जयपुर VIDEO: बेणेश्वर का गांधी परिवार से पुराना सियासी और अनूठा रिश्ता, राहुल गांधी बोले- मैं यहां फिर आऊंगा आदिवासी कुंभ में भाग लूंगा

VIDEO: बेणेश्वर का गांधी परिवार से पुराना सियासी और अनूठा रिश्ता, राहुल गांधी बोले- मैं यहां फिर आऊंगा आदिवासी कुंभ में भाग लूंगा

जयपुर: बेणेश्वर का गांधी परिवार से पुराना सियासी और अनूठा रिश्ता है . यही कारण है कि गांधी परिवार के सदस्य यहां जनसभाओं में शिरकत करना पसंद करते है. कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने आज बेणेश्वर में आदिवासियों के बीच रैली की और मावजी महाराज और शिव मंदिर के दर्शन किए.  राहुल गांधी बोले मैं फिर यहां आऊंगा आदिवासी कुंभ में भाग लूंगा. सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि यहां आते ही मुझे राजीव गांधी जी की याद आ जाती है. बहरहाल बेणेश्वर में राहुल गांधी के भाषण के सियासी मायने है कि उनकी जनयात्राओं का आगाज आज आदिवासी अंचल से हो गया.

कभी कांग्रेस के लिये वागड़ और बेणेश्वर प्रिय इलाका था. गांधी परिवार की बेणेश्वर के तीर्थ पर सभाएं आज भी आदिवासियों के जहन में है . लेकिन धीरे धीरे सियासी तापमान बदला है . वागड़ में बढ़ते कांग्रेस के ग्राफ को बीजेपी और बीटीपी ने पिछले कुछ सालों में चुनौती दी है. राहुल गांधी ने जब आज बेणेश्वर पर पुल का शिलान्यास किया तो उनकी आदिवासियों के प्रयाग को देखकर यादें ताजा हो गई. आज सुबह मैंने बेणेश्वर धाम में दर्शन किए और मुझे बहुत खुशी हो रही है कि यहाँ हम इस पुल का शिलान्यास कर रहे हैं. हर साल लाखों आदिवासी भाई और बहन यहाँ दर्शन करने आते हैं और मुझे बताया गया है कि बारिश के समय उनको बहुत कष्ट होता है, मुश्किल होती है. इसीलिए हम इस पुल का शिलान्यास कर रहे हैं. तो मैं आप सबको बधाई देना चाहता हूं और ये भी बताना चाहता हूं कि आने वाले समय में जब आपका मेला होगा, तो मैं भी यहाँ आपके साथ आकर दर्शन करुंगा. इस मेले को आदिवासियों का महाकुंभ कहा जाता है, तो मैं भी अपनी आंखों से देखना चाहता हूं कि मेले में क्या होता है और दर्शन करना चाहता हूं.कांग्रेस पार्टी का और आदिवासियों का बहुत पुराना रिश्ता है, गहरा रिश्ता है. आपका जो इतिहास है, उसकी हम रक्षा करते हैं. हम जो आपकी हिस्ट्री है, आपका इतिहास है, उसको मिटाना, दबाना नहीं चाहते हैं. 

सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि वो जब भी बेणेश्वर की धरती पर आते है तो राजीव गांधी की यादें ताजा हो जाती है . सीएम अशोक गहलोत ने आदिवासी अंचल और गांधी परिवार के बीच के अनूठे संबंध को बयान किया. वागड़ से निकली आवाज दूर तलक जाती है. आस-पास की कम से 30 सीटों पर होता है असर .बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर,चितौड़,भीलवाड़ा और राजसमंद तक की प्रादेशिक आदिवासी पट्टी पर प्रभाव पड़ता है .साथ ही गूंज सुनाई देती गुजरात, एमपी समेत विभिन्न प्रदेशों तक . लगता यही है कि मावजी महाराज की धरती से राहुल गांधी ने आदिवासियों के बीच जाकर जन जागरण अभियान का आगाज कर दिया. 

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