निकाय चुनाव में बने कांग्रेस के बोर्ड चैयरमेन, बीजेपी से काफी आगे निकली कांग्रेस

निकाय चुनाव में बने कांग्रेस के बोर्ड चैयरमेन, बीजेपी से काफी आगे निकली कांग्रेस

जयपुरः निकाय चुनाव परिणाम में कांग्रेस आगे थी और अब बोर्ड चेयरमैन की गणित में कांग्रेस ने बड़ी बढ़त बना कर इतिहास रच दिया. कांग्रेस उन सीटों पर भी चेयरमैन बनाने में कामयाब हो गई जहां केवल एक ही पार्षद जीता था. राजस्थान के 50 नगर निकाय चुनावों में कांग्रेस पार्टी 36 जगह बोर्ड बनाने में सफल रही और भाजपा केवल 12 बोर्डों के साथ 24 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई . निकाय चुनाव में पांच मंत्रियों की प्रतिष्ठा भी दांव पर थी, लेकिन सभी चेयरमैन बनाने में कामयाब रहे.  मंत्री लाल चंद कटारिया, परसादी लाल मीणा, प्रमोद जैन भाया, सुभाष गर्ग और भजन लाल जाटव अपनी साख बचाने में सफल साबित हुए. 

जानकारी के अनुसार अलवर जिले के बहरोड़ और तिजारा में कांग्रेस जीती. बारां के अंता और बारां में मंत्री प्रमोद जैन भाया की रणनीति कामयाब रही. कांग्रेस विधायक पाना चंद मेघवाल बारां में कामयाब रहे. भरतपुर में कांग्रेस ने कमाल कर दिया और निर्दलीय की गणित में कांग्रेस रही  और 8 जगह कांग्रेस ने चेयरमैन बना दिया. विश्वेंद्र सिंह और सुभाष गर्ग सियासी कटुता भुलाकर एक हो गए और हाथ को मजबूत कर दिया. 

वहीं बीजेपी के पास मजबूत नेतृत्व का अभाव रहा. धौलपुर में कांग्रेस -बीजेपी पर भारी पड़ी. यहां गिरिराज सिंह ने बाड़ी और रोहित बोहरा ने राजाखेड़ा में कांग्रेस का चेयरमैन बना दिया. दौसा के दौसा और बांदीकुई ने कांग्रेस का चेयरमैन तय था लेकिन परसादी लाल मीणा की लालसोट में रणनीतिसफल रही. बताया जा रहा है कि लालसोट में कांग्रेस-बीजेपी बराबर थे लेकिन परसादी लाल मीणा यहां कामयाब रहे. दौसा में तय था कि मुरारी लाल मीणा इतिहास बनाएंगे, क्योंकि यहां बीजेपी पूरी तरह आपसी जंग में उलझी हुई थी. उधर बांदीकुई में जी आर खटाना कामयाब रहे. श्रीगंगानगर में कांग्रेस की साख रखी गुरमीत सिंह कुन्नर ने. यहां 10में से चार सीटें जो कांग्रेस ने यहां जीती वो भी कुन्नर के नाम ही रही. इसी के साथ उन्होंने सरकार में मंत्री बनने का अपना दावा भी प्रबल कर दिया. 

जयपुर जिले में कांग्रेस ने बीजेपी को बुरी तरह परास्त किया. 10 में से 9 कांग्रेस ने जीती. वहीं निर्दलीय विधायक आलोक बेनीवाल ने शाहपुरा में कांग्रेस का बोर्ड बनाया दिया,उन्होंने बीजेपी के राव राजेन्द्र सिंह को पटखनी दी . फुलेरा विधानसभा में निर्मल कुमावत बुरी तरह कांग्रेस के विद्याधर चौधरी की रणनीती के सामने पस्त हो गए. विद्याधर कामयाब रहे सांभर, फुलेरा और रेनवाल में बोर्ड बनाने में.  चौमूं में कद्दावर विधायक रामलाल शर्मा फिसड्डी साबित हुए वो भी पूर्व विधायक भगवान सहाय सैनी के सामने. यहां सैनी के पुत्र निकाय चेयरमैन बने.  मंत्री लालचंद कटारिया तय किया था कि जोबनेर में कामयाब रहेंगे और हुआ भी वहीं. कोटा के रामगंज मंडी में कांग्रेस के पूर्व विधायक मेघवाल मजबूत रहे और चेयरमैन बनवा दिया. बीजेपी विधायक चंद्र कांता मेघवाल परास्त हो गई . करोली जिले में कांग्रेस ने झंडे गाड दिए मंत्री बनने की दौड़ में शुमार रमेश मीना ने. लाखन सिंह मीणा, पी आर मीणा और भरोसी लाल जाटव ने अपने-अपने इलाकों करोली, टोडाभीम और हिंडौन में कांग्रेस को जीत दिलाई. सवाई माधोपुर जिले में दानिश अबरार कारगर रहे. वहीं विधायक रामकेश मीना की रणनीती गंगापुर में सफल नहीं हो पाई. 

सादुलशहर, अनूपगढ़, श्रीविजयनगर, रायसिंहनगर, इटावा, आबू रोड, बिलाड़ा, राजगढ़, खेड़ली, खैरथल, किशनगढ़बास और गंगापुर ही ऐसी जगह रही जहां बीजेपी का चेयरमैन बना. खेरथल में तो हाइब्रिड फार्मूले से बीजेपी ने चेयरमैन बना लिया. कांग्रेस के विधायक जगदीश चन्द्र जांगिड़ सादुलशहर में बोर्ड नहीं बना पाए. अलवर में कांग्रेस की रणनीती कामयाब नहीं रही ,यहां के चार निकायों में कांग्रेस पराजित हो गई. किशनगढ़बास में कांग्रेस विधायक दीपचंद खेरिया चेयरमैन नहीं बना पाए.  राजगढ़ में कांग्रेस के जोहरी लाल मीणा फ्लॉप रहे. अनूपगढ़ में कांग्रेस का विधायक नहीं है फिर भी कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुलदीप इंदौरा की प्रतिष्ठा यहां जुड़ी थी. बिलाड़ा में कांग्रेस विधायक हीरालाल मेघवाल को पचास फीसदी जीत ही नसीब हुई. पीपाड़ में कामयाब रहे लेकिन बिलाड़ा में असफल रहे. 

कांग्रेस विधायकों की बात करे तो इंद्राज गुर्जर ने विराटनगर में इतिहास बनाया. बगरू में गंगा देवी ने बीजेपी का बोर्ड नहीं बनने दिया. विधायक वेदप्रकाश सोलंकी चाकसू में अपनी साख बचाने में कामयाब रहे. विधायक मुरारी लाल मीणा और जीआर खटाना पूरी तरह कामयाब रहे. पूर्व मंत्री विश्वेंद्र सिंह और मंत्री सुभाष गर्ग भरतपुर में सफल रहे. डीग-कुम्हेर में निर्दलियों की रणनीती कामयाब रही. भरतपुर के नदबई में 20 साल बाद कांग्रेस का बोर्ड बना है. यहां कांग्रेस की हरवती देवी ने जीत हासिल की. इस जीत में विधायक जोगिंदर अवाना का अहम रोल रहा. कांग्रेस के केवल दो विधायक सफल नहीं हो पाए इनमें प्रमुख रहे दीपचंद खेरिया, जोहरी लाल मीणा, रामकेश मीणा और जगदीश चंद जांगिड़. विधायकों की परफॉर्मेंस मंत्रिपरिषद फेरबदल विस्तार और बदलाव में अहम रहेगी.
फर्स्ट इंडिया के लिए योगेश शर्मा की रिपोर्ट

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