विश्व धरोहर खिताब को बचाए रखना राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/07/17 09:19

जयपुर: जयपुर के परकोटे को संयुक्त राष्ट्र संघ के यूनेस्को ने विश्व धरोहर तो घोषित कर दिया है, लेकिन अब इस खिताब को बचाए रखना राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती है. क्योंकि यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति वर्ष 2020 में समीक्षा करेगी कि क्या वाकई परकोटा विश्व धरोहर रहने लायक है या नहीं. ऐसे में राज्य सरकार और जयपुर नगर निगम को अपने किए वो सभी वादे तय समय में पूरे करने होंगे, जिन्हें पूरा करने के आश्वासन पर यह खिताब मिला. 

6 जुलाई को हुई थी घोषणा:
यूनेस्को की विश्व धरोहर समिति की अजरबैजान की राजधानी बाकु में 6 जुलाई को हुई बैठक में जयपुर के परकोटा क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित किया गया. समिति में कुल 21 सदस्य देशों में से 16 सदस्य देशों ने परकोटे को विश्व धरोहर घोषित करने के प्रस्ताव का समर्थन किया था. जानकारों की मानें तो भारत के इस प्रस्ताव को यूं ही समर्थन नहीं मिला. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था, भारत का विश्व परिदृश्य में बढ़ता प्रभाव. इसी प्रभाव के कारण ही आवश्यकता से अधिक बहुमत के साथ विश्व धरोहर समिति की बैठक में परकोटे को विश्व धरोहर की सूची में शामिल करने का फैसला किया गया. 

वादों को पूरा करना बड़ी चुनौती:
बाकु गए जयपुर नगर निगम और राज्य सरकार के अधिकारियों ने परकोटा क्षेत्र को बचाए रखने के लिए यूनेस्को से कड़े बड़े वादे किए थे. इन वादों को पूरा करने की शर्त पर ही चारदिवारी क्षेत्र को विश्व धरोहर घोषित किया गया. ऐसे में भारत के प्रभुत्व के कारण विश्व धरोहर का तमगा तो मिल गया, लेकिन अब असली चुनौती इन वादों को पूरा करने की है. ये वादे पूरे किए गए तो ही विश्व धरोहर का खिताब बरकरार रहेगा. आपको बताते हैं कि इन वादों के मुताबिक ऐसे कौनसे काम हैं, जो जयपुर नगर निगम और राज्य सरकार को पूरे करने हैं. 

वादों के मुताबिक कौनसे काम जो पुरे करने हैं:
—जयपुर के मास्टरप्लान के तहत चारदिवारी क्षेत्र में स्पेशल हैरिटेज प्लान लागू करना
—इस प्लान के तहत प्राचीन संपत्तियों के साथ सिटी वॉल और परपंरागत उद्योगों वाली रास्ते व गलियों का संरक्षण करना
—चारदिवारी क्षेत्र की सभी हैरिटेज संपत्तियों की सूची तैयार करना
—परकोटे की विरासत को बचाने के लिए सख्त कानून लागू करना
—इस कानून के तहत आर्किटेक्चरल कंट्रोल गाइडलाइन्स लागू कर प्राचीन इमारतों के मूल स्वरूप का संरक्षण करना
—कानून व कंट्रोल गाइडलाइन्स की सख्त पालना के लिए एक मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित करना
—क्षेत्र में किसी भी विकास परियोजना को शुरू करने से पहले उसका हैरिटेज इम्पैक्ट एसेसमेंट कराना
—इस एसेसमेंट के बाद ही परियोजना को शुरू करने या नहीं करने का फैसला लेना
—वर्तमान में चल रही परियोजना का भी एसेसमेंट करना

विश्व धरोहर समिति करेगी पुनर्विचार:
विश्व धरोहर की समिति की बैठक में किए गए ये वादे पूरे हुए या नहीं, इस बारे में राज्य सरकार को अनिवार्य तौर पर 1 दिसम्बर तक रिपोर्ट यूनेस्को को भेजनी होगी. इस रिपोर्ट के आधार पर वर्ष 2021 में होने वाले विश्व धरोहर समिति के 45 वें सत्र में फैसला किया जाएगा कि परकोटे का विश्व धरोहर का खिताब वापस लिया जाए या नहीं. यूनेस्को ऐसे मामलों में कितना गभीर रहता है इसकी बानगी है दार्जिलिंग में चलने वाली 140 वर्ष पुरानी टॉय ट्रेन. इस ट्रेन को पहले अपनी मौलिकता के चलते विश्व धरोहर का खिताब दिया गया था. लेकिन इसके हैरिटेज को बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने के कारण यूनेस्को ने इससे विश्व धरोहर का खिताब वापस लेने की तैयारी कर ली है. मामला साफ है कि एक बार खिताब मिलने से बड़ी चुनौती उसे बनाए रखना है. 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 
 

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