VIDEO: खबर का बड़ा असर, गुलाब कोठारी प्रकरण को लेकर हरकत में आया CMO

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/04/06 02:39

जयपुर। फर्स्ट इंडिया न्यूज की खबर का मतलब असर तो होगा ही। जी हां एक बार फिर फर्स्ट इंडिया न्यूज की एक खबर का बड़ा असर हुआ है। गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकोर्ट की आदेश की पालना का अब मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गया है। मामले में अब मुख्यमंत्री कार्यालय की पूरी नजर रहेगी। 

बहुचर्चित गुलाब कोठारी प्रकरण में हाईकोर्ट के दिए आदेश के तीन बिंदुओं के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने का फैसला किया है। इनमें से हाईकोर्ट के आदेश का एक बिंदु है जयपुर के इकॉलोजिकल जोन को पुराने मास्टरप्लान के अनुसार आरक्षित रखना। सुप्रीम कोर्ट में सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्त मनीष सिंघवी ने राय दी थी कि इस आदेश की आंशिक पालना करते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की जाए। 

फर्स्ट इंडिया न्यूज पर 3 अप्रेल को प्रमुखता से प्रसारित खबर में खुलासा किया गया कि अतिरिक्त महाधविक्ता की इस राय से राज्य सरकार सहमत नहीं हैं। साथ ही यह भी बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाने वाली विशेष अनुमति याचिका में कहा जाएगा कि पुराने मास्टरप्लान के अनुसार पूरे क्षेत्र को इकोलाेजिकल जोन के रूप में आरक्षित रखना अब व्यावहािरक तौर पर संभव नहीं हैं। आपको बताते हैं कि अतिरिक्त महाधिवक्ता ने आखिर सरकार को किस तरह हाईकोर्ट आदेश की आंशिक पालना की सलाह दी थी।

क्या है मामला:

—जयपुर विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1996 में मास्टरप्लान-2011 लागू किया था
—इस मास्टरप्लान में आगरा रोड व खोनागाेरियान के आस-पास 481 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इकोलोजिकल जोन दिखाया गया
—इस मास्टरप्लान की अवधि 2011 में  खत्म होने के बाद नया मास्टरप्लान जारी किया
—नए मास्टरप्लान 2025 में इस क्षेत्र को इकोलोजिकल जोन के तौर पर दर्शाया नहीं गया है
—हाईकोर्ट का आदेश है मास्टरप्लान 2011 के अनुसार ही इकोलोजिकल जोन सुनिश्चित किया जाए
—अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष सिंघवी ने राय दी कि इस आदेश की आंशिक पालना की जा सकती है
—पुराने मास्टरप्लान में इकोलोजिकल जोन दर्शाए 481 वर्ग किलोमीटर एरिया में से 125 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अधिक निर्माण नहीं हैं
—इस 125 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इकोलोजिकल जोन के तौर पर नए मास्टरप्लान में चिहिन्त किया जा सकता है

फर्स्ट इंडिया न्यूज पर 3 अप्रेल को खबर प्रसारित होने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय हरकत में आया। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले में नगरीय विकास विभाग और जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को तलब कर बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने मामले को पूरी तरह समझा। आने वाले दिनों में बैठकों के ऐसे और दौर होंगे। मुख्यमंत्री कार्यालय का दखल बताता है कि मामले में अब उसकी पैनी नजर रहेगी।

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 


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