गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों के किनारे लाशें दफनाने पर बोले मुख्यमंत्री गहलोत, कहा- केन्द्र सरकार को कोविड प्रोटोकॉल के तहत SOP जारी करनी चाहिए

गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों के किनारे लाशें दफनाने पर बोले मुख्यमंत्री गहलोत, कहा- केन्द्र सरकार को कोविड प्रोटोकॉल के तहत SOP जारी करनी चाहिए

गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों के किनारे लाशें दफनाने पर बोले मुख्यमंत्री गहलोत, कहा- केन्द्र सरकार को कोविड प्रोटोकॉल के तहत SOP जारी करनी चाहिए

जयपुर: यूपी में गंगा के किनारे लगती लाशों को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर है. ऐसे दृश्य उन्नाव और बलिया में सामने आए थे. कहा ये भी गया कि, बिहार से बहकर ये लाशें यहां पहुंची. लेकिन इस विवाद के बाद प्रशासन ने आनन-फानन में इन्हें गंगा के किनारे ही रेत में दफन कर दिया था. इस बीच इनकी तस्वीरें जब सार्वजनिक होने लगी तो स्थानीय प्रशासन ने कब्र पर पड़ी पीली चादरों को हटाना शुरू कर दिया. अब इसे लेकर विवाद चल रह है. तमाम विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं.

बुधवार को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस बारे में ट्वीट करते हुए कहा कि जिस तरह गंगा, यमुना सहित पवित्र नदियों के किनारे लाशें दफनाई जा रही हैं व नदियों में बहाई जा रही हैं इसका संज्ञान लेकर केन्द्र सरकार को कोविड प्रोटोकॉल के तहत SOP जारी करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में इन शवों से संक्रमण फैलने पर महामारी के और ज्यादा फैलने की आशंका हो सकती है. 

प्रियंका ने कहा- अब उनके ऊपर पड़ी रामनामी चादर भी हटाई जा रही 
बता दें कि इससे जुड़े कई वीडियो सामने आ रहे हैं. इसे लेकर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर सरकार को घेरा. उन्होंने लिखा कि, जब जिंदा थे तो उन्हें इलाज नहीं मिला. कई ऐसे हैं जिनका अंतिम संस्कार भी ठीक तरह से नहीं हुआ. अब उनके ऊपर पड़ी रामनामी चादर भी हटाई जा रही है.

राहुल गांधी ने कहा था- मुझे शवों के फ़ोटो साझा करना अच्छा नहीं लगता
इससे पहले राहुल गांधी भी कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं. उन्होंने हाल ही में दो दिन पहले कहा था कि मुझे शवों के फ़ोटो साझा करना अच्छा नहीं लगता. देश-दुनिया फ़ोटो देखकर दुखी है लेकिन जिन्होंने मजबूरी में मृत प्रियजनों को गंगा किनारे छोड़ दिया, उनका दर्द भी समझना होगा- ग़लती उनकी नहीं है. इसकी ज़िम्मेदारी सामूहिक नहीं, सिर्फ़ केंद्र सरकार की है. 


 

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