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VIDEO: राजस्थान विधानसभा सेमीनार में सीएम गहलोत ने की राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद ही दल बदल को लेकर कोई अहम निर्णय ले सकती है. किसी पार्टी से चुनाव जीता हुआ सदस्य यदि दलबदल करता है तो वह पार्टी में नहीं रहे या सदस्य नहीं रहे, ऐसा नियम होना चाहिए. ...वरना गलियां तो कई निकल जाएंगी. दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर विधानसभा में हुई सेमिनार में उन्होंने यह बात कही. 

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दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए: 
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की पहल पर विधानसभा में आज दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर सेमिनार हुई इसमें उद्घाटन और पहले सत्र में दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए गए. इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज देश के हालात सब देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चार जज भी कह चुके हैं कि लोकतंत्र ख़तरे में है...तो संसद को ही इसके लिए उपाय करने होंगे. वहीं राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उदाहरण देते हुए कहा कि 1 दिन में 5-5 बार दल बदल की घटनाएं भी देखी गई हैं. उन्होंने इसे बड़ी चिन्ता का हल बताते हुए कहा कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बेहतर और विश्वसनीय प्रहरी है..और हमें उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. 

दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं:
इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा हम दल बदल कानून का 35 साल का सफर देख रहे हैं. दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं हैं...कि जनप्रतिनिधियों ने जिस पार्टी से वे चुने गए हों, उसे छोड़कर दल बदला है गहलोत ने कहा आज यह भी बहस यह छिड़ी है कि स्पीकर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई. यह बहुत बड़ा डिस्कशन का विषय है. कई बार मुख्यमंत्री को शपथ दिला दी जाती है. लेकिन उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट फैसले देता आया है. मुख्यमंत्री गहलोत बोले यूपी और बिहार में भी ऐसा हुआ है. पार्लियामेंट को यह अधिकार है कि यदि सुप्रीम कोर्ट से ऐसा कोई फैसला आए तो वह संविधान में संशोधन कर सकता है. 

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गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला: 
मुख्यमंत्री ने कहा कोई न कोई पॉलिटिकल पार्टी से आगे आकर ही जनप्रतिनिधि को अध्यक्ष बनने का मिलता मौक़ा मिलता है. उसे अपनी शपथ के आधार पर ही फैसला लेना होता है. फिर चाहे इलेक्शन कमीशन हो, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज हों. संविधान की जो भी शपथ ली जाती है उसके बाद जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने कॉन्शियस से फैसला कर सकें. लेकिन यदि वह अपने बैकग्राउंड के भाव रखेगा तो फिर शपथ किस बात की है. गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला है कि अध्यक्ष किस राजनीतिक दल से आता है जब ये सवाल उठते हैं और फिर बहस चलती है कि वह फला पॉलिटिकल पार्टी से है. शपथ लेने के बाद अपने कॉन्शियस से ही उन्हें फैसला करना चाहिए.

विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा: 
उन्होंने कहा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जजों पर फिर भी आरोप लगते हैं. पिछले पांच-छह महीने में देश में जो माहौल बना है कि संविधान बचाओ...यदि संविधान बच जाता है तो ये बातें नहीं होतीं. जिस प्रकार के हालात देशभर में बने हुए हैं सोचना चाहिए कि संविधान की मूल भावना ही नहीं रहेगी. तो ये सब बातें किस काम की हैं. मुख्यमंत्री ने कहा मैं समझता हूँ कि विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिससे दल बदल के बाद हर बार कोई न कोई गली निकल जाने के जो आरोप लगते हैं. उसका स्थाई समाधान हो सकेगा. दल बदल के लिए पहले एक तिहाई सदस्य का प्रावधान था. बाद में वह दो तिहाई हो गया. 

दल नहीं बदल सके ऐसा कानून बने:
उन्होंने कहा चाहे कोई भी पॉलिटिकल पार्टी का व्यक्ति हो वह किसी भी कीमत पर दल नहीं बदल सकता. यदि ऐसा कोई कानून बने,तो अलग बात है. वरना गलियां निकलती जाएंगी और ये रुकने वाला नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा पॉलिटिकल पार्टी खुद कैसे फैसला करेंगी. क्योंकि उसके मैम्बर पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, तो वो कभी नहीं कहेगी. चाहे आप किसी भी पार्टी से जीते हों आपको वहीं रहना होगा, वरना मैंबरशिप ख़त्म होगी ये निर्णय होना ही चाहिए. वरना कोई ना कोई गलियां निकल ही जाएंगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पॉलिटिकल पार्टी को चन्दे के मामले में भी कहा कि जोधपुर में मैंने एक कार्यक्रम में सबके सामने कहा कि लम्बे समय से मेरी इच्छा थी मैं सीजेआई से मिलूं. कुछ रास्ता निकले कि स्टेट फंडिंग हो. गहलोत ने कहा चार सुप्रीम कोर्ट जज ने जब प्रेस कांफ्रेंस करके यह कह दिया कि आज लोकतंत्र के लिए ख़तरा है, तो पूरा देश हिल गया. इसलिए मेरा मानना है कि दल बदल के मामले में पार्लियामेंट ही कोई रास्ता सुझा सकती है. 

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स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी: 
उद्घाटन सत्र में राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने कहा निर्वाचन आयोग के सुझाव को ऐसे फैसलों में तरजीह दी जानी चाहिए. राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष इसे तय करें. बल्कि स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी है. राज्यसभा उप सभापति हरिवंश ने कहा कि हल यह है कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बहेतर और विश्वसनीय प्रहरी है. हमे उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. उन्होंने राज्यसभा द्वारा एक मामले में 3 माह में फैसला देने बाद में उससे सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला देने और फिर दूसरा फैसला देने के कारण मामला अटकने की बात कही और दोहराया की समय सीमा तय होना बहुत जरूरी है. 

डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए:
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की सेमीनार में विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने लोकतंत्र में डिस क्वालिफाई करने का यह अधिकार दिया गया है. जिस पार्टी की विचारधारा है उस पार्टी की विचारधारा के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधि को वोट दिया जाता है. डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए. दलबदल को लेकर बहुत सारे निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं. जन प्रतिनिधि अपने निजी स्वार्थ के कारण मूल पार्टी को बदल रहा है. इस बारे में जो अधिकार मिलना चाहिए वह पार्टी के अध्यक्ष को मिलना चाहिए ना कि विधानसभा के अध्यक्ष को ऐसा अधिकार मिलना चाहिए. 

कई दिग्गज रहे मौजूद:
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष और सीपीए राजस्थान शाखा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सीपीए राजस्थान शाखा के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सीपीए राजस्थान शाखा उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, सीपीए राजस्थान शाखा सचिव और विधायक संयम लोढ़ा मंच पर मौजूद रहे. 
 

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जयपुर: एसएचओ विष्णु दत्त आत्महत्या मामले की CBI जांच होगी. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फाइल पर मुहर लगा दी है. सीएम गहलोत ने CBI जांच के अनुशंसा पत्र पर मुहर लगाई. विष्णु दत्त के परिजनों के मुताबिक CBI जांच का फैसला लिया. 

आपको बता दें कि चूरू के राजगढ़ पुलिस थाने के थानाधिकारी विष्णु दत्त विश्नोई द्वारा 23 मई को की गई आत्महत्या के प्रकरण की जांच सीबीआई से करवाए जाने पर सीएम अशोक गहलोत ने सैद्धान्तिक सहमति दे दी है. 

अब पीड़ित परिजनों को यह विकल्प दिया गया है कि वे चाहें तो केस की जांच सीबी सीआईडी कर सकती है, वे चाहें तो न्यायिक जांच भी हो सकती है और यदि वे चाहते हैं कि मामले की जांच सीबीआई करे तो इस पर भी सरकार को कोई आपत्ति नहीं है. 

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जयपुर: उच्च शिक्षा में परीक्षा आयोजन को लेकर सरकार के निर्देश के बाद राजस्थान विश्व विद्यालय ने अपनी तैयारियां तेज कर दी है. 2 जून को सरकार ने जुलाई के दूसरे सप्ताह में परीक्षा आयोजन के निर्देश दिए हैं तो वहीं राविवि कुलपति आरके कोठारी ने परीक्षा नियंत्रक सहित कमेटी के साथ बैठक कर परीक्षाओं को आयोजन को लेकर कवायद शुरू कर दी है. 

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20 नये परीक्षा केंद्रों को भी चिन्हित कर लिया गया:
राजस्थान विश्व विद्यालय में यूजी फाइनल, पीजी फाइनल और सेमेस्टर फाइनल की परीक्षा 13 जुलाई से शुरू हो जाएंगी. राविवि ने करीब 160 परीक्षा केन्द्रों को सुरक्षा की दृष्टि से सही पाया है. साथ ही 20 नये परीक्षा केन्द्रों को भी चिन्हित कर लिया गया. जल्द ही राविवि टीम इन सेंटरों का दौरा करेगी और टीम की हरी झंडी के बाद सेंटर्स को फाइनल किया जाएगा. परीक्षा से पहले सभी विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रिनिंग की जाएगी तो वहीं फेस मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ध्यान रखा जाएगा. इसके साथ ही हर परीक्षा के बाद सेंटर को सेनेटाइज किया जाएगा. 

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सिर्फ नियमित विद्यार्थियों को ही प्रमोट किया जाएगा: 
कुलपति आरके कोठारी ने कहा की सरकार के निर्देशानुसार परीक्षा आयोजित करवाई जाएगी. साथ ही यूजी, पीजी और सेमेस्टर में फाइनल के अलावा सभी विद्यार्थियों को प्रमोट किया जाएगा और परिस्थितियां अनुकुल होने पर अगस्त में इनकी परीक्षा आयोजित हो सकती है. साथ ही कुलपति आरके कोठारी ने बताया कि सिर्फ नियमित विद्यार्थियों को ही प्रमोट किया जाएगा. स्वयंपाठी विद्यार्थियों का औसत परिणाम बहुत कम रहता है. ऐसे में उनको प्रमोट करना संभव नहीं है. ऐसे में जब भी परिस्थितियां अनुकुल होगी तब इनकी परीक्षा का आयोजन करवाया जाएगा. 

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जयपुर: राजधानी जयपुर शहर में एसीबी ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया. इस दौरान एसीबी की टीम ने जीपीएफ विभाग के एक कर्मचारी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है. GPF विभाग के कनिष्ठ लिपिक रघुवीर सिंह ने परिवादी से उसके GPF का बिल बनाने की एवज़ में 2500 रुपया की रिश्वत मांगी थी. परिवादी का क़रीब 10 लाख रुपये से ज़्यादा क़ा बिल बन रहा था. इसके लिए आरोपी रघुबीर ने परिवादी से पहले 500 रुपये ले लिए. बावजूद इसके आरोपी रघुवीर ने परिवादी का बिल नहीं बनाया.

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एसीबी की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही: 
परिवादी काफी समय से विभाग के चक्कर काट रहा था. जब कोई बात नहीं बनी तो परिवादी ने एसीबी में आरोपी बाबू की शिकायत कर दी. एसीबी ने पूरे मामले का सत्यापन कराया जो कि सही पाया गया. योजना के तहत एसीबी की टीम ने आज आरोपी बाबू को सांगानेर स्थित नगर निगम के ज़ोन कार्यालय के पास ढाई हज़ार रुपया की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ़्तार कर लिया. बहरहाल एसीबी की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है. 

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जयपुर: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना खरीफ-2019 अन्तर्गत प्रदेश में 13 लाख पात्र बीमित किसानों को 2 हजार 261 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण किया जा चुका है. यह कुल क्लेम का 91 प्रतिशत है. कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया ने बताया कि फसल बीमा योजना अन्तर्गत खरीफ-2019 में कुल 2 हजार 496 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का आंकलन किया गया था, जिसमें से 2 हजार 261 करोड़ रुपए के क्लेम का वितरण किया जा चुका है. यह कुल क्लेम का लगभग 91 प्रतिशत है, जिससे 13 लाख बीमित काश्तकार लाभान्वित हुए हैं.

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राज्य के 14 जिलों में खरीफ-2019 का पूरा क्लेम वितरित कर दिया गया:
कटारिया ने बताया कि राज्य के 14 जिलों में खरीफ-2019 का पूरा क्लेम वितरित कर दिया गया है. अन्य 14 जिलों में भी कुल देय बीमा क्लेम में से अधिकांश का भुगतान किया जा चुका है. शेष पांच जिलों के बकाया बीमा क्लेम के भुगतान की कार्यवाही की जा रही है, जिससे जल्द पात्र बीमित काश्तकारों को उनका बीमा क्लेम मिल जाएगा. 

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बीमा कम्पनियों से 2 हजार 386 करोड़ रुपए का भुगतान करवाया: 
कृषि मंत्री ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य सरकार के विशेष प्रयासों से 13 लाख बीमित किसानों को बीमा कम्पनियों से 2 हजार 386 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का भुगतान करवाया गया है. कृषि मंत्री कटारिया ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अन्तर्गत 1 जनवरी 2019 से अब तक 6 हजार 41 करोड़ रुपए के बीमा क्लेम का वितरण किया जा चुका है, जिससे 42 लाख 31 हजार पात्र बीमित किसानों को राहत मिली है. 


 

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नई दिल्ली: कोरोना संकट के चलते दिल्ली-एनसीआर की सीमाएं सील होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इसी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर सुनावाई करते हुए कोर्ट ने बुधवार को एनसीआर क्षेत्र के लिए कॉमन पास बनाने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि एक पास जारी हो जिसकी हरियाणा, यूपी और दिल्ली में मान्यता हो. इस बारे में कोर्ट ने 1 हफ्ते में कदम उठाने को कहा है. 

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एनसीआर क्षेत्र में आवाजाही के लिए एक कॉमन पोर्टल बनाया जाए:
एनसीआर के लोगों की समस्याओं को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनसीआर क्षेत्र में आवाजाही के लिए एक कॉमन पोर्टल बनाया जाए. इसके लिए सभी स्टेक होल्डर मीटिंग करें और एनसीआर क्षेत्र के लिए कॉमन पास जारी करें, जिससे एक ही पास से पूरे एनसीआर में आवाजाही हो सके. कोर्ट ने कहा कि सभी राज्य इसके लिए एक समान नीति तैयार करें. इसके लिए तीनो राज्यों की बैठक कराई जाए.

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कोरोना के लगातार बढ़ रहे मामलों को चलते लिया फैसला:
बता दें कि सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में घोषणा कर के बताया कि दिल्ली बॉर्डर अब एक हफ्ते के लिए सील किए जा रहे हैं. उन्होंने साथ में यह तर्क भी दिया कि जिस तरह से कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं उसको देखते हुए यह फैसला लिया जा रहा है.  

नामचीन स्कूल ने बच्चों की जान को डाला खतरे में...बिना अनुमति के स्कूल खोल करा दी 9 वीं और 11 वीं कक्षा की पूरक परीक्षा

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अजमेर: जिले के नामचीन माहेश्वरी पब्लिक स्कूल ने कोविड-19 के नियमों को ताक में रखते हुए और सरकार के आदेशों की अवहेलना करते हुए आज स्कूल खोल करके 9वीं और 11 वीं कक्षा के छात्रों की पूरक परीक्षा का आयोजन कर दिया. मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन हरकत में आया और स्कूल पहुंचकर कार्रवाई को अंजाम दिया. वहीं परीक्षाओं को बीच में उठा कर सभी छात्रों को पुनः घर की तरफ रवाना कर दिया. अब मामले की पड़ताल जारी है. 

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मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन हरकत में आया: 
अजमेर जिले में कोरोना का प्रकोप अभी भी जारी है और शहरवासियों में इसका खौफ अभी भी देखने को मिल रहा है. लेकिन अजमेर का एक जाना माना नामचीन माहेश्वरी पब्लिक स्कूल इससे डर नहीं रहा ना ही उसे अपने स्कूल के विद्यार्थियों की जान माल के खतरे का डर सताता है. क्योंकि आज उसने कोविड-19 के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 9वी और 11वीं कक्षा के छात्रों की पूरक परीक्षा का आयोजन करवा दिया. मामला उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग और प्रशासन हरकत में आया और शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल परिसर पर पहुंचे. वहीं मौके पर क्रिस्चनगंज थाना पुलिस को भी बुलाया गया. जब अधिकारी वहां पर पहुचे तो स्कूल प्रशासन हरकत में आया और तुरंत बच्चों की परीक्षा रुकवा कर कक्षों से बाहर निकाल दिया गया और घरों की तरफ रवाना कर दिया. जब फर्स्ट इंडिया की टीम के द्वारा स्कूल प्राचार्य से बात करने को कोशिश की तो प्राचार्य ने कहा अभिभावकों के दबाव के चलते हमें यह परीक्षा करवानी पड़ी है और हमारे पास इस परीक्षा को करवाने की अनुमति भी है. लेकिन सोचने वाली बात यह है कि एक इतने बड़े स्कूल के प्राचार्य को झूठ बोलना कितना शोभा देता है.

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शिक्षा अधिकारी के द्वारा जांच टीम गठित: 
वहीं अभी तक सरकार के द्वारा स्कूलों को खोलने की अनुमति नहीं दी गयी है उसके बाबजूद अजमेर का एक नामचीन स्कूल अपने ही दम पर स्कूल को खोलकर परीक्षा आयोजित करवा लेता है. यह विषय सवालों के घेरे में खड़ा हो गया है. वहीं शिक्षा अधिकारी के द्वारा जांच टीम गठित करके पड़ताल शुरू कर दी है. अगर प्रशासन स्कूल प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाता है तो पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी. देखना अब यह होगा कि बच्चों की जान को खतरे में डालने पर स्कूल प्रशासन पर अब किस तरह की कार्यवाही की जाती है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिए अजमेर से शुभम जैन की रिपोर्ट

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जयपुर: राजस्थान में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. पिछले 12 घंटे में प्रदेश में 68 नए पॉजिटिव केस सामने आए हैं. इसमें सर्वाधिक 16 मरीज भरतपुर में चिन्हित किए गए हैं. इसके अलावा चूरू में 12, जयपुर में 12, झुंझुनूं 5, जोधपुर 12, कोटा 7, नागौर में एक और सवाईमाधोपुर में एक मरीज पॉजिटिव मिला है. ऐसे में अब प्रदेश में पॉजिटिव मरीजों का ग्राफ 9720 पहुंच गया है. वहीं कोरोना से अब तक 209 लोगों ने दम तोड़ दिया है. 

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अस्पताल में उपचाररत कुल एक्टिव मरीज 2692:
वहीं राहत वाली खबर यह है कि अब तक प्रदेश में कुल 6819 पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है. इनमें 6267 मरीजों को अस्पताल में से डिस्चार्ज किया जा चुका है. ऐसे में  अब अस्पताल में उपचाररत कुल एक्टिव मरीजों की संख्या 2692 है. वहीं प्रदेश में कुल कोरोना पॉजिटिव प्रवासियों की संख्या 2767 है. 

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भरतपुर जिला अब कोरोना का नया हॉटस्पॉट बन गया: 
राज्य का भरतपुर जिला अब कोरोना का नया हॉटस्पॉट बन गया है. यहां पिछले 24 घंटे में 104 नए पॉजिटिव केस सामने आए. इसके बाद जिले में कुल संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर और 471 तक पहुंच गया है. भरतपुर अब राजस्थान के सबसे ज्यादा संक्रमित 10 जिलों में सातवें नंबर पर पहुंच गया है. इनमें जयपुर 2138, जोधपुर 1685, उदयपुर 568, पाली 549, कोटा 501, नागौर 476 हैं. 

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नई दिल्ली: केरल के साइलेंट वैली फॉरेस्ट में एक गर्भवती हथिनी की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने केरल के मल्लपुरम में एक हाथी की हत्या के मामले पर गंभीरता दिखाई है. हम सही तरीके से जांच करने और अपराधियों को पकड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे. हाथियों को पटाखा खिलाना और मारना भारतीय संस्कृति नहीं है.

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घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश: 
वहीं केंद्र सरकार ने इस पर गंभीर रुख अपनाते हुए राज्य से रिपोर्ट मांगी है. सीएम पिनराई विजयन ने कहा कि पलक्कड जिले के मन्नारकड़ वन मंडल में हथनी की मौत मामले में प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और पुलिस को घटना के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने घटना पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि केंद्र ने इस पर पूरी रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई थी:
गौरतलब है कि 27 मई को केरल के मल्लपुरम से इंसानियत को झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई थी. यहां एक गर्भवती मादा हथिनी खाने की तलाश में जंगल के पास वाले गांव पहुंच गई, लेकिन वहां शरारती तत्वों ने अनन्नास में पटाखे भरकर हथिनी को खिला दिया, जिससे उसका मुंह और इससे हथिनी के मसूड़े बुरी तरह फट गए और वह खा भी नहीं पा रही थी. बाद में उसकी मौत हो गई. बेजुबान जानवर के साथ हुई इस क्रूरता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों में जबरदस्त गुस्सा है. 

                            
                                                             

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