लंदन Blue Plaque: अंग्रेजी शासन के दौरान लंदन लायी गईं भारतीय आयाओं के घर को किया जाएगा सम्मानित

Blue Plaque: अंग्रेजी शासन के दौरान लंदन लायी गईं भारतीय आयाओं के घर को किया जाएगा सम्मानित

Blue Plaque: अंग्रेजी शासन के दौरान लंदन लायी गईं भारतीय आयाओं के घर को किया जाएगा सम्मानित

लंदन: भारत से अंग्रेजों के परिवारों द्वारा लायी गयीं आया या नर्सों के लिए लंदन में बने एक घर को ‘ब्लू प्लाक’ से सम्मानित किया जाएगा. यह ब्रिटेन की राजधानी में श्रमिक वर्ग के अनुभवों पर प्रकाश डालने की एक श्रृंखला का हिस्सा है.

इंग्लिश हेरीटेज चैरिटी द्वारा चलायी ‘ब्लू प्लाक’ योजना के तहत लंदन में ऐतिहासिक महत्व वाली इमारतों को सम्मानित किया जाता है. पूर्वी लंदन के हैकने इलाके में आया होम में भारत और दक्षिण तथा दक्षिणपूर्व एशिया के अन्य उपनिवेश से लायी गयीं आयाएं रहती थीं. यह घर 1900-1921 में बना था.

छोड़ दी गयीं ये आयाएं साझा आश्रय स्थलों या कार्य स्थल पर रहने को मजबूर थीं:

इंग्लिश हेरीटेज ने कहा कि ब्रिटिश परिवारों द्वारा लंदन लाई गई कई महिलाओं को ‘द आयाज’ होम में आश्रय और सुरक्षा मुहैया कराई गयी. इन आयाओं से उनके नियोक्ताओं ने वापस भेजने का वादा नहीं निभाया.उसने कहा कि छोड़ दी गयीं ये आयाएं साझा आश्रय स्थलों या कार्य स्थल पर रहने को मजबूर थीं. ब्लू प्लाक’ इंग्लिश हेरीटेज द्वारा लंदन में महिलाओं के अनुभवों का जश्न मनाने की कोशिश का हिस्सा है. ब्रिटिश भारतीय जासूस नूर इनायत खान के लंदन स्थित घर को भी सम्मानित किया जाना है.

15 से 20 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं के एक समूह द्वारा की गयी इस हड़ताल का संगठित श्रम और महिलाओं के आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान:

इंग्लिश हेरीटेज की ब्लू प्लाक समिति की सचिव एना एविस ने कहा, ‘‘इस साल हम जो कहानियां बता रहे हैं उनमें से कई लंदन के कामकाजी वर्ग की हैं. मैं खासतौर से मैच गर्ल्स प्लाक को लेकर उत्साहित हूं. 15 से 20 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं के एक समूह द्वारा की गयी इस हड़ताल का संगठित श्रम और महिलाओं के आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है.

ऐसा कहा जाता है कि 1888 की मशहूर मैच गर्ल्स हड़ताल ने आधुनिक ब्रिटिश श्रम इतिहास का रूप बदल दिया था. पूर्वी लंदन में माचिस बनाने की फैक्ट्री में करने वाली करीब 1,400 महिलाओं ने यह आंदोलन किया था. हड़ताल के तीन हफ्तों बाद उनकी लगभग सभी मांगें मान ली गयी थीं. सोर्स-भाषा

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