VIDEO: जयपुर एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंजेशन की बड़ी परेशानी, लैंडिंग राडार लगाना जरुरी

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/08/17 10:02

जयपुर: जयपुर एयरपोर्ट पर इन दिनों अक्सर ये परेशानी देखने को मिल रही है. जब भी एक साथ 4 से 5 विमानों की लैंडिग या टेक ऑफ होना होता है, फ्लाइट्स को अक्सर होल्ड पर रख दिया जाता है. विमानों की लैंडिंग में 10 से 15 मिनट का अतिरिक्त समय लगना जैसे जरूरी हो गया है. आखिर क्यों हो रही है यह परेशानी, क्यों फ्लाइट्स को रखा जाता है होल्ड पर, कैसे हो सकता है समाधान, एक खास रिपोर्ट:

रोजाना 52 फ्लाइट:
जयपुर एयरपोर्ट पर फ्लाइट्स की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है. जयपुर से रोजाना 52 फ्लाइट उड़ान भरती हैं और इतनी ही फ्लाइट लैंड होती हैं. पीक ऑवर्स में भी औसतन 6 से 7 फ्लाइट प्रति घंटे लैंड और इतनी ही फ्लाइट टेक ऑफ होती हैं, यानी बड़े एयरपोर्ट्स से तुलना की जाए तो यह फ्लाइट मूवमेंट बहुत ज्यादा नहीं है. लेकिन इसके बावजूद जयपुर एयरपोर्ट पर एक साथ इतनी फ्लाइट्स का आवागमन होने पर एयर ट्रैफिक कंजेशन हो जाता है. ऐसे में अक्सर फ्लाइट्स को होल्ड पर रख दिया जाता है. जबकि मुम्बई एयरपोर्ट, जहां से रोजाना औसतन 440 फ्लाइट उड़ान भरती हैं और इतनी ही लैंड होती हैं, वहां पर कंजेशन की समस्या नहीं होती. जयपुर के आसमान में इन फ्लाइट्स को 8 से 15 हजार फीट की ऊंचाई पर अलग-अलग अल्टीट्यूड पर चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है. दोपहर के समय जब एक साथ फ्लाइट्स का टेक ऑफ ज्यादा होता है, उस दौरान फ्लाइट्स को उड़ान भरने के लिए कतार में रखना पड़ता है. 

कब होता है एयर ट्रैफिक कंजेशन ?
—दोपहर में 1:10 से 2:15 बजे के बीच 1 घंटे के लिए कंजेशन
—एयर इंडिया की जयपुर-बीकानेर फ्लाइट 9I-830 जाती दोपहर 1:10 बजे
—एयर इंडिया की जयपुर-भोपाल फ्लाइट 9I-683 जाती दोपहर 1:20 बजे
—एयर इंडिया की जयपुर-दिल्ली फ्लाइट AI-492 जाती दोपहर 1:30 बजे
—स्पाइसजेट की जयपुर-जैसलमेर फ्लाइट SG-2981 जाती दोपहर 1:40 बजे
—एयर इंडिया की जयपुर-मुम्बई फ्लाइट AI-612 जाती दोपहर 2 बजे
—इंडिगो की जयपुर-चेन्नई फ्लाइट 6E-569 जाती दोपहर 2:10 बजे
—इंडिगो की जयपुर-हैदराबाद फ्लाइट 6E-913 जाती दोपहर 2:15 बजे
—इसी अवधि में 6 फ्लाइट की लैंडिंग भी होती है, इस कारण रहता है कंजेशन
—विमान के गेट बंद होने के बाद भी 15 से 20 मिनट लगते हैं टेक ऑफ होने में

रात 9:15 बजे से रात 10:25 बजे तक रहता है ट्रैफिक कंजेशन:
—इस दौरान 9 फ्लाइट्स की होती हैं लैंडिंग, 3 का होता है टेक ऑफ
—रात 9:15 बजे गो एयर की मुम्बई-जयपुर फ्लाइट G8-2607
—रात 9:30 बजे स्पाइसजेट की अहमदाबाद-जयपुर फ्लाइट SG-2988
—रात 9:45 बजे इंडिगो की हैदराबाद-जयपुर फ्लाइट 6E-6638
—रात 9:50 बजे एयर एशिया की कुआलालंपुर-जयपुर फ्लाइट D7-194
—रात 9:55 बजे इंडिगो की मुम्बई-जयपुर फ्लाइट 6E-998
—रात 10:05 बजे इंडिगो की दिल्ली-जयपुर फ्लाइट 6E-736
—रात 10:10 बजे स्पाइसजेट की सूरत-जयपुर फ्लाइट SG-2790
—रात 10:20 बजे स्पाइसजेट की अमृतसर-जयपुर फ्लाइट SG-3521
—रात 10:25 बजे इंडिगो की बेंगलूरु-जयपुर फ्लााइट 6E-838
—इसलिए प्रत्येक फ्लाइट को 10 से 15 मिनट आसमान में रखा जाता है होल्ड पर

ट्रैफिक कंट्रोल का अपग्रेडेशन नहीं:
अब तक हमने बात की जयपुर एयरपोर्ट पर चल रहे हालात की. यानी दोपहर और रात के समय होने वाले एयर ट्रैफिक कंजेशन की, लेकिन अब सवाल उठता है कि यह कंजेशन होता क्यों है. जयपुर एयरपोर्ट से जुड़े एयर ट्रैफिक कंट्रोल के विशेषज्ञ मानते हैं कि जिस तेजी से जयपुर एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक बढ़ा है, उसकी तुलना में एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल का अपग्रेडेशन नहीं हो सका है. न तो उतने अधिक बेहतर इंस्ट्रूमेंट हैं, न ही अन्य संसाधन. इस कारण एयरपोर्ट पर एयर ट्रैफिक कंजेशन बढ़ रहा है।

कंजेशन रोकने को क्या हो सकता है समाधान: 
—जयपुर एयरपोर्ट पर अभी ओवर फ्लाइंग का राडार है, लेकिन लैंडिंग राडार नहीं
—लैंडिंग राडार नहीं होने से विमानों की प्रोसीजरल लैंडिंग करानी पड़ती है
—पहले विमान ओवरहैड आता है, इसके बाद 7 से 8 मिनट में प्रोसीजरल लैंडिंग होती है
—जयपुर एयरपोर्ट का एटीसी का दायरा 50 नॉटिकल माइल है, यानी करीब 92 किलोमीटर
—जयपुर एयरपोर्ट के 92 किमी के दायरे में ही एटीसी विमानों की हैंडलिंग करती है
—इससे बाहर के दायरे में सब कुछ दिल्ली एटीसी के कंट्रोल में होता है
—अहमदाबाद एयरपोर्ट का दायरा 250 नॉटिकल माइल का है, जयपुर का यह दायरा बढ़ना चाहिए
—जयपुर एयरपोर्ट पर लैंडिंग राडार लगना चाहिए, जिससे लैंडिंग कराने में कम समय लगेगा
—टेक ऑफ में कम समय लगे, इसके लिए पैरेलल टैक्सी ट्रैक का निर्माण पूरा करें
—यदि टैक्सी ट्रैक रनवे के छोर तक होगा तो टेक ऑफ प्रोसीजर में मात्र 1 मिनट लगेगा
—जबकि अभी कम से कम 5 मिनट का समय विमान को रनवे पर लाइन अप होने में लगते हैं

लैंडिंग राडार लगाना जरुरी:
यानी कि जयपुर एयरपोर्ट पर यदि विमानों के आवागमन की क्षमता बढ़ानी है तो एयरपोर्ट प्रशासन को यहां पर लैंडिंग राडार लगाना होगा. साथ ही दिल्ली में एयरपोर्ट अथॉरिटी, डीजीसीए और विमानन मंत्रालय से अनुरोध कर एटीसी का दायरा भी बढ़ाना होगा. वहीं लम्बे समय से चल रहे पैरेलल टैक्सी ट्रैक के निर्माण को भी जल्द पूरा करना होगा. इससे न केवल एयर ट्रैफिक कंजेशन खत्म हो जाएगा, साथ ही प्रत्येक यात्री के 15 से 20 मिनट बचेंगे और विमानों के होल्ड पर रखने के दौरान होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करने में भी मदद मिलेगी।

... संवाददाता काशीराम चौधरी की रिपोर्ट 

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