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VIDEO: चुनाव नहीं लड़ने वाले दिग्गजों के लिये भी दांव पर प्रतिष्ठा

VIDEO: चुनाव नहीं लड़ने वाले दिग्गजों के लिये भी दांव पर प्रतिष्ठा

जयपुर: राजस्थान के मौजूदा लोकसभा के चुनाव दिग्गज राजनेताओं के लिये प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके है. कुछ राजनेताओं के लिये तो यह चुनाव सियासी तौर पर शह और मात के समान भी कहे जा सकते हैं. हम बात कर उन दिग्गजों की जो खुद तो चुनाव नहीं लड़ रहे, लेकिन उनका सियासी कैरियर इन चुनावों में दांव पर है. खास चुनावी रिपोर्ट:

चुनावों के परिणाम नई लोकसभा की तस्वीर तो लिखेंगे ही साथ ही उन दिग्गज राजनेताओं के सियासी भाग्य का फैसला भी करेंगे, जिनके लिये यह चुनाव सियासी नैया पार लगाने और किनारे लगाने वाले दोनों में से कुछ भी हो सकते हैं. दिग्गज राजनेताओं में कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने मूल पार्टी को त्याग कर अलग लाईन खींच दी. कुछ ऐसे जिन्होंने पार्टी लाइन पर चलते हुये ही अपनी पार्टी के उम्मीदवार को आंखे दिखा दी. कुछ ऐसे हैं, जिनका करियर इन चुनावों के जरिये साख पर है. यह तमाम दिग्गज नेता वो हैं, जिन्होंने खुद चुनावी समर में उतरना ठीक नहीं समझा, लेकिन पूरे चुनाव के दौरान यह सियासत की मुख्यधारा में रहे, भले ही तेवर विद्रोही ही रहे हो या बगावती. आइये आपको बताते है ऐसे ही कुछ दिग्गजों के बारे में जिनके लिये यह चुनाव प्रतिष्ठा का चुनाव है.

मौजूदा लोकसभा चुनाव बने राजनीतिक चुनौती:

कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला (भाजपा-गुर्जर नेता):
—लोकसभा चुनावों से पहले कर्नल बैंसला ने भाजपा का दामन थाम लिया
—गुर्जर नेता और आंदोलनकारी के नाते उनकी देश और प्रदेश में रही है छवि
—हालांकि पहले भी भाजपा में आकर टोंक-सवाई माधोपुर से चुनाव लड़ा था
—उस समय चुनाव हारने से उनकी राजनीतिक पारी शुरु से होने पहले ही खत्म हो गई थी
—अब नये सिरे से कर्नल बैंसला ने बीजेपी में फिर वापसी की
—चुनाव लड़ने के बजाये कर्नल बैंसला और उनके पुत्र विजय बैंसला ने भाजपा के लिये काम किया
—गुर्जर समाज को भाजपा से जोड़ पाये तो ये बैंसला के लिये जीत होगी
—विधानसभा चुनावों में गुर्जर समाज पूरी तरह भाजपा से छिटक गया था
—आंदोलन और राजनीति का साथ संपूर्ण चुनावी सफलता पर निर्भर करता है 
—बैंसला के कारण भाजपा को सर्वाधिक उम्मीद है पूर्वी राजस्थान से 

डॉ किरोड़ी लाल मीणा (राज्यसभा सांसद भाजपा):
—आखिरी वक्त तक डॉ किरोड़ी के कारण ही बीजेपी में दौसा का टिकट अटका
—डॉ किरोड़ी के लिये दौसा लोकसभा सीट काफी अहम थी
—उनके परिजनों का टिकट नहीं होना यहां उनके लिये मलाल समान था
—जसकौर मीना के टिकट को डॉ किरोड़ी कैम्प पचा नहीं पाया था
—भाजपा आलाकमान ने डॉ किरोड़ी से चुनावों में मन से लगने को कहा था
—दौसा में डॉ किरोड़ी फेक्टर भी हार और जीत का एक बड़ा कारण बनेगा
—सपोटरा और महुवा गंवाने के बाद डॉ किरोड़ी के लिये भी यह प्रतिष्ठा का चुनाव है

घनश्याम तिवाड़ी (वरिष्ठ कांग्रेस नेता):
—लोकसभा चुनावों से पहले कांग्रेस में शामिल हो गये
—अपनी मूल पार्टी बीजेपी को इन्होंने अलविदा कह दिया
—आज तिवाड़ी है कांग्रेस में अशोक गहलोत के विश्वस्त सिपहसलार
—गहलोत ने हर चुनावी सभा में तिवाड़ी का जिक्र किया
—तिवाड़ी के 'अघोषित आपातकाल' से जुड़े संबोधन को बार-बार दोहराया
—तिवाड़ी के लिये चुनौती है कि वो अपने समाज को कांग्रेस से कितना जोड़़ पाये
—कांग्रेस ने उन्हें बतौर स्टार प्रचारक कई चुनावी क्षेत्रों में भेजा था
—तिवाड़ी की बगावत सफल रही तो वे कांग्रेस में बड़े क्षत्रप के तौर पर उभरेंगे
—गहलोत सरकार में उन्हें सम्मानजनक और प्रमुख स्थान मिल सकता है
—भारत वाहिनी के बैनर तले चुनाव हारने के बाद उन्हें है संजीवनी की तलाश

देवी सिंह भाटी (वरिष्ठ नेता):
—बीजेपी में रहते हुये अर्जुन राम मेघवाल को बीकानेर से टिकट देने का विरोध किया था
—टिकट नहीं कटवा पाये तो खुलकर जता दिया विरोध
—बीजेपी ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया
—भाटी के लिये अर्जुन राम मेघवाल की पराजय ही बड़ी जीत है
—उन्होंने मेघवाल के कारण बीजेपी से अलग होना ज्यादा उचित समझा
—भाटी के गैर मेघवाल जातीय सम्मेलन की रणनीति कितनी सफल रही यह परिणामों से तय होगा
—राजपूत वोटों और कोलायत का अंतर भी परिणाम से सामने आ जायेगा
—रणनीति में सफल रहे तो देवीसिंह भाटी की सियासत फिर से चमकेगी
—अर्जुन राम मेघवाल के चुनाव जीतने पर नई राजनीति के बारे में निर्णय करना पड़ेगा
—देवी सिंह भाटी की बहू विधानसभा चुनावों में कोलायत से भाजपा उम्मीदवार थी
—लेकिन मोदी लहर के बावजूद कोलायत में पराजय मिली
—कोलायत के चुनावों ने ही भाटी और मेघवाल के बीच खाई पैदा करने का काम किया 

रामेश्वर डूडी (पूर्व नेता प्रतिपक्ष):
—बीकानेर में मदन गोपाल मेघवाल के टिकट को उनसे जोड़ कर देखा जा रहा
—डूडी के कारण जाट वोटों के शिफ्टिंग की उम्मीद की जा रही
—बीकानेर का परिणाम डूडी के सियासी भाग्य से भी जुड़ा है
—सियासी कद के इजाफे मे यह तथ्य भी मायने रहेगा

कर्नल सोनाराम (वरिष्ठ नेता भाजपा):
—कर्नल सोनाराम की पूरे चुनावों में ही तल्खी रही
—भाजपा तो नहीं छोड़ी लेकिन मन से साथ भी नहीं आ पाये
—कैलाश चौधरी का बाड़मेर से टिकट उनके गले नहीं उतरा
—मौजूदा सांसद के नाते फिर लड़ना चाहते थे बाड़मेर से चुनाव
—उनके कांग्रेस में भी जाने की बात पूरे चुनाव के दौरान चर्चा में रही
—चुनाव परिणाम तय करेंगे कि सीमावर्ती क्षेत्र में क्या रहेगा कर्नल का भाग्य 

प्रहलाद गुंजल (वरिष्ठ नेता भाजपा):
—गुंजल हिमायती नहीं थे कि कोटा से ओम बिरला को टिकट मिले
—इसे लेकर उन्होंने बीजेपी में जमकर अपना विरोध भी जताया
—बिरला को टिकट मिला तो गुंजल उनके प्रचार से पूरी तरह दूर ही रहे
—नेतृत्व की समझाइश पर भी प्रहलाद गुंजल ने कदम पीछे नहीं हटाये
—हाड़ौती में गुंजल को गुर्जर समाज का बड़ा नेता माना जाता है
—ऐसे में रामनारायण मीना को गुंजल की नाराजगी से उम्मीद है
—कोटा का यह चुनाव प्रहलाद गुंजल की विरोध की रणनीति का इम्तिहान है
—भाजपा उम्मीदवार का साथ नहीं देकर पूरे चुनावों में उन्होंने तेवर तीखे ही रखे

गुलाब चंद कटारिया (नेता प्रतिपक्ष):
—गुलाब चंद कटारिया के लिये यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण
—मेवाड़ में उनके कारण ही दीया कुमारी को एंट्री मिली
—उदयपुर ,बांसवाड़ा-डूंगरपुर और राजसमंद ये तीनों सीटें उनके लिये अहम
—कटारिया कैम्प की रणनीति के अनुसार ही मेवाड़-वागड़ में चुनाव लड़ा गया
—यहां के परिणाम कटारिया के राजनीतिक कद को भी प्रभावित करेंगे

प्रमोद जैन भाया (खनिज मंत्री):
—झालावाड़-बारां में कांग्रेस मतलब प्रमोद भाया को माना जाता है
—कांग्रेस प्रत्याशी प्रमोद शर्मा के पीछे भी उनका ही दिमाग रहा
—प्रमोद के पीछे झालावाड़-बारां में प्रमोद ही खड़े रहे
—यहां के चुनाव परिणाम उनकी सियासत को प्रभावित करेंगे

प्रताप सिंह खाचरियावास (परिवहन मंत्री):
—जयपुर में पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल के टिकट के पीछे खाचरियावास की भूमिका रही
—गैर ब्राह्मण कार्ड चलाया जाना यहां नई रणनीति का भाग था
—चुनाव परिणामों से जयपुर की सियासत प्रभावित होगी तो खाचरियावास की भी
—नये सियासी समीकरण भविष्य में जयपुर में देखने को मिल सकते है 

विश्वेन्द्र सिंह (पर्यटन मंत्री गहलोत सरकार):
—भरतपुर का पूरा चुनाव पूर्व महाराजा विश्वेन्द्र सिंह के कंधो पर ही रहा
—विश्वेन्द्र सिंह की एन ओ सी के बाद ही अभिजीत कुमार जाटव को टिकट मिला
—जाटव उम्मीदवार को जाट वोट की पूरी शिफ्टिंग का दारोमदार उन्हीं पर है
—भरतपुर के हर वर्ग के बीच विश्वेन्द्र सिंह की पैठ मानी जाती है
—कांग्रेस की जीत से उनका प्रदेश की सियासत में कद बढ़ना तय है 

रमेश मीना (खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री):
—करौली-धौलपुर के टिकट के पीछे रमेश मीना की ही रणनीति रही
—बैरवा की जगह जाटव कार्ड खेलने की रणनीति उन्हीं की मानी गई
—सपोटरा से फिर चुनाव जीतने के बाद रमेश बन चुके है मीना क्षत्रप
—रमेश मीना के कारण मीना वोटों के कांग्रेस में जाने की पूरी उम्मीद है
—नये चेहरे संजय जाटव की जीत और हार प्रभावित करने की उनकी साख को

राजेन्द्र राठौड़ (उपनेता प्रतिपक्ष):
—चूरु का चुनाव राठौड़ का साख से जुड़ा है
—राठौड़ नहीं थे राहुल कस्वां के टिकट के पक्ष में
—अंत समय में आलाकमान और कस्वां परिवार की पहल पर माने
—राठौड़ के सियासी कद का गुणा-भाग चूरु के चुनाव पर टिका है
—प्रदेश के कद्दावर राजपूत क्षत्रप माने जाते है राजेन्द्र राठौड़
—हालांकि परिणामों से पहले ही उनकी सक्रियता देखने लायक है

यूनुस खान (भाजपा नेता):
—नागौर में हनुमान बेनीवाल के नाम पर उनका समर्थन नहीं था
—यूनुस खान ने बेनीवाल के प्रचार में भी रुचि नहीं ली
—जबकि यूनुस खान रह चुके है डीडवाना से विधायक और फिर मंत्री
—खान का प्रभाव नागौर के मुस्लिम वोटों पर है
—टायर के चिन्ह पर बेनीवाल की हार-जीत उनकी सियासत को प्रभावित करेगी

राजकुमार रिणवां (पूर्व मंत्री- कांग्रेस नेता):
—लोकसभा चुनावों से ठीक पहले कांग्रेस में पहुंच गये
—बीजेपी ने रतनगढ़ से टिकट काटा था नाराजगी उनके जहन में थी
—अशोक गहलोत से बातचीत के बाद मन बदला और हो लिये हाथ के साथ
—कांग्रेस को उनसे उम्मीद शेखावाटी में ब्राह्मण वर्ग सधेगा
—रिणवां के सियासी कैरियर को भी मौजूदा चुनाव से आशाएं है

संतोष अहलावत (पूर्व सांसद भाजपा): 
—झुंझुनूं से संतोष अहलावत का बीजेपी ने टिकट काटा
—उनकी जगह नरेन्द्र कुमार को बनाया बीजेपी ने उम्मीदवार
—अहलावत समर्थकों को उनका टिकट कटना नागवार गुजरा है
—इसके अलावा कांग्रेस प्रत्याशी श्रवण कुमार और अहलावत का गृह इलाका समान है
—हालांकि संतोष अहलावत ने अनुशासन की सीमाएं नहीं लांघी 
—अब सबकी नजरें टिकी है चुनाव परिणाम और अहलावत परिवार परए

बृजेन्द्र ओला (कांग्रेस विधायक):
—झुंझुनूं में कांग्रेस के अंदर भी कलह दिखी
—यहां ओला परिवार का टिकट काटकर श्रवण कुमार को थमाया
—शेखावाटी और झुंझुनूं के सियासी इतिहास में ओला परिवार के साथ ऐसा पहली बार हुआ
—जबकि यहां की सियासत में कांग्रेस और शीशराम ओला को पर्याय माना जाता रहा है
—वहीं श्रवण कुमार के साथ ओला परिवार के कभी सुखद रिश्ते भी नहीं रहे
—चुनाव परिणाम यहां सियासत की नई भाषा लिखेंगे

चुनाव अगर राजनेता नहीं लड़े फिर भी चुनाव सीधे तौर कद्दावरों की सियासी अग्निपरीक्षा के समान होते है. क्षेत्रीय-जातीय धाक को भी यह चुनाव परिणाम तय करने का काम करते है. मौजूदा लोकसभा का चुनाव इसलिये खास है कि यहां कई दिग्गजों की साख दांव पर लगी है. परिणाम मनमाफिक आये तो सियासत परवान चढेगी औऱ परिणाम सुखद नहीं रहे तो राजनीतिक पारी में अवरोधों का सामना करना पड़ सकता है.

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की बिछी चौसर, तीन सीटों पर चार उम्मीदवार मैदान में 

जयपुर: राजस्थान में राज्यसभा चुनाव की चौसर बिछ गई है.3 सीटों पर 4 उम्मीदवार चुनावी समर में उतरे है, दो भाजपा से और दो कांग्रेस से.तीसरी सीट के लिये रोमांचक जंग के आसार है. वोटों का गणित कांग्रेस के पक्ष में है,करीब 122 से 125 वोट कांग्रेस खेमे में माने जा रहे ,बीजेपी को उम्मीद है सेंध लगाने की.  

पूरे 200 विधायकों के वोट हैं मान्य: 
राज्यसभा चुनाव की गणित की बात करे तो एक सीट को जीतने के लिए कितने वोट चाहिए?  दरअसल, प्रदेश की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव को लेकर पूरे 200 विधायकों के मान्य वोट हैं. प्रदेश की इन तीनों सीटों की बात करें तो हर एक सीट को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के लिए 51 वोट चाहिए. कांग्रेस ने दोनों उम्मीदवारों को बराबरी का वोट दिलाने की रणनीति बना ली थी.

सत्ताधारी दल के पास वोटों की गणित की बात करे तो
कांग्रेस - 107
निर्दलीय - 13
बीटीपी-2
आरएलडी-1
सीपीएम - 2
कांग्रेस +=125 

बीजेपी +
72 वोट
RLP - 2
कुल वोट-74

कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए चाहिए 102 वोट:
तय फॉर्मूले के अनुसार कांग्रेस को दो सीट जीतने के लिए 102 वोट चाहिए जो कि पर्याप्त रूप से उसके पास हैं. वहीं बात करते है कि भाजपा के पास सदन में 72 विधायक हैं, ऐसे में प्रथम वरीयता के 51 वोट चाहिए लिहाजा भाजपा के खाते में भी एक सीट आने वाली है. दो सीटों पर बीजेपी की जीत की संभावना तभी है जब निर्दलियों और कांग्रेस कैम्प में सेंध लगे.

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बीजेपी की रणनीति
-असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों का समर्थन जुटाना
-लेकिन वोट दिखाकर देना होगा
-कांग्रेस विधायक दल के व्हीप का पालन करना अनिवार्य होगा
-क्रास वोट, अनुपस्थित और पेन/स्याही की गलती करने पर ही बीजेपी को लाभ
-निर्दलीय विधायकों का वोट गोपनीय होता है दिखाकर और नहीं दिखाकर दोनों तरीके से वोट दे सकते है
-बीजेपी की कोशिश निर्दलियों के वोट में सेंध लगे, हालांकि कार्य आसान नहीं है

बहरहाल चुनाव तो चुनाव ही है.लॉक डाउन के कारण रिसोर्ट राजनीति भले ही नजर ना आये लेकिन खेमेबंदी साफ नजर आने वाली है.

...फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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19 जून को होंगे राज्यसभा चुनाव, 7 राज्यों की 18 सीटों पर होने हैं राज्यसभा चुनाव

जयपुर: राज्य सभा की 18 सीटों के लिए इस महीने की 19 तारीख को चुनाव आयोजित किए जाएंगे. चुनाव आयोग ने यह जानकारी दी है. 19 जून को राज्यसभा चुनाव होंगे. कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव स्थगित हुए थे. 7 राज्यों की 18 सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने हैं. प्रदेश की 3 सीटों पर चुनाव होने हैं.19 जून को राज्यसभा चुनाव होंगे, सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोट डाले जाएंगे. वहीं 19 जून को शाम 5 बजे बाद मतों की गणना होगी. कोरोना संक्रमण के चलते चुनाव स्थगित करने का फैसला लिया था. 

19 जून को इन सीटों पर होगा मतदान:
राज्यसभा की जिन 18 सीटों के लिए 19 जून को मतदान होगा. उनमें आंध्र की 4 सीट, गुजरात की 4 सीट, झारखंड की 2 सीट, मध्य प्रदेश की 3 सीट, मणिपुर की 1 सीट, मेघालय की 1 सीट और राजस्थान की 3 सीट शामिल हैं.

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राजस्थान में तीन सीटों पर होंगे चुनाव:
राजस्थान में तीन सीटों पर राज्यसभा चुनाव होंगे. चार उम्मीदवार मैदान में है, दो कांग्रेस और दो भाजपा के उम्मीदवार है. कांग्रेस के प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल और नीरज डांगी है. जबकि भाजपा से राजेन्द्र गहलोत और ओंकार सिंह लखावत उम्मीदवार है. संख्या बल में कांग्रेस को बढ़त हासिल है. एक-एक सीट पर दोनों दलों की जीत तय है. तीसरी सीट के लिए चुनावी जंग होगी.

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मनरेगा श्रमिकों का कार्य समय कम किया जाये, डिप्टी CM सचिन पायलट ने लिखा केन्द्र को पत्र

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जयपुर: राजस्थान के डिप्टी CM सचिन पायलट ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखा है. पायलट ने केन्द्र से मांग रखी है कि राजस्थान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है और मौसम विभाग ने भी 27 जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है. इस भीषण गर्मी में मनरेगा श्रमिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुये उनके निर्धारित कार्य समय एवं टास्क में कमी की जाये जिससे श्रमिक लगभग सुबह 11 बजे तक कार्य पूर्ण कर घर लौट सके.

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भीषण गर्मी को देखते हुए कार्यस्थल पर मिले आवश्यक सुविधाएं: 
पायलट ने कहा कि मनरेगा के तहत निर्धारित कार्य समय से पूर्व यदि कोई श्रमिक या श्रमिक समूह निर्धारित टास्क पूर्ण कर लेता है तो वह कार्य की माप मस्टरोल में अंकित करवाकर कार्यस्थल छोड सकता है. पायलट ने किसी भी श्रमिक को टास्क पूर्ण करने के बाद अनावश्यक रूप से कार्यस्थल पर नहीं रोकने के निर्देश दिए. साथ ही भीषण गर्मी को देखते हुए मनरेगा कार्यस्थल पर आवश्यक सुविधाएं जैसे स्वच्छ पेयजल, छाया, मेडिकल किट, ओ.आर.एस. घोल, बच्चों के लिए पालने आदि की व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराने के भी निर्देश दिये है.

श्रमिकों के लिए मनरेगा योजना वरदान साबित:
उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि देश के अन्य राज्यों से रोजगार के अभाव में प्रदेश में लौटे श्रमिकों तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार से वंचित श्रमिकों के लिए मनरेगा योजना वरदान साबित हो रही हैं. उन्होंने बताया कि 30 मई को वर्ष 2019-20 में प्रदेश में जहां 33.02 लाख श्रमिक नियोजित थे वहीं इस वर्ष 42.80 लाख श्रमिक नियोजित हुए हैं. इस प्रकार मनरेगा योजना के तहत इस वर्ष लगभग दस लाख अधिक श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है. विभिन्न राज्यों से लौटे 1.77 लाख प्रवासी श्रमिकों के जॉब कार्ड भी जारी किये जा चुके हैं.

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नई दिल्ली: कोरोना संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला साल आज पूरा हो गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने देश के नाम चिट्ठी लिखर पिछले 1 साल की सरकार की उपलब्धियों का रोडमैप बताया है.

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कोरोना पर जीत के लिए देश के दृढ़ संकल्प को भी सलाम किया: 
प्रधानमंत्री मोदी ने पत्र में लिखा कि देशवासियों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति करते हुए हम तेज गति से आगे बढ़ ही रहे थे, कि कोरोना वैश्विक महामारी ने भारत को भी घेर लिया. कई लोगों ने आशंका जताई थी कि जब कोरोना भारत पर हमला करेगा, तो भारत पूरी दुनिया के लिए संकट बन जाएगा. पीएम ने अपनी चिट्ठी में कोरोना पर जीत के लिए देश के दृढ़ संकल्प को भी सलाम किया. 

उन्होंने लिखा कि यदि सामान्य स्थिति होती तो मुझे आपके बीच आकर आपके दर्शन का सौभाग्य मिलता, लेकिन वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से जो परिस्थितियां बनी हैं उन परिस्थितियों में, मैं इस पत्र के द्वारा आपका आशीर्वाद लेने आया हूं.

बड़े शहरों को छोड़ कर जा रहे मजदूरों का मर्म भी दिखा:
मोदी के खत में बड़े शहरों को छोड़ कर जा रहे मजदूरों का मर्म भी दिखा. उन्होंने कहा कि ''निश्चित तौर पर, इतने बड़े संकट में कोई ये दावा नहीं कर सकता कि किसी को कोई तकलीफ और असुविधा न हुई हो. हमारे श्रमिक साथी, प्रवासी मजदूर भाई-बहन, छोटे-छोटे उद्योगों में काम करने वाले कारीगर, पटरी पर सामान बेचने वाले, रेहड़ी-ठेला लगाने वाले, हमारे दुकानदार भाई-बहन, लघु उद्यमी, ऐसे साथियों ने असीमित कष्ट सहा है. इनकी परेशानियां दूर करने के लिए सभी मिलकर प्रयास कर रहे हैं.

2014 की उपलब्धियों का जिक्र:
पिछले कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में बताते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि हमने गरीबों के बैंक खाते खोलकर, उन्हें मुफ्त गैस कनेक्शन देकर, मुफ्त बिजली कनेक्शन देकर, शौचालय बनवाकर और घर बनवाकर गरीब की गरीमा भी बढ़ाई. इससे आगे उन्होंने लिखा कि उस कार्यकाल में जहां सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एयर स्ट्राइक हुई. वहीं हमने वन रैंक वन पेंशन, वन नेशन वन टैक्स- जीएसटी, किसानों की MSP की बरसों पुरानी मांगों को भी पूरा करने का काम किया. पहला कार्यकाल अनेकों आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए समर्पित रहा.

एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान: 
पीएम ने कहा कि इस एक साल में लिए गए फैसले इन्हीं बड़े सपनों की उड़ान है. उन्होंने आगे लिखा कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास' इस मंत्र को लेकर आज देश सामाजिक हो या आर्थिक, वैश्विक हो या आंतरिक, हर दिशा में आगे बढ़ रहा है.

बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे: 
प्रधानमंत्री ने बताया कि बीते एक वर्ष में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय ज्यादा चर्चा में रहे और इस वजह से इन उपलब्धियों का स्मृति में रहना भी बहुत स्वाभाविक है. राष्ट्रीय एकता-अखंडता के लिए आर्टिकल 370 की बात हो, सदियों पुराने संघर्ष के सुखद परिणाम-राम मंदिर निर्माण की बात हो, आधुनिक समाज व्यवस्था में रुकावट बना ट्रिपल तलाक हो, या फिर भारत की करुणा का प्रतीक नागरिकता संशोधन कानून हो, ये सारी उपलब्धियां आप सभी को स्मरण हैं. 

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जयपुर: दिग्गज भाजपा नेता भंवर लाल शर्मा का शुक्रवार को निधन हो गया. भंवर लाल शर्मा BJP के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और राज्य सरकार में मंत्री रहे चुके थे. भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओम प्रकाश माथुर ने भंवर लाल शर्मा के निधन पर गहरी संवेदना जताई. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी भंवर लाल शर्मा के निधन पर गहरी संवेदना जताते हुए शोक व्यक्त किया.

पार्थिव देह को किया नमन:
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ.सतीश पूनिया ने भंवरलाल शर्मा के निवास पर पहुंचकर पार्थिव देह को नमन किया. पूनिया ने कहा कि भंवरलाल शर्मा पार्टी के वरिष्ठ नेता व सबके मार्गदर्शक रहे है. उनका निधन हम सबके लिए और मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर बड़ी क्षति है. शर्मा प्रदेश के आमजन के साथ हमेशा खड़े रहते थे. शर्मा की कमी हमेशा खलेगी. प्रदेश के विकास और पार्टी की मजबूती में भंवर लाल शर्मा का बड़ा योगदान है.उन्होंने विधायक और मंत्री रहते हुए कभी सरकारी बंगला और सरकारी गाड़ी का उपयोग नहीं किया.

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ओमप्रकाश माथुर ने जताया शोक:
भंवरलाल शर्मा के निधन पर भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओमप्रकाश माथुर ने शोक जताते हुए कहा कि आत्मा को भीतर तक पीड़ा देने वाला समाचार जयपुर से प्राप्त हुआ. महामारी का ऐसा संकट की उनके अंतिम दर्शन भी ना कर पा रहा हूं. जनसंघ से जनता पार्टी फिर भाजपा पार्षद से 6 बार विधायक रहे चुके है. भंवर लाल शर्मा ने भैरों सिंह जी की हर सरकार में अहम भूमिका निभाई है. कई बार प्रदेश अध्यक्ष अनगिनत भूमिकाओं में उन्हें देखा और उनसे सिखा भी है. उनकी जीवटता , साहस, कार्यकर्ताओं से और आम जनता से उनका आज तक सतत सम्पर्क था. उनके व्यक्तित्व के बारे में हर शब्द छोटा है. मुझे उनका आशीष राजनीति में रहते और अब गांव में जीवन व्यतीत करते समय भी हमेशा प्राप्त हुआ. मेरे लिये व्यक्तिगत क्षति, एक युग का अंत एक पीढ़ी का अवसान. प्रभु अपने श्रीचरणों उन्हें स्थान दे , परिवार को सम्बल प्रदान करें.

राजनीतिक हलकों में छाई शोक की लहर:
भाजपा के पूर्व मंत्री भंवर लाल शर्मा के निधन की खबर से राजनीतिक हलकों में शोक की लहर छा गई. मुख्य सचेतक डॉ.महेश जोशी ने दुख जताया है. कहा-उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें. परिजनों को इस दुख की घड़ी को सहने की क्षमता प्रदान करें.

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छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी का निधन, 74 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी का निधन, 74 साल की उम्र में ली अंतिम सांस

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी का निधन हो गया. अजीत जोगी लंबे समय से अस्पताल में भर्ती थे. उन्होंने 74 साल की उम्र में अंतिम सांस ली. अजीत जोगी को दिल का दौरा पड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वे 20 दिन से रायपुर के अस्पताल में भर्ती थे. 

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बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर दी जानकारी:
उनके निधन की जानकारी उनके बेटे अमित जोगी ने ट्वीट कर दी.उन्होंने लिखा कि 20 वर्षीय युवा छत्तीसगढ़ राज्य के सिर से आज उसके पिता का साया उठ गया. केवल मैंने ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ ने नेता नहीं,अपना पिता खोया है. अजीत जोगी ढाई करोड़ लोगों के अपने परिवार को छोड़कर, ईश्वर के पास चले गए. गांव-गरीब का सहारा, छत्तीसगढ़ का दुलारा,हमसे बहुत दूर चला गया.

तीन दिन का राजकीय शोक:
अजीत जोगी के निधन पर छत्तीसगढ़ सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है. इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा. कोई भी शासकीय समारोह आयोजित नहीं होंगे. स्व. अजीत जोगी का राजकीय सम्मान के साथ 30 मई को गौरेला में अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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VIDEO: पीसीसी प्रवक्ता प्रदीप चतुर्वेदी को फोन पर धमकी, मोदी सरकार के खिलाफ लिखने पर कहे अपशब्द

जयपुर: मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने पर पीसीसी प्रवक्ता डॉ प्रदीप चतुर्वेदी को फोन पर धमकी मिली है. धमकी देने वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ चतुर्वेदी ने मानसरोवर के शिप्रा थाने में मुकदमा दर्ज कराया है. हालांकि धमकी देने वाले का खुलासा अभी नहीं हो पाया है. इस बारे में चतुर्वेदी ने टॉप लीडरशीप को लिखा है.

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लिखने पर अप्रत्याशित परिणाम भोगने के लिए तैयार रहने को भी कहा: 
चतुर्वेदी ने कहा कि एक अज्ञात व्यक्ति ने मोबाइल फोन पर मेरे लेखों के बारे में अप्रसन्नता जाहिर की और मुझसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध लिखने का कारण पूछा. मैंने अपनी विचारधारा के बारे में उसे अवगत कराया. उस अनजान व्यक्ति ने मुझे धमकी देते हुए कहा कि मैं भविष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी के विरुद्ध कुछ ना लिखूं. लिखने पर अप्रत्याशित परिणाम भोगने के लिए तैयार रहने को भी कहा. इसके बाद मुझे अपशब्द बोले जिसकी रिकार्डिंग पुलिस को दे दी है. 

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