किसानों के लिए बड़ी खबर, कृषि कनेक्शन की स्वीकृति 

FirstIndia Correspondent Published Date 2018/09/16 12:00

रामदेवरा (जैसलमेर)। जिले के किसानों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि कृषि कनेक्शनों की 1051 फाइलों को एक साथ स्वीकृति मिली है। किसानों के अनुसार पिछले 70 सालों में पहली बार ऐसा हुआ है कि एक साथ इतनी फाइलों की स्वीकृति जारी हुई है। इससे पहले यह सिस्टम पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ था। किसान को एक जगह से दूसरी जगह चक्कर काटने पड़ते थे और उसके बाद बड़ी मुश्किल से कृषि कनेक्शन की स्वीकृति मिल पाती थी। 

गौरतलब है कि पिछले दिनों किसान जागृति मंच की ओर से कृषि कनेक्शनों में चल रही सेटिंग को लेकर आंदोलन शुरू किया गया था। आंदोलन होने के साथ ही इस मामले की परतें खुलती गई। बात राज्य सरकार तक जा पहुंची और आखिरकार स्वीकृति की सख्ती को नरम करते हुए दिशा निर्देश जारी किए गए। डिस्कॉम से नलकूप अनुमति समिति के साथ एक साथ फाइलें भेजने का निर्णय लिया गया। बाद में समिति की ओर से स्वीकृति जारी करने का नियम बनाया गया। इस पर काम हुआ और किसानों की जीत हुई।  जैसलमेर जिले में कृषि कनेक्शन लेना आम किसान के बूते से बाहर था। किसानों को इसके लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी। प्रभावशाली लोग अपनी पहुंच के चलते कनेक्शन ले लेते थे। मगर आम किसान इससे दूर रह जाता। स्थिति यह हो गई कि हजारों फाइलें लंबित पड़ी रही। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा, अनुमति की सलाहकार समिति में डिस्कॉम की ओर से फाइलें जाएगी और वहां से ही सीधी अनुमति दी जाएगी। 

जैसलमेर को बना रखा था डार्क जोन 

किसान जागृति मंच के आंदोलन के दौरान सामने आया कि जैसलमेर नोटिफाइड एरिया नहीं है। बावजूद इसे डार्क जोन की श्रेणी में बता रखा था। किसानों ने आरोप लगाया कि, "पूर्व भू-जल वैज्ञानिक ने जानबूझकर किसानों को परेशान करने तथा मिलीभगती को बढ़ावा देने की नीयत से जैसलमेर को डार्क जोन की श्रेणी में बता रखा था। ऐसे में पूर्व में आए कलेक्टर व अन्य अधिकारी अनुमति देने से कतराते थे। आंदोलन हुआ तो सामने आया कि जैसलमेर डार्क जोन नहीं है। ऐसे में वर्तमान कलेक्टर ओम कसेरा ने जल्द ही मीटिंग आयोजित कर एक साथ 1051 फाइलों को स्वीकृति जारी कर दी।" 

किसान जागृति मंच के बैनर तले कुछ समय पूर्व किसानों ने कृषि कनेक्शन के कड़े नियमों को लेकर आंदोलन किया था। किसानों ने आसानी से कृषि कनेक्शन दिलवाने तथा डिस्कॉम के स्तर से फाइलें सलाहकार समिति को भेजने की मांग की। प्रशासन ने उनकी मांगे मानते हुए कुछ नियमों में बदलाव किया। लेकिन उसके बाद भी किसान राजी नहीं हुए, तो फिर से नए दिशा निर्देश जारी हुए। जिससे किसान संतुष्ट हो गए। अब उन नियमों के आधार पर अनुमति मिलना आसान हो गया है।

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