जयपुर VIDEO: प्रदेश में चल रहा अवैध खनन के खिलाफ अभियान, फिर भी हिण्डौन में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद, देखिए ये खास रिपोर्ट

VIDEO: प्रदेश में चल रहा अवैध खनन के खिलाफ अभियान, फिर भी हिण्डौन में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद, देखिए ये खास रिपोर्ट

जयपुर: बृज चौरासी की घटना के बाद भी शायद खान, वन विभाग और पुलिस के संयुक्त अभियान के हिंडौन में खनन माफिया पर ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा. सख्त अभियान के बाद भी करौली जिले के हिण्डौन में खनन माफिया की मशीनों की मार से पहाड़ करहाते दिखाई दे रहे हैं. संरक्षित वन क्षेत्र होने के बावजूद हिण्डौन क्षेत्र की पहाडियों के अस्तित्व को खनन माफिया कमाई के लालच में खत्म कर रहा है. 

अभियान के बाद भी हिंडौन में खनन माफिया के हौसले बुलंद

रोजाना दर्जनों ट्रेक्टर, ट्रक अवैध खनिज का परिवहन

जानकारी के बाद भी कार्रवाई से बरता जा रहा परहेज

जबकि वन मंत्री तक दे चुके सख्त कार्रवाई के निर्देश 

दूसरी ओर प्रदेश में चल रहा अवैध खनन के खिलाफ अभियान

अभियान के पहले 11 दिन में 423 प्रकरण बनाए

सर्वाधिक 40 प्रकरण भीलवाड़ा, अलवर 33, अजमेर 27, जयपुर, 26- 26 प्रकरण

नागौर 31, राजसमन्द 22, कोटा 16 प्रकरण बनाए

कुल 96 एफआईआर दर्ज कर 23 को किया अभी तक गिरफ्तार

28 बड़ी मशीन, 410 वाहन जप्त और 9340 टन खनिज भी किया जप्त

विशेष अभियान में अभी तक 1.84 करोड़ की जुर्माना वसूली भी

बृज चौरासी क्षेत्र में संतों के विरोध के बाद राज्य सरकार ने वहां की 46 वैध खनन लीज बंद कर दी हैं और अवैध खनन माफिया के खिलाफ खान, वन, राजस्व और पुलिस ने विशेष अभियान छेड़ दिया है. अभियान के तहत पूरे प्रदेश में 11 दिन में 423  मामले बनाए गए हैं लेकिन करौली जिले के हिंडोन में खनन माफिया के हौंसले बुलंद हैं. यहां से रोजाना दर्जनों ट्रैक्टर ट्रॉली पत्थर और मोरम के अलावा अवैध  सैण्ड स्टोन से भरे 40-50 ट्रक बेरोकटोक थानों और नाकों को पार करके शहर की रीको और सिकंदरा की पत्थर मंडी तक पहुंच रहें हैं, लेकिन पुलिस, खनिज और वन विभाग द्वारा अनदेखी की जा रही है.  यहां रोजना हो रहे अवैध खनन से गांवड़ा का पहाड़ लगभग खत्म होने की कगार पर है. वहीं खरेटा और पोंछड़ी के डूंगर जरा से नजर आते हैं. हिण्डौन वन रेंज में 2 हजार हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र अवैध खनन की चपेट में है, लेकिन वन अधिकारियों में खनन माफिया का खौफ इस कदर है कि वे खोखली होती पहाड़ियों की ओर जाने से कतराते हैं. हिण्डौन के मोठियापुरा क्षेत्र की पहाड़ियों में अवैध खनन करते मजदूर साफ दिखाई देते हैं. आरेणी क्षेत्र की पहाड़ियों में अवैध खनन के लिए अवैध कम्प्रेशर ट्रैक्टर से विस्फोट भी किए जाने की शिकायतें मिली हैं. 

अवैध खनन मामले में वन विभाग की कमजोरी ये हैं कि कार्मिकों के पास संसाधनों व हथियारों का अभाव है. वन रक्षकों के पास स्वयं की सुरक्षा के लिए न तो हथियार है और न गश्त के लिए वाहन है. डंडे के दम पर ही उन्हें खुद की सुरक्षा करनी पड़ती है. कभी गश्त के लिए वाहन किराए पर लेना पड़ता है. जबकि खनन माफिया संगठित रूप से अवैध खनन करता है. खनन के बाद पत्थर, मोरम व चीरी से भरे वाहन एक साथ निकलते हैं. वन विभाग का दल अगर इन पर कार्रवाई करता है तो खनन माफिया के लठैत उन पर हमला बोल देते हैं. यही नहीं खान विभाग की टीम पर भी ये हमला बोल चुके हैं. विगत 20 जून की रात रीको क्षेत्र से जब्त सेंड स्टोन से भरे ट्रक को महू चौकी ले जाते समय खनन माफिया के चालक ने ट्रक को क्यारदा बालाजी के पास पलट दिया था. इससे खनिज विभाग के एक जवान की जान चली गई, वहीं दो घायल हुए. इससे पहले पिछले साल 10 मार्च को नई मंडी थाने के समीप हमले में सहायक वनपाल घायल हो गया. पिछले वर्ष ही  24 जनवरी को क्यारदा रेंज से खनन माफिया जब्तशुदा अवैध खनन के पत्थरों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली छुड़ा ले गए थे. 

वर्ष 2018 में खरेटा की पहाडियों मे अवैध खनन का जायजा लेने गए तत्कालीन डीसीएफ और दस्ते पर खनन माफिया ने हमला किया था. दरअसल हिण्डौन रेंज में झिरना, मोठियापुरा, खरेटा (राजौर), जगर, कोटरी- पालनपुर, लीलोटी, चिनायटा, तेली की पंसेरी, डूंगर पोंछड़ी खंड की पहाडियों में बड़े पैमाने पर बरोकटोक अवैध खनन हो रहा है. जबकि अटक, पोंछड़ी कोठार नाला, फैली का पुरा, कारवाड़ मीणा, कारवाड़ी, कुतकपुर व खानवाड़ा खंड की पहाडिय़ों के दुर्गम रास्तों वाहनों की आवाजाही में दिक्कत होने से अवैध खनन कम है. इस मामले में वन विभाग के कार्यवाहक रेंजर केदार योगी का कहना है कि खनन रोकने के लिए उचित संसाधन नहीं हैं. वनकर्मी बाइक से गश्त और डंडे के भरोसे सुरक्षा कर रहे हैं. संसाधन उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है. वहीं वन मंत्री हेमाराम चौधरी और पीसीसीएफ हॉफ डॉ डीएन पाण्डेय ने भी अधिकारियों को वन भूमि पर अवैध खनन और अतिक्रमण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

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