VIDEO: कांग्रेस की जीत का मूलमंत्र एकता, बीजेपी के लिये टिकट बदलना रहा घाटे का सौदा 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/31 11:31

जयपुर (योगेश शर्मा)। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले रामगढ़ के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस में जोश का संचार कर दिया है। इसे अशोक गहलोत के लिये सरकार बनने के बाद पहली बड़ी राजनीतिक सफलता कहा जायेगा। राहुल गांधी का किसान कर्ज माफी का कार्ड और सेकुलर पॉलिटिक्स भी रामगढ़ में कांग्रेस के पक्ष में सफलता की गारंटी साबित हुई। पूरे चुनावों में कांग्रेस में जमीनी एकता दिखी तो बीजेपी में एकजुटता के साथ मुकाबले का अभाव नजर आया। खास रिपोर्ट-

वसुंधरा शासनकाल के आखिरी चरण में अलवर लोकसभा के उपचुनाव हुये थे। उस समय जमीनी सियासी हालात नजर आ गये थे कि डॉ करण सिंह यादव के सामने डॉ जसवंत सिंह यादव नहीं टिक पायेंगे। कांग्रेस के चुनावी मैनेजमेंट की कमी से तब करण सिंह की जीत बड़ी तो थी, लेकिन विराट नहीं पाई वहीं जसवंत यादव को अत्यधिक आत्मविश्वास ले डूबा। भंवर जितेन्द्र सिंह ने सियासी चातुर्य उस समय दिखाया। हालांकि बीजेपी थिंक टैंक अलवर में हार मान कर चल रहे थे। इसका अहसास उस समय वहां कैम्प कर रहे तत्कालीन बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को हो गया था। इसके बाद विधानसभा के चुनाव आ गये। कांग्रेस को यहां भारी जीत की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। तिजारा में दुरु मियां, करण सिंह यादव चुनाव हार गये, थानागाजी व किशनगढ बास में कांग्रेस की करारी पराजय हो गई। बहरोड़, तिजारा, किशनगढ बास, थानागाजी में गैर कांग्रेस, गैर भाजपाइयों ने जीत दर्ज कर ली। बीजेपी का तो और भी बुरा हाल रहा। रामहेत यादव, रोहिताश्व शर्मा जैसे दिग्गज परास्त हो गये। कुल मिलाकर अलवर जिले में विधानसभा चुनावों के परिणाम बेहद चौंकाने वाले रहे। ऐसे में रामगढ़ से यह उम्मीद की जा रही थी, लेकिन समय रहते कांग्रेस ने यहां मोर्चेबंदी कर ली। 

कांग्रेस का मिशन रामगढ़

—सबसे पहले तय हुआ जुबेर नहीं साफिया होगा उम्मीदवार
—पर्दे के पीछे जुबेर खान बनायेंगे रणनीति
—पढ़ी लिखी साफिया की इमेज का होगा सियासी लाभ
—फिर जाहिदा के कारण नाराज हुये मेवों को साधा गया
—यह काम किया अशोक गहलोत, सचिन पायलट और भंवर जितेन्द्र सिंह ने
—अविनाश पांडे ने ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिये फील्ड में भेजा डॉ रघु शर्मा को
—शर्मा ने वहां ब्राह्मण फेक्टर को भी साधने का काम किया
—कांग्रेस को पता था ज्ञानदेव आहूजा के नहीं होने का क्या लाभ मिलेगा लिहाजा कांग्रेस ने चुनाव को हिन्दू - मुस्लिम नहीं होने दिया
—किसान कर्ज माफी के फैसले को भुनाने का पूरा प्रयास किया गया
—कांग्रेस ने रामगढ़ में सेकुलर पॉलिटिक्स का सहारा लिया और कामयाबी
—मुख्यमंत्री गहलोत के दौरों ने यहां कांग्रेसियों में जोश भरा
—पुराने राहुल फार्मूले को अपनाते हुये कांग्रेस ने यहां गहलोत-पायलट के साझा दौरे कराये, अविनाश पांडे साथ साथ रहे इसका लाभ मिला
—रामगढ़ में पिछले 10सालों से बीजेपी विधायक रहा लेकिन विकास नहीं होना यहां बड़ा मुद्दा रहा, कांग्रेस ने इसका सियासी लाभ लिया
—मेवात के रामगढ़ में यह मिथक पिछले कुछ सालों से रहा है जब राज्य में कांग्रेस होता है यहां विरोधी दल का विधायक बनता, यह मिथक भी साफिया की जीत से टूट गया
—मेव मुस्लिम और दलित वोट यहां कांग्रेस के लिये ट्रम्प कार्ड बना

भारतीय जनता पार्टी ने रामगढ़ चुनाव को गंभीरता से शायद लिया नहीं लिया। विधानसभा चुनावों में मिली पराजय की निराशा से उबरने का अच्छा अवसर हो सकता था, लेकिन ऐसा बीजेपी कर नहीं पाई क्या कारण रहे बताते है। 

रामगढ़ में क्यों हारी भाजपा

—पहली गलती हुई उम्मीदवार चयन में
—ज्ञानदेव आहूजा के टिकट कटने से सही संदेश नहीं गया
—इससे बीजेपी हिन्दू कार्ड को आंच आई
—बीजेपी के चुनाव प्रचार में धार नजर नहीं आई
—वसुंधरा राजे का फेस आगे रहता तो मुकाबला संघर्ष पूर्ण हो सकता था
—लेकिन वर्तमान में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी और नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया है दोनों का यहां खास प्रभाव नहीं दिखा
—संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ने बिसात बिछाने की कोशिश की लेकिन अलवर उपचुनाव जैसी गलतियां हो गई
—मॉब लिचिंग जैसे मुद्दों से नुकसान हुआ
—बीजेपी के प्रचार में एकता का अभाव दिखा
—सामान्य और ओबीसी वोटों को साधने की प्लानिंग ठीक ढंग से नहीं बन पाई
—कुशल संगठक बीरम देव को ग्राउंड पर भेजा लेकिन उनके दिये इनपुट पर समय रहते नेतृत्व ने समुचित एक्शन नहीं लिया
—बीजेपी को लगा कि बसपा के कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने से लाभ मिल जायेगा हालांकि यह दिवा स्वप्न साबित हुआ

बहुजन समाज पार्टी का रामगढ़ में कोई पुराना सुनहरा इतिहास नहीं है। जगत सिंह ने मुकाबले की कोशिश की मगर उन्हें कैडर का साथ नहीं मिल पाया। अत्यधिक आत्मविश्वास से भी नुकसान हुआ। जगत सिंह को जिला बदलने से नुकसान हुआ। कांग्रेस ने मेव वोटो में सेंध नहीं लगने दी। चुनाव परिणामों के बाद राज्य की विधानसभा में कांग्रेस ने बहुमत के आंकडे को प्राप्त कर लिया है। साथ ही लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी पर मानसिक राजनीतिक बढ़त बनाने का प्रयास किया है। 

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