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स्कूली बच्चों के अपहरण की सूचना से जिलेभर में नाकाबंदी

स्कूली बच्चों के अपहरण की सूचना से जिलेभर में नाकाबंदी

नागौर: जिले की महाराणा प्रताप कॉलोनी से पुलिस को तीन बच्चों के अपहरण की सूचना मिली है. मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला एसपी डॉ विकास पाठक एडिशनल एसपी सरजीत सिंह कोतवाली थाना अधिकारी नंदकिशोर सहित आला पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं. साथ ही जिला पुलिस अधीक्षक विकास पाठक के निर्देशों पर पूरे जिले में नाकाबंदी भी पुलिस ने करा दी है. पुलिस इस बात को वेरीफाई कर रही है कि क्या सचमुच बच्चों का अपहरण हुआ है. 

स्कूली छात्र ने दी अपहरण की जानकारी: 
जानकारी के मुताबिक महाराणा प्रताप कॉलोनी क्षेत्र से एक स्कूली छात्र ने अपने स्कूल की अध्यापिका को यह जानकारी दी कि सफेद रंग के लंबे कपड़े पहने कुछ लोगों ने तीन छोटे बच्चों को पहले बोरे में डाला, फिर कांधे पर लादकर वे उन बच्चों को उठाकर ले गए. इस बात की जानकारी स्कूल प्रबंधन की ओर से तुरंत स्थानीय पुलिस अधिकारियों को दी गई. जानकारी मिलते ही पुलिस अलर्ट मोड में आ गई है और जिला पुलिस अधीक्षक विकास पाठक खुद मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं. 

पुलिस ने जिले भर में की नाकाबंदी: 
मीडिया से रूबरू हुए डॉ विकास पाठक ने बताया कि पुलिस ने जिले भर में इसके लिए नाकाबंदी करा दी है. साथ ही नागौर के स्कूलों में इस बात की तस्दीक की जा रही है कि बच्चे गायब तो नहीं है. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो नागौर के घर घर में जाकर उनसे बच्चों के बारे में जानकारी ली जाएगी कि उनके बच्चे कहीं गायब तो नहीं है. हालांकि ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है जिससे बच्चों के अपहरण की पुष्टि हो जाए लेकिन एक बार क्षेत्र के सभी स्कूलों और घरों से जानकारी मिलने के बाद ही पूरी बात स्पष्ट हो पाएगी.

बच्चों का किया जा रहा वेरिफिकेशन: 
हाईवे पर लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आसपास की स्कूलों में बच्चों का वेरिफिकेशन, घरों पर सत्यापन के कार्य में जुटी अलग-अलग टीमें नागौर जिला पुलिस अधीक्षक डॉ विकास पाठक खुद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे है. आपको बता दें कि नागौर जिले के मकराना में भी 1 दिन पहले तीन बच्चों के गायब होने की सूचना मिली थी उस मामले में भी नागौर जिला एसपी डॉ विकास पाठक ने त्वरित कार्रवाई कराते हुए जिला पुलिस के कई थानों के साथ-साथ आसपास के सीमावर्ती जिलों में भी बच्चों की तलाश कराई थी और मैं 24 घंटों के अंदर तीनों बच्चों को अजमेर से दस्तियाब कर लिया गया था. 

...नरपत ज़ोया संवाददाता 1st इंडिया न्यूज नागौर 

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नागौर: कोरोना महामारी घोषित की जा चुकी है और कोरोना का कहर धीरे धीरे कई देशों तक फैलकर लोगों की जाने ले चुका है भारत भी इससे अछूता नही है. भारत में अब तक कोविड 19 यानी कोरोना की वजह से 15 मौतें हो चुकी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 21 दिनों के लिए लोक डाउन कर दिया है लोगों को स्टे एट होम के निर्देश दिए गए है ताकि संक्रमण का खतरा ताला जा सके और भारत मे कम से कम लोगो की जान जाए और जो संक्रमित है उनकी जाने बचाई जा सके. वहीं कोरोना को लेकर संवत्सरी पांडुलिपि में कई गई भविष्यवाणी के अनुसार खतरा जल्द टलेगा मगर सरकार की एडवाइजरी को नागरिकों को मानना होगा ताकि संक्रमण से बचा जा सके. 

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संवत्सरी नाम की इस पांडुलिपि में भविष्यवाणी की गई: 
नागौर जिले के डीडवाना के भाटी बास स्थित प्राचीन काली माता अखाड़े में कई पुराने और प्राचीन ग्रंथ रखे है जिनमे लगभग 200 साल पुरानी एक पांडुलिपि भी है. संवत्सरी नाम की इस पांडुलिपि में भविष्यवाणी की गई है कि भारतिय संवत्सर 2076 में वायरस जनित बीमारी से महामारी फैलेगी और इससे विश्वभर में लगभग एक लाख पच्चास हजार मौतें हो सकती है! पांडुलिपि की भविष्यवाणीया लगभग सटीक निकलती है.

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कोरोना को देखते हुए जारी एडवायजरी की पूर्ण पालना कि जाए:
काली माता मंदिर के महंत योगी सोहननाथ के अनुसार कोरोना वायरस जनित संक्रमण वाला रोग है इससे सबको बचना होगा. काली माता मंदिर में आज चैत्र नवरात्रि में भी सिर्फ अकेले ही पूजा की गई है. भक्तों और श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए मनाही है. योगी ने लोगों से अपील की है कि कोरोना को देखते हुए जारी एडवायजरी की पूर्ण पालना कि जाए नियमों का पालन किया जाए ताकि संक्रमण से बचा जा सके. योगी ने यह भी कहा है कि संवत्सर 2076 में शुरू हुई यह बीमारी 2077 के शुरुआती दौर में खत्म हो जाएगी और आने वाला नव संवत्सर देशवासियों के लिए मंगलकारी होगा और खुशहाली लेकर आएगा.

विश्व जल दिवस आज, सयुंक्त राष्ट्र संघ द्वारा इस बार का थीम क्लाइमेंट चेंज

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नागौर: जलवायु परिवर्तन से मौसम तंत्र में आश्चर्यजनक बदलाव हो रहे हैं. इससे मानसून भी प्रभावित हो रहा है. साथ ही जल दोहन की बढ़ोतरी के कारण प्रदेश में जल संकट गहराता जा रहा है. जल संकट एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है. इस समस्या का निदान जन जागरूकता एवं जल संरक्षण ही एकमात्र एक उपाय है. आम जन को अब समझना होगा की जल है तो कल है. आज हम पेयजल के लिए नलकूप पर आश्रित हो गये है, जिससे हमारी पनघट भी सुनी सुनी सी हो गयी है अब कुए तालाब और बावडिया बिना पनघट वीरान सी हो गयी है. जल संकट को लेकर विश्व जल दिवस पर पेश है एक विशेष रिपोर्ट.

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क्लाइमेंट चेंज की वजह से भी जल संकट:
क्लाइमेंट चेंज की वजह से भी जल संकट आने वाले समय मे खड़ा हो सकता है. जल संकट को देखते हुए जल संरक्षण जरुरी हो गया है और आज जरुरत इस बात की है की जल सरंक्षण में आमजन की भागीदारी आवश्यक हो गई है आम आदमी को  जल सरंक्षण के लिए आगे आना होगा. क्यों की मानूसन का मिजाज भी साल दर साल बदल रहा है जिससे से हालात विकट होते जा रहे है. इसका सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हो रहा जिससे कृषि में नुकसान होता है और इससे भारत की अर्थ व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा हैं. इस बार विश्व जल दिवस पर यूएन द्वारा भी क्लाइमेंट चेंज थीम रखी गई है. 

राजस्थान में भी काफी बदलाव:
क्लाइमेंट चेंज की वजह से राजस्थान में भी काफी बदलाव हो रहे है. इस बार बीना मौसम ओलावृष्टि और बर्फ का गिरना, कभी अतिवृष्टि और कभी अल्पवृष्टि भी क्लाइमेंट चेंज की वजह से हो रही है. इससे किसानो को बड़ा नुकसान होता है और इसमें अर्थ व्यवस्था गड़बड़ा जाती है. मौसम विभाग समय समय पर पूर्वानुमान की सूचनाएं देता रहता है मगर किसानों तक सही समय पर सूचनाएं पंहुचे इसको लेकर काम करने की जरूरत है. ताकि किसान बदलते मौसम की वजह से नुकसान से बच सके. साथ ही बरसात के मौसम में होने वाले रन ऑफ़ को रोककर जल संग्रहण करने के साथ भूमिगत जलभूत चट्टानों में वर्षा जल को पहुँचाकर भूजल को रिचार्ज करना होगा अत्यधिक अंधांधुंध जल दोहन की वजह से जल की क्वालिटी भी जा रही है 85 फीसदी रोग जल जनित होते है ऐसे में शुद्ध पेयजल की उपलबधता काफी मायने रखती है .  

पेयजल योजनाएं भूजल आधारित:
प्रदेश की 10 फीसदी से अधिक पेयजल योजनाएं भूजल आधारित है तथा कृषि व उद्योग में भी भूजल का अत्यधिक उपयोग होने सेभूजल स्तर प्रदेश में लगातार गिरा है व भूजल गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है. नागौर जिले में भूजल स्तर गत 25 वर्षों में 50  फीट गहराई में नीचे चला गया है. प्रदेश के ज्यादातर ब्लाकों की स्थिति खराब है नागौर जिला भी डार्क जोन में है और यहा फिर भी भूजल का अँधाधुंध दोहन हो रहा है, जो आने वाले समय के लिए खतरे की घंटी है. आज जरुरत इस बात की है की आम आदमी को पानी का मूल्य समझाना होगा ! क्यों की जल है तो कल है.

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बावड़ी और तालाब को भूल चुके है:
आज हम कुवे बावड़ी और तालाब को भूल चुके है जो बदहाल है और देख रेख के आभाव में ज्यादातर रित चुके है या रीतने के कगार पर है. भू जल को अधिक से अधिक पुनर्भरण करने की जरुरत है. हमें परम्परागत जल स्रोतों की और फिर से मुड़ना होगा और अपनी पुराणी और परम्परागत कुवे बावड़ी और तालाब की और लोटना होगा ।ताकि जल संकट की एक जंग को जीत सके. नदियों को जोडक़र नहर परियोजना से जल प्रबन्धन समय की आवश्यकता है.

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कोरोना वायरस को लेकर चिकित्सा अधिकारी सतर्क, आमजन को किया जा रहा है जागरूक 

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मूण्डवा( नागौर): देशभर में कोरोना वायरस को लेकर सभी चिंतित है तो वहीं नागौर जिले के मूण्डवा खण्ड चिकित्सालय में कोरोना वायरस से बचाव के लिए अलग अलग प्रयास किए जा रहे है. यहां चिकित्सा कर्मी, आशा सहयोगीनी, नर्सिंग स्टाफ द्वारा घर घर जाकर लोगों को कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है. वहीं मूण्डवा चिकित्सालय में भी कोरोना वायरस को लेकर आने वाले मरीजों के हाथ धुलाकर परिसर मे प्रवेश दिया जा रहा है. 

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कोरोना की बीमारी का बचाव ही इलाज:
साथ ही चिकित्सालय में सभी स्टाफ कोरोना वायरस से बचाव को ध्यान मे रखते हुए मार्स्क लगाए हुए नजर आये. इसके साथ ही मूण्डवा बीसीएमओ राजेश बुगासरा ने बताया कि कोरोना वायरस की बीमारी का बचाव ही इलाज है. सभी को इस समय अपने घरों में ही रहना चाहिए और जब भी घरों से बाहर निकलो तो अपने मुंह पर मार्स्क या रूमाल लगा कर निकले और समय समय पर साबुन से हाथ धोये. अधिक भीड भाड वाले इलाके में जाने से बचे. साथ ही सर्दी जा जुकाम होने पर अपने नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक के पास जाकर सलाह लें. 

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फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स ने लगाई सरकार से मदद की गुहार, सुरक्षित भारत वापसी की गुहार

 फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स ने लगाई सरकार से मदद की गुहार, सुरक्षित भारत वापसी की गुहार

नागौर: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे के बीच फिलीपींस में फंसे 1000 से ज्यादा मेडिकल स्टूडेंट की स्वदेश वापसी की सरकार से मांग की है. बेनीवाल ने विदेश मंत्री को पत्र लिखकर कहा कि जल्द से जल्द सभी विधार्थियो की वतन वापसी हो. वहीं दूसरी और फिलीपींस में फंसे नागौर के तीन छात्रों के परिजनों ने बुधवार को नागौर जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव को प्रधानमंत्री,विदेश मंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौपा और मदद की गुहार लगाई है.

नागौर के करीब 50 मेडिकल स्टूडेंट फंसे हुए हैं फिलीपींस में:
परिजनों ने बताया कि नागौर के दोनों छात्रों की भारत के बाकी छात्रों के साथ 19 मार्च की भारत वापसी की टिकट थी, लेकिन भारत सरकार ने 17 मार्च को ही फिलीपींस से आने वाली उड़ान पर रोक लगा दी और उनके बच्चे वहीं फंस गए हैं. आपको बता दें  नागौर के करीब 50 मेडिकल स्टूडेंट फिलीपींस में फंसे हुए हैं, जिनमें से दो नागौर शहर के दो स्टूडेंट नितिन भाकल और प्रवीण मिर्धा है. जिनके लिए परिजनों ने जिला कलक्टर दिनेश कुमार यादव को ज्ञापन सौपते हुए केंद्र सरकार से गुहार लगाई है कि उनके बच्चों को सुरक्षित घर लाया जाए. 

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मेडिकल की पढ़ाई करने गया था फिलीपींस:
नागौर शहर के रहने वाले नितिन भाकल की मां वसुंधरा भाकल ने बताया कि नितिन तीन साल पहले मेडिकल की पढ़ाई करने फिलीपींस गया था. मार्च में परीक्षा होने पर वह नागौर आने वाला था, लेकिन इसी बीच कोरोना वायरस का खतरा आ गया और वहां की सरकार ने तीन दिन में देश छोड़कर जाने को कह दिया. नितिन और पुष्पेंद्र डूडी, रवि बसवाना, प्रदीप मेघवाल, नरेंद्र जाणी, सुरेश सारण ने 19 मार्च के टिकट भी बनवा रखे थे, लेकिन 17 मार्च को ही सरकार ने फिलीपींस से भारत आने वाली उड़ान पर रोक लगा दी. 

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खाने-पीने का भी पर्याप्त राशन नहीं:
वहीं नितिन के मामा का कहना है कि फिलीपींस में फंसे हुए स्टूडेंट्स के पास खाने-पीने का भी पर्याप्त राशन नहीं है. ऐसे में वे वहां परेशान हो रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि फिलीपींस में फंसे स्टूडेंट्स को एयरलिफ्ट कर भारत वापस लाया जाए. नितिन के पिता सुखदेव भाकल सीआरपीएफ में इंस्पेक्टर हैं और अभी छत्तीसगढ़ में तैनात हैं. वहीं नागौर जिला कलेक्टर दिनेश कुमार यादव का कहना है कि परिजनों के शॉप पर ज्ञापन को गृह मंत्रालय को प्रेषित किया जा रहा है. 

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कोरोना वायरस को लेकर सतर्कता, नगरपालिका ने शहर में करवाई फॉगिंग

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डीडवाना(नागौर): विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित कर दिया है. वहीं  भारत में कोरोना से बचाव को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है. प्रदेश सरकार भी कोरोना के खतरे को लेकर गंभीर है, स्वास्थ्य महकमा अलर्ट मॉड पर है. मंगलवार को  नागौर जिले के डीडवाना में नगरपालिका द्वारा शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में फॉगिंग करवाई गई है.

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बनाया गया आइसोलेशन वार्ड:
पालिका की टीम ने मंगलवार को कचहरी परिसर में अधिवक्ताओं के चेम्बरों के साथ-साथ कोर्ट परिसर, मुख्य बस स्टैंड, निजी बस स्टैंड और अस्पताल परिसर में फॉगिंग करवाई गई. डीडवाना में प्रशासन द्वारा शहर के बांगड़ अस्पताल में भी कोरोना को देखते हुए 6 बेड का आईशोलेशन वार्ड बनाया गया है और इटली इंग्लैंड और जापान से प्रवास कर आए नागरिकों की भी जांच कर उन्हें निर्देश दिए गए है. प्रवासी नागरिकों पर विशेष निगरानी भी रखी जा रही है. 

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कोरोना वायरस का असर मतदान केन्द्रों पर, मुंह पर मास्क लगाकर ड्यूटी कर रहे हैं  तैनात सुरक्षाकर्मी 

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नागौर: प्रदेश के कई जिलों में कोरोना वायरस के खौफ के चलते मतदान जारी है. ऐसे में मुंह पर मास्क लगाकर सुरक्षाकर्मी ड्यूटी कर रहे है. नागौर जिले में चार पचायत समितियों के मतदान केन्द्रों पर दोपहर 12 बजे तक 31 प्रतिशत मतदान हुआ है. देश में कोरोना वायरस का असर व्यापार, सिनेमाघर समेत अन्य व्यवस्थाओं पर पूरी तरह से देखा जा रहा है. वहीं नागौर की 4 विधानसभाओं में रविवार को पंचायत राज चुनाव के तहत आयोजित हो रहे मतदान में भी इसका असर  देखा जा रहा है. नागौर के गुढा भगवान दास के मतदान केंद्र पर तैनात सुरक्षाकर्मी मुंह पर मास्क लगाकर अपनी ड्यूटी को अंजाम दे रहे हैं यहां पर आमजन में भी कोरोना वायरस को लेकर डर में देखा जा रहा है. 

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मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ कम:
यही वजह की अधिकांश से मतदान केंद्रों पर लोगों की भीड़ कम नजर आ रही है, वहीं मतदाता भी भीड़ कम होने के बाद ही मतदान केंद्र पर पहुंचने ताकि इस वायरस से बचा जा सके. वहीं चिकित्सा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए है. इसके साथ ही यहां पर मेडिकल टीम की एक यूनिट को भी तैनात किया गया, ताकि किसी भी व्यक्ति को अगर कोरोना वायरस से जुड़े हुए लक्षण मिले तो उसका तुरंत इलाज शुरू किया जा सके. 

मतदान केन्द्र पर मत का प्रयोग:
कुचामन-में 31.06 और डीडवाना में- 30.64 और मकराना - 40.46 खींवसर- 37.28 के साथ मतदान केन्द्रों पर ग्रामीण क्षेत्र में महिलाएं पारम्परिक पौशाके घाघरा लूंगडी पहनकर झुण्ड बनाकर नाचते गाते मतदान केन्द्र पर अपने मत का प्रयोग करने पहुंच रही है. मतदान केन्द्र पर लम्बी लम्बी कतारे देखने को मिल रही है. मतदान केन्द्रों पर मतदान की गति धीमी चलने के कारण दोनों केन्द्रों पर मतदाताओं की लम्बी लम्बी कतारे लगी रही है. मतदान केन्द्रों पर फर्जी मतदान पर पूरी तरह से सख्ती नजर देखने को मिली है. 

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सीबीआई की टीम ने किया आयकर विभाग में चल रहे रिश्वत के खेल का खुलासा, सीए व दो अधिकारी गिरफ्तार

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नागौर: जिले में सर्वे की कार्रवाई के नाम पर आयकर विभाग में चल रहे रिश्वत के बड़े खेल को सीबीआई की टीम ने गुरुवार को उजागर किया है. पिछले 2 दिन से नागौर में डेरा डाले जोधपुर सीबीआई की टीम ने नागौर में कार्रवाई करते हुए आज चार्टेड अकाउंटेंट सुरेश पारीक और आयकर विभाग के 2 अन्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. बताया जा रहा है कि सीए सुरेश पारीक इस पूरे मामले में दलाल की भूमिका निभा रहा था. फिलहाल, आयकर विभाग के कई कर्मचारियों  को भी सीबीआई ने जांच के दायरे में लिया है.

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आयकर विभाग ने नागौर में 2 व्यापारी समूह पर सर्वे की कार्रवाई की थी: 
पूरा मामला बीती 5-6 मार्च को नागौर के 2 व्यापारी समूहों पर आयकर विभाग की ओर से की गई सर्वे की कार्रवाई से जुड़ा हुआ है. मिली जानकारी के मुताबिक आयकर विभाग की टीम ने पिछले दिनों नागौर में 2 व्यापारी समूह पर सर्वे की कार्रवाई की थी.  लगभग डेढ़ दिन चली इस कार्रवाई में दोनों समूहों की ओर से करीब 3 करोड़ रुपए की अघोषित आय सरेंडर करने की बात आयकर विभाग के अधिकारियों की ओर से सामने आई थी. इसी मामले में आयकर विभाग के अधिकारी और सीए सुरेश पारीक दोनों व्यापारी समूह से लाखों रुपए की रिश्वत मांग रहे थे इससे परेशान होकर एक व्यापारी ने इस मामले की शिकायत सीबीआई को कर दी.

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सीए ने विभीषण बनकर की चक्रव्यूह की रचना:
बताया ये भी जा रहा है कि सीए सुरेश पारीक इसी व्यापारी का एकाउंट का काम देखता था और उसी ने विभीषण बनकर आयकर विभाग के अधिकारियों से मिलकर इस चक्रव्यूह की रचना की थी. सुरेश पारीक ही व्यापारी को आयकर के नाम से डराकर कर ,अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए सहमत कर रहा था. बताया जा रहा है कि सीबीआई ने पिछले 2 दिन से आयकर अधिकारियों और सीए के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर ले रखा था. इससे शिकायत सही पाई गई तो सीबीआई ने शिकायतकर्ता को रिश्वत की राशि सीए के हाथी चौक स्थित घर पर देने को कहा. वहां जैसे ही आयकर विभाग के अधिकारी रिश्वत की राशि लेने पहुंचे सीबीआई ने उन्हें रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद लगातार हुई पूछताछ से मामले का खुलासा हो गया है.  मामले में सीए सुरेश पारीक के साथ आयकर विभाग के लक्ष्मण सिंह और प्रेम सिंह डिडेल को गिरफ्तार कर लिया है. इसके साथ ही विभाग के डेढ़ दर्जन अधिकारी भी सीबीआई के राडार पर है जिनके बारे में गहनता से जांच शुरू कर दी गई है. 

happy Holi 2020: डीडवाना की डोलची मार अनूठी होली, राज की गेर नाम से भी है प्रसिद्ध

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डीडवाना(नागौर): हर जगह की अपनी अपनी परम्पराएं, रीती रिवाज और संस्कृति होती है, देशभर में होली की भी अलग-अलग परम्पराएं है कही की लठ मार होली प्रसिद्ध है, ऐसी ही ख़ास और अनूठी होली की परंपरा है डीडवाना की डोलची मार होली. डोलची मार होली देशभर में डीडवाना और बीकानेर में ही खेली जाती है आइये इस अनूठी होली का आनंद लेते है.डीडवाना शहर में निकलने वाली ऐतिहासिक डोल्ची मार होली (राज कि गैर) आज भी जारी है. आज से कुछ सालो पहले इस होली में काफी अनूठापन था जो अब नजर नहीं आता है. 

पूरे नगर की करते है परिक्रमा:
मगर आज भी हाकम को डोलची मार कर विधिवत रूप से डीडवाना उपखंड कार्यालय से शुरू होकर शहर भर मे खेली जाने वाली इस होली कि अनूठी परंपरा चल रही है और यहा के नागरिक जो पहले कभी हाकम के साथ होली खेलते थे अब आजाद भारत के अधिकारियों के साथ होली खेलते है.धुलंडी के दिन  रंगों से सराबोर होने के बाद सरकार के हाकम (उपखंड अधिकारी ) इस गेर की शुरुवात करते है. प्रथम डोलची हाकम के लगाने के बाद ये गेर कचहरी से शुरू होकर नगर भ्रमण करते हुए सभी डोलची मार गेरीयों को वहां से सभी टोलियां एक साथ निकलती है पूरे नगर की परिक्रमा के लिए जिसे गैर कहा जाता है. 

महाराजाओं के वक्त से है गैर का प्रचलन:
डोलची गैर को खेलने के लिए विदेशों तक में बसे डीडवाना के प्रवासी लोग यहाँ खींचे चले आते है. इस गैर का प्रचलन राजा महाराजाओं के समय से है तत्कालीन हाकम को डोलची मार कर इस गैर की शुरुआत की जाती है. लौहे के डिब्बे को विशष तरीके से काटकर डोलची का आकार दिया जाता है, उसमें पानी और रंग भरकर गैर खेलने वाले एक दूसरे पर मारते हैं जिसकी मार काफी तेज होती है. इस डोलची गैर को खेलने के लिए विदेशों तक में बसे डीडवाना के प्रवासी लोग यहाँ खींचे चले आते हैं.

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डोलची की मार असहनीय होते हुए भी लोग इसका आनंद लेते हैं जिसके पिच्छे लोगों की मान्यता है की डोलची की मार खाने के बाद साल भर तक मार खाने वाले को कमर का दर्द नहीं होता. मगर इसका असली मकसद सिर्फ यह है कि आम आदमी और अधिकारियों के बिच कि दुरिया मिटाना है इससे अधिकारियों भी आम आदमी के दुःख दर्द और खुशियों का अहसास कर सके. कुछ भी कहो मगर यह होली आम आदमी के लिए खास होली है. 

यहां की परम्पराएं और लोक संस्कृति हटकर:
डोलची मार होली की इस अनूठी परंपरा को लेकर होली खेलने वाले लोगों में इस दिन का इन्तजार रहता है और इसको लेकर काफी उत्साह भी रहता है एक और यह परम्परा जंहा अधिकारी और आम आदमी की बराबरी से सम्बन्ध करवाती है तो दूसरी और सामाजिक भेदभाव भी मिटाकर एक दूसरे को जोड़ती है. भारत विविधताओं का देश है यहां की परम्पराएं और लोक संस्कृति हटकर है बीते कुछ वर्षों में इनमे कुछ कमी आ रही है लोगो का उत्साह कुछ कम होता जा रहा है जरूरत इस बात की है कि इन परम्पराओ के संरक्षण का प्रयास हो ताकि भारत की विविधताओं वाली रंग बिरंगी छटा युही बनी रहे.

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