जैसलमेर जिले में ऊर्जा उत्पादन को लेकर मुख्यमंत्री की पहल, पहले हवा तो अब धूप से बदल रही इलाके की तकदीर

Suryaveer Singh Tanwar Published Date 2019/09/23 11:10

जैसलमेर: देश के पश्चिमी छोर पर बसा सरहदी जिला जैसलमेर जो अपने विशाल रेगिस्तान और अपनी विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों के चलते काले पानी के रूप में जाना जाता था. लेकिन समय और परिस्थितयों के बदलने के साथ साथ जैसलमेर ने अपनी पुरानी पहचान के इतर नई पहचान गढना आरम्भ कर दिया जिसमें पर्यटन के साथ साथ खनिज क्षेत्रों के रूप में जिला विकास की रफ्तार के साथ कदमताल करने लगा. पर्यटन व खनिज उत्पादन के बाद यहां की तेज आंधियों को भी सरकार ने उपयोगी बनाते हुए यहां पर पवन उर्जा के क्षेत्र में संभावनाओं को गति दी जिसके बूते यहां पर कई देशी व विदेशी कंपनियों ने करोडों का निवेश कर जैसलमेर जिले को एनर्जी हब के रूप में नई पहचान दी.

सौर उर्जा को लेकर वृहद स्तर पर काम आरम्भ: 
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पूर्ववर्ती कार्यकाल में जैसलमेर जिले में उर्जा के क्षेत्र में विकास का आगाज हुआ था जिसके चलते जिला उर्जा उत्पादन में अग्रणी बन गया और यहां के लोगों को भी रोजगार के नये विकल्प उपलब्ध हुए लेकिन अशोक गहलोत की सरकार के जाते ही बीजेपी की वसुंधरा सरकार द्वारा उर्जा नीति को लेकर स्पष्टा नहीं होने के चलते यहां एक बार फिर उर्जा उत्पादन में निवेश पर ब्रेक लग गया था लेकिन इस बार अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री बनने के बाद जैसलमेर में उर्जा उत्पादन को लेकर अपनी मंशा को स्पष्ट करते हुए उर्जा नीति बना कर कहा है कि अब जैसलमेर की हवाओं के साथ साथ यहां की धूप का भी उपयोग उर्जा उत्पादन के लिये किया जायेगा और मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से यहां पर सौर उर्जा के क्षेत्र में बडी बडी कंपनियां निवेश के लिये आगे आई है और यहां सौर उर्जा को लेकर वृहद स्तर पर काम आरम्भ भी हो गया है. 

रोजाना पवन उर्जा के माध्यम से 3 हजार मेघावाट से भी अधिक बिजली उत्पादन:  
रेतीले लहरदार धोरे,, सोने के समान चमकने वाला पीले पत्थर से बना सोनार किला व हवेलियां और रेगिस्तान में नखलिस्तान के रूप में जाना जाने वाले गडीसर सरोवर जी हां यहां आने वाले सैलानियों के लिये जैसलमेर किसी अजूबे से कम नही है. यहां की विपरीत परिस्थितियों के बीच किस तरह से जीवन जीने की जीवटता यहां के लोगों की मजबूती का दर्शाती यह दुनिया भर के लोगों को चौंकाने वाली है. आजादी से पहले यह इलाका जहां अफगानिस्तान और करांची से होने वाले व्यापार की बडी मंडी के रूप में जाना जाता था वहीं आजादी के बाद सरहदों के खींच जाने से देश के एक किनारे पर आ गया था जैसलमेर.. चूंकि कोने पर होने के कारण दिल्ली से निकला विकास यहां पहुंचते पहुंचते हांफ सा जाता था इसलिये विकास के लिहाज से लम्बे समय तक जैसलमेर जिला हाशिये पर ही रहा लेकिन पर्यटन की असीम संभावनाओं के बाद अब जिले में उर्जा उत्पादन को लेकर सरकार द्वारा की गइ पहल ने जिले की तकदीर को बदल कर रख दिया है. जैसलमेर जिले में जहां पवन उर्जा के माध्यम से 3 हजार मेघावाट से भी अधिक बिजली उत्पादन रोजाना किया जा रहा है वहीं अब इस क्षमता को बढाने के लिये सरकार ने नई उर्जा नीति के तहत सौर उर्जा कंपनियों के लिये भी जैसलमेर के द्वार खोल दिये गये हैं. 

देशभर में उजाले का पर्याय बनने की ओर अग्रसर: 
तेज आंधियों और असहनीय गर्मी जो जैसलमेर के श्याम पक्ष के रूप में देखी जाती थी अब यही स्याह पक्ष देशभर में उजाले का पर्याय बनने की ओर अग्रसर हो रहा है. तेज आंधियों के चलते जहां पवन उर्जा कंपनियों को यहां उर्जा उत्पादन में गति मिल रही है वहीं अब यहां की तेज धूप और गर्मी का उपयोग सौर उर्जा उत्पादन के लिये किया जा रहा है.  

सरकार ने अपनी उर्जा नीति को भी स्पष्ट कर दिया: 
जैसलमेर जिले में उर्जा उत्पादन की असीम संभावनाओं को नये पंख देते हुए सूबे के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी जैसलमेर यात्रा के दौरान स्पष्ट किया था कि पहले जैसलमेर की हवाओं को तो अब यहां की धूप को इस्तेमाल कर उर्जा के क्षेत्र में जैसलमेर जिले को देशभर में अग्रणी बनाने का काम सरकार द्वारा किया जा रहा है. उन्होंने कहा था कि इस संबंध में सरकार ने अपनी उर्जा नीति को भी स्पष्ट कर दिया है ताकि निवेश करने वाली कंपनियों को परेशानियों का सामना नहीं करना पडे. गहलोत ने कहा है कि उर्जा कंपनियों की स्थापना के साथ जैसलमेर जिला विकास की दौड में देश के अग्रणी जिलों के साथ कंधे से कंधा मिला सकता है. 

स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के अवसरों की स्थापना होगी: 
पवन उर्जा उत्पादन में जहां सुजलॉन, एनरकॉन, विन्डवर्ड, आईनौक्स, वैस्टाज सहित कई नामी गिरामी कंपनियों द्वारा बडा निवेश किया गया है वहीं अब सौर उर्जा के लिये भी यहां पर अडानी, एस्सेल सहित कई बडी कंपनियां अपने प्लांट स्थापित कर रही है जो कि जिले के विकास को नये पंख देने वाली है. उर्जा उत्पादन से जहां यहां के स्थानीय लोगों के लिये रोजगार के अवसरों की स्थापना होगी वहीं शिक्षा के क्षेत्र में पिछडे इस जिले के युवा अब शिक्षा से जुडकर इन कंपनियों में बडे पदों पर काम करने की ओर अग्रसर भी हो रहे हैं.  

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