VIDEO: सोमवार को समाप्त होगा बजट सत्र, सरकार ने गुड गवर्नेंस की ओर बढ़ाए कदम

Naresh Sharma Published Date 2019/08/03 09:02

जयपुर: अशोक गहलोत सरकार का पहला बजट सत्र सोमवार को समाप्त हो जाएगा, लेकिन यह बजट सत्र कई रिकॉर्ड व ऐतिहासिक फैसलों के लिए इतिहास के पन्नों पर अंकित हो जाएगा. 29 दिन में 13 विधेयक और इनमें भी चार ऐसे बड़े कानून जो नजीर बन जाएंगे. एक खास रिपोर्ट: 

चार बड़े कानून:
27 जुलाई से शुरू हुआ विधानसभा का बजट सत्र सोमवार को समाप्त हो जाएगा. बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बड़ी घोषणाएं करते हुए वाहवाही लूटी, लेकिन इस बजट से भी बड़ी घटना है इस सत्र के दौरान बनने वाले चार बड़े कानून. अपने चुनाव भाषण या अन्य कार्यक्रमों के दौरान किए गए वादों के मुताबिक ये चारों कानून बने हैं. कानून प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने के लिए भी बना है, तो प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए भी. युवाओं बढती नशे की लत को रोकन के लिए भी कानून बना है, तो प्यार करने वालों पर अत्याचार करने वालों के खिलाफ भी अब कानून होगा. आइये आपको बताते हैं वे चार कानून, जो गहलोत सरकार ने बनाए हैं. 

सिगरेट और अन्य तबांकू उत्पाद राजस्थान संसोधन विधेयक 2019:
इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने प्रदेश में हुक्का बार पर पूरी तरह बैन लगा दिया. तंबाकू उत्पाद के लिए पहले से केन्द्रीय अधिनियम, 2003 है, लेकिन अब प्रदेश में राजस्थान संशोधन विधेयक, 2019 पास हो गया है, जो केंद्रीय अधिनयम से बेहद असरकारक,  प्रभावी और सख्त होगा.  केन्द्रीय अधिनियम की धारा 4 का उल्लंघन करने पर केवल 200 रुपए तक जुर्माना किए जाने का प्रावधान है, जबकि राजस्थान संशोधन विधेयक, 2019 में उपबंधों का उल्लंघन करने पर 3 वर्ष तक का कारावास जो कि 1 वर्ष से कम नही होगा. इसके अलावा 50 हजार से एक लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है. नए कानून के अनुसार अब किसी भी तरह हुक्का बार संचालन नहीं हो सकेगा. 

दूसरा बड़ा कानून है, मॉब लिन्चिंग के खिलाफ:
राजस्थान अप्रैल 2017 में अलवर मॉब लिंचिंग केस में देशभर में बदनाम हो चुका है. इसमें भीड़ ने पेहलू खान को गोतस्करी के शक में पीट-पीटकर मार डाला था. लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा. अब मॉब लिंचिंग में पीड़ित व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो ऐसे करने वालों लोगों को आजीवन कारावास होगी और 5 लाख का जुर्माना लगेगा. पीड़ित यदि गंभीर घायल होता है, तो अपराधी को 10 साल तक की कैद होगी. पीड़ित यदि थोड़ा भी घायल होता है, तो ऐसे लोगों को 7 साल तक की कैद होगी व एक लाख का जुर्माना लगेगा.

तीसरा बड़ा कानून है प्रेम विवाह करने वालों की सुरक्षा के लिए:
अब सरकार प्रेम विवाह करने वालों के लिए पहरेदार की तरह काम करेगी. ऑनर किलिंग के लिए अब सख्त कानून होगा. गहलोत सरकार राजस्थान सम्मान और परंपरा के नाम पर वैवाहिक संबंधों की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का प्रतिषेध कानून बना रही है. सरकार ने फैसला किया है कि अब प्रेम विवाह करने वाले जोड़े को इज्जत के नाम पर नहीं मारा जा सकता. इज्जत के नाम पर खाप पंचायत करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा और अगर कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह प्रेम विवाह करने वालों का सामाजिक बहिष्कार करने की घोषणा करती है तो उनको भी अपराध की श्रेणी में माना जाएगा. युगल या उनमें से किसी एक को यदि मौत के घाट उतारा जाता है, तो इस कृत्य के लिए जो जिम्मेदार होंगे उनको सजाए मौत या आजीवन कारावास सुनाई जाएगी. गंभीर घायल होने की स्थिति में भी तीन से पांच साल तक की कैद का प्रावधान है. चौथा कानून है, एमएसएमई के लिए. अब प्रदेश में यदि कोई उद्योग लगाता है, तो उस उद्यमी को तीन साल तक सरकार के किसी भी विभाग से किसी भी तरह की परमिशन की जरूरत नहीं होगी. 

मॉब लिन्चिंग व ऑनर किलिंग को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कई बार चिंता जता चुके हैं और उनका मानना है कि समाज के लिए ये दोनों ही बुराईयां जड़ से खत्म होनी चाहिए. इसी भावना को अमलीजामा पहनाते हुए उन्होंने अब इनके खिलाफ कानून बनाने का फैसला किया है. ये फैसले प्रदेश की कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होंगे. 

... संवाददाता नरेश शर्मा की रिपोर्ट

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in