VIDEO: कल संसद में पेश होगा 'सपनों का बजट', व्यापारिक मंदी से निपटना सबसे बड़ी चुनौती

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/04 08:47

जयपुर: कल यानि पांच जुलाई को संसद में पेश होने जा रहे केन्द्रीय बजट से केन्द्रीय वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रही निर्मला सीतारमण से हर किसी को उम्मीदें है. देश में इंदिरा गांधी के बाद पहली बार कोई महिला केन्द्रीय बजट पेश करेगी, इसलिए महिलाओं के कल्याण के लिए कुछ नया होने की उम्मीद की जा रही है. 

संसद में कल अर्थात शुक्रवार को सुबह 11 बजे से बजट भाषण की शुरुआत होगी. इस भाषण से किसकी झौली में क्या आता है और किसकी जेब खाली रह जाती है, इसके केवल अनुमान ही लगाए जा सकते हैं, लेकिन फिर भी प्रचण्ड बहुमत से चुनी गई मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के संसद में पेश होने वाले पहले आम ही नहीं खास को भी काफी उम्मीदें हैं. बजट को लेकर खास रिपोर्ट:

सर्वेक्षण रिपोर्ट में कृषि क्षेत्र के विकास पर फोकस:
केन्द्रीय बजट से पूर्व आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट को बजट का आइना माना जाता है. गुरुवार को जो आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट पेश हुई है, उसमें कृषि क्षेत्र के विकास पर फोकस किया गया है. कृषि उपजों के उत्पादन में बढ़ोतरी के साथ ग्रामीण जनता के लिए वैकल्पिक आय के स्रोत पशुपालन को भी सर्वेक्षण में स्थान मिला है. यह सरकार की सोच की ओर भी इशारा करता है, जो ग्रामीण जनता का शहरों की ओर पलायन रोकने व उनकी आय में बढ़ोतरी को कृत संकल्प है. बजट से पहले ही सरकार ने 14 खरीफ फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी की घोषणा इस इसका प्रमाण भी दिया है. इसी के साथ देश की अर्थव्यवस्था की विकास दर को भी सात फीसदी तक रखे जाने का इशारा इस रिर्पोट में किया गया है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार विकास की धूरी पर निरंतर काम करेगी.

उद्योग और व्यापार जगत को भी काफी उम्मीदें:
अब बात करें उद्योग और व्यापार की... केन्द्रीय बजट को उद्यमी व कारोबारी काफी उम्मीद की नजर से देख रहे हैं. इसका कारण यह है कि वैश्विक मंदी के साथ नोटबंदी और इसके बाद लागू किए गए GST कानून ने देश के कारोबार की कमर ही तोड़ कर रख दी है. बाजार में कुल उत्पादन व बिक्री में 40% तक कमी हो जाने की बातें आम है. हाल ही उजागर हुए बैंक घोटालों के कारण बाजार में धन की तंगी है. स्थिति यह है कि जोखिम उठाकर कारोबार करने का हौसला रखने वाले उद्यमियों को कोई ऋण देने को तैयार ही नहीं.

ठोस नीतियों के दम पर बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था:
बाजार में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें आसमान पर है, जबकि आम आदमी की आय लगातार घटती जा रही है. इससे जहां किचन का खर्च चलाना भी अनेक परिवारों के लिए मुश्किल हो रहा है. वहीं चिकित्सा व शिक्षा के बढ़ते खर्च को पूरा करने के लिए कॉमन मेन को अपना दिन रात एक करना पड़ रहा. ऐसे में उम्मीद यह है कि केन्द्रीय बजट के माध्यम से ऐसी ठोस नीतियों की घोषणा हो, जिसके माध्यम से बेइमानी करने वाले उद्यमियों व कारोबारियों पर तो शिंकजा कसा जाएं, लेकिन इमानदारी से काम करने वालों को राहत व प्रोत्साहन मिले. 

रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर भी रहेगा फोकस:
उत्पादन के साथ सेवा क्षेत्र की हालत भी फिलहाल अच्छी नहीं कही जा सकती. इसका नतीजा रोजगार पर पड़ रहा है. ना तो काम के नए अवसर निकल रहे हैं, और न ही बेरोजगार हुए लोगों को कोई वैकल्पिक रोजगार मिल रहा. देश के सकल घरेलू उत्पाद में सर्विस सैक्टर की बड़ी भूमिका है, लेकिन नीतियों की खामियों के कारण यह सेक्टर भी फिलहाल ग्रोथ नहीं कर पा रहा. जिसका सीधा असर समूची अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा.  

महिला वित्त मंत्री से महिलाओं को भी काफी आशा:
हर बजट से आम आदमी को आयकर छूट व बचत योजनाओं को प्राेत्साहन दिए जाने की उम्मीद रहती है. अंतरिम बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने आयकर छूट सीमा को तकनीकी रूप से बढ़ाने का प्रयास किया था. इस बजट में उम्मीद है कि तकनीकी पेंच समाप्त कर सरकार आयकर छूट की सीमा को सीधे बढ़ाने की घोषणा करेगी. इसी तरह महिला सशक्तिकरण के लिए वेतन भाेगी महिलाओं के लिए भी विशेष राहत की घोषणा इस बजट में हो सकती है. जिससे विदेशों की तर्ज पर भारत में भी महिलाएं कारोबार व सेवा क्षेत्र में भी प्रोत्साहित हो सके. कुल मिला कर कहा जा सकता है कि बजट से हर क्षेत्र को उम्मीदें तो काफी है, लेकिन राजकोष की सीमा व बजट घाटे में कमी की सरकार की नीति के चलते किसे क्या मिलता है. यह बजट भाषण आने के बाद देखने वाली बात होगी. 

... संवाददाता विमल कोठारी की रिपोर्ट 

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