VIDEO: गरीबों को मकान उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहा बड़ा "खेल", मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बिल्डर्स की कारगुजारी

VIDEO: गरीबों को मकान उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहा बड़ा "खेल", मुख्यमंत्री जन आवास योजना में बिल्डर्स की कारगुजारी

जयपुरः मुख्यमंत्री जन आवास योजना में गरीबों को आशियाना उपलब्ध कराने के नाम पर एक बड़ा "खेल" चल रहा है. जेडीए ने इस "खेल" को हमेशा के लिए बंद करने के लिए  ठोस कदम उठाए हैं. आखिर किस तरह से गरीबों के मकान के नाम पर धांधली हो रही है और जेडीए ने इसे किस प्रकार रोका ? पढ़ें फर्स्ट इंडिया न्यूज़ की यह खास रिपोर्ट

प्रदेश की पिछली अशोक गहलोत सरकार के समय अफॉर्डेबल हाउसिंग योजना शुरू की गई थी. इसके तहत निजी प्रमोटर की ओर से विकसित की जाने वाली टाउनशिप स्कीम या ग्रुप हाउसिंग स्कीम में एक निर्धारित संख्या में भूखंड अथवा फ्लैट गरीबों के लिए आरक्षित रखे जाते हैं. यह फ्लैट्स अथवा भूखंड आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग,निम्न आय वर्ग और मध्यम आय वर्ग को ही आवंटित किए जाते हैं. इस योजना को परिवर्धित रूप में मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तौर पर पिछली भाजपा सरकार के समय शुरू किया गया. मौजूदा सरकार में भी इसी योजना के तहत गरीबों को मकान उपलब्ध कराए जा रहे हैं, लेकिन इस योजना की आड़ में प्रदेश के बड़े बिल्डर बड़ा "खेल" चला रहे हैं आपको सबसे पहले बताते हैं कि यह "खेल" किस तरह से चल रहा है.

यूं चल रहा है "खेल"
- मुख्यमंत्री जन आवास योजना के मुताबिक निजी ग्रुप हाउसिंग योजना में कुल बिल्ड एरिया रेश्यो के 10% के बराबर फ्लैट्स गरीबों के लिए आरक्षित रखने होते हैं.

- प्रमोटर्स को इस मामले में यह छूट दी गई है कि जहां वह ग्रुप हाउसिंग योजना विकसित कर रहा है उसी स्थान के बजाय वह अन्यत्र प्रस्तावित योजना में भी गरीबों के लिए फ्लैट उपलब्ध करा सकता है.

- मुख्यमंत्री जन आवास योजना के एक अलग प्रावधान के तहत कोई भी प्रमोटर अपनी खुद की भूमि पर गरीबों के लिए ग्रुप हाउसिंग स्कीम ला सकता है.

- गरीबों के लिए ग्रुप हाउसिंग स्कीम विकसित करने वाले प्रमोटर को भू रूपांतरण शुल्क, भू उपयोग परिवर्तन शुल्क और भवन मानचित्र अनुमोदन शुल्क समेत विभिन्न प्रकार की छूट दी जाती है.

- शहरों के पॉश इलाके में ग्रुप हाउसिंग स्कीम लाने वाले कई बिल्डर गरीबों के लिए आरक्षित फ्लैट्स किसी और स्थान पर उपलब्ध कराते हैं.

- आरक्षित फ्लैट्स उपलब्ध कराने के लिए बड़े बिल्डर मुख्यमंत्री जन आवास योजना में अनुमोदित गरीबों के लिए लाइ अन्य ग्रुप हाउसिंग स्कीम का सहारा ले रहे हैं.

- गरीबों के लिए आरक्षित फ्लैट्स मुख्यमंत्री जन आवास योजना की ही अन्य ग्रुप हाउसिंग में बिल्डर उपलब्ध करा रहे हैं.

अपनी हिस्सेदारी के गरीबों के फ्लैट्स मुख्यमंत्री जन आवास योजना में ही स्वीकृत अन्य योजना में उपलब्ध कराने का यह खेल चल रहा है. जयपुर विकास प्राधिकरण में हाल ही जेडीए आयुक्त गौरव गोयल ने  इस धांधली को पकड़ा. जयपुर विकास आयुक्त गौरव गोयल की सतर्कता के चलते जेडीए ने इस "खेल" को रोक दिया है. इसमें शामिल ऐसे प्रोजेक्ट्स की स्वीकृति जेडीए ने रोक दी है. जेडीए ने संबंधित बिल्डर से स्पष्ट कह दिया है कि या तो मूल स्कीम में ही गरीबों को मकान उपलब्ध कराएं या फिर अन्यत्र मकान देने का प्रस्ताव प्रस्तुत करें. मुख्यमंत्री जन आवास योजना में स्वीकृत स्कीम में गरीबों के लिए मकान उपलब्ध कराने पर प्रोजेक्ट को स्वीकृति नहीं दी जाएगी.

आपको बताते हैं कि इस खेल से किस तरह से मुख्यमंत्री जन आवास योजना के मूल उद्देश्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और निकायों के राजस्व की भी हानि हो रही है.

- बिल्डर्स के इस खेल के कारण मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत निर्धारित संख्या में मकान उपलब्ध नही हो पा रहे हैं.

- एक उदाहरण के तौर पर समझा जा सकता है मसलन किसी प्रमोटर को गरीबों के लिए 25 फ्लैट्स उपलब्ध कराने हैं.

- ऐसे में उस प्रमोटर को इन फ्लैट्स के लिए अलग से स्कीम बनानी होगी.

-लेकिन वह प्रमोटर इसके बजाय मुख्यमंत्री जन आवास योजना में स्वीकृत किसी अन्य निजी प्रमोटर की स्कीम में ये 25 फ्लैट खरीद कर उपलब्ध कराता है.

- तो गरीबों के लिए उपलब्ध कुल फ्लैट की संख्या उतनी ही कम हो जाएगी.

- जिस स्कीम में प्रमोटर ने गरीबों के लिए फ्लैट्स उपलब्ध कराएं हैं मान लीजिए उस स्कीम में कुल 100 फ्लैट्स बनने हैं.

- वह प्रमोटर अगर 25 फ्लैट्स गरीबों के लिए अन्य स्कीम  में उपलब्ध कराता तो 100+25 कुल 125 फ्लैट्स बनते.

- लेकिन प्रमोटर की इस कारगुजारी के कारण गरीबों को केवल 100 फ्लैट्स ही मिल पाएंगे.

- दूसरी तरफ मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत स्कीम स्वीकृत बनाने वाले प्रमोटर को विभिन्न प्रकार के शुल्क में 100 फ़ीसदी की छूट दी जाती है.

- बिना बैटरमैंट लेवी लिए उस प्रमोटर को अतिरिक्त निर्मित क्षेत्र भी संबंधित निकाय स्वीकृत करता है.

- तमाम प्रकार की छूट का फायदा उठाने वाला प्रमोटर अपने फ्लैट्स को सीधे गरीबों को देने के बजाय किसी दूसरे प्रमोटर को बेच देता है.

- इस प्रकार विभिन्न छूट के पेटे दी गई रियायत से संबंधित निकाय को राजस्व की हानि भी होती है.

गरीबों को मकान देने के नाम पर चल रही इस कारगुजारी को अन्य शहरों में भी रोकने के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण राज्य सरकार को इस बारे में अवगत कराएगा. इसके लिए जेडीए की ओर से बाकायदा सरकार को प्रस्ताव भी भेजा जाएगा. इस प्रस्ताव में सिफारिश की जाएगी कि मुख्यमंत्री जन आवास योजना में स्वीकृत स्कीम का प्रमोटर फ्लैट्स सीधे गरीबों को देने के बजाय किसी अन्य प्रमोटर को बेचता है तो विभिन्न शुल्क में दी गई छूट की उस प्रमोटर से वसूली की जाए.
फर्स्ट इंडिया न्यूज़ से अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 
 

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