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पश्चिमी राजस्थान के 8 जिलों में टिड्डी दलों के प्रकोप पर सीएम गहलोत ने जाहिर की चिंता

पश्चिमी राजस्थान के 8 जिलों में टिड्डी दलों के प्रकोप पर सीएम गहलोत ने जाहिर की चिंता

जयपुर: पिछले चार माह से पश्चिमी राजस्थान के 8 जिलों में टिड्डी दलों के प्रकोप पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चिंता जाहिर की है. सीएम गहलोत ने बुधवार को CMO में कृषि विभाग के रिव्यू मीटिंग लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे भारत सरकार की मदद से नियंत्रण करने का प्रयास करे. खुद मुख्यमंत्री ने भी केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर केंद्र से मदद मांगी है. 

टिड्डी के नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की जानकारी ली: 
मुख्यमंत्री ने जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, चूरू, श्रीगंगानगर तथा हनुमानगढ़ जिलों में टिड्डी दल के प्रकोप पर चिंता व्यक्त करते हुए इन जिलों में टिड्डी के नियंत्रण के लिए किए गए उपायों की जानकारी ली तथा और गति लाने के निर्देश दिए. साथ ही, टिड्डी नियंत्रण विषय मुख्यतः भारत सरकार के अधीन होने के फलस्वरूप उन्होंने निर्देश दिए कि राज्य सरकार के संसाधनों के साथ-साथ भारत सरकार का सहयोग लेकर इस समस्या के समाधान के प्रयास किए जाएं ताकि किसानों की फसल बर्बाद होने से बचाई जा सके. CMO में हुई इस बैठक में कृषि मंत्री  लालचंद कटारिया, कृषि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव तथा कृषि विभाग, वित्त विभाग एवं उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे. मुख्यमंत्री ने साथ ही केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर को पत्र लिखकर मांग की है कि टिड्डियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रदेश में जल्द से जल्द नये दवा छिड़काव यंत्रों, मानव संसाधन और दवा के हवाई छिड़काव के लिए सुविधाएं मुहैया कराई जाएं. 

दवा छिड़काव मशीनें टिड्डी दलों पर प्रभावी नियंत्रण में नाकाफी: 
मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि वर्तमान स्थिति के मद्देनजर भारत सरकार के टिड्डी चेतावनी संगठन के पास उपलब्ध 45 दवा छिड़काव मशीनें टिड्डी दलों पर प्रभावी नियंत्रण में नाकाफी साबित हो रही हैं. इसलिए जल्द से जल्द 15 से 20 नये दवा छिड़काव यंत्र, वाहन और मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं. साथ ही, जोधपुर, बीकानेर और जैसलमेर जिलों में अतिशीघ्र हवाई अथवा ड्रोन के माध्यम से दवा छिड़काव की सुविधा उपलब्ध कराना भी नितांत आवश्यक है. राज्य सरकार ने अब तक कुल 5 लाख 7 हजार 885 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी के लिए सर्वेक्षण किया गया है और लगभग 1 लाख 50 हजार 892 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई है. 

लालचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री को पूरी रिपोर्ट सौपी: 
बुधवार को CMO में हुई बैठक में मंत्री लालचंद कटारिया ने मुख्यमंत्री को पूरी रिपोर्ट सौपी. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों की आय बढ़ाने, उन्हें उन्नत कृषि के लिए आवश्यक सुविधाएं एवं संसाधन उपलब्ध करवाने के साथ ही कृषि प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए हरसम्भव प्रयास किए जाएं. उन्होंने कहा कि बजट में की गई कृषि से संबंधित घोषणाओं पर तेजी से काम करें और किसान कल्याण की विभिन्न योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करें. 

बैठक में ये निर्देश भी दिए सीएम ने
- प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में और आगे बढ़ाने के लिए नवाचार अपनाने के निर्देश दिए
- गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन को बढ़ावा दिया जाए
-किसानों को बाहर से महंगे दामों पर बीज नहीं खरीदना पडे़
-रबी के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करें 
- कृषि प्रसंस्करण गतिविधियां बढ़ाने के लिए  इकाई संस्थापन प्रक्रिया सरल करें
- कस्टम हायरिंग सेंटर्स का हो विस्तार
-सहकारी समितियों के माध्यम से इनका और अधिक विस्तार किया जाए
- कुसुम योजना में किसानों को ऋण के लिए परीक्षण कराए

मुख्यमंत्री ने CMO में हुई बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, सौर ऊर्जा पम्प परियोजना, ई-राष्ट्रीय कृषि बाजार, मॉडल एपीएलएम एक्ट-2017 सहित कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की गहन समीक्षा की. 

 

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जयपुर: फसली ऋण से जुड़े करीब 3.50 लाख अवधिपार ऋणी किसानों को भी फसली ऋण प्रदान किया जाएगा. सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ऋण माफी के अपात्र इन किसानों को भी अब शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण मिल सकेगा. आंजना ने बताया कि ऐसे सभी किसान जो ऋण माफी में अपात्र थे और उन्होंने समय पर अपना फसली ऋण चुका दिया था. उन्हें अब भी फसली ऋण दिया जा रहा है. लेकिन कई किसान ऐसे थे जो ऋण माफी में अपात्र थे तथा उन्होंने अपना फसली ऋण देरी से चुकाया था वे अवधिपार श्रेणी में आए थे. ऐसे किसानों को भी अब फसली ऋण मिल सकेगा.

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मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे: 
सहकारिता मंत्री ने बताया कि जिन किसानों ने अभी तक अपना फसली ऋण नहीं चुकाया है तथा जो अवधिपार हो चुके है. ऐसे किसान अब अवधिपार मूल राशि एवं ब्याज चुकाकर पात्रता की स्थिति में मूल राशि के बराबर पुनः फसली ऋण ले सकेंगे. उन्होंने बताया कि ऐसे किसानों के हित में राज्य सरकार के शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसली ऋण का लाभ देने के उदेद्श्य से यह निर्णय लिया गया है.

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इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा:
आंजना ने बताया कि 16 अप्रेल से प्रारम्भ हुए खरीफ सीजन के फसली ऋण में अब तक 23 लाख 79 हजार किसानों को 7 हजार 321 करोड़ रूपये का फसली ऋण का वितरण किया जा चुका है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष लगभग 3 लाख नए किसानों को भी फसली ऋण दिया जा रहा है. खरीफ सीजन में फसली ऋण 31 अगस्त तक वितरित होगा. 


 

टिड्डियों के हमले को लेकर कृषि विभाग अलर्ट

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बिसाऊ(झुंझुनू): बिसाऊ क्षेत्र में टिड्डयों का नियंत्रण जब तक किसान सहयोग नहीं करेगे तब तक विभाग अकेला कुछ नहीं कर सकता है. इस लिये किसान टिड्‌डी नियंत्रण टीम के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करे. सुबह क्षेत्र में विभाग द्वारा चलाये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य का निरक्षण करने आये कृषी विभाग के आयुक्त डॉ ओमप्रकाश ने किसान गोष्टी में कही. यह किसान गोष्टी कस्बे के राणासर रोड पर स्थीत अरविंद आश्रम फार्म हाउस पर पालिकाध्यक्ष मुस्ताक खान की अध्यक्षता में हुई जिसमें क्षेत्र के निराधनू, टांई, बाडेट, श्यामपुरा, पूनीया का बास सहित एक दर्जन गांवों से आये किसानों ने भाग लिया. 

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टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली:  
आयुक्त ने किसानों से टीम द्वारा किये जा रहे टिड्‌डी नियंत्रण कार्य के बारे में जानकारी ली व सुझाव भी मांगे. आयुक्त ने किसानों को फसल पर होने वाले टिड्डीयों के हमले से कैसे बचा जाऐ उसके बारे में जानकारी दी और कहा की टिड्डियों के हमले के समय धुआं व आवाज करें. यह टिड्डियां 150 से 200 किलो मिटर की रफतार से उड़ती है. यह समय इनके मेटिंग का है जहां भी पड़ाव डालेगी वहां अंडे देगी. इन अंडो से निकलने वाला फाका 8 से 10 दिन में चलने लग जाता है. इन से फसलों को बचाने के लिये पारम्परिक तरिके अपनाये. टिडिडयों के नियंत्रण के लिये विभाग ट्रेक्टर, पानी के टेंकर, हेलिकाप्टर भी लगा रखे हैं. सर्वे के लिये अधिकारियों को गाडियां उपलब्ध करवा रखी है. गौष्टी में विभाग के संयुक्त सचिव डॉ एसपी सिंह ने भी किसानो को टिड्‌डी दल व फाके से फसलों के बचाव हेतू कई जानकारिया दी.

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90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया: 
सिंह ने बताया की विभाग ने नई टेक्नोलोजी अपना कर 90 प्रतिशत टिड्‌डी दल पर नियत्रंण कर लिया है. किसान ध्यान रखे फसलों व सब्जियों में स्प्रे के 10 दिन बाद ही काम करे. फाके को मारने के लिये खेतों में एक से डेढ फुट गहरी व एक फुट चोडी खाई खोदे जिसमें फाका खाई में गिरकर मर जाएगा. सिंह ने बताया की टिड्‌डी दल को हवा से एनर्जी पावर मिलता है. पड़ाव के समय इन्हे मारने के लिये नीम व उनकी निबोंली को पानी में उबाल उसका छीड़काव भी कारगर है. पालिकाध्यक्ष खान ने टिड्‌डी दल नियंत्रण में विभाग को पालिका की और से सहयोग देने का आश्वासन दिया है. गोष्टी से पूर्व आयुक्त व संयुक्त सचिव ने सहायक निदेशक डॉ विजयपाल कंस्वा व अन्य अधिकारियों के साथ आश्रम के फार्म हाउस पर टिड्‌डयों द्वारा दिये गये अंडो को व उनमें से निकलने वाले जीवो को देखा. इस मौके पर सीकर के कृषी संयुक्त निदेशक प्रमोद कुमार, उपनिदेशक कृषी डॉ. राजेद्र लांबा, सहायक निदेशक विजयपाल कंस्वा, सीकर के कृषी अधिकारी सर्जनसिंह व फार्म हाउस की देखरेख करने वाले मैनेजर ओमप्रकाश जोशी व आश्रम के पदाधिकारी भी मोजूद रहे. 

खेत में फव्वारा लाइन बदलते समय करंट लगने से मां-बेटे की मौत

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चूरू: जिले के बूटिया गांव में आज मां-बेटे की खेत में पानी के फव्वारे बदलते समय करंट लगने से मौत हो गई. बताया जा रहा है कि बूटिया गांव का एक किसान परिवार अपने खेत में सिंचाई कर रहा था उसी दौरान जब पानी के फव्वारे की लाइन बदल रहे मां बेटे को करंट लगा और दोनों की मौत हो गई. 

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ट्रांसफार्मर के अर्थिंग से जमीन में आया करंट: 
खेत में लगे हुए ट्रांसफार्मर के अर्थिंग से जमीन में करंट आना प्रथम दृष्टया कारण माना जा रहा है जिससे फव्वारे की लाइन में भी करंट आया और लाइन बदलते समय यह हादसा हुआ है. सूचना मिलते ही सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों के शव राजकीय डीबी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाये, बाद में शवों का पोस्टमार्टम करवा शव परिजनों के सुपुर्द कर दिए हैं अब सदर थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है.

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जैसलमेर: पाकिस्तान के रास्ते भारत आया टिड्डी दल फसलों को काफी नुकसान पहुंचा रहा है. खासतौर पर राजस्थान के कई जिलों में इनका असर सबसे ज्यादा है. कई किलोमीटर लंबे टिड्डी दल राजस्थान के आधा दर्जन से ज्यादा जिलों में बार-बार हमला कर रहे हैं. टिड्डी दल के हमले से अब पाकिस्तान बॉर्डर से लगे राजस्थान के जिलों में किसानों पर आफत आ गई है. अब अगस्त में एक बार फिर पाकिस्तान के रास्ते कारोड़ों टिड्डियों का दल भारत में आ सकता है. राजस्थान कृषि विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में टिड्डी दल के हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. मानसून का सीजन शुरू हो चुका है, और बारिश में टिड्डियां ज्यादा अंडे देती हैं. 

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अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी:  
टिड्डी दलों के हमले से अब तक 2 लाख हैक्टेयर फसल बर्बाद हो चुकी है. राजस्थान के कृषि विशेषज्ञों की मानें तो अब हमले ज्यादा बड़े और लगातार होंगे. इन हमलों से यदि प्रदेश की 10 प्रतिशत फसल भी बर्बाद हुई तो नुकसान का आंकड़ा लगभग 4 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. कृषि विशेषज्ञों एवं अधिकारियों की आशंका और अब तक हुए हमलों को ध्यान में रखते हुए टिड्डियों पर नियंत्रण के लिए कारगर कदम उठाए जा रहे हैं. केंद्र सरकार ने हेलीकॉप्टर से कीटनाशक स्प्रे कराने का प्रबंध किया है. वहीं राज्य सरकार जमीनी स्तर पर कीटनाशक का स्प्रे कराने के साथ ही अन्य आवश्यक कदम उठा रही है. फायर ब्रिगेड, ड्रोन व ट्रेक्टर का सहारा लेकर इन पर नियंत्रण का प्रयास किया जा रहा है. 

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टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई:
जैसलमेर में टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार व कृषि उपनिदेशक राधेश्याम नारवाल ने बताया कि जैसलमेर जिले में आज  टिड्डी नष्ट करने के लिये हेलिकॉप्टर की मदद ली गई. जैसलमेर जिले के धनाना क्षेत्र में 140 आर.डी क्षेत्र में हेलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर 50 से ज्यादा हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इसके साथ ही जिले में रविवार को कुल 351 हेक्टेयर क्षेत्र मे टिड्डी नियंत्रण किया गया जिनमें पोकरण, डेलासर, एकां, अमीरों की बस्ती प्रमुख रूप से शामिल है. उन्होंने बताया कि जैसलमेर में 908 हेक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण की कार्यवाही की गई. जिले के मुल्ताना, फतेहगढ़, बांधा, ओला, सोढ़ाकर पोकरण, दूधिया आदि क्षेत्रों में हेलिकॉप्टर, ड्रोन, व्हीकल माउंटेन स्प्रेयर के जरिए टिड्डी नियंत्रण किया गया. 

सीमा पार से आई टिड्डियों पर 'एयर स्ट्राइक' जारी

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जैसलमेर: पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान से आने वाले टिड्डी दलों पर जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर से धावा जारी है. जैसलमेर जिले में टिड्डी नियंत्रण में अब हैलिकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है. रविवार को जिले के 140 आरडी क्षेत्र में  हैलिकॉप्टर से कीटनाशक का स्प्रे कर टिड्डी नियंत्रण किया गया. टिड्डियों के पड़ाव की सूचना विभाग को मिलने के बाद किसानों की फसलों व अन्य वनस्पति के लिए आतंक का सबब बने इन अवांछित मेहमानों पर एयर स्ट्राइक की जा रही है.

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हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया: 
जिले में निजी कंपनी के एक हेलीकॉप्टर ने शनिवार सुबह जैसलमेर के पुलिस लाइन मैदान में बने हेलीपैड से उड़ान भरी. इससे पहले वहां हेलीकॉप्टर में पेस्टिसाइड और जरूरी पानी का बंदोबस्त किया गया. टिड्डी नियंत्रण अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि जिले के विभिन्न स्थानों पर कुल 351 हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण कार्य किया गया. इसमें अमीरों की बस्ती में 25 हैक्टेयर, 138 से 162 आरडी में 80 हैक्टेयर, डेलासर में 60 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 150 हैक्टेयर में नियंत्रण किया गया. इसी प्रकार ड्रोन से 36 हैक्टेयर में टिड्डी नियंत्रण किया गया. इनमें डेलासर में 20 हैक्टेयर तथा एका, पोकरण में 16 हैक्टेयर क्षेत्र में ड्रोन से टिड्डी नियंत्रण कार्य को अंजाम दिया गया. 

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जैसलमेर: अल्पसंख्यक मामलात, वक्फ एवं जन अभियोग निराकरण मंत्री शाले मोहम्मद ने ग्रामीणों से कहा है कि सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ पाकर अपनी तकदीर संवारें और गांवों की तस्वीर बदलें. इसके लिए यह जरूरी है कि ग्रामीण पूरी तरह जागरुक रहकर इन योजनाओं की जानकारी पाएं और अपने काम की गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता पाते हुए खुशहाली लाएं.

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ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया:  
अल्पसंख्यक मामलात मंत्री ने जैसलमेर जिले के विभिन्न सीमावर्ती और नहरी क्षेत्रों का दौरे में ग्रामीणों को यह बात कही.कैबिनेट मंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों का अवलोकन किया और जन सुनवाई करते हुए ग्रामीणों की समस्याओं को सुना तथा इनके समाधान के लिए आश्वासन दिया. उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में महात्मा गांधी नरेगा योजना में समय पर भुगतान के साथ ही जरूरतमन्दों के लिए पर्याप्त काम खोलकर ग्रामीणों को रोजगार मुहैया कराने के निर्देश दिए.

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राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी:
वहीं मंत्री शाले मोहम्मद ने कहा की कोरोना की तरह टिड्डी भी बहुत बढ़ी आफ़ात है इसको लेकर राज्य सरकार लगातार किसानों से साथ खड़ी है.  किसानों की आवाज केंद्र की तरफ पंहुचा रही है लेकिन केंद्र सरकार को राजस्थान में और संसाधन जुटाने की आवश्यकता है ताकि यह टिड्डी कंट्रोल यही किया जाए ताकि भारत वर्ष में यह टिड्डी न फैले. वहीं उन्होंने कहा की केंद्र के मंत्री केवल आरोप लगाते है करते कुछ नहीं, इसलिए कुछ काम करे. 

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जैसलमेर: पिछले साल राजस्थान ही नहीं बल्कि कई राज्यों में तबाही की स्याह दास्तां लिखने के बाद पिछले करीब दो माह में पाकिस्तान से टिड्डियों के लाखों की तादाद में आए झुंड भारत मे घुस कर एक दर्जन राज्यों में फसलों को बर्बाद करने में लगे हैं. इनके आंतक के खात्मे के लिए सरकार अब जमीन के बजाए आसमान से करने जा रही है. किसानों पर कहर बरपा रहे हवाई आतंक पर अब एयर स्ट्राइक के जरिए ही काबू पाने की तैयारी है. टिड्डियों पर अब हेलिकॉप्टर के जरिए कीटनाशक का छिड़काव किया जाएगा. टिड्डियों के खात्मे के लिए माउटेंड स्प्रेयर ट्रैक्टर, ड्रोन के बाद अब हेलीकॉप्टर की मदद ली जा रही है. इसके केहर आज एक हेलीकॉप्टर जैसलमेर पुलिस लाइन मैदान हेलीपेड पर उतरा जैसलमेर के सीमावर्ती क्षेत्रों में हेलीकाप्टर से छिड़काव किया. 

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60 दिन में इसकी 100 घंटे की उड़ान अनिवार्य:  
निजी हेलिकॉप्टर एक बार में महज 250 लीटर कीटनाशक का स्प्रे सिर्फ 50 हेक्टेयर क्षेत्र में ही कर सकता है. इसमें पायलट के नीचे दोनों तरफ स्प्रे करने की सुविधा है. कंपनी से हुए करार के तहत 60 दिन में इसकी 100 घंटे की उड़ान अनिवार्य है. इससे पहले एक हेलिकॉप्टर बाड़मेर के उत्तरलाई एयरबेस पर तैनात है. वहीं आज जैसलमेर में हेलीकाप्टर को तैनात किया गया है. जरूरत के आधार पर इसे बाड़मेर के साथ ही जैसलमेर, जोधपुर, बीकानेर और नागौर जिलों में टिड्‌डी नियंत्रण के लिए काम में लिया जाएगा.

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40 मिनट में 750 हेक्टेयर क्षेत्र में 800 लीटर कीटनाशक का छिड़काव: 
वहीं दूसरी तरफ टिडि्डयों के सफाया के लिए अब इंडियन एयरफोर्स मदद के लिए आगे आया है. एयरफोर्स ने अपने तीन एमआई-17 हेलिकॉप्टरों को मॉडिफाइड कर टिड्‌डी पर स्प्रे करने को तैयार कर दिया है. ये हेलिकॉप्टार महज 40 मिनट में 750 हेक्टेयर क्षेत्र में 800 लीटर कीटनाशक का छिड़काव कर देगा. इन तीन में से एक हेलिकॉप्टर को जोधपुर एयरबेस पर तैनात किया जाएगा. यहां टिड्‌डी दलों के भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही ये हेलिकॉप्टर हमला करने को उड़ान भरेगा. आज शाम तक जैसलमेर पहुंच जायेंगे.  

ऋणी किसानों के लिए फसल बीमा योजना स्वैच्छिक

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जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2020 में ऋणी काश्तकारों के लिए भी स्वैच्छिक रहेगी. फसल बीमा से अलग रहने के इच्छुक ऋणी किसान को आगामी 8 जुलाई तक संबंधित बैंक शाखा में आवेदन करना होगा. कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने बताया कि फसल बीमा योजना में खरीफ-2020 से केन्द्र सरकार की ओर से कई बदलाव किए गए हैं. 

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किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया: 
इसके तहत वित्तीय संस्थान से फसली ऋण लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा स्वैच्छिक किया गया है. फसली ऋण लेने वाले किसानों को 8 जुलाई तक संबंधित बैंक में जाकर फसल बीमा से पृथक रखने के लिए निर्धारित प्रपत्र में लिखित में आवेदन करना होगा. आवेदन पत्र बैंक शाखाओं में उपलब्ध है. कटारिया ने बताया कि केन्द्र सरकार ने किसानों के लिए फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 15 जुलाई निर्धारित की है. 

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