशजों ने किराडू में 35 मंदिरों का निर्माण किया था लेकिन बाद में मोहम्मद गजनवी ने मंदिरों पर आक्रमण कर मंदिरों को खंडहर में तब्दील कर दिया. तब से मंदिरों की पांच श्रृखंला ही अब किराडू में स्थित है. मोहम्मद गजनवी के आक्रमण में 30 मंदिर खंडहर में तब्दील हो गए. 19वीं शताब्दी में प्रारंभ में आए भूकंप से भी इन मंदिरों को बहुत नुकसान पहुंचा. वहीं सदियों से किराडू में मंदिर वीरान होने के चलते किराडू मंदिर गुमनाम रहा. आज इन पांच मंदिरों में से केवल विष्णु मंदिर और सोमेश्वर मंदिर ठीक हालत में है. सोमेश्वर मंदिर यहां का सबसे बड़ा मंदिर है ऐसी मान्यता है कि विष्णु मंदिर से ही यहां के स्थापत्य कला की शुरुआत हुई थी और सोमेश्वर मंदिर को इस कला के उत्कृर्ष का अंत माना जाता है. किराडू अपने मंदिरों की शिल्पकला के लिए विख्यात है. किराडू को राजस्थान का खजुराहो भी कहा जाता है लेकिन 900 साल तक विरान होने के चलते किराडू को खजुराहो जैसी ख्याति नहीं मिल पाई.

साधु के श्राप से जुड़ा रहस्य:  
किराडू मंदिर में सदियों पहले यहां चहल पहल हुआ करती थी सभी सुख सुविधाओं से युक्त विकसित प्रदेश था दूसरे प्रदेशों के लोग यहां पर व्यापार करने आते थे, लेकिन मान्यता के अनुसार स्थानीय लोग बताते हैं कि किराडू मंदिर के वीरान होने के पीछे एक साधु के श्राप से रहस्य जुड़ा हुआ है. मान्यता है कि सदियों पहले किराडू में एक तपस्वी साधु आए उनके साथ उनके अपने शिष्य भी थे, साधु शिष्यों को किराडू में छोड़कर भ्रमण पर निकल गए इस बीच शिष्यों का स्वास्थ्य खराब हो गया लेकिन एक वृद्धा के अलावा शिष्यों की किसी ने मदद नहीं की. जब साधु भ्रमण से वापस किराडू शहर लौटे तब शिष्यों की दुर्दशा स्वास्थ्य खराब देखकर साधु को क्रोध आ गया और तपस्वी साधु ने गांव को श्राप दे दिया कि शाम ढलने के बाद सभी लोग पत्थर बन जाएंगे. तपस्वी साधु ने शिष्यों की मदद करने वाली वृद्धा से शाम ढलने से पहले यहां से चले जाने का भी कहा, लेकिन वृद्वा अपने घर को नहीं छोड़ पाई और कहा जाता है कि साधु के श्राप से सभी लोग पत्थर बन गए, जिससे किराडू शहर वीरान हो गया तब से सदियों से किराडू वीरान ही रहा. लेकिन अब एक हजार साल बाद किराडू मंदिरों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है. अब किराडू मंदिर को इस श्राप से भी मुक्ति मिलने लगी है धीरे-धीरे लोग इस श्राप को भूल कर मंदिर में आने जाने लगे हैं.

भूत प्रेत आत्मा जैसी कोई चीज नहीं देखी: 
किराडू मंदिर में पिछले 6 सालों से गार्ड की नौकरी कर रहे नरपतराम ने फर्स्ट इंडिया को बताया कि वह पिछले 6 साल से मंदिर में गार्ड की नौकरी कर रहा है और हर रात शाम ढलने के बाद भी पूरी रात मंदिर के आगे के हिस्से में बने क्वार्टर में ही सोता है लेकिन अभी तक इंसान के पत्थर बनने और भूत प्रेत आत्मा जैसी कोई चीज नहीं देखी, गांव के लोग भी बताते हैं कि अब अंधविश्वास को लोग भूल कर किराडू मंदिर की सभ्यता कलाकृति को देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं. देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए 2 करोड़ के बजट से किराडू मंदिरों को पर्यटन के रूप में विकसित किया जा रहा है.

मंदिर की कलाकृति लोगों का मन मोह लेती है: 
साधु के श्राप के चलते भले ही 900 साल तक किराडू वीरान रहा लेकिन अब किराडू मंदिरों की संस्कृति सभ्यता और कलाकृति लोगों का मन मोह लेती है. दिरों की कलाकृति को देखने के लिए देश के साथ विदेशों से भी पर्यटक किराडू आते हैं. प्रदेश सरकार ने किराडू मंदिरों को पर्यटन के रूप में विकसित करने को लेकर दो करोड़ का बजट भी पारित किया जिसके चलते किराडू मंदिरों में विकास कार्य भी हुए हैं ऐसे में अब उम्मीद है कि सदियों से चले आ रहे श्राप से अब किराडू मंदिर को मुक्ति मिलेगी.

...लूणाराम दर्जी फर्स्ट इंडिया न्यूज बाड़मेर

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in