VIDEO: राजस्थान विधानसभा सेमीनार में सीएम गहलोत ने की राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी

VIDEO: राजस्थान विधानसभा सेमीनार में सीएम गहलोत ने की राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद ही दल बदल को लेकर कोई अहम निर्णय ले सकती है. किसी पार्टी से चुनाव जीता हुआ सदस्य यदि दलबदल करता है तो वह पार्टी में नहीं रहे या सदस्य नहीं रहे, ऐसा नियम होना चाहिए. ...वरना गलियां तो कई निकल जाएंगी. दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर विधानसभा में हुई सेमिनार में उन्होंने यह बात कही. 

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दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए: 
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की पहल पर विधानसभा में आज दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर सेमिनार हुई इसमें उद्घाटन और पहले सत्र में दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए गए. इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज देश के हालात सब देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चार जज भी कह चुके हैं कि लोकतंत्र ख़तरे में है...तो संसद को ही इसके लिए उपाय करने होंगे. वहीं राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उदाहरण देते हुए कहा कि 1 दिन में 5-5 बार दल बदल की घटनाएं भी देखी गई हैं. उन्होंने इसे बड़ी चिन्ता का हल बताते हुए कहा कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बेहतर और विश्वसनीय प्रहरी है..और हमें उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. 

दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं:
इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा हम दल बदल कानून का 35 साल का सफर देख रहे हैं. दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं हैं...कि जनप्रतिनिधियों ने जिस पार्टी से वे चुने गए हों, उसे छोड़कर दल बदला है गहलोत ने कहा आज यह भी बहस यह छिड़ी है कि स्पीकर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई. यह बहुत बड़ा डिस्कशन का विषय है. कई बार मुख्यमंत्री को शपथ दिला दी जाती है. लेकिन उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट फैसले देता आया है. मुख्यमंत्री गहलोत बोले यूपी और बिहार में भी ऐसा हुआ है. पार्लियामेंट को यह अधिकार है कि यदि सुप्रीम कोर्ट से ऐसा कोई फैसला आए तो वह संविधान में संशोधन कर सकता है. 

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गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला: 
मुख्यमंत्री ने कहा कोई न कोई पॉलिटिकल पार्टी से आगे आकर ही जनप्रतिनिधि को अध्यक्ष बनने का मिलता मौक़ा मिलता है. उसे अपनी शपथ के आधार पर ही फैसला लेना होता है. फिर चाहे इलेक्शन कमीशन हो, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज हों. संविधान की जो भी शपथ ली जाती है उसके बाद जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने कॉन्शियस से फैसला कर सकें. लेकिन यदि वह अपने बैकग्राउंड के भाव रखेगा तो फिर शपथ किस बात की है. गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला है कि अध्यक्ष किस राजनीतिक दल से आता है जब ये सवाल उठते हैं और फिर बहस चलती है कि वह फला पॉलिटिकल पार्टी से है. शपथ लेने के बाद अपने कॉन्शियस से ही उन्हें फैसला करना चाहिए.

विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा: 
उन्होंने कहा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जजों पर फिर भी आरोप लगते हैं. पिछले पांच-छह महीने में देश में जो माहौल बना है कि संविधान बचाओ...यदि संविधान बच जाता है तो ये बातें नहीं होतीं. जिस प्रकार के हालात देशभर में बने हुए हैं सोचना चाहिए कि संविधान की मूल भावना ही नहीं रहेगी. तो ये सब बातें किस काम की हैं. मुख्यमंत्री ने कहा मैं समझता हूँ कि विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिससे दल बदल के बाद हर बार कोई न कोई गली निकल जाने के जो आरोप लगते हैं. उसका स्थाई समाधान हो सकेगा. दल बदल के लिए पहले एक तिहाई सदस्य का प्रावधान था. बाद में वह दो तिहाई हो गया. 

दल नहीं बदल सके ऐसा कानून बने:
उन्होंने कहा चाहे कोई भी पॉलिटिकल पार्टी का व्यक्ति हो वह किसी भी कीमत पर दल नहीं बदल सकता. यदि ऐसा कोई कानून बने,तो अलग बात है. वरना गलियां निकलती जाएंगी और ये रुकने वाला नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा पॉलिटिकल पार्टी खुद कैसे फैसला करेंगी. क्योंकि उसके मैम्बर पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, तो वो कभी नहीं कहेगी. चाहे आप किसी भी पार्टी से जीते हों आपको वहीं रहना होगा, वरना मैंबरशिप ख़त्म होगी ये निर्णय होना ही चाहिए. वरना कोई ना कोई गलियां निकल ही जाएंगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पॉलिटिकल पार्टी को चन्दे के मामले में भी कहा कि जोधपुर में मैंने एक कार्यक्रम में सबके सामने कहा कि लम्बे समय से मेरी इच्छा थी मैं सीजेआई से मिलूं. कुछ रास्ता निकले कि स्टेट फंडिंग हो. गहलोत ने कहा चार सुप्रीम कोर्ट जज ने जब प्रेस कांफ्रेंस करके यह कह दिया कि आज लोकतंत्र के लिए ख़तरा है, तो पूरा देश हिल गया. इसलिए मेरा मानना है कि दल बदल के मामले में पार्लियामेंट ही कोई रास्ता सुझा सकती है. 

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स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी: 
उद्घाटन सत्र में राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने कहा निर्वाचन आयोग के सुझाव को ऐसे फैसलों में तरजीह दी जानी चाहिए. राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष इसे तय करें. बल्कि स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी है. राज्यसभा उप सभापति हरिवंश ने कहा कि हल यह है कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बहेतर और विश्वसनीय प्रहरी है. हमे उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. उन्होंने राज्यसभा द्वारा एक मामले में 3 माह में फैसला देने बाद में उससे सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला देने और फिर दूसरा फैसला देने के कारण मामला अटकने की बात कही और दोहराया की समय सीमा तय होना बहुत जरूरी है. 

डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए:
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की सेमीनार में विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने लोकतंत्र में डिस क्वालिफाई करने का यह अधिकार दिया गया है. जिस पार्टी की विचारधारा है उस पार्टी की विचारधारा के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधि को वोट दिया जाता है. डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए. दलबदल को लेकर बहुत सारे निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं. जन प्रतिनिधि अपने निजी स्वार्थ के कारण मूल पार्टी को बदल रहा है. इस बारे में जो अधिकार मिलना चाहिए वह पार्टी के अध्यक्ष को मिलना चाहिए ना कि विधानसभा के अध्यक्ष को ऐसा अधिकार मिलना चाहिए. 

कई दिग्गज रहे मौजूद:
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष और सीपीए राजस्थान शाखा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सीपीए राजस्थान शाखा के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सीपीए राजस्थान शाखा उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, सीपीए राजस्थान शाखा सचिव और विधायक संयम लोढ़ा मंच पर मौजूद रहे. 
 

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