VIDEO: खींवसर में हो सकता है बोतल-कमल का गठजोड़, जानें प्रदेश की दोनों सीट पर टिकट के दावेदार दिग्गज

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/21 09:30

जयपुर: हनुमान बेनीवाल और नरेन्द्र कुमार के लोकसभा सांसद बनने के बाद राजस्थान में दो सीटों खींवसर और मंडावा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने है. कांग्रेस पार्टी की नजरें इन दोनों सीटों पर गढ़ी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पीसीसी चीफ सचिन पायलट दोनों ही चाहेंगे कि कांग्रेस दोनों सीटें जीते जिससे विधानसभा में सत्तापक्ष के विधायकों का संख्या बल मजबूती स्थिति में होगा. कुछ महिनों पहले ही कांग्रेस ने रामगढ़ का उपचुनाव जीता था. बीएसपी के विधायकों के कांग्रेस में विलय से भी सत्ताधारी दल के हौंसले बुलंद है. खींवसर और मंडावा के उप चुनाव की तारीखों का ऐलान आज हो गया. वहीं खींवसर में बोतल और कमल का गठजोड़ हो सकता है. एक रिपोर्ट:

रामगढ़ उप चुनाव की जीत से उत्साहित कांग्रेस:
पिछले विधानसभा चुनावों में खींवसर और मंडावा दोनों ही सीटों पर कांग्रेस की हार हुई थी, भले ही राज्य में सरकार बन गई हो. खींवसर में आरएलपी के उम्मीदवार हनुमान बेनीवाल ने चुनाव जीता, वहीं मंडावा से बीजेपी के विधायक नरेन्द्र कुमार ने जीत दर्ज की. लोकसभा चुनावों में हनुमान बेनीवाल ने एनडीए की चुनावी समर में नागौर से ताल ठोकी और सांसद बन गये, बीजेपी ने नागौर सीट आरएलपी के बेनीवाल के लिये छोड़ी थी. मंडावा के विधायक नरेन्द्र कुमार को पार्टी निर्देशों के बाद झुंझुनूं लोकसभा सीट से सांसद का चुनाव लड़ना पड़ा, वे चुनाव जीतकर सांसद बन गये. खींवसर में इस बार बोतल और कमल के गठजोड़ की उम्मीद है. बेनीवाल की पसंद के उम्मीदवार को बीजेपी उम्मीदवार बना सकती है, बीजेपी-आरएलपी का गठबंधन उम्मीदवार सामने आ सकता है. 

टिकट के दावेदार दिग्गज:

खींवसर के दावेदार:
खींवसर विधायक सीट को हनुमान बेनीवाल के अभेद्य दुर्ग के तौर पर जाना जाता है. वे तीन बार विधायक बन चुके हैं. पूर्व मंत्री हरेन्द्र मिर्धा का नाम चर्चा में है, हरेन्द्र मिर्धा नागौर से विधायक रह चुके है. हरेन्द्र स्वर्गीय रामनिवास मिर्धा के पुत्र हैं. पिछली बार चुनाव लड़ चुके सवाई सिंह के नाम की भी चर्चा है, लेकिन तीसरे जाट नेता के तौर पर पूर्व मंत्री और पीसीसी उपाध्यक्ष राजेंद्र चौधरी का नाम भी लिया जा रहा, इनका ताल्लुक नागौर जिले से ही है.

मंडावा सीट के दावेदार:
मंडावा से पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ चंद्रभान और पूर्व विधायक रीटा चौधरी की दावेदारी सामने आ रही है. मुकाबले में रीटा का नाम अभी तक रेस में आगे बताया जा रहा है. उनके पिता रामनारायण चौधरी यहां के कद्दावर नेता रहे थे. उनके निधन के बाद पुत्री रीटा चौधरी ने विरासत को संभाला. पिछले चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा, मजबूती के साथ मुकाबला किया, लेकिन पराजय मिली, रीटा चौधरी के नाम पर गंभीरता है टिकट मिलने की उम्मीद है. वहीं डॉ चंद्रभान के लिये पिछले चुनाव अच्छे नहीं रहे, मंडावा से भी उनको एक बार करारी चुनावी शिकस्त मिल चुकी है. यही कारण है कि पिछले चुनाव में टिकट यहां से नहीं मिल पाया था. खींवसर और मंडावा के चुनाव सत्ताधारी दल के लिये बेहद अहम है. निकाय चुनावों भी इसी दौरान होंगे. उप चुनाव की जीत कांग्रेस सत्ता और संगठन के लिये अहम होगी. संदेश मारवाड़ और शेखावाटी में नहीं जाएगा, बल्कि देशव्यापी होगा. 

... संवाददाता योगेश शर्मा की रिपोर्ट 

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