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किसानों के लिए बड़ी खबर, कृषि कनेक्शन की स्वीकृति 

किसानों के लिए बड़ी खबर, कृषि कनेक्शन की स्वीकृति 

रामदेवरा (जैसलमेर)। जिले के किसानों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि कृषि कनेक्शनों की 1051 फाइलों को एक साथ स्वीकृति मिली है। किसानों के अनुसार पिछले 70 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साथ इतनी फाइलों की स्वीकृति जारी हुई है। इससे पहले यह सिस्टम पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ था। किसान को एक जगह से दूसरी जगह चक्कर काटने पड़ते थे और उसके बाद बड़ी मुश्किल से कृषि कनेक्शन की स्वीकृति मिल पाती थी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों किसान जागृति मंच की ओर से कृषि कनेक्शनों में चल रही सेटिंग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था। आंदोलन होने के साथ ही इस मामले की परतें खुलती गई। बात राज्य सरकार तक जा पहुंची और आखिरकार स्वीकृति की सख्ती को नरम करते हुए दिशा निर्देश जारी किए गए। डिस्कॉम से नलकूप अनुमति समिति के साथ एक साथ फाइलें भेजने का निर्णय लिया गया। बाद में समिति की ओर से स्वीकृति जारी करने का नियम बनाया गया। इस पर काम हुआ और किसानों की जीत हुई।  जैसलमेर जिले में कृषि कनेक्शन लेना आम किसान के बूते से बाहर था। किसानों को इसके लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। प्रभावशाली लोग अपनी पहुंच के चलते कनेक्शन ले लेते थे। मगर आम किसान इससे दूर रह जाता। स्थिति यह हो गई कि हजारों फाइलें लंबित पड़ी रही। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अनुमति की सलाहकार समिति में डिस्कॉम की ओर से फाइलें जाएगी और वहां से ही सीधी अनुमति दी जाएगी। 

जैसलमेर को बना रखा था डार्क जोन 

किसान जागृति मंच के आंदोलन के दौरान सामने आया कि जैसलमेर नोटिफाइड एरिया नहीं है। बावजूद इसे डार्क जोन की श्रेणी में बता रखा था। किसानों ने आरोप लगाया कि, "पूर्व भू-जल वैज्ञानिक ने जानबूझकर किसानों को परेशान करने तथा मिलीभगती को बढ़ावा देने की नीयत से जैसलमेर को डार्क जोन की श्रेणी में बता रखा था। ऐसे में पूर्व में आए कलेक्टर व अन्य अधिकारी अनुमति देने से कतराते थे। आंदोलन हुआ तो सामने आया कि जैसलमेर डार्क जोन नहीं है। ऐसे में वर्तमान कलेक्टर ओम कसेरा ने जल्द ही मीटिंग आयोजित कर एक साथ 1051 फाइलों को स्वीकृति जारी कर दी।" 

किसान जागृति मंच के बैनर तले कुछ समय पूर्व किसानों ने कृषि कनेक्शन के कड़े नियमों को लेकर आंदोलन किया था। किसानों ने आसानी से कृषि कनेक्शन दिलवाने तथा डिस्कॉम के स्तर से फाइलें सलाहकार समिति को भेजने की मांग की। प्रशासन ने उनकी मांगे मानते हुए कुछ नियमों में बदलाव किया। लेकिन उसके बाद भी किसान राजी नहीं हुए, तो फिर से नए दिशा निर्देश जारी हुए। जिससे किसान संतुष्ट हो गए। अब उन नियमों के आधार पर अनुमति मिलना आसान हो गया है।

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नहरी किसानों के लिए राहत की खबर, आज से 30 जुलाई तक मिलेगा खरीफ का पानी

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जैसलमेर: भारत पाक सीमा से सटे सरहदी जिले जैसलमेर के नहरी किसानों के लिए अच्छी खबर है कि अब उन्हें आगामी एक महीने तक खरीफ की फसलों के लिए पानी दिया जाएगा. हालांकि पहले सरकार द्वारा रेगुलेशन के तहत 26 अप्रैल से 30 मई तक पानी दिया जाना था, लेकिन रेगुलेशन में संशोधन करते हुए सरकार ने 30 मई से आगामी 30 जुलाई तक किसानों को खरीफ की फसल व पेयजल के लिए पानी उपलब्ध करवाया जाएगा. 

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सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा:
इंदिरा गांधी नहर परियोजना की नहरों को खरीफ फसलों के दौरान सिंचाई के लिए 30 मई से 30 जुलाई तक पानी दिया जाएगा. नहरों के 4 समूह में से इन अवधि में दो समूह चलाएं जाएंगे. जिसमें जैसलमेर व पोकरण भी शामिल है. इसके साथ ही बाड़मेर लिफ्ट परियोजना के लिए भी पानी छोड़ा जाएगा. विभाग ने काश्तकारों से अपील की है कि सिंचाई पानी की मात्रा को ध्यान में रखते हुए कम पानी के उपयोग वाली फसलों की सिंचाई करे. इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसलमेर संभाग में बुर्जी 1254 मुख्य नहर के नीचे बारी प्रणाली, द्वितीय चरण के रेगुलेशन के लिए जल नहरों में सिंचाई के लिए दिया जाएगा. नहरबंदी के बाद अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी रविवार से नियमित रूप से मिलेगा.

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किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी:
अब सिंचाई के लिए इंदिरा गांधी मुख्य नहर से जुड़ी नहरों के चार में दो समूह में पानी चलाया जाएगा ताकि खरीफ फसल की बुआई की जा सके. नहरों में दो समूह में चलने वाला पानी एक समूह में साढ़े आठ दिन तक चलता है. इसके बाद दूसरा समूह शुरू होता है. इसी क्रम से नहरी पानी का शिड्यूल 34 दिनों तक निर्धारित होता है. उधर सिंचाई पानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे किसानों ने भी खरीफ की बुआई की तैयारियां शुरू कर दी है. पंजाब के साथ अब राजस्थान सीमा में भी नहर की मरम्मत नहीं होगी क्योंकि 4 समूह में पानी देने के लिए नहर में हरिके से 11 हजार 500 क्यूसेक पानी छोड़ा जाना है. इतने पानी में नहर का जलस्तर ज्यादा रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की मरम्मत संभव नहीं है.  

जून माह में 25 हजार किसानों को उपज रहन ऋण योजना से जोड़ने का लक्ष्य, फसल रहन ऋण के लिए 5500 ग्राम सेवा सहकारी समितियां को दी पात्रता

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जयपुर: 1 जून से शुरू हो रही उपज रहन ऋण योजना के तहत जून माह में राज्य के 25 हजार किसानों को जोड़कर लाभ प्रदान किया जायेगा. राज्य सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना से किसानों के उपज बेचान से जुड़े हितों की सुरक्षा सम्भव हो सके. उन्होंने कहा कि योजना में पात्र समितियों का दायरा बढ़ाकर इसे 5500 से अधिक किया गया है ताकि अधिक से अधिक किसान लाभान्वित हो सके. 

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किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा:
आज सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव और रजिस्ट्रार नरेश पाल गंगवार पंत कृषि भवन में उपज रहन ऋण योजना, फसली ऋण वितरण एवं अन्य संबंधित बिन्दुओं पर जिलों में पदस्थापित सहकारिता के अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को विडियों काफ्रेंसिंग के माध्यम से सम्बोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये एवं बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में देने के लिए योजना जारी की है. इसमें किसान को उसकी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. किसान बाजार में अच्छे भाव आने पर अपनी फसल को बेच सकता है. यह योजना किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकता को पूरी करने तथा कम दामों में फसल बेचने की मजबूरी में मददगार साबित होगी. 

कार्मिकों के लिए आयेगी प्रोत्साहन स्कीम:
प्रमुख सचिव ने कहा कि राजस्थान की यह योजना भारत में सबसे कम ब्याज दर 3 प्रतिशत पर किसान को रहन ऋण देने की विशेष पहल है. जो किसानों एवं समितियों की आय में वृद्धि करेगी. उन्होंने निर्देश दिये कि सहकारी समितियां अपने आस-पास के गोदामों को ध्यान में रखते हुए अधिक से अधिक किसानों को उपज रहन ऋण देकर उनकी तात्कालिक आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद करें. योजना में अच्छे कार्य करने वाली समितियों के कार्मिकों के लिए शीघ्र ही एपेक्स बैंक द्वारा प्रोत्साहन स्कीम जारी की जायेगी. 

4.44 लाख मै.टन सरसों एवं चना की हुई खरीद: 
गंगवार ने कहा कि कोविड-19 महामारी में केवीएसएस एवं जीएसएस घोषित गौण मण्डियां बहुत अच्छे से कार्य कर रही है और 427 गौण मण्डियां ओपरेशनल होकर किसानों को अपने खेत के नजदीक ही उपज बेचान की सुविधा दे रही है. उन्होंने कहा कि समर्थन मूल्य पर खरीद में जीएसएस को जोड़ने से किसानों को अपने नजदीकी उपज बेचान की सुविधा मिलने से खरीद कार्य में गति आयी है. जो खरीद पहले 58 दिन में होती थी, आज वह 26 दिन में ही पूरी हो रही है तथा किसानों के खाते में तीन से चार दिन में भुगतान भी हो रहा है. 27 मई तक 1 लाख 76 हजार 434 किसानों से 4 लाख 44 हजार 628 मै.टन सरसों एवं चना की खरीद हो चुकी है, जिसकी राशि 2 हजार 64 करोड़ रूपये है. इसमें से 1 हजार 723 करोड़ रूपये का भुगतान किसानों को हो चुका है. 

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4295 करोड़ रूपये फसली ऋण का हुआ वितरण: 
राज्य के 13 लाख 18 हजार 177 किसानों को 4 हजार 295 करोड़ रूपये का सहकारी फसली ऋण का वितरण हो चुका है. उन्होंने भरतपुर, जैसलमेर, हनुमानगढ़, बारां एवं जालौर जिलों में ऋण वितरण की धीमी गति पर नाराजगी व्यक्त की. उन्होंने कहा कि संबंधित जिले इस कार्य में गति लाये और शीघ्र फसली ऋण वितरण करे. गंगवार ने कहा कि हमारी मंशा है कि ग्राम सेवा सहकारी समिति को किसान की समस्या समाधान एवं सुविधाओं के लिए सिंगल विड़ों के रूप में विकसित किया जाये. 
 

टिड्डी पर काबू करने में विफल रही राज्य और केन्द्र सरकार, हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर 8 जून तक जवाब पेश करने के दिये आदेश

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जयपुर: राज्य में टिडडी दल के अब तक के सबसे भयावह प्रकोप से बचने और काबू पाने के लिए तय गाईड लाईंस के अनुसार काम नहीं होने और टिड्डी दल पर काबू नहीं पाने पर राजस्थान हाईकोर्ट ने केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस सबीना और जस्टिस सी के सोनगरा ने एडवोकेट विजय पूनिया की ओर से दायर जनहित याचिका पर ये आदेश दिये है. 

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राज्य में टिड्डी दल का कई दशक बाद इतना जबरदस्त हमला हुआ: 
एडवोकेट विजय पूनियां ने जनहित याचिका दायर कर अदालत को बताया कि पिछले कई दिनों से राज्य में टिड्डी दल का कई दशक बाद इतना जबरदस्त हमला हुआ है. राज्य में टिडडी हमले से करीब 5 लाख हैक्टेयर में फसल और हरियाली नष्ट हो गई है. इसके बावजूद अभी तक केन्द्र और राज्य सरकार ने टिडडी नियंत्रण के लिए अब तक कोई ठोस काम नहीं किया है. याचिका में केन्द्र और राज्य सरकार को टिडडी नियंत्रण की योजना और गाईड लाईंस की पालना के निर्देश देने की गुहार लगायी गयी है. 

याचिका में कहा सरकार ने नही कि गाईडलाइन की पालना:
लेकिन अभी तक केन्द्र और राज्य सरकारे इस पर काबू पाने में पुरी तरह से विफल रही है. टिड्डी दल की समस्या एक निरंतर समस्या बनी हुई है. यूनाईटेड नेशन के फूड व एग्रीकल्चर संगठन ने रेगिस्तानी टिडडी पर काबू पाने के लिए गाईड लाईंस और आकस्मिक योजना जारी कर रखी हैं, लेकिन सरकारों द्वारा इस योजना की कोई पालना नही कि गयी. याचिका में कहा गया टिडडी दल के हमला होने पर नियंत्रण के लिए कृषि मंत्रालय के साथ गृह, रक्षा, विदेश, सिविल एविऐशन, दूरसंचार सहित राज्य सरकारों की भूमिका भी स्पष्ट तौर पर गाईड लाईंस और योजना में बतायी गयी है.

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प्राथमिक जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय और विभाग की:
टिडडी नियंत्रण की योजना में मंत्रालयों के साथ ही कीटनाशक निर्माताओं और एयरक्राफ्ट कंपनियों सहायता लेना भी बताया है. टिडडी दल के हमले व उत्पत्ति के स्थान का पता लगाने और किसानों तथा आमजन को चेतावनी देने के साथ ही सभी ऐजेंसियों को एकजुट कर नियंत्रण की योजना पर काम करने की प्राथमिक जिम्मेदारी कृषि मंत्रालय और विभाग की है. राज्य सरकारों को नियंत्रण के लिए कीटनाशक,वाहन और मानवसंसाधन उपलब्ध करवाना होता है. केन्द्रीय कृषि व किसान कल्याण मंत्रालय तथा राज्य सरकार टिडडी नियंत्रण करने में विफल रहे हैं. 

किसान टिड्डी दल से परेशान, नागौर में लगातार हमला जारी, फसलों को हो रहा है नुकसान 

किसान टिड्डी दल से परेशान, नागौर में लगातार हमला जारी, फसलों को हो रहा है नुकसान 

नागौर: राजस्थान के कई जिलों में टिड्डी दल का हमला जारी है. बीते एक सप्ताह से नागौर में भी टिड्डी दल का हमला जारी है और लगातार 3 दिनों से डीडवाना उपखण्ड क्षेत्र में टिड्डियों का हमला जारी है. टिड्डियों द्वारा फसलों और पेड़ पौधों को भारी नुकसान पंहुचाया जा रहा है. रविवार सुबह केंद्र से आई कृषि विभाग के अधिकारियों की 14 टीमें लगातार टिड्डी मारने और भगाने के प्रयास में जुटी हुई है. वहीं रविवार को डीडवाना विधायक चेतन डूडी भी अधिकारियों के साथ दौलतपुरा गांव में टिड्डियों द्वारा किये गए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे. विधायक डूडी ने केंद्र से आये टीम के अधिकारियों से मुलाकात कर जानकारी और क्षेत्र का मौका मुआयना भी किया गया.

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कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से की बात:
वहीं प्रदेश के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया से फ़ोन पर बात कर यहां के कर्मचारियों के स्थानांतरण पर रोक एवं नुकसान की आशंका को मध्यनजर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की मांग भी की गई है. डूडी ने मौके पर पंहुचे कृषि अधिकारियों से आंकलन करवाने के आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए. वहीं डूडी ने टिड्डियों को लेकर जिला कलेक्टर से भी वार्ता कर क्षेत्र में टिड्डी पर नियंत्रण को लेकर चर्चा की गई.

फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं:
डूडी ने इस दौरान किसानों से भी अपील करते हुए कहा है कि 8 किलोमीटर लंबे और चार किलोमीटर चौड़े इस टिड्डी दल पर कृषि विभाग द्वारा अकेले नियंत्रण नही किया जा सकता है. किसानों से अपील करते हुए कहा है कि किसान अपने अपने खेतों में टिड्डी भगाने का प्रयास करे और फसलों और पेड़ पौधों को टिड्डी से बचाएं ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके. टिड्डडी दल डीडवाना के आसपास बीती रात से बैठा है और सबह तीन बजे ही टीमों ने स्प्रे कर इसको मारने का प्रयास शुरू किया गया. दिन उगने के बाद टिड्डियों का दल उड़कर आसमान में चला जाता है जिसको मारना मुश्किल हो जाता है और स्प्रे काम नही करता है.

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टिड्डी दल के खात्मे को लेकर नागौर के कृषि विभाग के अधिकारियों ने तैयार किया एक्शन प्लान, 5 टीमों का किया गठन

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नागौर: पाकिस्तान से आए कई अलग टिड्डी दल ने नागौर जिले में जमकर तबाही मचाई है. अब टिड्डी दल को समाप्त करने के लिए प्रशासनिक अमला भी पूरी तरह से सतर्क नज़र आ रहा है. गुरुवार को कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव और  नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने नागौर जिला कलेक्ट्रेट सभागार में कृषि विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर टिड्डी दल के खात्मे को लेकर एक्शन प्लान तैयार किया है.

किसानों की फसलों को हुआ नुकसान:
जिला प्रशासन ने टिड्डी दल से निपटने के लिए तैयारियां के बारे में जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव ने विस्तृत कार्य योजना की जानकारी दी. इस बैठक में टिड्डी के द्वारा जिले में किसानों की फसलों को पहुंचाये गए नुकसान को लेकर चर्चा की गई. इसके साथ ही टिड्डियों को समाप्त करने के लिए पांच टीमों का गठन किया गया.कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव तथा नागौर के प्रभारी सचिव नरेशपाल गंगवार ने मीडिया से रूबरू होते हुए बताया कि यह टिड्डी दल पाकिस्तान, अफ्रीका के इलाके से भारत में प्रवेश कर सकता है.

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कई जिलों में हुआ टिड्डी दल: 
डेजर्ट के इलाके बाडमेर से होते हुए नागौर सहित कई जिलों में टिड्डी दल का हमला हुआ है. नियन्त्रण दल द्वारा उनके ऊपर पेस्टिसाइड का स्प्रे करके नष्ट्र कार्य किया जा रहा है केन्द्र सरकार अब डॉन कैमरें की उपलब्धता करवाएंगी टिड्डी दल को समूल नष्ट करके किसानों को राहत देने का प्रयास जारी है. नागौर जिले में टिड्डी के दल ने खिवसर ,मकराना ,मेडता,नागौर व आज जायल में नुकसान पहुंचाया है. उन्होंने बताया कि टिड्डी के दल को कंट्रोल करने के लिए विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर पूरी कार्ययोजना बना ली गई है.

किसानों को अलर्ट रहने के दिए निर्देश:
इसके साथ ही अब कृषि विभाग की ओर से रात्रि को रेस्क्यू ऑपरेशन चलाते हुए स्प्रे का छिड़काव कर टिड्डी दल  समाप्त करने का प्रयास किया जाएगा.टिड्डी बड़ी आपदा के रूप में पनप चुकी है, इससे अब अगले बड़े हमले से पहले किसानों को अलर्ट रहने के लिए आगाह किया है. उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि अगर कहीं भी टिड्डी दल देखने और होने की सूचना प्राप्त होती है तो वे तुरंत कृषि विभाग के अधिकारियों को सूचित करें.

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सीएम का एक और ऐतिहासिक फैसला, किसानों को मिलेगा हर साल 50 करोड़ रुपए का अनुदान

जयपुर: कोविड-19 महामारी के दौर में किसानों को कम दामों पर फसल नही बेचनी पडे़ इसके लिए उपज रहन ऋण को 3 प्रतिशत ब्याज दर पर देने का ऐतिहासिक फैसला किया है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के फैसले को अमलीजामा पहनाते हुए 1 जून को सभी जिलों में किसानों को एक साथ फसल रहन ऋण वितरण का शुभारंभ किया जाएगा. 

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50 करोड़ रुपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा:
प्रतिवर्ष कृषक कल्याण कोष से 50 करोड़ रुपये का अनुदान इस योजना के लिए किसानों को मिलेगा. योजना में 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान राज्य सरकार वहन कर रही है. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने कहा कि लघु एवं सीमान्त किसानों को 1.50 लाख रूपये तथा बड़े किसानों को 3 लाख रूपये रहन ऋण के रूप में मिलेंगे. किसान को अपनी उपज का 70 प्रतिशत ऋण मिलेगा. बाजार में अच्छे भाव आने पर किसान अपनी फसल को बेच सकेगा. इस योजना से किसान की तात्कालिक वित्तीय आवश्यकताएं पूरी होगी. प्रमुख सचिव सहकारिता नरेश पाल गंगवार ने वीडियों कान्फ्रेंसिंग के दौरान जिले में पदस्थ अधिकारियों एवं व्यवस्थापकों को संबोधित करते हुए कहा कि सहकारिता मंत्री राज्य में सहकारिता के ढांचे को सार्थक एवं उपादेय बनाना चाहते है. 

किसानों का सीधा जुड़ाव अब सहकारी समितियों से और मजबूत होगा:
मुख्यमंत्री द्वारा इस योजना में अनुदान देने से किसानों का सीधा जुड़ाव अब सहकारी समितियों से और मजबूत होगा और उनकी मदद भी बेहतर होगी. गंगवार ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रतिवर्ष 2 हजार करोड़ रूपये रहन ऋण के रूप में किसानों की मदद की जाए. यह देश की एक यूनिक योजना है। जिसे मूर्त रूप देना आवश्यक है. उन्होंने कहा कि इस कार्य में लगे कार्मिकों के लिए भी प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी.  अभी इस कार्य के लिए 4 हजार जीएसएस को अधिकृत किया गया है आने वाले समय में अन्य जीएसएस को भी इस कार्य में जोड़ा जाएगा. उन्होंने निर्देश दिए कि असक्रिय गौण मंडियों को भी शीघ्र सक्रिय किया जाए. जीएसएस एवं केवीएसएस घोषित 400 गौण मंडियां कार्य कर रही है. इन्हें लगातार सक्रिय कर स्थायित्व प्रदान करे. प्रबंध निदेशक राजफैड़ सुषमा अरोड़ा ने कहा कि सरसों एवं चने की समर्थन मूल्य पर 2 लाख 8 हजार से अधिक मीट्रिक टन खरीद हो चुकी है. अधिकतर खरीद केन्द्र सक्रिय है.

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जहां कही भी तकनीकी समस्या है हमें तुरन्त अवगत करायें:
उन्होंने कहा कि जहां कही भी तकनीकी समस्या है हमें तुरन्त अवगत करायें ताकि किसानों को परेशानी का सामना नही करना पड़े. उन्होंने कहा कि 52 हजार 921 किसानों को 4.91 करोड़ रूपये का भुगतान किया जा चुका है. उन्होंने निर्देश दिए कि ईडब्लयूआर शीघ्र भिजवायें ताकि किसानों को 3 से 4 दिवस में भुगतान हो सके. इससे पहले अतिरिक्त रजिस्ट्रार प्रथम रश्मि गुप्ता ने वीसी के एजेंडा की शुरूआत कर बिन्दुवार चर्चा की. मार्केटिंग बोर्ड के निदेशक ताराचंद मीणा ने कहा कि मंडी सचिव गौण मंडी से लेकर किसी भी प्रकार की समस्या आने पर तत्काल जीएसएस एवं केवीएसएस की मदद करे. प्रबंध निदेशक अपेक्स बैंक परशुराम मीणा ने कहा कि 7 लाख 82 हजार से अधिक किसानों को 2 हजार 377 करोड़ रूपये से अधिक का फसली ऋण वितरित हो चुका है. उन्होंने कम फसली ऋण वितरण वाले जिलों के प्रबंध निदेशकों को निर्देश दिए कि एक सप्ताह में ऋण वितरण में गति लाए अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहे. 

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जयपुर: कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कोरोना महामारी के बीच टिड्डी प्रकोप को बड़ी चुनौती बताते हुए विभागीय अधिकारियों को जिला प्रशासन के साथ बेहतर समन्वय एवं किसानों के सहयोग से प्रभावी नियंत्रण करने के निर्देश दिए. निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ टिड्डी नियंत्रण, खरीफ आदान व्यवस्था एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा की. सोमवार को कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ के खाद्य एवं कृषि संगठन ने इस साल व्यापक पैमाने पर टिड्डी प्रकोप की आशंका जताते हुए गत वर्ष की तुलना में दो से तीन गुना अधिक प्रभाव की चेतावनी दी है.

टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम:
इस साल पिछले वर्ष प्रभावित हुए 12 जिलों के अलावा अन्य जिलों में भी टिड्डी के पहुंचने की आशंका है. उन्होंने कहा कि हमने पिछले साल बहुत ही बढ़िया तरीके से टिड्डी पर नियंत्रण किया था, लेकिन इस साल और ज्यादा प्रभावी सर्वेक्षण एवं नियंत्रण प्रणाली अपनाने की आवश्यकता होगी. राज्य सरकार केन्द्र के साथ पूरा समन्वय स्थापित कर टिड्डी नियंत्रण के लिए सभी जरूरी इंतजाम कर रही है. उन्होंने जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के माध्यम से सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए. अधिकारी मौके पर पर्याप्त कीटनाशक की उपलब्धता सुनिश्चित करें. व्हाट्स एप ग्रुप बनाकर पंचायत प्रतिनिधियों से लेकर सांसद तक सभी जनप्रतिनिधियों को जोड़ें, ताकि समय पर टिड्डी की तुरंत सूचना मिल सकें और प्रभावी नियंत्रण किया सके. उन्होंने किसानों का पूरा सक्रिय सहयोग लेने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी प्रभावित जिलों में रिक्त पदों पर अन्य जिलों से कार्मिक नियुक्त किए गए हैं और शीघ्र ही नई भर्ती से चयनित सहायक कृषि अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षकों को नियुक्ति दी जाएगी. जिसके कार्मिकों की कोई कमी नहीं रहेगी.

खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए:
कृषि मंत्री ने अच्छी बरसात होने की भविष्यवाणी को विभाग और किसानों के लिए खुश खबरी बताते हुए काश्तकारों के लिए समय पर बीज एवं खाद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। फसल बीमा ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कटारिया ने बताया कि इस वर्ष से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऋणी किसानों के लिए भी वैकल्पिक कर दी है. ऋणी किसान यदि स्वयं को बीमा से अलग रखना चाहता है तो उसे आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा को सूचित करना होगा. उन्होंने अधिकारियों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए. कृषि मंत्री ने रबी फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि नुकसान का आंकलन किया जा सके. उन्होंने तकनीकी वजह से पुराने सालों के अटके कुछ क्लेम भी शीघ्र जारी करवाने के निर्देश दिए.

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गत वर्ष हुए 12 जिले टिड्डी से प्रभावित:
प्रमुख शासन सचिव नरेशपाल गंगवार ने बताया कि गत वर्ष 12 जिले टिड्डी से प्रभावित हुए थे, वहां के लिए काफी पहले ही कंटीनजेंसी प्लान तैयार कर लिया है. इस साल नए जिले जुड़ने की आशंका के कारण शेष जिले भी जिला कलक्टर से कंटीनजेंसी प्लान स्वीकृत कराकर मुख्यालय भिजवाएं. उन्होंने सोयाबीन बीज का उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए. उन्होंने बताया कि टिड्डी नियंत्रण के लिए जहां गाड़ियां पहुंचने में मुश्किल होती है वहां ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया जाएगा. इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी.  कृषि आयुक्त डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि इस वर्ष पहली बार 11 अप्रेल को राज्य में टिड्डी दलों का प्रवेश हुआ था और अब तक जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, अजमेर, पाली, बीकानेर, सिरोही एवं भीलवाड़ा जिलों में लगभग 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी का प्रभाव रहा है.

खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक:
यहां प्रभावी ढंग से नियंत्रण कर भविष्य के लिए राज्य सरकार की ओर से योजनाबद्ध ढंग से प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि टिड्डियों के नियंत्रण एवं सर्वेक्षण के लिए 70 बोलेरो, 45 बोलेरो केम्पर यूटिलिटी वाहन, 600 ट्रेक्टर माउंटेड स्प्रेयर मय ट्रेक्टर एवं 3 हजार 200 ट्रेक्टर मय पानी के टैंकरों के उपयोग की स्वीकृति जारी की जा चुकी है. वाहनों का किराये पर संचालन के लिए 5 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है. किसानों को शत प्रतिशत अनुदान पर पौध संरक्षण रसायन उपलब्ध कराने के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. गत वर्ष की तरह इस साल भी खरीफ के लिए खाद-बीज की पर्याप्त व्यवस्था है. मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप पात्र किसानों को निःशुल्क बीज उपलब्ध कराने के लिए 15 हजार क्विंटल संकर बाजरा बीज के लिए जिलेवार आपूर्ति एवं वितरण आदेश जारी किए जा चुके हैं. साथ ही 25 हजार क्विंटल मक्का बीज की व्यवस्था की जा रही है. डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2019 तक के सभी बीमा क्लेम का भुगतान जून अंत तक कर दिया जाएगा. 

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'आत्म निर्भर' भारत के लिए कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने किए ये बड़े ऐलान

'आत्म निर्भर' भारत के लिए कृषि के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए वित्त मंत्री ने किए ये बड़े ऐलान

नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत अभियान का आगाज किया है. आज के ऐलान कृषि सेक्टर से जुड़े बुनियादी ढांचे पर आधारित है. यह पैकेज देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए है. जानें- वित्त मंत्री की बड़ी बातें...

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1. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृषि के बुनियादी ढांचे के लिए सरकार एक लाख करोड़ देगी. ये एग्रीग्रेटर्स, एफपीओ, प्राइमरी एग्रीकल्चर सोसाइटी आदि के लिए फार्म गेट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए दिया जाएगा जैसे कोल्ड स्टोरेज. इससे किसान की आय भी बढ़ेगी. 

2. माइक्रो फूड एंटरप्राइजेज (एमएफई) के लिए सरकार ने 10,000 करोड़ रुपये की योजना शुरू की है.  यह योजना पीएम के 'वोकल फॉर लोकल' मुहिम को बल देगा.

3. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना, इसकी घोषणा बजट में की गई, कोरोना की वजह से इसे तत्काल लागू किया जा रहा है. मछुआरों को नई नौकाएं दी जाएंगी. 55 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. इससे भारत का निर्यात दोगुना बढ़कर 1 लाख करोड़ रुपये का हो जाएगा. अगले 5 साल में 70 लाख टन अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन होगा.

4. सीतारमण ने कहा कि जानवरों में फुट ऐंड माउथ डिजीज होता है, क्योंकि उनका टीकाकरण नहीं होता, इसलिए दूध के उत्पादन पर असर पड़ता है. अब सभी पशुओं का 100 फीसदी टीकाकरण होगा. जनवरी 2020 तक 1.5 करोड़ गाय, भैंसों का टीकाकरण किया गया. ग्रीन जोन में यह काम जारी है.

5.  फुट एंड माउथ डिजीज और ब्रुसेलोसिस के लिए राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत 13,343 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

6. सीतारमण ने कहा कि 15,000 करोड़ रुपये का पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष शुरू किया जाएगा. इससे पशुपालन से जुड़े लोगों को मदद मिलेगी. 

7.  500 करोड़ रुपये मधुमक्खी पालन पर खर्च किए जाएंगे. दो लाख से ज्यादा मधुमक्खी पालकों को इससे मदद मिलेगी.

8.  हर्बल खेती को बढ़ावा देने के लिए 4000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. अगले 2 साल में 10,00,000 हेक्टेयर जमीन को कवर किया जाएगा.

9. ऑपरेशन ग्रीन का विस्तार टमाटर, प्याज और आलू के अलावा बाकी सभी फल और सब्जियों के लिए भी किया जाएगा.

10. एक केंद्रीय कानून आएगा जिससे किसान अपने उत्पाद को आकर्षक मूल्य पर दूसरे राज्यों में भी बेच सकें. अभी वह सिर्फ लाइसेंसी को ही बेचा जा सकता है. अगर वह किसी को भी बेच सके तो उसे मनचाही कीमत मिलेगी. हम उसे ऐसी सुविधा देंगे.

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