चंडीगढ़ दिल्ली किसानों की हिंसा पर बोले सीएम खट्टर, कहा- किसी को भी आंदोलन करने की स्वतंत्रता, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं 

दिल्ली किसानों की हिंसा पर बोले सीएम खट्टर, कहा- किसी को भी आंदोलन करने की स्वतंत्रता, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं 

दिल्ली किसानों की हिंसा पर बोले सीएम खट्टर, कहा- किसी को भी आंदोलन करने की स्वतंत्रता, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार नहीं 

चंडीगढ़: केंद्र के नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन की तरफ इशारा करते हुए हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने मंगलवार को कहा कि किसी को भी आंदोलन करने की स्वतंत्रता है, लेकिन अराजकता फैलाने का अधिकार किसी को भी नहीं है.

किसानों को दी संविधान का पालन करने की सीखः
पंचकूला में तिरंगा फहराने के बाद खट्टर ने गणतंत्र दिवस के अपने संबोधन में कहा कि संविधान अधिकारों के बारे में बात करता है, लेकिन ये अधिकार हमें कुछ भी करने की स्वतंत्रता नहीं देते. उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों को संविधान का पालन करना होता है.

अधिकारों का मतलब यह नहीं है कि हम कुछ भी कर सकते हैंः
किसानों के प्रदर्शन के बारे में सीधा उल्लेख किए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एक लोकतंत्र हैं, गणतंत्र दिवस पर, हमें हमारा संविधान मिला. संविधान निर्माताओं ने विभिन्न अधिकारों के बारे में बात की जिनसे हम अपने जीवन को सुखी बना सकते हैं. लेकिन मैं एक चीज याद दिलाना चाहता हूं कि संविधान के तहत हमारे अधिकारों और दायित्वों-दोनों का उल्लेख किया गया है. उन्होंने कहा कि हमारे अधिकारों का मतलब यह नहीं है कि हम कुछ भी कर सकते हैं, कुछ सीमाएं हैं. इन सीमाओं के माध्यम से, हमें याद रखना चाहिए कि हमने जिस संविधान को स्वीकार किया है उसका पालन करना हमारा दायित्व है.

प्रदर्शनकारी किसानों की कई जगह पुलिस के साथ झड़पः
गौरतलब है कि किसान समूहों की ट्रैक्टर परेड के दौरान कुछ स्थानों पर पुलिस के साथ झड़प हुई. इसके बाद पुलिस ने किसान समूहों पर आंसू गैस के गोले छोड़े तथा लाठीचार्ज किया. दिल्ली की सीमा पर कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने अवरोधक तोड़ दिए. पुलिस का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में ट्रैक्टर परेड के लिए जो मार्ग पूर्व में निर्धारित किया गया था प्रदर्शनकारियों ने उसका अनुसरण नहीं किया.

लाल किले परिसर में लगाया झंडाः
आपको बता दें कि पुलिस द्वारा आईटीओ से खदेड़े गए प्रदर्शनकारी किसानों का एक समूह अपने ट्रैक्टर लेकर लालकिला परिसर पहुंच गया. प्रदर्शनकारी किसान और निहंग (पारंपरिक सिख योद्धा) लालकिला परिसर में घुस गए और उस ध्वज-स्तंभ पर अपना झंडा लगाते दिखे, जहां से प्रधानमंत्री 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं. उन्होंने (प्रदर्शनकारी किसानों के समूह ने) लालकिले के कुछ गुंबदों पर भी अपने झंडे लगा दिए.
सोर्स भाषा

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