VIDEO: भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे देने की अड़चनें होंगी दूर, निकायों में बरसों से लंबित मुआवजा प्रकरणों का होगा निस्तारण 

VIDEO: भूमि अधिग्रहण के मामलों में मुआवजे देने की अड़चनें होंगी दूर, निकायों में बरसों से लंबित मुआवजा प्रकरणों का होगा निस्तारण 

जयपुर: मुआवजे देने को लेकर तकनीकी पेचीदगियों में उलझे भूमि अधिग्रहण मामलों के निस्तारण को लेकर राज्य सरकार ने एक स्पष्ट फार्मूला लागू किया है. इससे ना केवल प्रभावित खातेदार को उसका मुआवजा मिल सकेगा, बल्कि निकायों ने जिस उद्देश्य से भूमि का अधिग्रहण किया था वह भी पूरा हो सकेगा.निकायों की ओर से विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से अधिग्रहित की गई भूमि के मुआवजे के प्रकरण वर्षों से लंबित चल रहे हैं. पूरे प्रदेश में जमीनी मुआवजे का एक स्पष्ट फार्मूला नहीं होने के कारण ना तो अधिग्रहित भूमि का कब्जा निकायों को मिल पा रहा है और उधर प्रभावित खातेदार भी मुआवजे के लिए तरस रहे हैं. इन प्रकरणों में सबसे अधिक दिक्कत ऐसे मामलों में आती है जिनमें भूमि तो किसी योजना के लिए अधिग्रहित की गई. लेकिन विकसित भूखंड का मुआवजा किसी दूसरी योजना में दिया गया है.

प्रभावित खातेदार को कितनी भूमि का दिया जाए मुआवजा: 
दोनों योजनाओं की भूमि की कीमत में अंतर के कारण प्रभावित खातेदार को कितनी भूमि का मुआवजा दिया जाए, इसको लेकर वर्तमान में एकरूपता नहीं है इसके कारण हो रही विसंगतियों को दूर करने के लिए यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल के स्तर पर मंथन किया गया. इसके बाद सरकार ने आदेश जारी कर एक स्पष्ट फार्मूला लागू किया है. आपको बताते हैं इस फार्मूले के अनुसार किस प्रकार विकसित भूखंड का मुआवजा दिया जाएगा.

इस प्रकार मिलेगा विकसित भूखंड का मुआवजा:
-अवाप्त भूमि का मुआवजा किसी अन्य योजना में दिया जाता है.
-तो मुआवजे में दी जाने वाली भूमि का आकार एक फार्मूले से तय होगा.
-इस फार्मूले के मुताबिक कुल अवाप्त भूमि की 25% भूमि के आकार को गुणा किया जाएगा.
-जिस योजना के लिए भूमि अवाप्त की जानी है उसकी दर से गुणा किया जाएगा
-इसके लिए योजना की आरक्षित दर और डीएलसी दर इनमें से जो भी अधिक होगी उस से गुणा किया जाएगा.
- जिस अन्य योजना में मुआवजा दिया जाना है उस योजना की दर का प्राप्त गुणनफल में भाग दिया जाएगा.
-इसके लिए भी योजना की आरक्षित दर और डीएलसी दर में से जो भी अधिक होगी, उससे ही भाग दिया जाएगा.
-इस भागफल से प्राप्त आकार की भूमि बतौर कुल मुआवजा दी जाएगी.
- इसी फार्मूले के मुताबिक मुआवजे में दिए जाने वाले आवासीय भूखंड के क्षेत्रफल की गणना के लिए अवाप्त भूमि के 20% क्षेत्रफल से गुणा किया जाएगा.
-इसी प्रकार व्यावसायिक भूखंड के क्षेत्रफल की गणना के लिए 5% क्षेत्रफल से गुणा किया जाएगा.

तीनों प्राधिकरण में समान फार्मूला लागू:
अधिग्रहण के कई मामलों में भूमि जयपुर विकास प्राधिकरण, अजमेर विकास प्राधिकरण और जोधपुर विकास प्राधिकरण की विभिन्न धाराओं के तहत संबंधित प्राधिकरण खातेदार से आपसी समझौते के आधार पर भूमि लेता है, तो ली गई जमीन के बदले ऐसे मामलों में कितना जमीनी मुआवजा दिया जाए? इसके लिए भी तीनों प्राधिकरण में समान फार्मूला लागू किया गया है. आपको बताते हैं कि यह फार्मूला किस तरह से काम करेगा.

जानिए, इस तरह करेगा फार्मूला काम:
- सबसे पहले ली गई भूमि की किस्म या लैंड यूज़ के अनुसार उस भूमि की कुल कीमत डीएलसी के अनुसार निकाली जाएगी.
- जिस योजना में मुआवजा दिया जाना है उसकी डीएलसी दर का ली गई भूमि की कुल कीमत में भाग दिया जाएगा.
- चाहे जमीनी मुआवजा उसी योजना में दिया जाए जिसके लिए भूमि ली गई है अथवा मुआवजा अन्य योजना में दिया जाए.
- दोनों परिस्थितियों में यही फार्मूला लागू होगा.
- प्राप्त भागफल में भूमि का जो क्षेत्रफल प्राप्त होगा उतनी ही भूमि बतौर मुआवजा दी जाएगी.

इन सबके अलावा केंद्रीय भूमि अवाप्ति अधिनियम के तहत भूमि की अनिवार्य अवाप्ति की जाती है ऐसे मामलों में 25% उसे 15% विकसित भूखंड देने का प्रावधान है. राज्य सरकार की ओर से जो यह नया फार्मूला लागू किया गया है इससे सभी निकायों के जमीनी मुआवजे के प्रकरणों में एकरूपता रहेगी.

और पढ़ें