वाशिंगटन बाइडन ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में अमेरिका की वापसी की घोषणा की, सदस्य देशों ने किया जोरदार स्वागत

बाइडन ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में अमेरिका की वापसी की घोषणा की, सदस्य देशों ने किया जोरदार स्वागत

बाइडन ने पश्चिमी देशों के गठबंधन में अमेरिका की वापसी की घोषणा की, सदस्य देशों ने किया जोरदार स्वागत

वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने शनिवार को कहा कि ‘ट्रांस अटलांटिक गठबंधन’ में अमेरिका की वापसी हो चुकी है. सदस्य देशों ने उनकी घोषणा का जोरदार स्वागत किया. बाइडन ने वार्षिक ‘म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन’ को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित किया. उन्होंने ईरान के साथ परमाणु समझौते में अमेरिका के फिर से शामिल होने, चीन और रूस द्वारा पेश आर्थिक और सुरक्षा से संबंधित चुनौतियां, कोरोना वायरस के कारण नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दे भी उठाए. बाइडन ने कहा है कि वह अमेरिका और पश्चिम के सहयोगियों के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करेंगे.

अपने संबोधन में पूर्ववर्ती राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बिना बाइडन ने गठबंधन को फिर से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जिसका सदस्य देशों ने जोरदार स्वागत किया. बाइडन ने कहा कि मैं जानता हूं कि पिछले कुछ साल में अटलांटिक महासागर के पार के देशों के साथ संबंधों में काफी खिंचाव रहा. अमेरिका फिर से यूरोप के साथ प्रतिबद्धता व्यक्त करना चाहता है, आपसे मशविरा करना चाहता है.

सात औद्योगिक देशों के समूह की बैठक में भी भागीदारी की: 
राष्ट्रपति ने शुक्रवार को डिजिटल तरीके से आयोजित सात औद्योगिक देशों के समूह की बैठक में भी भागीदारी की, जहां उन्होंने ‘‘कोविड-19 से निपटने, तथा आर्थिक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करने का संकल्प जताया. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष चार्ल्स माइकल ने म्यूनिख सम्मेलन के दौरान कहा कि गठबंधन में अमेरिका का स्वागत है. वहीं, जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के बीच अब भी कुछ मुद्दों पर मतभेद है.

चीन की आर्थिक महत्वाकांक्षा को यूरोप बड़ा खतरा नहीं मानता:
चीन की आर्थिक महत्वाकांक्षा को यूरोप बड़ा खतरा नहीं मानता है जबकि अमेरिका के लिए यह महत्वपूर्ण मुद्दा है. रूस को लेकर भी अमेरिका के रुख पर यूरोप के देशों में मतभेद है. मर्केल ने कहा कि दो साल पहले की तुलना में इस साल बहुपक्षवाद को फिर से गति मिलने की संभावना है और जो बाइडन ने अमेरिका का राष्ट्रपति बनने के बाद कई कदम भी उठाए हैं सोर्स- भाषा

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