चौरी चौरा शताब्दी समारोहः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को करेंगे वर्चुअल उद्घाटन

चौरी चौरा शताब्दी समारोहः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को करेंगे वर्चुअल उद्घाटन

चौरी चौरा शताब्दी समारोहः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को करेंगे वर्चुअल उद्घाटन

गोरखपुर (उप्र): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को डिजिटल माध्यम से चौरी चौरा शताब्दी समारोह की शुरूआत करेंगे और एक विशेष डाक टिेकट भी जारी करेंगे. यह समारोह साल भर चलेगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे.

वन्दे मातरम गीत की पहली पंक्ति को गाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का तैयारः
सरकार ने चौरी चौरा कांड के शहीदों के स्मारक स्थल और संग्राहलय का पुनरूद्धार किया है. वहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं. जिला प्रशासन वीडियो अपलोड के माध्यम से वन्दे मातरम गीत की पहली पंक्ति को एक साथ गाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने के लिए पूरी तरह से तैयार है.

अब तक 50 हजार वीडियो अपलोडः
जिले के अपर जिला अधिकारी वित्त राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हम बुधवार को दोपहर तक 50 हजार वीडियो अपलोड कर चुके हैं और उम्मीद है कि यह आंकड़ा एक लाख को पार कर जाएगा जिसमें राष्ट्र गीत वन्दे मातरम की पहली पंक्ति है. हमें उम्मीद है कि हमें गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिलेगा. यह वीडियो गुरुवार को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा. जिला प्रशासन ने मुंडेरा नज़र नगर पंचायत का नाम बदलकर चौरी चौरा नगर पंचायत करने का प्रस्ताव पहले ही सरकार को भेज दिया है और उम्मीद है कि शताब्दी समारोह के दौरान मुख्यमंत्री इसकी घोषणा कर सकते हैं.

असहयोग आंदोलन की याद दिलाता है चौरी-चौरा की घटनाः
इतिहास बताता है कि चार फरवरी को स्थानीय लोग चौरी-चौरा कस्बे में, महात्मा गांधी द्वारा शुरू किए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में जुलूस निकाल रहे थे तभी स्थानीय पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई. पुलिस की गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए. इससे प्रदर्शनकारियों का आक्रोश भड़क गया. तब पुलिस वाले थाने में छिप गए, लेकिन लोगों ने बाहर से कुंडी लगाकर थाने में आग लगा दी. इस घटना में 22 पुलिसकर्मी मारे गए. घटना की प्रतिक्रिया में, अहिंसा के पैरोकार महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया. चौरी-चौरा काण्ड में 172 लोगों को फांसी की सजा सुनाई गई थी. बतौर वकील पंडित मदन मोहन मालवीय की पैरवी से इनमें से 151 लोग फांसी की सजा से बच गए. बाकी 19 लोगों को 2 से 11 जुलाई 1923 के दौरान फांसी दे दी गई. इस घटना में 14 लोगों को उम्र कैद और 10 लोगों को 8 साल सश्रम कारावास की सजा हुई. जिन लोगों को फांसी दी गई, उनकी याद में एक स्मारक बनाया गया.
सोर्स भाषा

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