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VIDEO: राजस्थान विधानसभा सेमीनार में सीएम गहलोत ने की राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज राजनीतिक दल बदल को लेकर गम्भीर टिप्पणी करते हुए कहा कि संसद ही दल बदल को लेकर कोई अहम निर्णय ले सकती है. किसी पार्टी से चुनाव जीता हुआ सदस्य यदि दलबदल करता है तो वह पार्टी में नहीं रहे या सदस्य नहीं रहे, ऐसा नियम होना चाहिए. ...वरना गलियां तो कई निकल जाएंगी. दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर विधानसभा में हुई सेमिनार में उन्होंने यह बात कही. 

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दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए: 
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी की पहल पर विधानसभा में आज दसवीं अनुसूची के तहत अध्यक्ष की भूमिका को लेकर सेमिनार हुई इसमें उद्घाटन और पहले सत्र में दल बदल के ज्वलंत विषय को लेकर अपने विचार व्यक्त किए गए. इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि आज देश के हालात सब देख रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चार जज भी कह चुके हैं कि लोकतंत्र ख़तरे में है...तो संसद को ही इसके लिए उपाय करने होंगे. वहीं राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने उदाहरण देते हुए कहा कि 1 दिन में 5-5 बार दल बदल की घटनाएं भी देखी गई हैं. उन्होंने इसे बड़ी चिन्ता का हल बताते हुए कहा कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बेहतर और विश्वसनीय प्रहरी है..और हमें उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. 

दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं:
इस दौरान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा हम दल बदल कानून का 35 साल का सफर देख रहे हैं. दल बदल का कानून बनने के बाद भी ऐसी कई घटनाएं हुईं हैं...कि जनप्रतिनिधियों ने जिस पार्टी से वे चुने गए हों, उसे छोड़कर दल बदला है गहलोत ने कहा आज यह भी बहस यह छिड़ी है कि स्पीकर के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी गई. यह बहुत बड़ा डिस्कशन का विषय है. कई बार मुख्यमंत्री को शपथ दिला दी जाती है. लेकिन उसके बाद भी सुप्रीम कोर्ट फैसले देता आया है. मुख्यमंत्री गहलोत बोले यूपी और बिहार में भी ऐसा हुआ है. पार्लियामेंट को यह अधिकार है कि यदि सुप्रीम कोर्ट से ऐसा कोई फैसला आए तो वह संविधान में संशोधन कर सकता है. 

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गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला: 
मुख्यमंत्री ने कहा कोई न कोई पॉलिटिकल पार्टी से आगे आकर ही जनप्रतिनिधि को अध्यक्ष बनने का मिलता मौक़ा मिलता है. उसे अपनी शपथ के आधार पर ही फैसला लेना होता है. फिर चाहे इलेक्शन कमीशन हो, हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जज हों. संविधान की जो भी शपथ ली जाती है उसके बाद जिम्मेदारी बनती है कि वह अपने कॉन्शियस से फैसला कर सकें. लेकिन यदि वह अपने बैकग्राउंड के भाव रखेगा तो फिर शपथ किस बात की है. गहलोत ने कहा ये बहुत ही महीन मामला है कि अध्यक्ष किस राजनीतिक दल से आता है जब ये सवाल उठते हैं और फिर बहस चलती है कि वह फला पॉलिटिकल पार्टी से है. शपथ लेने के बाद अपने कॉन्शियस से ही उन्हें फैसला करना चाहिए.

विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा: 
उन्होंने कहा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट में जजों पर फिर भी आरोप लगते हैं. पिछले पांच-छह महीने में देश में जो माहौल बना है कि संविधान बचाओ...यदि संविधान बच जाता है तो ये बातें नहीं होतीं. जिस प्रकार के हालात देशभर में बने हुए हैं सोचना चाहिए कि संविधान की मूल भावना ही नहीं रहेगी. तो ये सब बातें किस काम की हैं. मुख्यमंत्री ने कहा मैं समझता हूँ कि विमर्श से कोई न कोई ऐसा रास्ता निकलेगा जिससे दल बदल के बाद हर बार कोई न कोई गली निकल जाने के जो आरोप लगते हैं. उसका स्थाई समाधान हो सकेगा. दल बदल के लिए पहले एक तिहाई सदस्य का प्रावधान था. बाद में वह दो तिहाई हो गया. 

दल नहीं बदल सके ऐसा कानून बने:
उन्होंने कहा चाहे कोई भी पॉलिटिकल पार्टी का व्यक्ति हो वह किसी भी कीमत पर दल नहीं बदल सकता. यदि ऐसा कोई कानून बने,तो अलग बात है. वरना गलियां निकलती जाएंगी और ये रुकने वाला नहीं है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा पॉलिटिकल पार्टी खुद कैसे फैसला करेंगी. क्योंकि उसके मैम्बर पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, तो वो कभी नहीं कहेगी. चाहे आप किसी भी पार्टी से जीते हों आपको वहीं रहना होगा, वरना मैंबरशिप ख़त्म होगी ये निर्णय होना ही चाहिए. वरना कोई ना कोई गलियां निकल ही जाएंगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पॉलिटिकल पार्टी को चन्दे के मामले में भी कहा कि जोधपुर में मैंने एक कार्यक्रम में सबके सामने कहा कि लम्बे समय से मेरी इच्छा थी मैं सीजेआई से मिलूं. कुछ रास्ता निकले कि स्टेट फंडिंग हो. गहलोत ने कहा चार सुप्रीम कोर्ट जज ने जब प्रेस कांफ्रेंस करके यह कह दिया कि आज लोकतंत्र के लिए ख़तरा है, तो पूरा देश हिल गया. इसलिए मेरा मानना है कि दल बदल के मामले में पार्लियामेंट ही कोई रास्ता सुझा सकती है. 

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स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी: 
उद्घाटन सत्र में राज्यसभा उपसभापति हरिवंश ने कहा निर्वाचन आयोग के सुझाव को ऐसे फैसलों में तरजीह दी जानी चाहिए. राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष इसे तय करें. बल्कि स्पीकर के फैसले के लिए समय सीमा तय किया जाना जरूरी है. राज्यसभा उप सभापति हरिवंश ने कहा कि हल यह है कि स्पीकर ही संसदीय लोकतंत्र प्रणाली का सबसे बहेतर और विश्वसनीय प्रहरी है. हमे उसे मज़बूत करने की ज़रूरत है. उन्होंने राज्यसभा द्वारा एक मामले में 3 माह में फैसला देने बाद में उससे सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला देने और फिर दूसरा फैसला देने के कारण मामला अटकने की बात कही और दोहराया की समय सीमा तय होना बहुत जरूरी है. 

डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए:
राष्ट्रमंडल संसदीय संघ की सेमीनार में विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर सीपी जोशी ने लोकतंत्र में डिस क्वालिफाई करने का यह अधिकार दिया गया है. जिस पार्टी की विचारधारा है उस पार्टी की विचारधारा के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधि को वोट दिया जाता है. डिसक्वालीफाई किए जाने के संबंध में पार्टी अध्यक्ष को अधिकार होना चाहिए. दलबदल को लेकर बहुत सारे निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं. जन प्रतिनिधि अपने निजी स्वार्थ के कारण मूल पार्टी को बदल रहा है. इस बारे में जो अधिकार मिलना चाहिए वह पार्टी के अध्यक्ष को मिलना चाहिए ना कि विधानसभा के अध्यक्ष को ऐसा अधिकार मिलना चाहिए. 

कई दिग्गज रहे मौजूद:
इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष और सीपीए राजस्थान शाखा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी, सीपीए राजस्थान शाखा के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सीपीए राजस्थान शाखा उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया, सीपीए राजस्थान शाखा सचिव और विधायक संयम लोढ़ा मंच पर मौजूद रहे. 
 

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स्कूल फीस मामले में अब सरकार भी एकलपीठ के आदेश को देगी चुनौती

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जयपुर: निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 फिसदी वसूल करने की छूट देने के आदेश को अब राज्य सरकार भी खण्डपीठ में चुनौती देगी. राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने हाईकोर्ट में सुनवाई के दोरान ये जानकारी दी है. सरकार के अपील करने के लिए समय मांगे जाने पर मुख्य न्यायाधीश की खण्डपीठ ने मामले की सुनवाई 30 सितंबर को तय की है. इसके साथ ही खण्डपीठ ने निशा फाउण्डेशन सहित 5 अन्य की ओर से पक्षकार बनने के प्रार्थना पत्रों को भी मंजूर कर दिया है. 

निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का सत्तर फीसदी वसूलने की छूट दी थी: 
राजस्थान हाईकोर्ट ने 16 सितंबर को  प्रमुख माध्यमिक शिक्षा सचिव, माध्यमिक शिक्षा निदेशक और सोसायटी ऑफ कैथोलिक एजुकेशन्स इंस्टीट्यूशन इन राजस्थान को नोटिस जारी जवाब मांगा था. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने निजी स्कूलों को ट्यूशन फीस का सत्तर फीसदी वसूलने की छूट दी थी. जिसके खिलाफ अधिवक्ता सुनील समदडिया ने अपील दायर कर कहा कि राज्य सरकार ने गत 9 अप्रैल और 7 जुलाई को आदेश जारी कर स्कूल खुलने तक फीस को स्थगित कर अभिभावकों को राहत दी थी.

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फाइनल रिलीफ को अंतरिम आदेश में नहीं दिया जा सकता:
वहीं एकलपीठ ने गत 7 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी कर स्कूल बंद रहने और प्रभावी शिक्षा नहीं देने के बावजूद स्कूलों को ट्यूशन फीस का 70 फीसदी हिस्सा वसूलने की छूट दे दी. जबकि नियमानुसार याचिका में मांगी गई फाइनल रिलीफ को अंतरिम आदेश में नहीं दिया जा सकता. इसके अलावा एकलपीठ ने प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन को मुख्य याचिकाकर्ता मानते हुए आदेश दिया था, जबकि यह एसोसिएशन पंजीकृत ही नहीं है. मामले पर अब 30 सितंबर को सुनवाई होगी. 

VIDEO: विधायकों के लिए बनेंगे 160 बहुमंजिला आवास, आवासन मंडल ने की प्रोजेक्ट की आज से शुरुआत

जयपुर: विधायकों के लिए बहुमंजिला आवास निर्माण के लिए आज विधायक नगर पश्चिम में मौजूदा संरचनाओं को तोड़ने का कार्य शुरू किया गया. आवासन मंडल की ओर से यहां 160 बहुमंजिला आवासों का निर्माण विधायकों के लिए किया जाएगा. 

पुराने स्ट्रक्चर तोड़ने की आज से शुरुआत: 
करीब 250 करोड़ रुपए के इस प्रोजेक्ट की शुरुआत के तौर पर मौजूदा संरचनाओं को हटाने के काम की शुरुआत के दौरान आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा और आवासन मंडल के अन्य अधिकारी मौजूद रहे आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने प्रोजेक्ट की विस्तार से जानकारी दी.

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विधायकों के लिए बड़ा पार्क भी विकसित किया जाएगा:
आवासन आयुक्त पवन अरोड़ा ने प्रोजेक्ट की विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि यहां विधायकों के लिए बड़ा पार्क भी विकसित किया जाएगा. इसके अलावा बहुमंजिला आवासों के हर टावर में विधायकों से मिलने वाले आगंतुकों की भी व्यवस्था की जाएगी.
 

कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

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नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टम अमरिंदर सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जन्मस्थान खटकर कलां गांव में धरना  दे रहे हैं. उनके साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए हैं. धरना शुरू करने से पहले सीएम कैप्टम अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी.

विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक': 
इस दौरान उन्होंने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक' बताया है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंताएं जाहिर करने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों के लागू होने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा. 

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राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान: 
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानून को किसानों के मौत का फरमान बताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान है. उनकी आवाज को संसद और संसद के बाहर दबाया जा रहा है. ये सबूत है कि देश में लोकतंत्र मर चुका है. 

कांग्रेस सांसद ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: 
इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

SMS सहित राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी क्यों ना शुरू हो कोरोना इलाज - हाईकोर्ट

जयपुर: राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएमएस सहित विभिन्न जिलों के सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज करने...कोरोना से जुड़े सभी टेस्ट और इलाज निशुल्क करने, राज्य के निजी अस्पतालों और होटलों को सरकार के नियत्रंण में लेने को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी किया है. मोहनसिंह की ओर से दायर जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश इन्द्रजीत महांति और जस्टिस प्रकाश गुप्ता की खण्डपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, एसीएस चिकित्सा और एसएमएस अधीक्षक को नोटिस जारी किये है. याचिका में बीपीएल, गरीब और जरूरमंदों कोरोना मरीजों का निशुल्क इलाज करने की गुहार की गयी है. 

प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे: 
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समीर जैन ने अदालत को बताया कि देश और प्रदेश में लगातार कोरोना महामारी का प्रभाव बढ़ रहा है. राज्य में प्रतिदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या कई गुना बढ़ रही है. प्रतिदिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों के चलते जयपुर सहित प्रदेश के कई स्थानों पर मरीजों को अस्पताल में बैड नहीं मिल रहे हैं. राज्य के सबसे बड़े एसएमएस सहित कई जिलों के सरकारी अस्पतालों को सरकार ने कोरोना फ्री अस्पताल के लिए आरक्षित कर रखे हैं. जिसके चलते इन अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है. जबकि वर्तमान में बिगड़ते हालात के चलते सरकार को एसएमएस सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज शुरू किया जाना चाहिए. 

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सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए:
साथ ही सरकार को सभी निजी अस्पतालों को अपने अधीन नियत्रंण में लेकर युद्ध स्तर पर कार्य किया जाना चाहिए. आईसोलेशन के लिए भी सरकार को निजी होटलों को अपने नियत्रंण में लिया जाना चाहिए. याचिका में कहा गया कि निजी और सरकारी अस्पतालों में बैड की व्यवस्था नहीं होने से बीपीएल, गरीब और जरूरतमंदों लोग को होम आईसोलेशन में ही इलाज कराना पड़ रहा है जो उनके लिए संभव नहीं है. याचिका मे राज्यभर में कोरोना मरीजों की सहायता के लिए हैल्थ सेंटर बनाने की भी गुहार लगायी गयी है. बहस सुनने के बाद खण्डपीठ ने मुख्य सचिव सहित अन्य को नोटिस जारी कर 12 अक्टूबर तक जवाब पेश करने के आदेश दिये है. 

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

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नई दिल्ली: कृषि बिल के खिलाफ सड़क पर जारी प्रदर्शन का मसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

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कर्नाटक में जदएस के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली:
कर्नाटक में भी आज कृषि बिल का विरोध देखने को मिल रहा है. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली, उन्हें पुलिस ने लक्ष्मी थिएटर सर्कल पर रोक दिया. कृषि कानून, भूमि सुधार अध्यादेश, कृषि उपज मंडी समिति में संशोधन और श्रम कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. 

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी:
बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है. 

VIDEO: राजस्थान में खतरे में बघेरों की जान! आखिर कब जागेगा वन विभाग

जयपुर: प्रदेश में एक ओर जहां बघेरों का कुनबा बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर जंगल में भोजन के प्रोपर इंतजाम न होने से बघेरों की आबादी क्षेत्र में लगातार घुसपैठ बढ़ रही है, जोकि इनके लिए खतरनाक साबित हो रही है. जिम्मेदार बघेरों की समस्याओं से बेखबर है. वन विभाग के आंकड़े देखे तो राज्य में 8 साल में करीब दो दर्जन बघेरों को लोगों ने घेरकर मार दिया है. 

- प्रदेश भर में 600 से ज्यादा बघेरे हैं.

- 250 से ज्यादा सेंचुरी तो 300 से ज्यादा जंगल में कर रहे प्रवास.

- बीते 5 साल में 35 से 40 फीसदी बढ़ी संख्या.  

- वाहन की टक्कर, करंट या फंदा लगने, आपसी टकराव, लोगों ने घेरकर मारने, शिकार सहित कई वजह से बीते 8 साल में 300 से ज्यादा बघेरों की मौत हुई है. 

प्रदेशभर के फॉरेस्ट रिजर्व और जंगलों में बघेरों की आबादी पांच साल में 35 से 40 फीसदी तक बढ़ी है, लेकिन सरकार और अफसर ने इनके प्रे बेस यानी सुरक्षा, प्रवास और भोजन के इंतजाम ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. जो इनके लिए काफी नुकसान दायक साबित हो रहा है. यह लेपर्ड टेरिटोरियल फाइट और भूख-प्यास से व्याकुल होकर आए दिन आबादी क्षेत्र में जा रहे है, जहां या तो इनको मार दिया जाता है या फिर शिकारियों के फंदे में फंस जाते हैं. अजमेर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, प्रतापगढ़, उदयपुर समेत कई जिलों में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. राजधानी से जुड़े जंगल में इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है. जिसे रोकना विभाग के लिए चुनौती साबित हो रहा है. वन विभाग के अफसरों ने कई बार इनको लेकर मंथन भी किए, योजनाएं भी बनाई, लेकिन वो कभी फाइलों से बाहर ही नहीं निकल पाई. जिसका खामियाजा वन्यजीवों को भुगतना पड़ रहा है.  

बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई: 
पिछली राज्य सरकार ने वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन और ट्यूरिज्म के रूप शुरू विकसित करने के लिए लेपर्ड प्रोजेक्ट की शुरूआत की. इसमें झालाना, बस्सी सीतामाता, खेतड़ी बांसिलायल, माउंटआबू और कुंभलगढ(रावली टॉडगढ) अभयारण्य को शामिल किया गया,,, यहां ग्रासलैंड, चारदीवारी, सुरक्षा, सर्विलांस समेत कई सुविधाएं विकसित करनी थी, लेकिन फंड नहीं मिलने से झालाना के अलावा कहीं भी काम पूरा नहीं हुआ. सरकार ने कोई रूचि भी नहीं दिखाई जिससे बघेरों के लिए सौगात अधूरी ही रह गई है.

झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे: 
बघेरे के प्रवास से देशभर से ख्याति पा चुके झालाना जंगल में भी आए दिन बघेरे बेघर हो रहे हैं. यहां वर्चस्व की लड़ाई और भोजन की कमी है. जिससे आए दिन यहां से बघेरे जंगल से आबादी इलाकों में जा रहे हैं. 20 वर्ग किलोमीटर के इस जंगल में 30 बघेरे प्रवास कर रहे हैं. इस ओर भी जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है. 

प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही:
जंगलात महकमें के अधिकारी भी मानते है कि प्रे बेस की कमी लेपर्ड्स पर भारी पड़ रही है. अब विभाग नए लेपर्ड रिजर्व तैयार करने के साथ ही जो फॉरेस्ट रिजर्व हैं उनमें प्रे बेस बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. उम्मीद की जानी चाहिए कि जल्द ही लेपर्ड्स के लिए माकूल व्यवस्था करने में वन विभाग कामयाब होगा. 
 

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

प्रदेश कांग्रेस का पैदल मार्च हुआ स्थगित, अब दो ही नेता सौंपेंगे राज्यपाल को ज्ञापन

जयपुर: कृषि अध्यादेशों के खिलाफ 24 सितंबर से शुरू हुए कांग्रेस के विरोध पखवाड़े के तहत आज प्रस्तावित पैदल मार्च अब स्थगित कर दिया गया है. यह पैदल मार्च कोरोना संक्रमण के कारण जयपुर में लगाई गई धारा 144 के चलते स्थगित किया गया है. 

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जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया:  
प्रदेश कांग्रेस ने ट्वीट करके इसकी जानकारी दी. पीसीसी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि जयपुर में धारा 144 के चलते पैदल मार्च स्थगित किया गया है. अब केवल दो ही नेता सोमवार दोपहर 12:30 बजे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात कर उन्हें राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपेंगे. 

डोटासरा और सीएम गहलोत सौंप सकते हैं ज्ञापन:
बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंप सकते हैं. गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से लागू  किए गए कृषि अध्यादेश के खिलाफ कांग्रेस ने 24 सितंबर से 10 अक्टूबर तक विरोध पखवाड़ा शुरू किया है जिसके तहत 28 सितंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से राजभवन तक पैदल मार्च रखा गया था. 

VIDEO: राजस्थान पुलिस ने घूसखोरी में तोड़ा रिकॉर्ड, पिछले 4 सालों से नंबर 1 पर कायम

जयपुर: प्रदेश में इन दिनों एंटी करप्शन ब्यूरो बड़े बड़े घूसखोरो को सलाखों के पीछे पहुंचाती जा रही है. एसीबी की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि घूसखोरी में राजस्थान पुलिस पिछले 4 सालों से  नंबर वन है. दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग, तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया है. प्रदेश की खाकी ही राजस्थान सरकार को शर्मसार कर रही है. ये सभी कार्रवाई एसीबी के डीजी डॉक्टर आलोक त्रिपाठी और एडीजी दिनेश एमएन लगातार भ्रष्टाचारियों पर एक से बढ़कर एक कार्रवाई करते हुए जा रहे हैं. 

पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल: 
एसीबी की रिपोर्ट में एक बड़ा खुलासा हुआ है पुलिस विभाग रिश्वत खोरी के धंधे में सबसे अव्वल है तो राजस्व विभाग का इस पूरे मामले में नंबर दो पर है. स्वच्छ और बेदाग छवि के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लोगों के बीच भ्रष्टाचार मुक्त माहौल पैदा करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं. वहीं दूसरी और शांति व्यवस्था स्थापित करने वाली पुलिस मुख्यमंत्री  की छवि को बदनाम करने में लगी है. हाल में ही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने एक रिपोर्ट तैयार की है. इसमें सामने आया है कि राजस्थान पुलिस के हाथ घूस की रकम से लाल-काले हुए हैं. आइये हम आपको बताते है घूसखोरी में किस विभाग का कौनसा नंबर है...

- घूसखोरी में राजस्थान पुलिस नंबर वन के रिकॉर्ड पर

- दूसरे नंबर पर राजस्व विभाग

- तीसरे नंबर पर पंचायत विभाग में तैनात कर्मचारियों और अधिकारियो ने रिकॉर्ड बनाया

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एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी के नेतृत्व में एसीबी की टीम लगातार बड़े बड़े घूसखोरों पर कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी डीजी आलोक त्रिपाठी ने सभी चौकी प्रभारियों को फ्री हेंड छोड़ रखा है. जिसके चलते एसीबी की टीम लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई करती जा है. एसीबी ने बजरी में लिप्त पुलिसकर्मियों पर भी शिकंजा कसा है. एसीबी ने अवैध वसूली करने वालों पर भी बड़ी कार्रवाई की है. एसीबी ने  कई बड़े अधिकारियो को रंगें हाथों गिरफ्तार किया है और काला धन इकट्ठा कर अकूत संपत्ति बनाने वाले अधिकारियों को भी सलाखों के पीछे पहुंचाया है. आइये अब आकड़ो के हिसाब से समझते है ट्रैप की कार्रवाइयों को...

- एसीबी ने पुलिस विभाग में पिछले 4 सालों में 263 पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते ट्रैप किया

- राजस्व विभाग में पिछले 4 सालो में 171 कर्मचारियों अधिकारियो को ट्रैप किया

- ऊर्जा विभाग में पिछले 4 सालो में 84 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- मेडिकल विभाग में पिछले 4 सालो में 52 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

- पंचायत विभाग में पिछले 4 सालो में  115 अधिकारी-कर्मचारियों को ट्रैप किया

एसीबी लगातार बजरी में लिप्त पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई करती जा रही है. एसीबी के आकड़े जारी करने के बाद ये साबित हो गया है की एसीबी कार्रवाई के बाद पुलिस का भ्रस्टाचार उजागर हुआ है.