कैग रिपोर्ट: पिछली सरकार में सरकारी भूमि पर अतिक्रमणों के खिलाफ नहीं हुई प्रभावी कार्रवाई

Abhishek Shrivastava Published Date 2019/07/18 04:31

जयपुर: कैग की विधानसभा में पेश रिपोर्ट बताती है कि प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार में सरकारी भूमि पर अतिक्रमणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई. इसी तरह मुद्रांक कर एवं पंजीयन शुल्क और आबकारी मामलों में भी कम वसूली कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया गया. खास रिपोर्ट:

भारत के नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) की ओर से कल विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2017-18 की रिपोर्ट पेश की गई. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रदेश की पिछली भाजपा सरकार के राज में सरकारी भूमि की सार-संभाल और भूमि से अतिक्रमण हटाने को लेकर गंभीर प्रयास नहीं किए गए. मुद्रांक कर एवं पंजीयन शुल्क वसूलने की ई-पंजीयन व्यवस्था में कई कमियों के चलते सरकारी राशि की कम वसूली हुई. आपको बताते हैं कि कैग की इस रिपोर्ट में इस पूरे मामले में किस प्रकार के गंभीर तथ्य उजागर किए गए हैं.

व्यवस्थाओं की खामी उजागर करती कैग की रिपोर्ट:
—सरकारी भूमि की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए भूमि के डेटा बेस संधारण की कोई केन्द्रीकृत व्यवस्था नहीं थी
—5 तहसीलों में 1.78 लाख वर्गमीटर भूमि पर अतिक्रमणों की चिहिन्त करने के बावजूद उसे अतिक्रमण रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया
—10 तहसीलों में 3101 अतिक्रमियों ने 30.77 लाख वर्गमीटर सरकारी भूमि अतिक्रमण किया गया
—सरकारी भूमि पर अतिक्रमण हटाने के लिए नीति बनाने के हाईकोर्ट आदेश के 10 महीने बीत जाने के बाद तत्कालीन सरकार ने नीति तैयार की
—अतिक्रमणों को हटाने के लिए तत्कालीन भाजपा सरकार ने कार्य योजना तैयार नहीं की
—अतिक्रमणों पर रोक लगाने के लिए सतर्कता एवं अतिक्रमण निरोधक प्रकोष्ठ का गठन नहीं किया गया
—5 तहसीलों के नौ अतिक्रमियों ने स्कूल,धर्मशाला तथा आश्रम बनाकर 62 हजार 820 वर्गमीटर सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया
—नियमों की अनदेखी के चलते कृषि भूमि के भू रूपांतरण व नियमतिकरण के पेटे 2.80 करोड़ रुपए की कम वसूली की गई
—बाजार दर तय करने के लिए जिला स्तरीय समितियों की तय समय में बैठकें नहीं होती थी
—ई पंजीयन के सॉफ्टवेयर में मालिक एवं विकासकर्ता के अलग-अलग हिस्सों पर मुद्रांक कर की गणना नहीं होने से 1.80 करोड़ की कम वसूली हुई
—इस सॉफ्टवेयर में लीजडीड की देरी से प्रस्तुतीकरण पर देय राशि की गणना के लिए मॉडयूल नहीं होने से सरकारी खाने को 5.52 करोड़ की चपत लगी
—पंजीयन एवं मुद्राक विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते 66.64 करोड़ रुपए सरकारी खजाने में नहीं आए
—127 प्रकरणों में ई सॉफ्टवेयर में गलत सूचनाएं दर्ज करने से राजस्व को 10.77 करोड़ रुपए का राजस्व को चूना लगा
—1 अप्रेल 2016 से आबकारी शुल्क में बढ़ोतरी के बावजूद अधिकारी लाईसेंसधारियों से 2.98करोड़ रुपए की अंतर राशि वसूलने में असफल रहे
—जिला आबकारी अधिकारियों ने कंपोजिट फीस की गलत गणना करके 1.33 करोड़ रुपए का सरकारी खजाने को चूना लगाया

कैग की इस रिपोर्ट पर अब विधानसभा की जन लेखा समिति संबंधित विभागों से जवाब तलब करेगी. इसमें पूछा जाएगा किन अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही के चलते सरकार को करोड़ों का घाटा हुआ. 

... संवाददाता अभिषेक श्रीवास्तव की रिपोर्ट 
 

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