चंडीगढ़ नीति आयोग की बैठक में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने उठाया एसवाईएल नहर का मुद्दा, केंद्र के हस्तक्षेत्र की मांग की

नीति आयोग की बैठक में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने उठाया एसवाईएल नहर का मुद्दा, केंद्र के हस्तक्षेत्र की मांग की

नीति आयोग की बैठक में सीएम मनोहर लाल खट्टर ने उठाया एसवाईएल नहर का मुद्दा, केंद्र के हस्तक्षेत्र की मांग की

चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने पंजाब के साथ लंबे समय से लंबित सतलुज-यमुना लिंक नहर मुद्दे को हल करने के लिए केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की ताकि राज्य को नदी के पानी का उसका हिस्सा मिल सके. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में शनिवार को वीडियो-कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नीति आयोग की संचालन परिषद की छठी बैठक को संबोधित करते हुए खट्टर ने जल संरक्षण के लिए अपनी सरकार द्वारा उठाए जा रहे कई कदमों के बारे में बताया.

हांसी-बुटाना लिंक नहर मुद्दे को हल करने मे केंद्र के हस्तक्षेप की मांगः
राज्य सरकार की ओर से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, खट्टर ने हांसी-बुटाना लिंक नहर के मुद्दे के हल के लिए भी केंद्र के हस्तक्षेप की मांग की.  उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि भूजल के स्तर में गिरावट के कारण राज्य के कई क्षेत्र ‘डार्क जोन’ की श्रेणी में आ गए हैं, इसलिए, यदि एसवाईएल और हांसी-बुटाना लिंक नहर के मुद्दे हल हो जाते हैं, तो हरियाणा में पानी की कमी की समस्या का समाधान हो जाएगा. सतलुज-यमुना लिंक (एसवाईएल) नहर दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से एक विवादास्पद मुद्दा रहा है, नहर के पंजाब का एक हिस्सा अभी भी अधूरा है. इसका निर्माण 1982 में शुरू हुआ था. पंजाब रावी-ब्यास नदी के पानी की मात्रा के पुनर्मूल्यांकन की मांग कर रहा है, जबकि हरियाणा एसवाईएल नहर को पूरा करने की मांग कर रहा है ताकि उसे उसका 35 लाख एकड़ फुट (एमएएफ) का हिस्सा मिल सके.

हांसी-बुटाना नहर को भाखड़ा मुख्य लाइन से नहीं जोड़ने दे रहा पंजाबः
खट्टर ने पहले बताया था कि कैसे पंजाब हांसी-बुटाना नहर को भाखड़ा मुख्य लाइन से नहीं जोड़ने दे रहा, हालांकि इसमें हरियाणा द्वारा पंजाब के पानी की एक बूंद भी लेना शामिल नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी के मुद्दे पर इसके संग्रह में हरियाणा सबसे आगे है. हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री से अधिकतम जीएसटी संग्रह वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना तैयार किए जाने का आग्रह किया. प्रधानमंत्री की ‘‘आत्मनिर्भर भारत’’ दृष्टि में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आश्वासन देते हुए खट्टर ने कहा कि ‘अंत्योदय’ की भावना के साथ राज्य सरकार पहले से ही इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि राज्य के महत्वाकांक्षी ‘परिवार पहचान पत्र’ के सफल कार्यान्वयन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले.

सीएम ने राज्य सरकार की उपलब्धियों के बारे में पीएम को बतायाः
मुख्यमंत्री ने व्यवसाय करने की लागत को कम करने के लिए कहा कि लॉजिस्टिक्स एंड वेयरहाउसिंग पॉलिसी, 2019 शुरू की गई है. नारनौल में एक एकीकृत बहु-मॉडल लॉजिस्टिक हब विकसित किया गया है. उन्होंने कहा कि कहा कि इसके अलावा, गन्नौर में लगभग 7,000 करोड़ रुपए की लागत से एक अंतरराष्ट्रीय बागवानी बाजार विकसित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में एक फूल बाजार की स्थापना की जा रही है. अन्य पहलों का उल्लेख करते हुए खट्टर ने कहा कि पंचकूला में एक सेब बाजार की स्थापना की जा रही है, जबकि एक मसाला बाजार सिरसा में आएगा. उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण के उद्देश्य से ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ योजना शुरू की गई है, जिसके तहत 97,000 एकड़ में मक्का, कपास, बाजरा और दालों जैसी फसलों की खेती की जा रही है. मुख्यमंत्री ने कहा कि फसल विविधीकरण अपनाने के लिए किसानों को प्रोत्साहन के रूप में 7,000 रुपये की राशि दी जा रही है.

4,000 नए प्लेवे स्कूल खोलने की योजना से कराया अवगतः
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में गन्ना किसानों को हरियाणा प्रति क्विंटल 350 रुपए का उच्चतम मूल्य दे रहा है. इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा विभिन्न फसलों जैसे चना, सरसों, सूरजमुखी और मक्का की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की जा रही है. खट्टर ने कहा कि फसल की कटाई के बाद भंडारण प्रणाली को मजबूत करने के लिए गोदामों की स्थापना की जाएगी, जिन्हें डीम्ड मंडियों के रूप में अधिसूचित किया जाएगा ताकि उपज को वहां से बेचा जा सके. मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा हमेशा उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और इस क्षेत्र में विभिन्न सुधार लाए गए हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 3 से 4 साल के बच्चों के लिए 4,000 नए प्लेवे स्कूल खोलने की योजना बनाई है.
सोर्स भाषा

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