Bharat Bandh: दिल्ली में सामान्य रुप से चल रही हैं ऑटो, टैक्सी, बाजार भी खुले, संघो का कहना- महामारी के कारण व्यापार पहले ही संकट में

Bharat Bandh: दिल्ली में सामान्य रुप से चल रही हैं ऑटो, टैक्सी, बाजार भी खुले, संघो का कहना- महामारी के कारण व्यापार पहले ही संकट में

Bharat Bandh: दिल्ली में सामान्य रुप से चल रही हैं ऑटो, टैक्सी, बाजार भी खुले, संघो का कहना- महामारी के कारण व्यापार पहले ही संकट में

नई दिल्ली: केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ विभिन्न किसान यूनियन द्वारा सोमवार को आहूत भारत बंद के बावजूद दिल्ली में ऑटो-रिक्शा तथा टैक्सी सामान्य रूप से सड़कों पर चलती नजर आईं और अधिकतर दुकानें भी खुली दिखीं. उनकी यूनियन तथा संघों ने किसानों के बंद को केवल सैद्धांतिक समर्थन देते हुए हड़ताल ना करने का फैसला किया है. 

किसानों के आंदोलन में ये संघ नहीं है शामिल:
ऑटो, टैक्सी यूनियन और व्यापारी संघों का कहना है कि कोविड-19 वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण उनकी आजीविका पहले ही बुरी तरह प्रभावित हुई है, इसलिए वे किसी भी हड़ताल में शामिल नहीं हो रहे हैं. दिल्ली ऑटो टैक्सी यूनियन के महासचिव राजेंद्र सोनी ने कहा कि पहले भी हमने किसानों द्वारा भारत बंद का समर्थन किया था, लेकिन अपने ऑटो और टैक्सी को चलाना जारी रखा था. इस बार भी हम किसानों का समर्थन कर रहे हैं लेकिन हड़ताल नहीं कर हैं क्योंकि वैश्विक महामारी के समय कम हुई कमाई के कारण हमारे सदस्य काफी संकट में हैं. कैब संघों का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली के ‘सर्वोदय ड्राइवर एसोसिएशन’ ने भी किसानों का समर्थन किया, लेकिन हड़ताल में शामिल नहीं हुए. एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलजीत गिल ने कहा कि हम किसानों के समर्थन में हैं, लेकिन वैश्विक महामारी के कारण हमारा काम प्रभावित हुआ है और हम उनके समर्थन में हड़ताल करके खुद नुकसान नहीं उठा सकते. अन्य ऑटो तथा टैक्सी यूनियन की भी यही राय है. 

कोरोना महामारी के कारण व्यापाार पहले ही संकट में:
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ऑटो चालक संघ के सचिव अनुज राठौड़ ने कहा कि हम किसानों का पूरा समर्थन करते हैं. लेकिन कोविड-19 के कारण जो वित्तीय संकट हमने उठाया है, उसे देखते हुए. हम सामान्य रूप से काम करते हुए उन्हें और उनकी मांग को अपना नैतिक एवं सैद्धांतिक समर्थन दे रहे हैं. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि शहर में बाजार और दुकानें खुली हैं क्योंकि किसानों ने हड़ताल के लिए हमारे संघ से कोई सम्पर्क नहीं किया. उन्होंने कहा कि साथ ही, त्योहारों के नजदीक होने के चलते यह व्यापारियों का वैश्विक महामारी और लॉकडाउन के कारण हुए नुकसान से उबरने का समय है. हालांकि हम किसानों का पूरा समर्थन करते हैं और सरकार से उनकी मांग पूरी करने की अपील करते हैं. उन्होंने कहा कि व्यापारी, किसानों और उनकी मांगों का समर्थन करते हैं लेकिन वे दुकानें बंद करने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि वे अपने व्यापार एवं व्यवसायों पर वैश्विक महामारी के प्रतिकूल प्रभाव के कारण पहले से ही संकट में हैं. 

गौरतलब है कि देश के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, पिछले साल नवंबर से दिल्ली की सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी केन्द्र के तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं. किसानों को भय है कि इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली खत्म हो जाएगी, हालांकि सरकार इन कानूनों को प्रमुख कृषि सुधारों के रूप में पेश कर रही है. दोनों पक्षों के बीच 10 दौर से अधिक की बातचीत हो चुकी है,लेकिन इनका कोई नतीजा नहीं निकला है. सोर्स-भाषा

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