मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर दोहराया जादुई इतिहास, बसपा के सभी 6 विधायकों का कांग्रेस में विलय

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/09/17 08:38

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर सियासी जादूगरी दिखाते हुए बसपा के सभी छह विधायकों को कांग्रेस में शामिल कर लिया है. बसपा विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को विलय पत्र भी सौंप दिया है. इस पर विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने कहा कि सभी विधायकों का कांग्रेस में विलय पत्र मिल चुका है. अब इसमें किसी प्रकार की कानूनी अड़चन नहीं है. 

पिछले कई महीनों से विलय की चर्चा: 
पिछले कई महीनों से बसपा विधायकों के कांग्रेस में विलय को लेकर चर्चा चल रही थी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ बसपा विधायक कई बार बैठक भी कर चुके थे. माना जा रहा है कि इनमें से कुछ विधायकों को मंत्री और संसदीय सचिव बनाया जा सकता है. 

विलय को विधानसभा अध्यक्ष ने दी मंजूरी: 
बसपा विधायक सोमवार रात 9:30 बजे पहले मुख्यमंत्री गहलोत से मिले. इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष जोशी से मिलकर देर रात कांग्रेस में विलय का पत्र सौंपा. विलय को जोशी ने मंजूरी दे दी. इसके बाद तमाम बसपा विधायक रात 11 बजे राजस्थान यूनिवर्सिटी स्थित गेस्ट हाउस पहुंचे और मर्जर का औपचारिक ऐलान किया. अब तक बसपा की ओर से कांग्रेस को बाहरी समर्थन था. उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट इस पूरे घटनाक्रम से दूर रहे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि प्रदेश को नए विकास पथ पर ले जाएंगे स्थायी सरकार के लिए राज्यहित में बसपा विधायकों का यह फैसला स्वागत योग्य है. उनकी भावनाएं अच्छी हैं. हम सब मिलकर राजस्थान को विकास के नए पथ पर ले जाएंगे. 

अब पूर्ण बहुमत की सरकार: 
गौरतलब है कि 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को कुल 99 सीटें मिली थी. जबकि बीजेपी को 73 सीटों से ही संतोष करना पड़ा था. हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन पूर्ण बहुमत से एक सीट कम रह गई. कांग्रेस ने बीएसपी और निर्दलीय विधायकों की मदद से अपनी सरकार बनाई थी. बीएसपी के सभी 6 विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने के बाद अब गहलोत सरकार अपने दम पर पूर्ण बहुमत वाली सरकार हो गई है.

2008 में हो चुका बसपा विधयाकों का विलय: 
यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में बसपा विधायकों का कांग्रेस में विलय हो रहा है.  2008 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में गहलोत के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी. उस समय गुढ़ा सहित 6 विधायक बसपा के टिकट पर विधानसभा में पहुंचे थे. गहलोत ने उस दौरान बसपा विधायक दल का कांग्रेस में विलय कराते हुए सभी 6 विधायकों को मंत्री बनाया था.

विलय के बाद होगा यह असर: 
- विलय के बाद अब विधानसभा में सरकार का नंबर गेम मजबूत हो गया है. कांग्रेस विधायकों की संख्या अब 106 हो गई. 
- इस विलय के बाद एक बार फिर गहलोत के सियासी जादूगर होने का मैसेज आलाकमान के पास गया है कि उनका कोई विकल्प नहीं है. 
- कांग्रेस में शामिल बसपा विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है. 
- कांग्रेस को विलय का फायदा उपचुनाव और नियाय चुनाव में देखने को मिलेगा. 


 

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