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VIDEO: खींवसर में बेनीवाल बनेंगे कांग्रेस के सामने चुनौती, मंडावा में नरेन्द्र कुमार की प्रतिष्ठा दांव पर 

VIDEO: खींवसर में बेनीवाल बनेंगे कांग्रेस के सामने चुनौती, मंडावा में नरेन्द्र कुमार की प्रतिष्ठा दांव पर 

जयपुर: राजस्थान में खींवसर और मंडावा विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तिथियों की घोषणा के साथ ही एक बार फिर सियासी संग्राम की बयार देखने को मिलेगी. दोनों ही जाट सीटें कही जाती है, जाट राजनीति में दोनों सीटों से ही सियासी संदेश जाता है. एक बार फिर संग्राम शुरू होने के साथ ही आइए नजर डालते हैं दोनों विधानसभा सीटों के इतिहास पर आंकड़ों के साथ. 

खींवसर हनुमान बेनीवाल का अभेद्य किला:
आंकड़ों के मुताबिक देखा जाए तो खींवसर विधानसभा सीट को हनुमान बेनीवाल ने अभेद्य किले के रूप में स्थापित कर लिया था. 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड कायम करते हुए बेनीवाल इस सीट से लगातार तीसरी बार जीते. नागौर जिले की खींवसर से विधानसभा चुनाव-2018 में RLP के संयोजक हनुमान बेनीवाल विधायक बने थे. उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव-2019 में बेनीवाल नागौर से सांसद चुने जा चुके हैं. उनके सांसद बनने के बाद अब इस सीट पर उपचुनाव होना है. बेनीवाल खींवसर से लगातार तीसरी बार चुनाव जीते थे. 

राजे से नहीं बनी तो हुए अलग:
विधानसभा चुनाव-2008 में बीजेपी के टिकट पर खींवसर से विधायक चुने गए बेनीवाल की बाद में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे से नहीं बनी तो वे अलग हो गए थे. उसके बाद वे विधानसभा चुनाव-2013 में निर्दलीय के रूप में वहां से जीते थे. विधानसभा चुनाव-2018 से पहले बेनीवाल ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नाम से नई पार्टी बनाई और बाद में इसी के बैनर पर लगातार तीसरा चुनाव खींवसर से जीता. यहां बेनीवाल की जड़ें काफी मजबूत हैं. खींवसर विधानसभा सीट राजस्थान के नागौर जिले की एक सीट है. ये नागौर लोकसभा सीट का हिस्सा है, जो मारवाड़ इलाके में पड़ता है. इस विधानसभा सीट में वोटरों की कुल संख्या 203736 है. 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर हनुमान बेनीवाल ने 65399 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 23020 मतों के अंतर से हराया. दूसरा स्थान बीएसपी के दुर्ग सिंह को मिला. तीसरा स्थान बीजेपी का रहा था. कांग्रेस को चौथा स्थान को मिला था. 

लोकसभा चुनाव में बीजेपी से आरएलपी का गठबंधन:
लोकसभा चुनाव में कुल 157078 मत पड़े थे. कुल 77.1% मतदान हुआ था. लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने बेनीवाल की पार्टी से गठबंधन किया था. बेनीवाल यहां एनडीए के प्रत्याशी के तौर चुनाव मैदान में उतरे थे. गठबंधन ने कांग्रेस की कद्दावर उम्मीदवार ज्योति मिर्धा को चुनाव हरा दिया. बीजेपी को यहां ज्योति के सामने उम्मीदवार नहीं मिल पाया था और बीजेपी की ये सोच भी थी कि बेनीवाल को साथ लेने से अन्य सीटों पर लाभ होगा, बीजेपी रणनीतिकारों की सोच सही सिद्ध हुई.

मंडावा विधानसभा सीट:
इधर अब बात करते है मंडावा विधानसभा सीट पर अब तक हुए चुनाव के आंकड़ों की तो झुझुनूं की मंडावा विधानसभा सीट का सियासी समीकरण भी काफी रोचक है. यहां के बीजेपी विधायक नरेन्द्र खीचड़ भी इस बार झुंझुनूं लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर सांसद बन चुके हैं. कांग्रेस की परंपरागत सीट रही मंडावा में 2018 के विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र खीचड़ ने आजादी के बाद पहली बार कमल खिलाया था. अब उनके सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हो गई है. नरेन्द्र खीचड़ इससे पहले 2013 में यहां से निर्दलीय विधायक जीते थे. 2013 के विधानसभा चुनाव में इस सीट पर नरेंद्र कुमार  ने बतौर निर्दलीय 58637 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 17118 मतों के अंतर से हराया. दूसरा स्थान रहा रीता चौधरी को मिला. तीसरा स्थान बीजेपी के सलीम तंवर का रहा. (15815) वोटों के साथ कांग्रेस को चौथा स्थान को मिला, डॉ चंद्रभान को करारी शिकस्त मिली. चुनाव में कुल 143671 मत पड़े थे. कुल 73.99% मतदान हुआ था.

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार है और केंद्र में बीजेपी की. विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस ने बाजी मारी थी. वहीं लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 25 सीटों में से किसी पर भी कांग्रेस काबिज नहीं हो सकी थी. ऐसे में अब दोनों पार्टियों के लिए उपचुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है.

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट


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