इस वजह के चलते सैकड़ों लोगों ने गाजेबाजे के साथ किया मतदान बहिष्कार का ऐलान

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/11/06 02:48

कोटा। आमतौर पर आपने नेताओं द्वारा झूठे वादे करने की शिकायतें जनता द्वारा करते सुना होगा लेकिन कोटा जिले की कोलाना ग्राम पंचायत के लोगों का दर्द इससे भी बढकर हैं । यहां के लोग कह रहे हैं कि हमारे साथ अफसरों ने झूठे वादे किये और नाराज होकर इस पंचायत के पांच गांवों के सैकड़ों वोटर्स ने विधानसभा चुनाव 2018 के मतदान के बहिष्कार का ऐलान बाकायदा गाजेबाजे के साथ कर डाला हैं । आखिर क्युं लोकतंत्र के इस महापर्व में शामिल नहीं होना चाहते कोटा की कोलाना ग्रामपंचायत के लोग और यहां के मतदाता किस पर लगा रहे हैं छलकपट और झूठे वादे करने के आरोप । 

मतदान के बहिष्कार की आवाजें उठा रहे ये ग्रामीण कोटा जिले की कोलाना ग्रामपंचायत के हैं । जहां के दमदमा,सारंगपुर,सातधारा,माणकचौक और फाटक डाबरा समेत पंचायत के सभी पांच गावों के करीब 600 मतदाताओं ने एकराय होकर न सिर्फ मतदान का बहिष्कार करने बल्कि नेताओं को चुनाव प्रचार के लिये गांव में घुसने तक नहीं देने का भी फैसला कर लिया हैं । इन ग्रामीण मतदाताओं की नाराजगी ये हैं कि पिछले एक दशक से लगातार उठ रही उनकी आवाज को शासन अनसुना करता आ रहा हैं । ग्रामीणों की मांग श्यामपुरा-मांदलिया रोड के करीब दस किलोमीटर के कच्चे टुकडे से जुड़ी हैं । गांववाले बताते हैं कि गांव को कोटा से जोड़ने वाले गड्ढो और कांटों से भरे इस रोड ने उनका जीना दूभर कर रखा हैं । ये सडक कई प्रसूताओं-नवजातों की जान तो ले ही चुकी हैं लेकिन सङक नहीं होने से अब तो इस गांव में कोई बेटी तक भी देने को भी तैयार नहीं हो रहा।

असल में इस ग्रामपंचायत के लोगों ने साल 2013 के विधानसभा चुनावों में भी इसी सडक की मांग को लेकर मतदान के बहिष्कार का ऐलान किया था लेकिन तब एसडीएम-तहसीलदार ने समझाइश करके सडक बना देने का वादा किया तो लोग मतदान प्रक्रिया में खुशी-खुशी शामिल हुये लेकिन पूरे पांच साल गुजर गये और अफसरों का वादा भी चुनावी और झूठा ही निकला । हालात आज भी जस के तस हैं और साल 2006 से बजट स्वीकृति के बावजुद तकनीकी कारणों से बंद पडे इस सडक का निर्माण नहीं होने से गांववालों में भारी नाराजगी हैं । इसिलिये अब यहां के लोगों ने कह दिया हैं रोड नहीं तो वोट नहीं । 

फर्स्ट इंडिया ने जब पूरा मामला जिले के निर्वाचन अधिकारी से सामने रखते हुये मतदान के बहिष्कार की बात बतायी तो एक्टिव आईएस अफसरों में शुमार कोटा कलेक्टर गौरव गोयल ने अधिकारियों को तुरत-फुरत में इन गांवों में दौड़ाया लेकिन ग्रामीणों ने फर्स्ट इंडिया को बताया हैं किअफसर गांव को रोड देने का प्लान बताने के बजाय समझाइश के नाम पर वोटिंग प्रक्रिया में बाधा डालने की कानूनी प्रक्रिया अमल में लाने की धमकी ज्यादा देते दिखे हैं । लेकिन यहां के पांच गांवों के ये लोग अभी भी इसी बात पर अड़े हैं कि ,इस बार रोड नहीं तो वोट नहीं, 
भंवर सिंह चरण फर्स्ट इंडिया न्यूज कोटा
 

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