भरतपुर की ऐतिहासिक धरोहर सफेद महल को मिला सरकार की तरफ से एक करोड़ का बजट

FirstIndia Correspondent Published Date 2017/10/16 12:10

भरतपुर| राजस्थान सरकार द्धारा बजट राशि में करीब एक करोड़ रुपये मिलने से कस्बा वैर की ऐतिहासिक धरोहर वाटिका एवं सफेद महल का संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य फिर से शुरू हो गया। ऐतिहासिक धरोहर प्रताप फुलवाडी में स्थित वाटिका एवं सफेद महल का जीर्णोद्धार कार्य करने के लिये 2014 में  427.03 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री बसुंधरा राजे द्धारा दी गई थी। साथ ही प्रताप दुर्ग को भी अलग से 4 करोड रूपये संरक्षण एवं जीर्णोद्धार कार्य के लिये दिये गये थे। यह कार्य फरवरी 2018 तक पूर्ण होना था| 

परन्तु बजट की राशि समय से पूर्ण ही समाप्त होने पर जीर्णोद्धार कार्य थम सा गया था, जबकि इनमें काफी काम होना शेष है। जीर्णोद्धार कार्य देख रहे सहायक अभियंता सीएस चौधरी ने बताया कि बजट के अभाव में काम बंद होने पर डेढ करोड रूपये का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया था, जिसमें लगभग एक करोड रूपये की राशि स्वीकृत हुई है, जिससे जीर्णोद्धार कार्य पुन शुरू करवा दिया है। खंडहर हो रहे लाल महल का जीर्णोद्धार प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इस जीर्णोद्धार के बाद इसमें पर्यटन के विकास के लिये होटल खोलने की भी योजना है। यह कार्य लगभग आठ नौ महीने में पूरा कर लिया जाएगा। 


शांति का प्रतीक सफेद महल:

कस्बे के बीचोंबीच बना 17 वीं शताब्दी का ऎतिहासिक प्रताप दुर्ग शौर्य गाथा का गवाह है शांति का अतीक सफेद महल। इसके चारों तरफ प्रताप गंगा नहर है। प्रताप गंगा के पश्चिमी भाग मे 42 बीघा क्षेत्र मे फैली ऎतिहासिक प्रताप फुलवाड़ी है। फुलवाड़ी के मध्य बना है सफेद महल, इसके उत्तर में लाल महल तथा लाल महल के सामने है मदनमोहन जी का मन्दिर। यहीं फुलवाड़ी है। यह फुलवाड़ी 1726 में म. सूरजमल के छोटे भाई प्रतापसिंह ने 95 बीघा में बनाए नौलखा बाग में बनाई थी। जयपुर बयाना मार्ग पर इस फुलवाड़ी का आधार जमीन से लगभग पांच फुट ऊंचा है। धरातल से 8 फुट की ऊंचाई पर सफेद महल बना है। 

लाजवाब केसर क्यारी:

सफेद महल के ठीक सामने 30 बीघा जमीन में रियासत काल में पक्के चूने की क्यारियां बनी हैं, जो कला की दृष्टि से लाजवाब हैं। कोई क्यारी पांच कोणीय सितारे सी है तो कोई चौकोर। कहीं ये फूल, पत्ती, बेल की आकृति में हैं। विशेषता यह है कि एक क्यारी में पानी चलाने पर सभी में पानी चला जाता है। 

संरक्षित क्षेत्र घोषित: राज्य सरकार ने कस्बा की ऎऐतिहासिक धरोहर सफेद महल, प्रताप दुर्ग एवं प्रताप फुलवाड़ी को 198 6 में संरक्षित क्षेत्र एवं सुरक्षित स्मारक रूप में घोषित किया गया था। लेकिन इन धरोहरों को पहुंचाई गई क्षति के मामलों में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
 

 

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