बंगाल : भाजपा के शुभेंदु अधिकारी चुने गए नेता प्रतिपक्ष

बंगाल : भाजपा के शुभेंदु अधिकारी चुने गए नेता प्रतिपक्ष

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में दूसरे सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में सामने आई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी को नेता प्रतिपक्ष चुना. केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पार्टी विधायकों के साथ बैठक करने के बाद शुभेंदु अधिकारी के भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने की घोषणा की. अधिकारी ने एक कड़े मुकाबले में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम विधानसभा सीट से 1900 मतों के अंतर से हराया है. गौरतलब है कि 294 सदस्यों वाली विधानसभा में भाजपा 77 सीटों पर जीत हासिल कर प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभरी है.

भाजपा ने नदिया सीट से जीत हासिल करने वाले मुकुल राय समेत पार्टी के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं को दरकिनार कर अधिकारी को तवज्जो दी है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों पर जीत हासिल कर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई है. वहीं गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के बिनय तमांग धड़े के निर्दलीय उम्मीदवार आर एस लेपचा ने कलिमपोंग से जीत हासिल की. कांग्रेस और वाम दलों का खाता भी नहीं खुल सका. भाजपा की बंगाल इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने संवाददाताओं से कहा कि विपक्ष के रूप में भाजपा के पास विधायकों की शानदार संख्या है.

भाजपा की बैठक में मौजूद 22 विधायकों ने अधिकारी के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया. घोष ने बताया कि अधिकतर विधायक भाजपा कार्यकर्ताओं पर हुए हमले को लेकर सहायता कार्य में व्यस्त हैं जबकि दो विधायक कोरोना से संक्रमित हो गए हैं. मुकुल राय ने कहा कि विधानसभा में शुभेंदु भाजपा का पक्ष जोरदार तरीके से रखेंगे और पार्टी को नयी ऊंचाईयों पर ले जाने के अलावा सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के गलत कार्यों का विरोध जोरदार तरीके से करेंगे. एक समय तृणमूल कांग्रेस में नंबर दो माने जाने वाले मुकुल रॉय ने चुनाव से पहले तृणमूल के कई नेताओं को भाजपा में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई थी.

नेता प्रतिपक्ष चुने जाने पर अधिकारी ने कहा कि मैं 2006 से विधायक हूं. मैंने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अहंकार को देखा है. हमें संसदीय नियमों के मुताबिक विधानसभा में विपक्ष की रचनात्मक भूमिका अदा करनी होगी. दरअसल, 2007-08 में नंदीग्राम में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान अधिकारी ममता बनर्जी के साथ थे और उन्होंने भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बनाई गयी समिति के गठन में अहम भूमिका निभाई थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली सरकार नंदीग्राम की हजारों एकड़ जमीन को कब्जे में लेकर उसे पेट्रोकैमिकल का गढ़ बनाना चाहती थी. ममता सरकार में परिवहन और पर्यावरण समेत कई अहम मंत्रालय संभाल चुके अधिकारी पिछले वर्ष दिसंबर में भाजपा में शामिल हुए थे. (भाषा)

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