कोरोना नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री का बड़ा फैसला, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से जुड़े लोगों को कोविड इलाज में दी बड़ी राहत

जयपुर: प्रदेश में खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे में आने वाले गरीब परिवारों को कोरोना का निजी अस्पतालों में फ्री इलाज मिलेगा. कोरोना नियंत्रण को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अहम फैसला किया है, जिसके तहत इन परिवारों को निजी अस्पताल में ईलाज का पूरा खर्चा का रिमेम्बरसमेंट किया जाएगा. 

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गहलोत सरकार ने कई अहम फैसले लेकर मरीजों को राहत दी:  
राजस्थान में कोरोना की रोकथाम के प्रति गहलोत सरकार स्वास्थ्य ही फ्रंट फुट पर काम कर रही है. फिर चाहे वह जांच का दायरा बढ़ाने की बात हो या फिर कोरोना मरीजों की सुविधाओं को लेकर फैसले. हर मोर्चे पर गहलोत सरकार ने कई अहम फैसले लेकर मरीजों को राहत दी है. इसी कड़ी में खाद्य सुरक्षा के दायरे में आने वाले परिवारों को बड़ी सौगात दी गई है. चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा से जुड़े लोग कोरोना पॉजिटिव चिन्हित पाए जाते हैं तो वह किसी भी निजी अस्पताल में भी इलाज ले सकते हैं. इस दौरान आने वाले खर्च का पूरा पुनर्भरण सरकार द्वारा किया जाएगा.   

सरकार कोरोना टेस्ट क्षमता और टेस्टिंग संख्या में लगातार बढ़ोतरी कर रही: 
राजस्थान में कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि प्रदेश भर में 30 हजार से ज्यादा कोरोना जांचें प्रतिदिन की जा रही हैं. सरकार कोरोना टेस्ट क्षमता और टेस्टिंग संख्या में लगातार बढ़ोतरी कर रही है. एग्रेसिव टेस्टिंग का ही परिणाम है कि कोरोना के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन सर्विलांस की दृष्टि से ये अच्छे संकेत हैं. उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर शून्य पर आ सके. इसके लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सुकून देने वाली बात यह रही कि जुलाई-अगस्त में प्रदेश में कोरोना से होने वाली मृत्युदर घटकर 1 प्रतिशत तक आ गई. वर्तमान में कोरोना से होने वाली मृत्युदर 1.5 फीसद है. उन्होंने कहा कि प्लाज्मा थेरेपी और जीवनरक्षक इंजेक्शन के जरिए इसे और भी कम किया जा रहा है.  

एंटीजन टेस्ट की विश्वसनीयता पर सवाल !
- चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा ने फिर केन्द्र पर साधा निशाना
- कहा - केंद्र सरकार से एंटीजन किट की लगातार कर रहे है मांग
- लेकिन चिकित्सा विभाग को अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए किट
- मजबूरन एक निजी अस्पताल से सैम्पल टेस्ट के लिए मंगवाए गए 200 किट
- इसमें से जांच में 48.6 फीसदी किट ही मानकों पर उतरे खरे
- 200 में से 89 उन मरीजों के टेस्ट बताए गए नेगेटिव
- जो RTPCR टेस्ट में भी पाए गए नेगेटिव
- लेकिन शेष बची 111 किट में से 57 रिपोर्ट बताई गई नेगेटिव
- जबकि RTPCR टेस्ट में यह सभी पाए गए थे पॉजिटिव
- इसमें चिकित्सा मंत्री ने केंद्र को एक बार फिर पत्र लिखने का किया जिक्र

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सरकार कोरोना की रोकथाम के लिए सजग और सतर्क है. राजधानी के निजी अस्पतालों में कोविड मरीजों का इलाज बेहतर तरीके से हो सके इसके लिए अस्पतालों के प्रबंधकों की मुख्य सचिव के साथ बैठक प्रस्तावित है. उन्होंने कहा कि आरयूएचएस अस्पताल में कोरोना के मरीजों की सुविधाओं को भी बढ़ाया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोरोना मरीजों के बेहतर उपचार के लिए 1300 नए वेंटीलेटर प्रोक्योर किए गए हैं. हालांकि प्रदेश सरकार के पास वेंटीलेटर्स की कोई कमी नहीं थी लेकिन पॉजिटिव्स केसों की बढ़ती संख्या के चलते यह वेंटीलेटर्स खासे उपयोगी होंगे.  

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केवल सावधानियों से ही कोरोना को हराया जा सकता:
स्वास्थ्य मंत्री ने एक बार फिर आमजन से अपील करते हुए कहा कि कोरोना का अभी तक कोई पुख्ता इलाज या कोई वैक्सीन नहीं खोजी जा सकी है, ऐसे में केवल सावधानियों से ही कोरोना को हराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सरकार अपने स्तर पर कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही लेकिन आमजन को भी कोरोना प्रोटोकॉल का ध्यान में रखते हुए मास्क लगाने, भीड़ में ना जाने, बार-बार साबुन से हाथ धोने जैसे नियमों की पालना जरूर करनी चाहिए. 

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