जयपुर VIDEO: सीएस उषा शर्मा का तीन महीने का कार्यकाल नवाचारों से रहा भरा, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: सीएस उषा शर्मा का तीन महीने का कार्यकाल नवाचारों से रहा भरा, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: उषा शर्मा का बतौर सीएस 3 माह का कार्यकाल नवाचारों से भरा रहा. इस दौरान उन्होंने सीएस ऑफिस की अहम इकाइयों को मजबूती से फंक्शनल किया है तो वहीं सीएम गहलोत के गुड गवर्नेंस के मैंडेट को लागू करने में अपनी भूमिका निभाई है. उषा शर्मा ने सीएस के रूप में जिम्मेदारी संभालते ही नवाचारों पर विशेष फोकस करना शुरू कर दिया. उन्होंने सीएस बनते ही सबसे पहले सभी अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख सचिवों और सचिवों को अपनी ओर से गुडविल जेस्चर के रूप में बुके भिजवा कर उनसे सहयोग और तालमेल की बात कही.

1.कोर्डिनेशन:
उषा शर्मा ने सीएस बनते ही विभागों के आपसी तालमेल पर खास फोकस किया.  इसके तहत उन्होंने विभागों के अंतर्विभागीय मुद्दों को आपसी सहमति से सुलझाने को लेकर नई पहल की. ऐसे मुद्दों को सुलझाने के लिए हालांकि सीएस की अध्यक्षता में कमेटी पहले भी बनी हुई थी लेकिन उन्होंने इसके लिए ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज बनाकर उनकी बैठक ली. इससे 2 या कई विभागों के मुद्दों को आपसी समझ के आधार पर हल करना संभव हो सका.

ये हैं ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज:
-राज्य स्तरीय आयोजना व  विकास समन्वय समितियों के स्थान पर हुआ है समितियों का गठन 
-कृषक कल्याण के लिए समिति गठित 
-कृषि, उद्यानिकी,पशुपालन, गोपालन, सहकारिता हैं इसके मुख्य विभाग
- जल संसाधन, ऊर्जा,उद्योग, खाद्य हैं आमंत्रित विभाग
-इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर बनी ग्रुप ऑफ़ सेक्रेट्रीज की समिति
-जल संसाधन, ऊर्जा,पीएचईडी पीडब्ल्यूडी,स्वायत्त शासन और एलएसजी,यूडीएच उनके प्रमुख विभाग 
-एचआरडी को लेकर ग्रुप ऑफ़ सेक्रेट्रीज की समिति गठित
- स्कूल शिक्षा,उच्च शिक्षा,तकनीकी शिक्षा 
-सूचना प्रौद्योगिकी, विज्ञान प्रौद्योगिकी
-खेल व युवा मामलात हैं प्रमुख विभाग 
-गांवों के विकास को लेकर ग्रुप ऑफ सिक्योरिटीज की समिति गठित 
-ग्रामीण विकास, पंचायती राज नरेगा, जल ग्रहण विकास हैं इसके प्रमुख विभाग 
-सामाजिक क्षेत्र को लेकर बनी ग्रुप ऑफ़ सेक्रेट्रीज की समिति 
-चिकित्सा,चिकित्सा शिक्षा सामाजिक न्याय, जनजाति क्षेत्रीय विकास
-महिला बाल विकास, सैनिक कल्याण, अल्पसंख्यक मामलात और जेल विभाग हैं इसके प्रमुख विभाग 
-उद्योग व उद्यमिता को लेकर ग्रुप ऑफ़ सेक्रेट्रीज की समिति गठित 
-उद्योग, एमएसएमई, सूचना प्रौद्योगिकी, कौशल रोजगार उद्यमिता 
-खान, पेट्रोलियम, पर्यटन, कला संस्कृति हैं प्रमुख विभाग 

इन समितियों के जरिए ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज का 2 या दो से ज्यादा विभागों की समस्याओं का हल अपनी तरह से बातचीत और तालमेल के आधार पर किया जा रहा है जिससे किसी भी विभाग को निर्णय एकतरफा और थोपा हुआ न लगे.

2.सीएस की अध्यक्षता में गठित समितियों का झमेला:
Cs-करीब 135 कमेटियों में पदेन अध्यक्ष हैं. कमेटियों में कई कमेटियां समान प्रकृति और समान कार्य व्यवहार वाली हैं. साथ ही कुछ कमेटियों के गठन का उद्देश्य भी बदलते समय में बेमानी सा लगता है. इनमें से कुछ ऐसी भी मानी जा रही हैं जिनका काम दूसरों को से दिया है या वे उसका जिम्मा संभाल रहे हैं. ऐसे में सीएस ने निरर्थक सी दिखने वाली कमेटियों को एक करने का जिम्मा अधिकारियों को सौंपा है इससे अनावश्यक काम का फैलाव नहीं होकर सीएस और अन्य अधिकारी गुड गवर्नेंस के खास काम पर फोकस कर सकेंगे.

3.आम आदमी को जन्म से लेकर मृत्यु तक के सारे लाभ की ट्रैकिंग:
अभी राज्य सरकार की ओर से आम आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसकी श्रेणी और पात्रता या योग्यता के आधार पर अलग-अलग योजनाओं में लाभ मिलते हैं लेकिन उसे इस लाभ के लिए खा से चक्कर काटने पड़ते हैं या फिर उन्हें लाभ नहीं मिलता या समय पर नहीं मिलता. इसे लेकर विधायक ओमप्रकाश हुडला ने अपने नवाचार के एक्सपिरिमेंट को सीएम से साझा किया था. उसके आधार पर सी एस उषा शर्मा ने इसकी क्रियान्विति और उसकी मॉनिटरिंग का जिम्मा खुद संभाल लिया है. इसके लिए सचिव डॉ समित शर्मा,आईएएस ओपी बैरवा और अन्य अधिकारियों को इसका जिम्मा दिया है. इसके जरिए आदमी के जन्म से लेकर मृत्यु तक सरकार ट्रैकिंग करेगी. हर अवस्था में उसे कैसे उसकी पात्रता और योग्यता अनुसार योजनाओं का लाभ मिले.इसके लिए ट्रैकिंग करके उसे सीधे लाभ पहुंचाने को लेकर काम होगा. सीएस ने मिशन मॉड पर इस काम को पूरा करने के निर्देश दिए हैं.

जैसे 1कलेक्टर अपने जिले में संस्थागत प्रसव के जरिए जन्मे बच्चे को जन्म के साथ मिलने वाले लाभ सुनिश्चित करवाएगा. इसके लिए उसकी उम्र के हिसाब से कब कब उसके टीके लगने हैं.इसका मैसेज उसे पहले मिल जाएगा और टीका लगवाने की तमाम औपचारिकताओं को पहले पूरा कर लिया जाएगा इसके बाद यदि संतान बच्ची है तो उसे शिक्षा छात्रवृत्ति के लाभ के लिए पहले से मैसेज देकर वह सुनिश्चित किया जाएगा साथ ही वह आरक्षित वर्ग में है तो उससे जुड़े तमाम लाभ समय बद्ध तरीके से उसकी पात्रता अनुसार कैसे दिए जाएं यह सुनिश्चित किया जाएगा.

4.कलेक्टर्स की फ्लैगशिप योजनाओं के आधार पर रैंकिंग:
जिलों में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर खासा काम किया जा रहा है. कई जिले तो 90 से 100% तक सफलता हासिल कर रहे हैं लेकिन अक्सर यह देखा जाता है कि उनके काम को समुचित पहचान नहीं मिलती है. ऐसे में फ्लैगशिप योजनाओं के आधार पर पहली बार जिलों की रैंकिंग जारी की गई है जिससे कलेक्टर्स में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ रही है और वह संबंधित योजनाओं में अपने प्रदर्शन को सुधार रहे हैं. अब तक आयोजना विभाग फ्लैगशिप योजना में प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन तो करता था लेकिन कभी रैंकिंग जारी नहीं की जाती थी.

5.कलेक्टर्स के नवाचारों की रिपोर्ट लेना:
सीएस उषा शर्मा ने कामकाज संभालते ही सबसे ज्यादा नवाचारों पर फोकस किया है और कलेक्टर्स को अपनी योजना या प्रोग्राम या काम के हिसाब से एक नवाचार चुनकर उसे करने का लक्ष्य दिया है. इसके आधार पर कलेक्टर्स की नवाचारों की रिपोर्ट बन रही है. इससे उनमें नवाचार करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा पनप रही है.

6.कई समितियों या विभागों के काम को फंक्शनल करना:
उषा शर्मा ने सीएस बनते ही कई मृतप्राय: या नॉनफंक्शनल कमेटियों का कामकाज खुद देखा और देख कर उनकी बैठक में करवा कर उन्हें फंक्शनल करवाया. खास तौर पर पोषाहार या अन्य कमेटियों की सुध नहीं ली जा रही थी. वहीं कुछ विभाग भी ज्यादा जिम्मेदारियां न होने से खानापूर्ति कर रहे थे. सीएस ने इनकी लगातार बैठक करके इन्हें जिम्मेदारियां और लक्ष्य देते हुए इन्हें फंक्शनल करवाया.

अब गहलोत सरकार चुनावी साल में कदम रखने जा रही है और ऐसे में सरकार की योजनाओं उसकी भी घोषणाओं का लाभ बेहतर सर्विस डिलीवरी के साथ आम आदमी तक पहुंचते दिखना लाजिमी है. गहलोत सरकार के इसी मैंडेट को अपने अथक प्रयासों से उषा शर्मा साकार करने में जुट गई हैं और यही कारण है कि वे न सिर्फ शनिवार,रविवार को अवकाश के दिन भी बैठकें लेती हैं बल्कि उनके काम के घंटे भी सुबह जल्दी से देर रात तक के होते हैं.

और पढ़ें