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VIDEO: सीएम गहलोत ने सीकर को दी कई सौगातें, बोले-आशाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास

VIDEO: सीएम गहलोत ने सीकर को दी कई सौगातें, बोले-आशाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास

सीकर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज एक दिवसीय सीकर दौरे पर रहे. इस दौरान सीकर में सीएम कई सौगातें दी. उन्होंने नवनिर्मित नगर परिषद के श्री कल्याण भवन का लोकार्पण किया. वहीं मुख्यमंत्री गहलोत ने सीकर में सीवरेज के ट्रीटमेंट प्लांट और नेहरू पार्क के जीर्णोद्धार कार्य का तथा महात्मा गांधी नानी लेक कार्य का भी शुभारंभ किया. 

आशाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास
मुख्यमंत्री गहलोत ने सीकर नगर परिषद के नवनिर्मित श्री कल्याण भवन का अवलोकन भी किया, तो साथ ही सीकर के राजा कल्याण सिंह द्वारा मंगवाए गए इंग्लैंड से रोड रोलर का भी अवलोकन किया. इस मौके पर आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का कांग्रेसियों द्वारा साफा व माला पहनाकर स्वागत भी किया गया. सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि इस भवन का शिलान्यास और लोकार्पण का सौभाग्य मुझे मिला है. उन्होंने कहा कि आमजन ने जो कांग्रेस में विश्वास जताकर सरकार बनाई थी, उन आशाओं पर खरा उतरने का पूरा प्रयास कर रहे हैं और आमजन को संवेदनशील पारदर्शी व जवाबदेही प्रशासन देने के भरसक प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने तत्कालीन भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पिछली सरकार ने बिना बजट के कई कार्यों का शिलान्यास कर दिया. 

जल्दी शुरू कर दिया जाएगा मेडिकल कॉलेज:
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि सीकर का मेडिकल कॉलेज भी जल्दी शुरू कर दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि हम और हमारी सरकार किसी भी तरीके की कोई कमी नहीं रखेगी. उन्होंने सीकर के रावराजा कल्याण सिंह के जनहित के कार्यों की जमकर प्रशंसा की और कहा कि जो समाज को देते हैं, समाज उनको कभी नहीं भूलता. उन्होंने केंद्र सरकार पर भी जमकर प्रहार किए और कहा कि आर्थिक मंदी का दौर है, लेकिन सरकार मानने को तैयार नहीं. गहलोत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने 70 साल तक लोकतंत्र को बचा कर रखा है, लेकिन वर्तमान में हालात ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि सांसद और विधायक उनसे मांगते मांगते थक जाते हैं, लेकिन वह देते देते नहीं थकते, क्योंकि उनकी मंशा सदा विकास कराने की रही है. उन्होंने कहा कि राजस्थान की सरकार आमजन के विकास के लिए योजनाएं शुरू कर रही हैं और उन्होंने आमजन से विकास की योजनाओं का लाभ उठाने का आह्वान भी किया. 

कई नेता रहे मौजूद:
स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सीकर के विकास में उनके विभाग की ओर से कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी. वहीं शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा राजेंद्र पारीक सहित तमाम विधायकों ने भी जनसभा को संबोधित किया. इस मौके पर स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल, वरिष्ठ नेता घनश्याम तिवाड़ी, शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा, विधायक राजेंद्र पारीक, विधायक वीरेंद्र चौधरी, विधायक परसराम मोरदिया, विधायक महादेव सिंह खंडेला, विधायक हाकम अली, सभापति जीवन खा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष पी एस जाट सहित कांग्रेस के पदाधिकारी जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

... संवाददाता रमेश शर्मा की रिपोर्ट 

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निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार, भक्तों के लिए पट रहे बंद

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सीकर: आज निर्जला एकादशी का पर्व है, लेकिन कोरोना संकट के बीच सारे उत्सव रद्द है, तो ऐसे में लोग निर्जला एकादर्शी का पर्व घरों में ही मना रहे है. निर्जला एकादशी पर बाबा श्याम की विशेष पूजा आराधना हुई. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पुजारियों ने बाबा श्याम का विशेष श्रृंगार के आराधना की. लेकिन श्याम प्रेमी इस बार निर्जला एकादशी पर दर्शन नहीं कर पाये. 

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श्याम प्रेमियों को नहीं हुए दर्शन:
निर्जला एकादशी पर जहां बाबा श्याम के दरबार में लाखों लोगों की भीड़ रहती थी, लेकिन कोरोना के चलते इस बार श्याम के भक्तों को निराश रहना पडा .मंगलवार को बाबा श्याम के भक्त दीदार नहीं कर पाए, कोरोना संक्रमण के चलते बाबा का दरबार बंद रहा. निर्जला एकादशी के दिन पुजारियों ने सिर्फ बाबा श्याम की सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पूजा आराधना की और पट बंद कर दिए. 

निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व:
निर्जला एकादशी का पौराणिक बड़ा महत्व है, आज के दिन बाबा श्याम के दरबार में लाखों भक्त अपनी हाजिरी लगाते हैं. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ और मंदिर 3 माह से पूरी तरह बंद चल रहा है. राज्य सरकार के आदेश के बाद ही भक्तों के लिए मंदिर खोला जाएगा. पहली बार ऐसा हुआ है कि निर्जला एकादशी के दिन बाबा श्याम के दर्शन भक्तों को नहीं हुए. 

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न बैंड, न बारात सादगी के साथ हुआ विवाह सम्पन्न, वर और वधु पक्ष ने दिया समाज को सकारात्मक संदेश

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अजीतगढ़(सीकर): वैश्विक महामारी कोरोना का देशभर में कहर जारी है. ऐसे में जहां कुछ लोग मनमानी करते हुए लॉकडाउन की एडवाजरी की धज्जियां उड़ा रहे हैं, वहीं कुछ लोग लॉकडाउन के पालन की मिसाल भी कायम कर रहे हैं. एक ऐसा ही मामला सीकर जिले के अजीतगढ़ में सामने आया है. यहां लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए नवदंपति 7 फेरों के बंधन में बंधे. विवाह समारोह में वर पक्ष के 5 लोग बारात लेकर आए जिनका वधु पक्ष की ओर से स्वागत सत्कार के बाद सोसियल डिस्टेंस और सरकार की एडवाजरी की पालना करते हुए पूर्ण वैदिक विधि विधान और 7 फेरों के साथ विवाह की रस्मे अदा की गई.

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हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक हुई शादी की रस्में: 
जानकारी के मुतबिक पूर्व भाजपा प्रदेश महामंत्री कुनेड पावटा निवासी जगदीश प्रसाद यादव के पुत्र अक्षय कुमार यादव की शादी 18 मई को तय हुई थी. वर पक्ष और वधु पक्ष की ओर से विवाह की धूमधाम से तैयारियां की गई, लेकिन कोरोना को लेकर लॉक डाउन लगने पर तैयारिया धरी रह गई. विवाह की तारीख नजदीक आने पर वर के पिता जगदीश यादव ने वधु पक्ष से चर्चा कर सादगी पूर्ण विवाह करने का निर्णय किया. इस पर लड़के के पिता ने मात्र पांच लोगों के साथ अजीतगढ़ निवासी सेठ रामेश्वर यादव हरियाणा वाले की पुत्री प्रवीण यादव के साथ सोमवार को हिन्दू रीति रिवाज के मुताबिक शादी की रस्में पूरी की.

विवाह समारोह में फिजूलखर्ची पर लगेगी रोक:
शादी में सादगी के साथ चंद लोगो के बीच सम्पन्न हुई. इस संबंध में विवाहित जोड़े अक्षय व प्रवीण ने कहा है कि हम लोगों ने लॉकडाउन का पालन करते हुए शादी की है. यह भी जीवन में एक पहचान बनी रहेगी. वर के पिता जगदीश प्रसाद यादव ने बताया कि वर्तमान में विवाह समारोह में फिजूलखर्ची बढ़ गई है. सादगी के साथ बेटे का विवाह करने में खुशी हुई और इससे समाज में फिजूलखर्ची रुकेगी और रचनात्मक सन्देश जाएगा.

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वीसी के जरिए हुई शिक्षा विभाग की ​बैठक, दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं को लेकर हुई विस्तृत चर्चा

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सीकर: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की शुक्रवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक हुई. इस बैठक के बाद प्रेस वार्ता करते हुए शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि माध्यमिक शिक्षा बोर्ड दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं को लेकर विस्तृत चर्चा वीसी में की गई है. परीक्षाओं को लेकर निर्णय मुख्यमंत्री गहलोत को लेना है. परीक्षा कराना इस समय संभव नहीं है लेकिन बोर्ड का रिजल्ट भी अपने आप में अलग महत्व रखता है. इसलिए निर्णय मुख्यमंत्री खुद अपने स्तर पर लेंगे.  

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आरटीई में बढाई आय सीमा:
इसी के साथ एलडीसी की हाल ही में जारी विभाग और जिला आवंटन संबंधी एवं आरटीई के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए आय सीमा 1 लाख  से 2लाख 50 हजार रुपए और  स्कूल लेक्चरर हैड मास्टर प्रिंसिपल के पदों पर नियमों में संशोधन के साथ ही सैकंड ग्रेड वरिष्ठ अध्यापक में चयनित नियुक्ति को लेकर विस्तृत चर्चा की गई है. जल्दी इन सभी को लेकर मुख्यमंत्री स्तर पर निर्णय होगा. 

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टाइम पास के लिए युवाओं ने शुरू की पहल बनी मिसाल, कोई भूखा न सोये की मुहिम पर अब तक बांटे 78 हजार से ज्यादा टिफिन

टाइम पास के लिए युवाओं ने शुरू की पहल बनी मिसाल, कोई भूखा न सोये की मुहिम पर अब तक बांटे 78 हजार से ज्यादा टिफिन

फतेहपुर(सीकर): लॉक डाउन के कारण घरों में बैठे बैठे परेशान नहीं हो इसको लेकर चार दोस्तों ने असहाय लोगों के एक दिन का खाना बनाकर छह सौ टिफिन बांटे. सेवा कार्य में ऐसा मजा आया कि युवाओं की एक टीम बन गई और पिछले 40 दिनों से रोजाना हजारों लोगों को खाना बनाकर मुहैया करवा रही है. हम बात कर रहे है फतेहपुर के उन युवाओं की टीम की जो सबके लिए प्ररेणा से कम नहीं है. सिर्फ एक दिन छह सौ टिफिन बांटे थे उसके बाद ऐसी मुहीम बनी की अब तक 78 हजार से यादा टिफिन बांट कर कोई भूखा ना सोएं की पहल सार्थक होने लग गई. कस्बे के चार दोस्त पंकज पारीक, मगन प्रजापत, भवानी चोटिया व योगेश ने 24 मार्च को गरीबो के लिए एक दिन का भोजन तैयार किया. पंकज ने बताया कि जनता कर्फ्यू के दौरान पूरे दिन घर रहे तो बहुत परेशान हुए. अक्सर दिनभर बाहर घूमते रहते थे ऐसे में अब घर कैसे रहा जाएगा. अगले ही दिन राजस्थान सरकार ने लॉकडाउन कर दिया तो घर बैठे बैठे परेशान होने लगे. ऐसे में सोचा कि क्यों ना समाज के लिए इस कोरोना महामारी के बीच कुछ किया जाएं. ऐसे में 24 मार्च को रेलवे स्टेशन के पास एक घर में छह सौ लोगों के लिए खाने के पैकेट तैयार किए. इसके बाद प्रशासन की देखरेख में जरूरतमंद लोगों तक पहुचाएं. पूरा दिन कैसे बीता मानो पता ही नहीं चला. असहाय लोगों की सेवा में जो सुकून मिला उसके आगे सबकुछ फीका था. इसके बाद सोशल मीडिया पर फोटो डाली तो लोगों का अपार स्नेह मिला तो मुहीम को आगे बढ़ाने की सोची. ऐसे में सोचा की पहले दिन का खर्चा तो दोस्तों ने मिलकर दे दिया लेकिन आगे कैसे चलेगा. लेकिन कस्बे के लोगों का ऐसा सहयोग मिला कि मुहीम अपने आप आगे बढ़ गई. छह सौ टिफिन से यह संख्या ढाई हजार तक पहुंच गई. 

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घर किए चिन्हित, अब रोज पहुंचा रहे हैं खाना:
एक ओर पूरा विश्व कोरोना जैसी महामारी की चपेट में है. लॉक डाउन के चलते असहाय व जरूरतमंद लोगों पर जबरदस्त संकट आ गया. कामकाजी लोग भटक रहे हैं. कोई पहले कचरा बीनता था ,कोई कुली हमाल था कोई रिक्शा चलाता था. उन स्थानों तक भोजन पैकेट जरुरतमंदों को पहुंचाए जा रहे हैं जहाँ मेहनतकशों का बसेरा है. अस्पतालों के बाहर ,कोई कच्ची बस्ती ,फुटपाथ ,बंजारों की बस्ती ऐसे स्थान है जहां ये लोग रोज पहुंच रहे हैं. रसोई टीम के संदीप हुड्डा व अभिषेक जोशी ने बताया कि पहले दिन खाना देने के बाद से सोशल मीडिया पर संदेश डाला कि कस्बे में कोई भूखा न सोये कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति या परिवार है तो उसकी जानकारी हमे दे. जब लोगों ने जानकारी मुहैया करवाई तो टीम के सदस्य जाके देख कर आये की इस परिवार को वास्तव में जरूरत है या फिर नही. वास्तविक जरूरत वाले परिवार एक दो दिन भर चिन्हित हो गए. 

चार लोगों से संख्या 20 से अधिक हुई, सब अपने आप जुड़े किसी को नहीं बुलाया:
राम रसोई चार दोस्तों ने मिलकर शुरू की. उसके बाद कार्यकर्त्ताओं की फ़ौज अपने आप जुड़ गई. एक भी कार्यकर्ता को फोन करके नहीं बुलाया. सब अपने आप जुड़े. इसके बाद सबने अपनी रुचि से कार्य निर्धारित कर लिया. तब से लेकर आज तक वैसे ही सभी लोग लगे हुए है. कोई पैकिंग में लगा है तो खाना सप्लाई में लग गया. उसके बाद आने वाले लोगों को वापस भेजा गया. 

शहरवासियों का मिला अतुलनीय सहयोग:
राम रसोई शुरू होने के साथ ही शहर वासियों का अतुलनीय सहयोग रहा. मनोज पीपलवा व गोविंद पारीक ने बताया कि कास्बे के लोगो ने दिल खोल कर सहयोग किया. किसी ने राशन सामग्री भेजी तो किसी ने नकद राशि दी. इसके बाद किसी ने अपनी गाड़ी दी तो किसी ने सब्जी मुहैया करवाई. कस्बे के लोगों व लायंस क्लब के सदस्यों से मिले सहयोग के काऱण 78 हजार से ज्यादा टिफ़िन वितरण किये गए. राम रसोई के कार्य से लोग अभिभूत हुए. बंधेज का काम करने वाली एक महिला ने भी नाम नहीं बताने की शर्त पर अपने घर से सहयोग दिया. जबकि वो खुद गरीब परिवार से थी. 

यह है राम रसोई की टीम:
कार्यकर्ताओं की टीम में योगेश पारीक, मनोज पीपलवा, अजमद खां, सद्दाम हुसैन, किशोर ढाढ़णियां, गोविन्द पारीक, पंकज पारीक, मगन प्रजापत, संदीप हुड्डा, भवानी शंकर चोटिया, अभिषेक जोशी, मोहित सिलावट, रितिक पिपलवा, रमेश दर्जी, राहुल वर्मा, राहुल रॉय, अतुल ढण्ड, मीनू शर्मा, राकेश प्रजापत, ललित सैनी, बबलू सांखला कार्य कर रहे हैं. 

बिना संगठन बड़ा काम, संभवत शेखावाटी की सबसे बड़ी रसोई:
फतेहपुर की युवाओं की टीम का ना ही तो कोई संगठन है ना ही कोई संस्था. सिर्फ अपने बलबूते पर शुरू हुआ यह काम अब बड़े स्तर तक पहुंच गया. रोजाना 25 सौ लोगों को पिछले 38 दिनों से खाना पहुंचाने में यह शेखावाटी की सबसे बड़ी रसोई है. यह संदेश है कि अच्छे काम के लिए संस्थान व एनजीओ के बिना भी कार्य किया जा सकता है. 

- रोज 150 किलो आटे की बन रही है रोटियां, 70 किलो चावल व 200 किलो से अधिक सब्जी की हो रही है रोजाना खपत

- 2100 से लेकर 2500 तक टिफिन रोजाना भेज रहे है असहाय व जरूरतमंद लोगों तक

जरूरतमंद लोगों तक खाना पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं की टीम सुबह चार बजे से ही खाना बनाने के काम में जुट जाती है. हलवाई सुबह चार बजे आते है इसके बाद खाना बनाने का काम शुरू होता है. सुबह नौ बजे पैकिंग शुरू की जाती है. इसके बाद दूर के इलाको में गाड़ी भेजना शुरू किया जाता है. रोजाना दोपहर को 1300 से लेकर 1450 तक टिफिन तैयार किए जाते है. ऐसे में रोजाना डेढ़ क्विंटल आटे की रोटियां व दो क्विंटल से ज्यादा की सब्जी तैयार की जाती है. शाम को हल्का खाना व हेल्दी फूड देने के उद्देश्य को लेकर कभी वेज पुलाव तो कभी नमकीन खीचड़ी व कभी राजमा चावल दिए जा रहे हैं. शाम को खाने के एक हजार टिफिन तैयार किये जाते हैं. अब तक 78 हजार से ज्यादा टिफिन वितरित कर दिये गए है. इसके लिए भामाशाहों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. कोई सामान देता है तो कोई नकद पैसे दे रहा है. लायंस क्लब के द्वारा भी भामाशाहों को प्रेरित किया गया तो कई भामाशाह भी जुड़ गए. नगर पालिका की टीम भी कार्य की पूरी मॉनीटरिंग कर रही है. 

सुरक्षा का रहा जा रहा है पूरा ख्याल: 
कार्यकर्ताओं की टीम के द्वारा रेलवे स्टेशन के पास एक मकान में खाना बनाने का कार्य किया जा रहा है. यहां पर खाना बनाने से लेकर पैकिंग व खाना वितरण में पूरी सावधानियां बरती जा रही है. सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है. खाना पैकिंग करते समय मुहं पर मास्क व हाथों में दस्ताने पहने जा रहे हैं. यह लोग कोरोना की जंग में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं.

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कोई हलवाई है कोई दुकानदार, कोई फोटोग्राफर तो कोई मजदूर:
रेलवे स्टेशन के पास चल रही राम रसोई में काम कर रहे युवाओं की कहानी भी अलग है. कोई पेशे से हलवाई है तो कोई मजदूरी करता है. कोई विदेश रहता है तो किसी के कैटरिंग का काम है तो कोई व्यापारी है. लेकिन लॉक डाउन के बाद सबका एक ही मकसद है फतेहपुर क्षेत्र में कोई भूखा ना सोएं. किसी भी कार्यकर्ता को फोन करके नहीं बुलाया गया. चार दोस्तों के द्वारा शुरू करने के बाद कारवां अपने आप बनता गया. अब कार्यकर्ताओं की भी कमी नहीं है. खाना पैक करने से लेकर वितरण करने वाली टीमें भी अलग अलग है. 

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सीकर: प्रदेश के सीकर जिले की दादिया थाना पुलिस ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए फेसबुक पर धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत एक लेखाकार को गिरफ्तार किया है. पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक फेसबुक पर धार्मिक भावनाओं संबंधी आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में पुलिस ने नीरज मील नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है.

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फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट:
जिसने पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में और कोरोना पर फेसबुक पर आपत्तिजनक पोस्ट की थी. आरोपी नीरज मील स्वास्थ्य विभाग में लेखाकार के पद पर पिपराली में कार्यरत है, वहीं दादिया थाना पुलिस गिरफ्त में आए आरोपी से पूछताछ करने में जुटी हुई है.

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सीकर: प्रदेश के सीकर जिले के नीमकाथाना तहसील में पालिका क्षेत्र स्थित नए बस स्टैंड के पीछे सब्जी मंडी में सब्जी विक्रेताओं द्वारा लोक डॉउन और राज्य सरकार के धारा 144 का उलंघन व सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं किया जा रहा है. जिससे संक्रमण फैलनी की आशंका बनी हुई है. वहीं राज्य सरकार करोड़ों रुपए कोरोना से बचाव को लेकर विज्ञापनों में खर्च कर रही है. जिसमें घरों में रहने और सोशल डिस्टेंस की अपील कर रहे है.

सैकड़ों लोग हुए एकत्रित: 
लेकिन नीमकाथाना में सुबह पांच बजे से 9 बजे तक सब्जी मंडी में थोक विक्रेताओं द्वारा सरकार के आदेशों की अवहेलना करते हुए सैकड़ों लोग एकत्रित होते है और ना ही एक दूसरे व्यक्ति के बीच कोई सोशल डिस्टेंस रखते है. विगत दो दिन पूर्व कोटपुतली शहर में कोरोना पॉजिटिव मामला सामने आया था. उक्त सब्जी मंडी में कोटपुतली शहर से करीब 80 प्रतिशत सब्जियां आती है. ऐसे में प्रशासन उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहा.

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उक्त मामले को लेकर विगत 31 मार्च को आस्था जन कल्याण सेवा समिति अध्यक्ष जुगलकिशोर ने मुख्यमंत्री, कलेक्टर, मुख्य सचिव, उपखंड अधिकारी, अधिशाषी अधिकारी को ईमेल के जरिए अवगत करवाया था, लेकिन आजतक प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई. स्थिति इतनी गंभीर है कि अधिकांश व्यक्ति ना तो मास्क का इस्तेमाल कर रहे है और ना ही सेनेटाइजर का ऐसे में संक्रमण को लेकर आसपास के वार्डवासियों में भय का माहौल बना हुआ है.

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जयपुर: एक तरफ तो देश में कोरोना वायरस का खौफ है, वहीं दूसरी ओर लॉकडाउन की वजह से कई इंसानों के लिए समस्या उत्पन्न हो गई. गरीब और मजदूर लोगों के लिए खाने-पीने और रहने की समस्या पैदा हो गई है. प्रदेश के कई जिलों में गरीबों के पास ना तो खाने के लिए कुछ है ना ही उनके पास पैसा है. वो करें तो क्या करें. 

सामाजिक सगठनों ने सरोकार निभाया:
सीकर में सांवली में बनने वाली मेडिकल कॉलेज के मजदूरों को ठेकेदार छोड़कर भाग गया, 175 परिवार ऐसे हैं जिनके पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है. इस पर सामाजिक सगठनों ने सरोकार निभाया और उन्हें खाने-पीने की व्यवस्था की गई. शहर से 5 किलोमीटर दूर सांवली में मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन अचानक ही ठेकेदारों ने छोड़कर फरार हो गया. 175 परिवारों के आगे खाने-पीने के लिए मोहताज होना पड़ा, इस पर सामाजिक संगठनो ने पहल करते हुए अपनी अहम भूमिका निभाई और इन परिवारों को खाने-पीने के पैकेट वितरित करा दिए.

दर्द छलक उठा:
कोरोना वायरस के खौफ ने जिंदगी की रफ्तार पर भले ही पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया हो लेकिन बात करें उन दिहाड़ी मजदूरों की जो अपना घर छोड़कर दूर दराज के इलाकों में रोजी रोटी के लिए जंग लड़ रहे थे तो अब वह मजदूर अपने घर पहुंचने के लिए एक और जंग लड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं. कोई मजदूर जोधपुर से मध्यप्रदेश के भिंड के लिए पैदल ही चल पड़ा है तो कई मजदूर अलवर से पैदल ही उत्तर प्रदेश के बहराइच की दूरी कदमों से नाप रहे हैं. फर्स्ट इंडिया की टीम को ऐसा ही नजारा दिखाई दिया भरतपुर के जिला कलेक्ट्रेट रोड पर जहां पीठ पर बैग टांग कुछ  मजदूर पैदल पैदल राष्ट्रीय राजमार्ग की ओर बढ़ रहे थे. जब इन मजदूरों से बात की तो उनका दर्द छलक उठा.उनका कहना था की लॉक डाउन पता नहीं कब तक चले इसलिए वे अपने घरों की ओर रवाना तो हो गए लेकिन कोई साधन नहीं मिला तो अब मंजिल पैदल ही तय करनी पड़ रही है.

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राशन का संकट:
बूंदी जिले के लाखेरी गांव में कोरोना संक्रमण को लेकर देशभर में लॉक डाउन जारी है. ऐसे में गरीब तबके के कई लोग ऐसे है, जिनके सामने खाने पीने का संकट खड़ा हो गया है. पुलिस प्रशासन भी केवल 2 झोपड़ियों में ही खाना दे पाए, जबकि अन्य दिहाडी मजदूर भुखे ही रहे, ना ही तो उनके घर में पैसा है ना ही राशन का सामान. आखिर वह करे तो क्या करे. प्रशासन को अवगत कराने पर भी अभी तक उनको सहायता नही मिल पा रही हैं.

जरूरतमंदों को राशन सामग्री के किट किए वितरण:
प्रदेश के जालौर जिले में लॉकडाउन का पूरी तरह पालन कर रहे है. गांवों में सरपंच और  भामाशाह आगे आकर जरूरतमंदों को राशन सामग्री के किट वितरण कर रहे है. लोगों को कोरोना के बचाव की अपील कर रहे है. वहीं जालमपुरा में भामाशाह और सरपंच प्रतिनिधि तुलसाराम ने जरूरतमंदों को राशन सामग्री के किट वितरण किए.

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