VIDEO: चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में स्थित बिरला सीमेंट वर्क्स बना 'हादसों' का प्लांट 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/06/30 09:06

चित्तौड़गढ़: चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में स्थित बीसीडब्ल्यू यानि बिरला सीमेंट प्लांट में कल रात हुए हादसे में प्लांट के 15 कार्मिक बुरी तरह झुलस गए. हादसे में झुलसे सभी कार्मिकों को उपचार के लिए उदयपुर रेफर किया गया, जहां से हालात चिंता जनक होने पर होने पर 14 कार्मिकों को अहमदाबाद के अपोलो हॉस्पीटल में शिफ्ट किया गया है. इधर जिला कलेक्टर ने घटना की प्रशासनिक जांच के आदेश दे दिए हैं तो वहीं चंदेरिया थाने में भी प्लांट प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. घटना की गंभीरता को देखते हुए आईजी उदयपुर रेंज बिनिता ठाकुर ने भी घटना स्थल का जायजा लिया है. 

बुरी तरह झुलस गए 15 कार्मिक:
चित्तौड़गढ़ के चंदेरिया में स्थित इस सीमेंट प्लांट में पैसा कमाने की आपाधापी में सीमेंट प्रबंधन से नियम और कायदा, कानून को भी ताक पर रख दिया है. जिसके चलते रविवार देर रात बिरला सीमेंट प्लांट में फाईल कोल होपर में टेम्परेचर बढ़ने से फाईल कोल होपर फट गया. बड़ी बात यह कि फाईल कोल होपर पहले से ही लीक था और इसके चलते प्लांट में ठीक करने के लिए 15 कार्मिकों का स्टाफ जमीन से 100 फीट ऊपर इसे ठीक कर रहा था. इसी दौरान फाइल कोल होपर फट गया और होपर से निकले कोयले में सभी 15 कार्मिक दब गए. हादसे के शिकार सभी 15 कार्मिक बुरी तरह झुलस गए, जिन्हे एम्बुलेंस के जरिए जिला अस्पताल और एमपी बिरला हॉस्पीटल लाया गया. जहां सभी की स्थिति गंभीर होने के चलते उपचार के लिए उदयपुर रेफर कर दिया. घटना की जानकारी मिलते ही जिला कलेक्टर भी जिला अस्पताल पहुंचे और घटना की जानकारी ली. इधर जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा ने पूरे मामले की प्रशासनिक जांच के लिए एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है, जो अपनी रिपोर्ट 10 दिन में देगीं. इधर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने संवेदनशीलता दिखाते हुए देर रात जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और हादसे में झुलसे सभी लोगों का अच्छे से अच्छा इलाज कराने के भी निर्देश दिए थे. 

हादसे के बाद कई सवाल, प्रबंधन की चुप्पी:
हादसे ने एमपी बिरला ग्रुप के इस सीमेंट प्लांट पर कई सवाल खड़े कर दिए है. हादसे में घायल सभी कार्मिक अभी भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे है. इधर बिरला सीमेंट प्लांट प्रबंधन पूरे मामले में चुप्पी साधे हुआ है. हादसे में सुखदेव, देवीलाल कुम्हार, आरके द्विवेदी, गुड्डू पासवान, सोहराई तेली, भैंरूलाल दरोगा, रमाकांत मेनारिया, सुखवंत सिंह जाट, आजाद सिंह राजपूत, विकास चेचाणी, जितेन्द्र गौड़, सांवतसिंह राजपूत, विकास सेन, अजय यादव और घीसूसिंह राजपूत गंभीर रुप से झुलसे है. झुलसने से गंभीर रुप से घायल हुए कार्मिकों में कई इंजीनियर, अधिकारी, कर्मचारी और श्रमिक शामिल है. इधर चंदेरिया थाना पुलिस ने धारा 143, 287, 336, 337, 308 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. प्रथमदृष्ट्या पूरे प्रकरण में एचआर हेड़ एसएन साहू, लोकेशन हेड़ राजेश कक्कड़, सेफ्टी ईंचार्ज संजय राठी, साईट ईंचार्ज दिनेश कुमार, सीनियर वाईस प्रसीडेंट राजीव भल्ला, डिप्टी जरनल मेनेजर संजय शाह शिफ्ट ईंचार्ज प्रकाश शर्मा सहित ठेकेदार पवन और अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है.

अब हम बताते है आखिर प्लांट में कहां और क्या-क्या लापरवाही हुई:
—एनसीसीड्ब्ल्यू यानि न्यू चंदेरिया सीमेंट वर्क्स, एमपी बिरला की सीमेंट इकाई
—सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी
—3 दिन से लीक हो रहा था फाईल कोल होपर
—कल शाम की गई थी फाईल कोल होपर को ठीक करने की प्लांनिग
—मौके पर नहीं थी पर्याप्त रोशन
—जमीन से 100 फीट ऊपर जाकर ठीक करना था फाईल कोल होपर
—फाईल कोल होपर के अंदर जलता है कोयल
—लीक होने के बावजूद कोयला डालकर दिया जा रहा था प्रेसर
—और इसी दौरान फट गया फाईल कोल होपर हो गया हादसा

इसके अलावा और भी बड़ी चूक:
—जहां काम हो रहा था वहां मौजूद थे इंजीनियर्स, अधिकारी, कार्मिक और श्रमिक
—लेकिन सुरक्षा मापदण्डों के मुताबिक नहीं पहने हुए थे हेलमेट
—मौके पर आधे लोगों ने ही लगाए हुए थे प्लास्टिक के हेलमेट

और ऐसे में सवाल उठते है:
—आखिर प्लांट में सेफ्टी ईंचार्ज की क्या है जिम्मेदारी ?
—क्या प्लांट में सभी हेलमेंट है सिर्फ प्लास्टिक के ही ?
—ऐसी जगह पर क्यों नहीं लगाए गए फाइवर के हेलमेट ?
—आखिर मौके पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था क्यों नहीं थी ?
—चलते हुए फाईल कोल होपर में क्यों कराया जा रहा था काम ?
—क्या तकनीकी कर्मचारी कोई नही था, था तो लीकेज के बाद भी क्यों दिया गया प्रेसर ?
—घटना की संभावनाओं को देखते हुए क्या थे सुरक्षा के इंतजाम ?

इससे पहले भी प्लांट में हादसे:
हालांकि बिरला सीमेंट प्लांट में यह कोई पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी प्लांट में इसी साल 14 जनवरी को पॉवर प्लांट का कूलिंग टावर जलकर राख हो गया था और प्लांट में बिजली उत्पादन भी ठप्प हो गया था. हालांकि उस समय गनीमत यहीं रही कि कोई जन हानि नहीं हुई थी. वह हादसा भी प्लांट प्रबंधन की लापरवाही के चलते हुए था, क्योंकि प्लास्टिक की बने चेम्बर के पास उस समय बेल्डिंग का काम चल रहा था. इतना ही नहीं 27 अगस्त को भी प्लांट में एक कार्मिक की मौत हो गई थी. जिसके चलते प्लांट में जमकर हंगामा हुआ था. हालांकि यह तो हादसों की महज़ बानगी है. प्लांट में आए दिन होने वाले हादसों को लेकर तो यही लगता है कि मानों यह सीमेंट का नहीं बल्कि अब हादसों का प्लांट बन गया हो. इधर पूरे घटनाक्रम को लेकर जिला पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल का कहना है कि हादसे के बाद चंदेरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच कर रही है. 

हादसे की सूचना मिलते ही खुद मुख्यमंत्री ने जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा से घटना की जानकारी ली. इधर आज सुबह आईजी उदयपुर रेंज आईपीएस बिनिता ठाकुर ने भी घटनास्थल का जायजा लिया है और हादसे की जांच के लिए जिला पुलिस अधीक्षक को निर्देश भी दिए हैं.

... चित्तौड़गढ़ संवाददाता पीके अग्रवाल की रिपोर्ट 


First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in