Behror Update: बहरोड़ लॉकअप कांड में आरोपी को फरार करवाने में पुलिस की ही मुख्य भुमिका

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/12 02:11

अलवर: अलवर के बहरोड़ थाने पर फायरिंग कर पपला गुर्जर को भगा ले जाने के मामले में परत दर परत नये खुलासे होते जा रहे है. आरोपी को फरार करवाने में पुलिस की ही मुख्य भुमिका सामने आई है. थाने पर आरोपी को भगाने को लेकर लाखों रुपये का सौदा भी हुआ, लेकिन थाने के करीब सभी पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी मिल गई. जिसके बाद सभी के लालच के चलते सौदा नहीं हो सका और बदमाश पपला गुर्जर साथियों की मदद से फरार हो गया. 

मामले में कई तरह की कहानियां:
गैंगस्टर पपला गुर्जर के फरार होने के बाद स्थानीय पुलिस ने कई तरह की सफाई दी. मामले में कई तरह की कहानियां बनाई गई, लेकिन पुलिस के आलाधिकारियों की जांच आगे बढ़ी तो सामने आने लगा कि पुलिस विभाग के लोग ही इस मामले में दोषी है. पुलिस ने गैंगस्टर को फरार करवाने में सहयोग करवाने वाले 5 लोगों को तो गिरफ्तार कर लिया, लेकिन कई पुलिसकर्मियों की ओर से भी सहयोग की भुमिका निभाने में भागिदारी साफ होने के बाद भी एक भी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. 

पपला गुर्जर ने हेड कांस्टेबल की मदद से किया फोन:
सूत्रों की मानें तो घटनाक्रम के दिन पपला गुर्जर ने ही फोन करके अपने साथियों को थाने पर बुलाया था. किसी भी बदमाश की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसके बाद मिले फोन को जब्त कर लेती है, लेकिन बहरोड़ थाना प्रभारी सुगन सिंह ने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट की, जिसमे जब्त रुपये के साथ पपला गुर्जर को दिखाया था. सवाल खड़ा होता है कि जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर रखा था, तो उसने अपने सहयोगियों को फोन कैसे कर दिया. जानकारी में ये भी आ रहा है कि पपला गुर्जर ने हेड कांस्टेबल की मदद से ही अपने साथियों को फोन किया था, जिसमें कोडवर्ड में ये कहा था कि यहां पर 20 से 25 पुलिसकर्मियों के साथ सौदा करना है, जिसके लिए करीब 70 से 80 की जरुरत होगी. पुलिस को ये लग रहा था कि 25 पुलिकर्मियों के लिए 70 से 80 लाख रुपये की व्यवस्था करने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन पपला गुर्जर कोडवर्ड के जरिये गैंग के साथियों को समझा रहा था कि 20 से 25 पुलिसकर्मी थाने पर मौजूद है. उसे फरार करवाने के लिए 70 से 80 राउंड फायर करके उसे फरार करवाना होगा. 

पपला गुर्जर ने ही बनाई थी फरारी की योजना:
—कोडवर्ड के जरिये भेजा था साथियों को मैसेज
—पुलिसकर्मियों के सामने ही किया था साथियों को फोन
—लाखो रुपये में सौदा तय करने के बाद किया था फोन
—कोडवर्ड में थाने में 20 से 25 पुलिसकर्मी होने की कही बात
—करीब 70 से 80 फायरिंग करने का भी कोडवर्ड में दिया मैसेज
—पुलिस नही समझ पायी थी पपला गुर्जर का कोडवर्ड मैसेज
—पुलिस कर रही थी सौदे की राशि का इंतजार
—और रुपये की जगह थाने पर बरस गई गोलियां

थाना स्तर पर ही मामले को दबाने का प्रयास:
राजस्थान का कुख्यात गैंगस्टर रहा आनंदपाल जब परबतसर के पास में से फरार हुआ था, तो उसका सहयोग करने वाले पुलिसकर्मी शक्तिसिंह को बर्खास्त करने के बाद गिरफ्तार किया था. अब सवाल खड़े होने लगे है कि आखिरकार पपला गुर्जर को फरारी में सहयोग करने वाले पुलिसकर्मियों को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया है. पुलिस की संदिग्ध भुमिका का खुलासा इस बात से भी होता है कि सीएम अशोक गहलोत की एसपी कांफ्रेंस के बाद भिवाड़ी एसपी अमनदीप सिंह कपुर ने नीमराणा मामले को लेकर थानाप्रभारियों की बैठक ली थी. इस दौरान सुबह करीब साढे 5 बजे थानाप्रभारी सुगन सिंह एसपी से मिले थे, लेकिन पपला गुर्जर की गिरफ्तारी या 31 लाख रुपये जब्त करने के बारे में एसपी को जानकारी नही दी थी. यानि थाना स्तर पर ही मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा था. 

डीजीपी को भी मिलीभगत का शक:
ये बात इससे भी साबित होती है कि पपला गुर्जर को पकड़ने के बाद पुलिस ने मौके से फरार हुए उसके 2 अन्य साथियों की गिरफ्तारी के लिए नाकाबंदी नहीं करवाई और पुलिस कंट्रोल रुम को सूचना नहीं दी. घटना के बाद डीजीपी को भी पुलिस की स्थानीय स्तर पर हुई मिलीभगत का शक हुआ, जिसके चलते पूरे मामले की तुरंत एसओजी को कमांड दे दी गई. थाने के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे और रोजनामचे से भी पुलिसअधिकारियों को कई तरह की अहम जानकारियां हाथ लगी है. जिसके चलते पुलिसकर्मियों के खिलाफ ओर कड़े एक्शन लिये जा सकते है. बहरहाल इस घटना के बाद खाकी पर जो दाग लगे है, उन्हे धोना तो मुश्किल है, लेकिन एसओजी पपला गुर्जर को जल्द गिरफ्तार कर लेती है तो आमजन में पुलिस के लिए विश्वास कुछ हद तक कायम रखा जा सकेगा. 

... संवाददाता शिवेंद्र परमार की रिपोर्ट 
 

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