VIDEO: बजट पेश करने के बाद दिए सीएम गहलोत के बयान ने राजनीति में मचाई नई हलचल

Naresh Sharma Published Date 2019/07/13 01:33

जयपुर: बजट पेश करने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बयान ने राजनीति में नई हलचल मचा दी है. अब तक मुख्यमंत्री पद पर अपने उम्मीदवारी के बारे में चुप्पी साधने वाले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीन दिन पहले साफ कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रदेश की जनता चाहती थी कि अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने और कोई न बने. राहुल गांधी ने उसी भावना का आदर करते हुए मुझे यह अवसर दिया. 

सुर्खियों में आया बयान:
एक घंटे 36 मिनट तक राजस्थान के विकास का खाका खींचने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट भाषण खत्म किया तो सबसे पहले उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने उनको बधाई दी. बाद में सभी कांग्रेसी विधायकों ने बजट घोषणाओं पर आभार जताया. इसके बाद मुख्यमंत्री मीडिया से बातचीत करने प्रेस रूम में आए, तो उम्मीद थी कि बजट घोषणाओं को लेकर बात करेंगे, लेकिन अचानक ही उनका ऐसा बयान आया कि राजनीतिक गलियारों की सुर्खियां बन गया. विधानसभा चुनाव को याद करते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश की जनता चाहती थी कि मैं मुख्यमंत्री बनूं, जनता ने किसी और का नाम नहीं लिया और इसीलिए मैंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. 

बयान के निकले कई मायने:
इस बयान के साथ ही प्रदेश की राजनीति के पंडित अपने अपने तरीके से मायने निकालने लग गए. दरअसल पहली बार मुख्यमंत्री ने इस तरह का बयान दिया है. इससे पहले अशोक गहलोत कभी इस तरह खुलकर नहीं बोले. विधानसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत व सचिन पायलट मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे. इसके बाद विधायकों की राय शुमारी भी हुई और राहुल गांधी ने अशोक गहलोत को प्रदेश की कमान संभलाने का फैसला किया और पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाया गया. इस बीच लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को प्रदेश में बुरी हार मिली और प्रदेश की कांग्रेस राजनीति में उथलपुथल मच गई. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हम सफल नहीं हो पाए, लेकिन यह सिर्फ प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हुआ. उन्होंने आरोप लगाया कि पीएम नरेंद्र मोदी ने सेना व देशभक़्ति के नाम पर लोगों को गुमराह किया और चुनाव जीत लिया. 

राजस्थान में रहने का अप्रत्यक्ष रूप से संकेत:
राहुल गांधी के इस्तीफे देने के बाद कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति गरमाई हुई है. रोज नई नई तरह की चर्चा चल रही है. अशोक गहलोत को जयपुर से दिल्ली अध्यक्ष बनाकर भेजने की भी चर्चा चली थी, लेकिन प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अप्रत्यक्ष रूप से संकेत दे दिया कि वे राजस्थान ही रहेंगे, क्योंकि प्रदेश की जनता का मन था कि वे मुख्यमंत्री बने. 

... संवाददाता नरेश शर्मा की रिपोर्ट 

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