डूंगरपुर में प्रदर्शन को लेकर बड़ा अपडेट, हिंसक प्रदर्शन को लेकर बाहरी लोगों के भी हाथ होने की खबर

डूंगरपुर में प्रदर्शन को लेकर बड़ा अपडेट, हिंसक प्रदर्शन को लेकर बाहरी लोगों के भी हाथ होने की खबर

डूंगरपुर में प्रदर्शन को लेकर बड़ा अपडेट, हिंसक प्रदर्शन को लेकर बाहरी लोगों के भी हाथ होने की खबर

डूंगरपुर: जिले की कांकरी डूंगरी से शुरू हुए आदिवासियों के प्रदर्शन की आग तीसरे दिन भी थमने का नाम ही नहीं ले रही है. उदयपुर-अहमदाबाद हाइवे पर लगातार तनाव का माहौल बना हुआ है. उपद्रवी हाइवे और आसपास की पहाड़ियों पर डटे हुए हैं. शनिवार को एक बार फिर उपद्रवियों ने हाइवे पर बने होटलों को निशाना बनाया. इनमें जमकर तोड़फोड़ की गई.

प्रदर्शन में ट्रेंड संदिग्धों के पहुंचने की सूचना:  
ऐसे में इस आंदोलन को लेकर अब जानकार सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर निकल रही है. हिंसक प्रदर्शन को लेकर बाहरी लोगों के भी हाथ होने की जानकारी सामने आ रही है. प्रदर्शन में ट्रेंड संदिग्धों के पहुंचने की सूचना है. बताया जाता है कि प्रदर्शन में भरुच, अंकलेश्वर और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों से आदिवासी भी शामिल हुए हैं. यही संदिग्ध आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं. हिंसक आदोलन के दौरान दर्जनों वाहनों में आगजनी कर चुके हैं. इसके साथ ही दर्जनों घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं. ये उपद्रवी अभी तक करोड़ों की संपत्ति आग के हवाले कर चुके हैं. 

करीब 700 लोगों को नामजद भी किया गया: 
वहीं, एक्शन में आई पुलिस उपद्रवियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रही है. डूंगरपुर जिले के बिछीवाड़ा और सदर थानों में एफआईआर दर्ज की जा रही है. करीब 700 लोगों को नामजद भी किया गया है. वहीं, प्रदर्शन के दौरान करीब 7 कंटेनर के साथ कुल 30 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. जयपुर ग्रामीण एसपी शंकर दत्त शर्मा को स्पेशल ड्यूटी पर लगाया गया है. 

मेवाड़ अंचल की पहचान तक बदल सकता है यह आंदोलन:
जानकारों की माने तो डूंगरपुर में चल रहा उपद्रव सिर्फ एसटी अभ्यर्थियों की 1167 सीटों पर भर्ती की मांग को पूरा करने का आंदोलन तो नहीं लग रहा है. इसके पीछे की हकीकत ये भी हो सकती है जिससे की मेवाड़ अंचल की पहचान तक बदल जाए. ऐसे में डूंगरपुर का यह उपद्रव आदिवासी अंचल के किसी बड़े मूवमेंट का ट्रेलर तो नहीं है…? क्यों कि जितने बेकाबू हालात हाईवे पर बाहरी तौर पर दिख रहे हैं, उसकी गंभीरता और हिंसकपन अंदरूनी तौर पर कहीं ज्यादा है.

कहीं यह मूवमेंट भील राज्य की मांग का एक ट्रेलर तो नहीं है..? 
ऐसे में कहीं यह मूवमेंट भील राज्य की मांग का एक ट्रेलर तो नहीं है..? अगर ऐसा है तो इस आग की जद में सिर्फ राजस्थान ही नहीं, गुजरात और मध्यप्रदेश का बॉर्डर एरिया भी आएगा. स्थानीय प्रशासन पिछले लंबे समय से इन सब बातों को लेकर डरा हुआ है और जूझ भी रहा है. साल 2012-13 से ही मेवाड़ के आदिवासी अंचल के चिह्नित क्षेत्रों में माओवादियों से संबंधित गतिविधियों की आशंकाओं के इनपुट सरकार के पास आते रहे हैं. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए सुनिल शर्मा की रिपोर्ट

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