जयपुर दिशा की पहली बैठक में बोले सीएम अशोक गहलोत, कहा- स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर हो मिशन मोड में काम

दिशा की पहली बैठक में बोले सीएम अशोक गहलोत, कहा- स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर हो मिशन मोड में काम

दिशा की पहली बैठक में बोले सीएम अशोक गहलोत, कहा- स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और रोजगार से जुड़ी योजनाओं पर हो मिशन मोड में काम

जयपुरः मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल एवं रोजगार से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं. उन्होंने कहा कि ये योजनाएं समावेशी विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं. गांव-ढाणी में बैठे हर जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर इनका लाभ मिले, इसके लिए मिशन मोड में काम करते हुए योजनाओं को गति दी जाए. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार शाम को मुख्यमंत्री निवास पर वीडियो कॉन्फे्रंस के जरिए राज्य विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की पहली बैठक को सम्बोधित कर रहे थे. 

आमजन को रोजगार से जोड़ने के लिए मनरेगा योजना वरदान साबित हुईः
बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मनरेगा, प्रधानमंत्री फसल बीमा, जल जीवन मिशन, समग्र शिक्षा अभियान तथा नेशनल हैल्थ मिशन से सम्बन्धित योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा की. मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन को रोजगार से जोड़ने के लिए मनरेगा योजना वरदान साबित हुई है. कोविड के चुनौतीपूर्ण दौर में इसकी महत्ता और बढ़ी है. राजस्थान इस योजना के क्रियान्वयन में सदैव अग्रणी रहा है. आगे भी इसी भावना के साथ काम किया जाए. उन्होंने निर्देश दिए कि 100 दिन का रोजगार पूरा करने वाले बारां की सहरिया एवं खेरवा तथा उदयपुर की कथौड़ी जनजाति के मनरेगा श्रमिकों को 50 दिन का अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि बीते दो वर्षाें में नियोजित परिवारों की संख्या 50.65 लाख से बढ़कर 69.96 लाख हो गई है. साथ ही,  99.69 प्रतिशत श्रमिकाें को 15 दिवस में भुगतान सुनिश्चित किया गया है.
 
बाधाओं को दूर करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंः
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि हमारी सरकार ने राज्य प्रीमियम की हिस्सा राशि देकर किसानों के फसल बीमा का भुगतान सुनिश्चित किया है. उन्होंने निर्देश दिए कि योजना की बाधाओं को दूर करने एवं पारदर्शितापूर्वक संचालन के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. इसके लिए अन्य राज्यों में किए गए नवाचारों का अध्ययन किया जाए. बैठक में बताया गया कि खरीफ-2019 में सभी 17 लाख 55 हजार किसानों के करीब 3153 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया है. इसी प्रकार रबी 2019-20 में 920 करोड़ रुपए के क्लेम में से करीब 777 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को कर दिया गया है. रबी 2019-20 में आठ जिलों के काश्तकारों का फसल बीमा भुगतान लम्बित था, जिसमें से 7 जिलों के लिए राज्यांश प्रीमियम जारी कर दिया गया है. 

जल जीवन मिशन योजना में तेजी लाने के निर्देशः
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश के हर गांव-ढाणी में स्वच्छ पेयजल पहुंचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. इसके लिए जल जीवन मिशन योजना को गति दी जाए. उन्होंने कहा कि राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए केन्द्र और राज्य की 50ः50 की भागीदारी पर संचालित हो रही इस योजना के फंडिंग पैटर्न में बदलाव की आवश्यकता है.

ग्राम पेयजल स्वच्छता समितियों का गठन किया गयाः
बैठक में निर्णय लिया गया कि केन्द्र शासित प्रदेशों एवं उत्तर-पूर्वी एवं पहाड़ी राज्यों की तरह राजस्थान की दुर्गम एवं रेगिस्तानी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यहां भी यह योजना 90ः10 की भागीदारी में संचालित करने के लिए केन्द्र सरकार से फिर अनुरोध किया जाए. बैठक में बताया गया कि मिशन को गति देने के लिए सभी 33 जिलों में जिला स्तरीय तथा 43 हजार गांवों में से 38 हजार गांवों में ग्राम पेयजल स्वच्छता समितियों का गठन कर दिया गया है. शेष गांवों में भी जल्द ही इनका गठन हो जाएगा. 

गांव-ढाणी तक मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना सरकार का लक्ष्यः
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश के गांव-ढाणी तक मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना हमारा मुख्य लक्ष्य है. इसको ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत मॉडल सीएचसी विकसित की जाएं. राज्य की आवश्यकता के अनुरूप जिला अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के लिए योजना तैयार की जाए. स्वास्थ्य केन्द्रों पर पर्याप्त चिकित्सा उपकरण एवं अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाएं ताकि लोगों को इलाज के लिए शहरों तक न जाना पड़े. बैठक में बताया गया कि प्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बेहतरीन क्रियान्वयन से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है. साथ ही, वर्ष 2005 में प्रदेश में संस्थागत प्रसव मात्र 32 प्रतिशत होते थे, वे अब बढ़कर 84 प्रतिशत हो गए हैं. 

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