VIDEO: सीएम गहलोत बोले, केन्द्र का राहत पैकेज नाकाफी, तात्कालिक लाभ नहीं

VIDEO: सीएम गहलोत बोले, केन्द्र का राहत पैकेज नाकाफी, तात्कालिक लाभ नहीं

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कोरोना में निराश्रित हुए बच्चों या विधवाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज को नाकाफी बताते हुए कहा है कि वे इस बारे में पीएम मोदी से अलग से बात करेंगे. गहलोत ने कहा कि राजस्थान सरकार ने डिटेल एनालिसिस के बाद कंपलीट व शानदार पैकेज दिया है, जबकि केंद्र सरकार के पैकेज का कोई तात्कालिक लाभ नहीं है. केंद्र सरकार की वैक्सीन पॉलिसी के खिलाफ आवाज उठाने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अब मोदी सरकार द्वारा अनाथ बच्चों के लिए घोषित पैकेज को डिफेक्ट बताया है. गहलोत ने कहा कि पैकेज का अर्थ होता है कि जरूरतमंदों को चाहे वे अनाथ बच्चे हो या फिर विधवा, तुरंत राहत पहुंचाई जाए. कोरोना महामारी में अनाथ बच्चों व विधवाओं के लिए राजस्थान सरकार ने शानदार पैकेज घोषित किया है, लेकिन केंद्र का पैकेज नाकाफी है. इसमें विधवाओं के लिए तो कोई घोषणा ही नहीं है.

आखिर राजस्थान सरकार व केंद्र सरकार के पैकेज में क्या है यह भी जान लेते है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दो बार मंत्रिमंडल की बैठक करके तथा मंत्रियों व अधिकारियों से सलाह करने के बाद एक कंपलीट पैकेज तेयार किया. इसमें अनाथ बच्चों का भी ध्यान रखा गया और उन महिलाओं का भी जिन्होंने अपने पति को खोया और अब बच्चों के पालन पोषण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई.

गहलोत सरकार का अनाथ बच्चों के लिए पैकेज:
-एक लाख रुपए की एकमुश्त सहायता तत्काल दी जाएगी
-18 साल की उम्र तक सरकार हर महीने 2500 रुपए मिलेंगे
-18 साल की उम्र पूरी होने पर एकमुश्त 5 लाख दिए जाएंगे
-12वीं तक पढ़ाई आवासीय विद्यालय या छात्रावास के जरिए सरकार फ्री कराएगी
-कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राओं को सरकार हॉस्टल में प्रवेश
-कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों को आवासीय सुविधा के लिए अम्बेडकर DBT वाउचर योजना का लाभ
-बेरोजगार युवाओं को मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत बेरोजगारी भत्ता

मुख्यमंत्री ने विधवाओं और उसके बच्चों के लिए भी अहम फैसले किए हैं. कोरोना से जिन महिलाओं के पति की मृत्यु हो गई और वह विधवा हो गई उनके लिए भी इस योजना में सहायता का प्रावधान रखा है. इसके तहत विधवा महिला को एकमुश्त एक लाख रुपए की राशि तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही 1500 रुपए महीना पेंशन दी जाएगी. ये पेंशन सभी आयु की विधवाओं को दी जाएगी. इन विधवा महिला के अगर बच्चे है तो उनके लिए अलग से 1000 रुपए प्रतिमाह और स्कूल की किताबें और ड्रेस खरीदने के लिए सालाना 2000 रुपए दिए जाएंगे.

गहलोत ने दिया विधवा महिलाओं को संबल :
-विधवा महिलाओं को मिलेंगी ये सुविधाएं
-एक लाख रुपए की एकमुश्त सहायता तत्काली दी जाएगी
-1500 रुपए प्रतिमाह विधवा पेंशन मिलेगी सरकार से
-प्रतिमाह प्रति बच्चें के हिसाब से 1000 रुपए की सहायता
-स्कूल ड्रेस व किताब खरीदने के लिए 2 हजार रुपए सालाना

अब बात केंद्र सरकार के पैकेज की भी कर लेते है.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणाओं में मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य बीमा, मासिक वजीफा और 23 साल की उम्र में एकमुश्त 10 लाख की मदद जैसे कदम शामिल हैं. उच्च शिक्षा के लिए ऋण भी दिया जाएगा. प्रधानमंत्री ने महामारी में अनाथ हुए बच्चों को मुफ्त शिक्षा और इलाज की सुविधा देने का फैसला किया. 18 वर्ष का होने पर मासिक आर्थिक सहायता (स्टाइपेंड) और 23 वर्ष का होने पर दस लाख रुपए की आर्थिक मदद मिलेगी.पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन’ स्‍कीम के तहत यह मदद की जाएगी. इस तरह के बच्चों के नाम पर फ‍िक्‍स्‍ड डिपॉजिट स्‍कीम शुरू की जाएगी. पीएम केयर्स फंड से एक विशेष स्‍कीम के तहत इसमें योगदान दिया जाएगा ताकि 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर प्रत्येक के लिए 10 लाख रुपये का फंड बनाया जा सके. इस फंड का इस्तेमाल 18 वर्ष के बाद अगले पांच वर्षों तक उन्हें मासिक वित्तीय सहयोग (स्‍टाइपेंड) देने में किया जाएगा. इससे उच्च शिक्षा के वर्षों में वे अपनी निजी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे. 23 वर्ष की उम्र में निजी और पेशेवर इस्तेमाल के लिए उन्हें एक निश्चित धन राशि दी जाएगी.

दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों का नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में एडम‍िशन कराया जाएगा. जो बच्चे 11 से 18 वर्ष के बीच के हैं, उन्हें सैनिक स्कूल और नवोदय विद्यालय जैसे केंद्र सरकार के किसी भी आवासीय स्कूल में नामांकित कराया जाएगा. अगर बच्चा अपने अभिभावक या परिवार के किसी अन्य सदस्य के साथ रहता है तो उसे नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में नामांकित कराया जाएगा. अगर बच्चे का एडमिशन निजी स्कूल में किया जाता है तो शिक्षा का अधिकार कानून के तहत उसका शुल्क पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा. उसके स्कूल यूनिफॉर्म, किताब और कॉपियों के खर्च का भी भुगतान किया जाएगा.उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को पेशेवर पाठ्यक्रमों या भारत में उच्च शिक्षा की खातिर एजुकेशन लोन हासिल करने में मदद की जाएगी. इस लोन के ब्याज का पीएम केयर्स से भुगतान किया जाएगा.

स्नातक और पेशेवर पाठ्यक्रमों के लिए विकल्प के तौर पर ट्यूशन फी या पाठ्यक्रम शुल्क के बराबर राशि केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं के तहत दी जाएगी. जो बच्चे वर्तमान स्कॉलरशिप योजना के तहत पात्र नहीं हैं, उन्हें पीएम केयर्स से समान छात्रवृत्ति मुहैया कराई जाएगी. ऐसे सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तौर पर लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा. इसमें उन्हें पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा. 18 वर्ष की उम्र तक इन बच्चों के लिए प्रीमियम की राशि पीएम केयर्स से दी जाएगी.

पीएम केयर्स के योगदान से एक विशेष योजना बनाई:
-तहत प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख का कोष सृजित होगा
-जब बच्चा 18 वर्ष का होगा, उसे इस कोष से पांच साल तक मासिक आर्थिक मदद दी जाएगी
-23 की उम्र होने पर उसे इस कोष की 10 लाख रुपये की रकम एकमुश्त दी जाएगी
-10 वर्ष से कम आयु के बच्चे का नजदीक के केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में प्रवेश कराया जाएगा
-प्राइवेट स्कूल में पढ़ने पर फीस आरटीई नियमों के मुताबिक पीएम केयर्स से दी जाएगी
-पीएम केयर्स बच्चे की यूनीफार्म और कापी किताबों का भी खर्च उठाएगा
-11 से 18 वर्ष के बच्चों का एडमीशन किसी भी केंद्र सरकार के आवासीय स्कूल जैसे सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय आदि में कराया जाएगा
-बच्चों को उच्च शिक्षा और व्यवसायिक शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण लेने में मदद की जाएगी
-बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत पांच लाख तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा
-बीमा का प्रीमियम 18 वर्ष की आयु तक पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा

राजस्थान सरकार ने जहां अनाथ बच्चों व विधवाओं के लिए तुरंत एक लाख रुपए की नकद आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है, ऐसा प्रावधान केंद्र सरकार ने नहीं किया. गहलोत सरकार ने बच्चों के साथ विधवाओं का भी ध्यान रखा है, लेकिन केंद्र सरकार ने विधवाओं को कोरोना पैकेज में शामिल नहीं किया. जबकि गहलोत सरकार ने उनको नियमों में शिथिलता देते हुए एक लाख की आर्थिक सहायता के साथ ही पेंशन देने का भी फैसला किया है. सीएम गहलोत चाहते है कि कोरोना से प्रभावित ऐसे जरूरत मंदों को तुरंत आर्थिक मदद मिले, न कि 18 या 23 साल का होने के बाद. वैक्सीन की तरह ही सीएम ने एक और मुद्दे को अपने हाथ में ले लिया है, अब देखना है कि जब गहलोत व मोदी की चर्चा होती है तो गहलोत किस तरह इस मुद्द को उठाकर केंद्र सरकार को फैसले में बदलाव करने पर मजबूर करते है.

और पढ़ें