पुडुचेरी में विधायकों को प्रलोभन देकर इस्तीफा दिलवाना BJP का गलत तरीके से सत्ता हथियाने का नया तरीका - CM गहलोत

पुडुचेरी में विधायकों को प्रलोभन देकर इस्तीफा दिलवाना BJP का गलत तरीके से सत्ता हथियाने का नया तरीका - CM गहलोत

पुडुचेरी में विधायकों को प्रलोभन देकर इस्तीफा दिलवाना BJP का गलत तरीके से सत्ता हथियाने का नया तरीका - CM गहलोत

जयपुर: पुडुचेरी विधानसभा में विश्वासमत के दौरान कांग्रेस पार्टी की सरकार गिर गई है. इस मामले में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि पुडुचेरी में अनैतिक तरीके से कांग्रेस सरकार गिराकर बीजेपी ने दिखाया है कि वे सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. पहले वहां उपराज्यपाल के माध्यम से शासन चलाने में परेशानियां पैदा कीं और अब धनबल से सरकार गिरा दी. 

मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि पहले कर्नाटक, फिर मध्य प्रदेश और अब पुडुचेरी में विधायकों को प्रलोभन देकर इस्तीफा दिलवाना भाजपा का गलत तरीके से सत्ता हथियाने का नया तरीका है. उन्होंने राजस्थान में भी अनैतिक तरीकों से सत्ता हथियाने का प्रयास किया जिसका यहां की जनता ने उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया. 

भाजपा इन तौर तरीकों से लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है:
गहलोत ने कहा कि भाजपा इन तौर तरीकों से लोकतंत्र को खत्म करना चाहती है. लोग इनकी चालों को समझ चुके हैं. आने वाले चुनावों में पुडुचेरी की जनता भाजपा को सबक सिखाएगी. 

उपराज्यपाल से मुलाकात कर अपना त्यागपत्र दे दिया:
आपको बता दें कि छह विधायकों के इस्तीफा देने के बाद नारायणसामी की सरकार अल्पमत में आ गई थी. दो विधायकों ने रविवार को इस्तीफा दे दिया. इसके बाद यहां सियासी संकट और गहरा गई. आज पुडुचेरी के मुख्यमंत्री नारायणसामी ने समर्थक विधायकों के साथ विधानसभा से वॉकआउट कर दिया. उपराज्यपाल से मुलाकात कर उन्होंने अपना त्यागपत्र दे दिया. 

स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया:
इस्तीफ़ा देने के बाद नारायणसामी ने स्पीकर के फ़ैसले को ग़लत बताते हुए इसे लोकतंत्र की हत्या बताया. उन्होंने कहा कि केंद्र की बीजेपी सरकार, एनआर कांग्रेस और एआईएडीएमके ने तीन मनोनीत सदस्यों को वोटिंग करने देकर हमारी सरकार गिरा दी. ये लोकतंत्र की हत्या है. पुदुचेरी और इस देश की जनता उन्हें सबक सिखाएगी. कांग्रेस-डीएमके गठबंधन सरकार के कई विधायकों के इस्तीफ़े के बाद सदन में उनका संख्या बल 11 (स्पीकर को लेकर 12) रह गया था, जबकि विपक्ष के पास 14 विधायक थे. 

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