उदयपुर कांग्रेस में बड़े सुधारों का ऐलान, जनता से ‘टूटे संपर्क’ को जोड़ने के लिए जमीन पर उतरने का आह्वान

कांग्रेस में बड़े सुधारों का ऐलान, जनता से ‘टूटे संपर्क’ को जोड़ने के लिए जमीन पर उतरने का आह्वान

कांग्रेस में बड़े सुधारों का ऐलान, जनता से ‘टूटे संपर्क’ को जोड़ने के लिए जमीन पर उतरने का आह्वान

उदयपुर (राजस्थान): कांग्रेस ने तीन दिनों के चिंतन शिविर के समापन के बाद रविवार को बडे सुधारों की घोषणा की जिनमें मुख्य रूप से पार्टी में युवाओं की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया गया है. पार्टी में एक परिवार, एक टिकट का फार्मूला लागू करने, संगठन में हर स्तर पर युवाओं को 50 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने और अगले लोकसभा चुनाव से 50 प्रतिशत टिकट 50 साल से कम उम्र के लोगों को देने का भी फैसला किया गया.

चिंतन शिविर में पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस कड़वी सच्चाई को भी स्वीकार किया कि जनता के साथ कांग्रेस का संपर्क टूट चुका है और इसे फिर से जोड़ने के लिए नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाना होगा.झीलों की नगरी उदयपुर में चिंतन शिविर के समापन के बाद कांग्रेस की ओर से जो उदयपुर नवसंकल्प जारी किया गया उसमें राजनीतिक मुद्दों, संगठन से जुड़े विषयों, पार्टी के भीतर सुधारों, कमजोर तबकों को फिर से साथ जोड़ने, युवाओं, छात्रों और आर्थिक मुद्दों पर पार्टी का नजरिया रखा गया. साथ ही, आगे के कदमों का भी स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया.

कांग्रेस ने ‘भारतीय राष्ट्रवाद’ को अपना मूल चरित्र बताते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की ‘ध्रुवीकरण की राजनीति’ की धार कुंद करने और सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने के लिए आगामी दो अक्टूबर से ‘भारत जोड़ो यात्रा’ निकाली जाएगी.देश के मुख्य विपक्षी दल ने यह भी बड़ा फैसला किया कि पार्टी में निर्वाचित पदों के लिए नेताओं की सेवानिवृत्त की आयुसीमा तय की जाएगी और ‘एक व्यक्ति, एक पद’ तथा एक पद पर अधिकतम पांच साल रहने की व्यवस्था भी लागू होगी.कांग्रेस ने समान विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के साथ संपर्क स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई और कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों के अनुरूप गठबंधन का विकल्प उसने खुला रखा है.

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चिंतन शिविर के समापन के मौके पर कांग्रेस कार्य समिति के कुछ सदस्यों को लेकर अपने तहत एक सलाहकार समूह बनाने का ऐलान किया और यह भी स्पष्ट किया कि यह सामूहिक निर्णय लेने वाला कोई समूह नहीं होगा.
पार्टी में बड़े सुधारात्मक कदमों की घोषणा किए जाने के बीच, राहुल गांधी ने यह स्वीकार किया कि जनता के साथ पार्टी का संपर्क टूट चुका है और इस संपर्क को फिर से स्थापित करने के लिए नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को सड़क पर उतरना होगा और पसीना बहाना होगा.

पार्टी ने पहली बार ‘एक परिवार, एक टिकट’ का फार्मूला अमल में लाने का फैसला किया है, हालांकि इसके साथ यह शर्त होगी कि परिवार के दूसरे सदस्य को टिकट तभी मिलेगा जब उसने संगठन में कम से कम पांच साल काम किया हो.कांग्रेस में ‘एक परिवार, एक टिकट’ की व्यवस्था लागू होने की स्थिति में भी गांधी-नेहरू परिवार से राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाद्रा के अगला लोकसभा चुनाव लड़ने का रास्ता साफ रहेगा क्योंकि प्रियंका 2019 के शुरु में सक्रिय राजनीति में उतरी थीं. इसके साथ ही, राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके पुत्र वैभव गहलोत के एक साथ चुनाव लड़ने में दिक्कत नहीं होगी क्योंकि वैभव पिछले कई वर्षों से पार्टी संगठन से जुड़े हुए हैं.

कांग्रेस आने वाले दिनों में पार्टी के सांसदों, विधायकों और सरकार में निर्वाचित पदों पर आसीन होने वाले नेताओं के लिए सेवानिवृत्ति की आयुसीमा निर्धारित करेगी और अगले लोकसभा चुनाव से 50 प्रतिशत टिकट, 50 साल से कम उम्र के लोगों को दिए जाने की घोषणा की.
पार्टी ने महिला आरक्षण के तहत ‘कोटा के भीतर कोटा’ को लेकर अपने रुख में बदलाव करते हुए कहा कि वह महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के साथ-साथ इसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं का अलग कोटा निर्धारित करने के पक्ष में है.

उसने आह्वान किया कि महिला आरक्षण विधेयक को जल्द पारित किया जाए. कांग्रेस ने अर्थव्यवस्था की बदहाल स्थिति, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया और कहा कि मौजूदा वैश्विक एवं घरेलू हालात के मद्देनजर यह जरूरी हो गया है कि उदारीकरण के 30 साल बाद अब देश की आर्थिक नीतियों को फिर से तय किया जाए.कांग्रेस ने किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने, अलग कृषि बजट बनाने, एमएसपी का ‘सी 2+50 प्रतिशत’ फार्मूला लागू करने, किसान कल्याण कोष बनाने और फसल बीमा योजना नए सिरे से बनाने की भी पैरवी की.

सोनिया गांधी ने ‘नवसंकल्प चिंतन शिविर’ से पहले राजनीति, सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण, अर्थव्यवस्था, संगठन, किसान एवं कृषि तथा युवा और सशक्तीकरण से संबंधित समन्वय समितियां गठित की थीं.इन समितियों की अलग-अलग बैठकों में 400 से अधिक नेताओं ने पिछले दो दिन में गहन मंथन किया और पार्टी के संगठन में सुधार तथा कई अन्य विषयों पर सुझाव दिए. इन सुझावों को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में अंतिम रूप देकर ‘नवसंकल्प’ का रूप दिया गया.

कांग्रेस के चिंतन शिविर के समापन के अवसर पर सोनिया गांधी ने कहा कि एक समग्र कार्य बल बनेगा, जो उन आंतरिक सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ायेगा जिन पर इस चिंतन शिविर में चर्चा हुई है. ये सुधार 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किए जाएंगे तथा इनमें संगठन के सभी पहलुओं को समाहित किया जाएगा.उन्होंने कहा, ‘‘मैंने यह भी फैसला किया है कि कांग्रेस कार्य समिति के लोगों को लेकर एक सलाहकार समूह बनाया जाएगा जो मेरी अध्यक्षता में नियमित रूप से बैठक करेगा और राजनीतिक मुद्दों और पार्टी के समक्ष मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करेगा.

उन्होंने यह भी कहा कि हम सीडब्ल्यूसी की बैठकें भी समय समय पर करते हैं और इसी जारी रखेंगे. नया समूह सामूहिक निर्णय लेने वाली कोई इकाई नहीं होगी, लेकिन इससे वरिष्ठ साथियों के अनुभव का लाभ उठाने में मदद मिलेगी. इसे भी जल्द अधिसूचित किया जाएगा. उल्लेखनीय कि कांग्रेस के ‘जी 23’ समूह के नेताओं की एक प्रमुख मांग यह रही है कि पार्टी में सामूहिक निर्णय लेने की व्यवस्था हो.

राहुल गांधी ने पार्टी नेताओं से कहा कि चाहे हमारे वरिष्ठ नेता हों, जूनियर नेता हों, कार्यकर्ता हों, हमें बिना सोचे जनता के बीच जाकर बैठ जाना चाहिए. जो उनकी समस्याए हैं, उनको समझना चाहिए. जनता के साथ हमारा संबंध होता था, वो टूट गया, उसको हमें स्वीकार करना पड़ेगा. उस संबंध को हमें फिर से बनाना पड़ेगा. कांग्रेस ने पब्लिक इनसाइट विभाग, राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान और चुनाव प्रबंधन विभाग का गठन करने और स्थानीय स्तर पर मंडल समितियां बनाने का भी फैसला किया है.(भाषा) 

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