लोक लुभावन हो सकती हैं बजट घोषणाएं, MSME को मिल सकती है बड़ी राहत 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/01/30 10:42

जयपुर (विमल कोठारी)। शुक्रवार को वर्ष 2019 का केन्द्रीय बजट पेश होगा। संसद में वित्त मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे पीयूष गोयल जो बजट पेश करेंगे, उसे लेकर देश का उद्यमी व कारोबारी तबका काफी आशा की दृष्टि से देख रहा है। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि यह बजट लोकलुभावन होगा। केन्द्रीय बजट को लेकर राज्य के प्रमुख उद्योग व कारोबारी संगठनों के प्रतिनिधियों का क्या कहना है, फर्स्ट इण्डिया न्यूज की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट-

हाल ही सम्पन्न विधानसभा चुनावों में भाजपा को लगे झटके के बाद भाजपा का सबसे मजबूत कहे जाने वाले वोट बैंक अर्थात कारोबारी तबके को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। राज्य के प्रमुख कारोबारी संगठन फैडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज का मानना है कि बाजार में धन की तंगी है। कारोबारियों का पैसा अटका हुआ है, ऐसे में वित्तीय संसाधनों के लिए केन्द्र सरकार इस बजट के माध्यम से कोई पहल जरूर करेगी। चूंकि देश की अर्थव्यवस्था के विकास में मध्यम व लघु उद्योगों का बड़ा योगदान है, अत: इस क्षेत्र के लिए बजट में राहत की फुहारें मिल सकती है। इसी तरह देश में व्यापार मंत्रालय की वर्षों पुरानी मांग पर भी सरकार नए मंत्रालय के गठन की घोषणा कर पहल कर सकती है। 

केन्द्रीय बजट में जौहरियों के लिए राहत की बड़ी उम्मीदें लगाई जा रही है। माना जा रहा है कि इस बजट में व्यापार के हितों के खिलाफ बनें माहौल को सुधारने की पहल करेगी। व्यापार की लागत में कमी के लिए भी प्रयास होंगे। जैम एण्ड ज्वैलरी सैक्टर का देश के निर्यात में 14 से 16 % योगदान है, लेकिन नीरव मोदी और मेहूल चौकसी को फर्जी वाड़े के बाद जारी ऋण राशि के डूबने के बाद जौहरियों को मिल रही एक्सपोर्ट क्रेडिट पर रोक लगी हुई है। यह भी माना जा रहा है कि जौहरियों को इस बजट में इससे राहत मिल सकती है। 

केन्द्रीय बजट से करों में राहत की अपेक्षा की जा रही है। कर की दर 25% से अधिक नहीं किए जाने की उम्मीद है। राजस्थान चैम्बर का मानना है कि आयकर छूट की सीमा में बढ़ोतरी के अलावा कृषि की परिभाषा में बदलाव किए जाने की उम्मीद है। खेती के साथ कृषकों की मतस्य पालन, मुर्गीपालन, फल, सब्जी व फूलों की खेती को बढ़ावा देने व इसे भी कृषि आय का हिस्सा माने जाने की उम्मीद है। इसी तरह निर्यातकों से पहले GST कर का भुगतान व बाद में रिफण्ड जारी करने की जटिल प्रक्रिया से मुक्ति मिलने की उम्मीद की जा सकती है। 

केन्द्रीय बजट में इस बार लघु व कुटीर उद्योग को तकनीकी मदद के लिए पहल की उम्मीद है। भारतीय उद्योग परिसंघ अर्थात CII की राजस्थान इकाई को उम्मीद है कि सरकार SME इकाइयों के देय आयकर का एक हिस्सा तकनीकी अपग्रेड करने के लिए प्रावधान करने की घोषणा हो। इसी तरह SME इकाइयों को बड़ी इकाइयों से आपूर्ति के भुगतान की 45 दिन की अधिकतम सीमा में भुगतान को प्रोत्साहित करने के लिए राहत की घाेषणाएं हो तो इन इकाइयों की वित्तीय समस्याओं का स्वत: निदान हो जाएगा। 

केन्द्रीय बजट को लेकर देश के हर वर्ग को काफी उम्मीदें हैं। इन उम्मीदों को पूरा करने के लिए सरकार को राहत देनी होगी, लेकिन सरकारी खजाने की स्थिति काफी कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह भी उठता है कि इच्छा शक्ति होने के बावजूद केन्द्रीय वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहें पीयूष गोयल आम लोगों की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाते हैं। 

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