VIDEO: वल्लभनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव, टिकट को लेकर शक्तावत परिवार के गृह युद्ध ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें 

VIDEO: वल्लभनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव, टिकट को लेकर शक्तावत परिवार के गृह युद्ध ने बढ़ाई कांग्रेस की मुश्किलें 

उदयपुर: वल्लभनगर विधानसभा उपचुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से रणभेरी बजना भले ही अभी बाकी हो, लेकिन रणनैतिक कौशल दिखाते हुए विभिन्न दावेदारों की सेनाएं अभी से रणक्षेत्र में जोर आजमाइश करने में जुटी हैं. इस सबके बीच वल्लभनगर की राजनीति में अधिशाषी माने जाने वाले शक्तावत परिवार के गृह युद्ध ने सत्ताधारी कांग्रेस के रणनितिकारों की मुश्किलें बढा दी हैं.मुश्किलें सिर्फ प्रत्याशी चयन को लेकर ही नही है बल्कि पिछले तीन चुनावों में कांग्रेस और अन्य पार्टी के बीच जीत हार के नजदीकी समीकरणो को लेकर भी हैं, कि यदि शक्तावत परिवार से एक भी दावेदार बागी हुआ तो पार्टी की उम्मीदें धराशाही हो सकती हैं. 

उदयपुर की वल्लभनगर विधानसभा सीट पर होने वाले सभी चुनावों यूं तो बेहद रौचक और राजनैतिक दावपेंचों से भरपूर होते हैं, लेकिन इस बार के उपचुनावों से पहले बने अजब हालातों ने राजनीति के जानकारों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया हैं. दरअसल पिछले तीन दशकों से वल्लभनगर विधानसभा सीट की गणित कांग्रेस के दिग्गज नेता स्वर्गीय गुलाबसिंह शक्तावत और उनके परिवार के ईर्द-गिर्द ही घूमती रही है. लेकिन इस परिवार के छोटे सदस्य विधायक गजेन्द्रसिंह शक्तावत के निधन के बाद इस परिवार में बने गृह युद्ध के से हालात सत्ताधारी कांग्रेस के माथे पर शिकन बढा रहे हैं.

दरअसल गजेन्द्रसिंह के निधन के बाद उनकी धर्मपत्नि प्रीती शक्तावत का नाम टिकट की दौड में सामनें आया तो गजेन्द्रसिंह शक्तावत के बडे भाई देवेन्द्रसिंह शक्तावत ने सार्वजनिक ऐलान कर दिया कि यदि प्रीती शक्तावत को कांग्रेस ने  उम्मीदवार बनाया तो वे निर्दलीय चुनाव लडेंगे. देवेन्द्रसिंह शक्तावत के इसी बयान के बाद इस सीट पर प्रत्याशी चयन के मायने ही बदल गए. दरअसल पिछले तीन चुनावों की बात करेें तो इस सीट पर कांग्रेस के हिस्से में आई जीत बेहद ही नजदीकी रही. आइये आपको आँकडों के माध्यम से इस सीट के चुनावी गणित को समझाते हैं.

वर्ष

पार्टी और जीते उम्मीदवार का नाम

जीत का अंतर

वर्ष 2008

कांग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत जीते

महज 6660 वोट

वर्ष 2013

निर्दलीय रणधीरसिंह भींडर जीते

13,167 वोट

वर्ष 2018  

 कांग्रेस के गजेंद्र सिंह शक्तावत जीते

महज 3719 वोट


दरअसल वल्लभनगर विधानसभा सीट के पिछले तीन चुनावो में असली मुकाबला काग्रेंस और रणधीरसिंह भींडर के बीच रहा हैं. मजे की बात तो यह है कि इन तीनों ही चुनावों में कांग्रेस की जीत और हार का अंतर बेहद नजदीकी रहा हैं. ऐसे में इस बार यदि शक्तावत परिवार के किसी भी सदस्य का निर्दलीय हो जाना अथवा चुनाव में एक-दूसरे को हार के कगार पर पहुंचाने की रणनिती अख्तियार करना, काग्रेंस के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता हैं औऱ शायद यही वजह कि पार्टी अब पारिवारिक कलह के इस द्धंद से बाहर निकल किसी गैर शक्तावत दावेदार को जीत की राह में लाने का प्रयास करें. 

...रवि कुमार शर्मा,फर्स्ट इंडिया न्यूज,उदयपुर

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