VIDEO: सांसद बनने के बाद फिर मैदान में 'बोतल' के सहारे बेनीवाल

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/12 09:05

जयपुर: राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी आरएलपी के लिये यह सुखद खबर.. 'बोतल' को उनकी पार्टी के चुनाव चिन्ह के तौर पर मान्यता मिल गई है. देश के निर्वाचन आयोग ने आरएलपी को क्षेत्रीय दल मानते हुये चुनाव चिन्ह बोतल को मान्यता देने पर मुहर लगा दी. अब बुलंद हौंसलों के साथ हनुमान बेनीवाल खींवसर के उपचुनाव में आरएलपी का उम्मीदवार उतार सकते है. साथ ही उनकी नजरें रहेगी निकाय और पंचायत के चुनावों पर भी. बीजेपी के साथ गठबंधन का भावी रुप क्या रहेगा यह भी जल्द पता चल जाएगा. नागौर  की लोकसभा सीट जीतने और दो विधायक होने के कारण आर एल पी को क्षेत्रीय दल की मान्यता हासिल हुई है. 

RLP को मिली क्षेत्रीय दल की मान्यता:
नागौर के लोकसभा चुनाव हनुमान बेनीवाल ना बोतल के सिम्बल पर चुनाव ल़ड पाये थे और ना वो कमल के चुनाव चिन्ह पर उतरे. टायर चुनाव चिन्ह ने ही उनकी नैया पार लगा दी, लेकिन बोतल चुनाव चिन्ह प्राप्त करने के लिये बेनीवाल ने भरसक प्रयास किये थे. चुनावी किस्मत टायर के भरोसे थे लिहाजा बोतल चली गई गुजरात. कारण साफ था आरएलपी को क्षेत्रीय दल के तौर पर तब तक मान्यता नहीं मिली थी, इसलिये विधानसभा चुनाव में लोकप्रिय रहा बोतल चुनाव चिन्ह नहीं मिल पाया था. अब नागौर से सांसद का चुनाव चिन्ह जीतने के बाद आरएलपी के प्रदेश प्रमुख हनुमान बेनीवाल की सियासी ताकत बढ़ी तो उनकी पार्टी को अधिकृत तौर पर क्षेत्रीय दल की मान्यता मिल गई. एक सांसद और जरुरी दो विधायक आरएलपी के पास है. दिल्ली में किये राजनीतिक प्रयासों के कारण बेनीवाल को सफलता प्राप्त करने में आसानी हुई. बीजेपी और आरएलपी गठबंधन के उम्मीदवार के तौर पर नागौर से सांसद बने हनुमान बेनीवाल यहीं नहीं रुकने वाले. 

बोतल चुनाव चिन्ह मिलने से आरएलपी के हौंसले बुलंद:
—अपने सियासी गढ़ खींवसर में बोतल चुनाव चिन्ह पर बेनीवाल अपना उम्मीदवार उतारेंगे! 
—नागौर लोकसभा की तर्ज पर बीजेपी कर सकती है खींवसर में आरएलपी से गठबंधन 
—बेनीवाल की नजरें मंडावा विधानसभा के उपचुनाव पर भी टिकी है 
—जाट बेल्ट होने के कारण मंडावा में बेनीवाल अपनी धाक रखना चाहेंगे
—पंचायत और निकाय चुनावों में बोतल हमें सक्रिय नजर आने वाली है
—जाट बहुल इलाकों में आरएसपी-बीजेपी गठबंधन दिख सकता है
—कांग्रेस के खिलाफ 'कमल-बोतल' समीकरण नजर आ सकता है

मोदी लहर के बावजूद आरएलपी और बेनीवाल के अस्तित्व को जाट बहुल इलाकों में नकारा नहीं जा सकता. लोकसभा चुनावों में ना केवल बेनीवाल ने नागौर सीट को जीता, बल्कि जाट प्रभावित माने जाने वाले क्षेत्रों में बीजेपी की मदद की. 

इन सीटों पर बीजेपी को मिला बेनीवाल से लाभ:
—राजसमंद(मेडता-डेगाना) 
—पाली
—जोधपुर
—बाडमेर-जैसलमेर
—बीकानेर
—श्रीगंगानगर-हनुमानगढ़
—चूरु
—सीकर
—झुंझुनूं
—जयपुर देहात
—अजमेर
—टोंक-सवाई माधोपुर (मालपुरा -टोंक बेल्ट) 
—दौसा (चाकसू क्षेत्र) 

कमल-बोतल गठजोड़ भविष्य दिख सकता है प्रभावी! 
लोकसभा चुनावों से पहले विधानसभा चुनाव में भी हनुमान बेनीवाल की पार्टी RLP ने कांग्रेस के मंसूबों पर पानी फेरा था. 99 के फेर में इसलिए ही आई थी कांग्रेस. विधानसभा चुनाव में 57उम्मीदवार बेनीवाल ने उतारे थे, तीन पर जीत मिली थी. कांग्रेस-बीजेपी और बीएसपी के बाद राजस्थान में सर्वाधिक वोट लेने वाली पार्टी आरएलपी बनी. जबकि विधानसभा चुनाव के महज 20 दिन पहले RLP का गठन हुआ था. महज एक महिने का बही खाता, RLP के चुनाव चिन्ह बोतल का एक वर्ग विशेष के बीच खास असर देखने को मिला. नतीजे यह निकले कि अपनी पहली पारी में ही  RLP की परफोरमेंस प्रभावित करने वाली रही है. विधानसभा चुनाव में RLP ने 2.34 प्रतिशत मत के आधार पर  8 लाख से अधिक मत प्राप्त किये. अब बुलंद हौंसलों के साथ हनुमान बेनीवाल फिर तैयार है. RLP एक बार फिर चुनावी समर में उतरने को तैयार ही इस बार एंजेडा है विधानसभा के उपचुनाव को जीतना, खींवसर में फिर परचम लहराना..प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शाबासी लेने के बाद बेनीवाल थमने वाले नहीं है बस इंतजार है "कमल-बोतल" गठजोड़ को नवीन शेप देने का. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

 

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