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किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले, सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भी भर्ती जल्द शुरू होगी

किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले, सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भी भर्ती जल्द शुरू होगी

जयपुर: प्रदेश में कोविड का प्रकोप है और आर्थिक स्थिति खराब है, इसके बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के किसानों को एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट लगाने के लिए प्रेरित करने का फैसला किया है. इसके लिए जिला स्तर पर अभियान चलाया जाएगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री ने किसानों को रबी फसल के बीमा क्लेम के शीघ्र भुगतान के लिए 250 करोड़ रूपए प्रीमियम कृषक कल्याण कोष से स्वीकृत करने का फैसला किया है. सीएम गहलोत ने मंगलवार को अपने आवास पर  कृषि, सहकारिता एवं अन्य विभागों की समीक्षा बैठक करके कई अहम फैसले किए. 

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प्रदेश के खराब आर्थिक हालातों के बीच राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का अभियान चलाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियो को निर्देश दिए हैं कि इस योजना के तहत बैंक से ऋण दिलाने में किसानों की सहायता की जाए. यूनिट लगाने पर किसानों को एक करोड़ रूपये तक ऋण मिल सकता है जिस पर राज्य सरकार द्वारा 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. इस योजना से न केवल किसानों की आमदनी में वृद्धि होगी बल्कि फसल उत्पादों में वैल्यू एडिशन होने से उनकी कीमत भी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर कृषि क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. मुख्यमंत्री आवास पर हुई अहम बैठक में कृषि मंत्री लालचन्द कटारिया, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना, कृषि राज्यमंत्री भजनलाल जाटव, सहकारिता राज्यमंत्री टीकाराम जूली वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जुड़े थे. वहीं मुख्य सचिव राजीव स्वरूप, एसीएस वित्त निरंजन आर्य, राजस्थान राज्य भण्डारण निगम के सीएमडी पीके गोयल, रजिस्ट्रार सहकारिता  मुक्तानन्द अग्रवाल, प्रबंध निदेशक राजफैड सुषमा अरोड़ा, निदेशक कृषि विपणन बोर्ड ताराचन्द मीणा मुख्यमंत्री आवास पर मौजूद थे. एक नजर डालते है कि बैठक में मुख्यमंत्री द्वारा लिए गए अहम फैसलों पर...

- किसानों के लिए मुख्यमंत्री ने किए बड़े फैसले
- बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए मुख्यमंत्री की मंजूरी
- कृषक कल्याण कोष से 250 करोड़ रूपए मंजूर किए गहलोत ने
- प्रदेश के 2.50 लाख किसानों को मिलेगा इसका फायदा
- 750 करोड़ रूपए के बीमा क्लेम का जल्द भुगतान होगा
- विभिन्न जिलों में 3,723 डिग्गियों के निर्माण को लेकर भी हुआ फैसला
- कृषक कल्याण कोष से 95.87 करोड़ रूपए के भुगतान आदेश
- मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन
- कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर फण्ड का लाभ किसानों को दिलाने के लिए बनी कमेटी
- राजस्थान में इस फण्ड से 9 हजार करोड़ आवंटन का लक्ष्य रखा गया
- मण्डी में किसानों की सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूखण्डों का आवंटन होगा
- पशुपालकों को पशुधन के आधार पर अधिकाधिक केसीसी जारी किए जाएंगे
- जमीन व पशुधन वाले किसानों के लिए केसीसी की सीमा 3 लाख तक होगी
- 1,000 सहकारी समितियों को इसी वर्ष निजी गौण मण्डी का दर्जा दिया जाएगा
- दूर के गांवों में भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद हो सकेगी

इस बैठक में मुख्यमंत्री ने मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटियों के द्वारा आम जनता को निवेश के नाम पर धोखा देकर उनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई लूटने पर चिंता जताई. सीएम ने अधिकारियों को ऎसा मैकेनिज्म तैयार करने के निर्देश दिए कि भविष्य में प्रदेश में ऎसी कोई भी को-ऑपेरटिव सोसायटी गरीब जनता को झांसे में नहीं ले सके. साथ ही गहलोत ने विभिन्न सहकारी संस्थाओं में 1,000 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने के आदेश दिए. इसके लिए अगले तीन महीनों में विभाग के सेवा एवं भर्ती नियमों में संशोधन भी कर लिया जाएगा. बैठक में मौजूद कृषि एवं सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि सहकारिता विभाग द्वारा वर्ष 2019-2020 में 21.86 लाख कृषकों को 9541 करोड़ रूपये का अल्पकालीन सहकारी फसली ऋण वितरित किया है. वर्ष 2020-21 में खरीफ सीजन के लिए 23.91 लाख किसानों को 7343.71 करोड़ रूपये का ऋण वितरित किया गया है, इसमें 2.25 लाख नए कृषकों को 393.80 करोड़ रूपये का ऋण बांटा गया.

अब शहरी क्षेत्रों में भी जल्द लगाए जाएंगे स्वास्थ्य मित्र, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने दी जानकारी

बैठक में यह भी तय किया गया कि सभी सहकारी भण्डारों के मेडिकल विक्रय केन्द्र ऑनलाइन होंगे जिससे प्रदेश के 4.15 लाख पेंशनरों को सहुलियत मिलेगी. प्रदेश में टिड्डियों के संकट पर भी विचार विमर्श किया गया. अब तक प्रदेश में 5 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण के लिए दवा छिड़काव किया गया. इस वर्ष प्रदेश के 33 में से 32 जिलों में टिड्डियों का प्रकोप रहा. आने वाले दिनों में टिड्डियों के नए दलों के आक्रमण की आंशका है. सोमवार की बैठक को विधानसभा सत्र से जोड़कर भी देखा जा रहा है. दरअसल, 21 अगस्त से फिर से सदन की कार्यवाही शुरू होनी है, जिसमें किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठ सकते हैं, लेकिन इससे पहले ही मुख्यमंत्री ने तमाम मुद्दों पर चर्चा करके विपक्ष के हमलों के जवाब तैयार कर लिए है और साथ ही किसानों की विभिन्न मांगों को स्वीकार कर लिया है.  
 

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केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान सरकार भी लाएगी तीन नए बिल

जयपुर: केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान सरकार भी तीन नए बिल विधानसभा में पारित कराएगी. राज्य सरकार इसके लिए नवंबर के पहले सत्र में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता मे मंगलवार रात को मुख्यमंत्री आवास पर हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में यह फैसला लिया गया.

सीएम ने पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में फैसला लेने की बात कही: 
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व राहुल गांधी ने कांग्रेस शासित राज्य सरकारों को निर्देश दिए थे कि वे अपने राज्य में केंद्र के कानूनों को बायपास करने के लिए विधानसभा को सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास करे. राजस्थान सरकार इस मामले में पंजाब सरकार के कदम का इंतजार कर रही थी. 12 अक्टूबर को भी इस मामले में गहलोत मंत्री परिषद की बैठक हुई थी, लेकिन तब कोई फैसला नहीं हो सका. मंगलवार को पंजाब सरकार ने विधानसभा के विशेष सत्र में केंद्र के कानून के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया. साथ ही तीन नए बिल विधानसभा से पारित करा दिए. इसकी सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तुरंत मंत्रिपरिषद की बैठक बुलाई और पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में फैसला लेने की बात कही. पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया था, जिसके तहत सरकार ने तीन नए कानून पास किए हैं जिसमें केंद्र से अलग बातें शामिल की गई हैं.

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किसान को MSP से नीचे फसल देने पर मजबूर किया जाता: 
प्रस्ताव में इस बात को शामिल किया गया है कि अगर किसान को MSP से नीचे फसल देने पर मजबूर किया जाता है, तो ऐसा करने वाले को तीन साल तक की जेल हो सकती है. साथ ही अगर किसी कंपनी या व्यक्ति द्वारा किसानों पर जमीन, फसल को लेकर दबाव बनाया जाता है तो भी जुर्माना और जेल का प्रस्ताव लाया गया है. केंद्रीय कानून में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट में किसानों और कंपनियों के बीच विवाद होने पर केवल एसडीएम तक ही केस लड़े जाने का प्रावधान किया हुआ है, जबकि इसके प्रभाव को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अपने एक्ट में प्रावधान किया है कि सिविल कोर्ट में किसान जा सकेंगे. केंद्रीय कानून में कहा गया है कि खरीदी जाने वाली फसल के बारे में कोई भी लिमिट नहीं होगी और न ही यह कहां भंडारण की गई है इसके बारे में बताने की जरूरत है. इस प्रभाव को कम करने के लिए पंजाब सरकार ने अपने बिल में कहा है कि खरीदी जाने वाली फसल की सीमा राज्य सरकार द्वारा तय की जाएगी और इसे कहां स्टोर किया गया है यह भी बताना होगा. अब इसी तरह के संशोधन राजस्थान में किए जाएंगे.

अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी:
सीएम गहलोत ने कहा है कि सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के नेतृत्व में हमारे अन्नदाता किसानों के पक्ष में मजबूती से खड़ी है और हमारी पार्टी किसान विरोधी कानून जो एनडीए सरकार ने बनाए हैं, का विरोध करती रहेगी. पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इन कानूनों के विरुद्ध बिल पारित किये हैं. राजस्थान भी शीघ्र ही ऐसा ही करेगा. इससे पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने पंजाब के मंत्री मनप्रीत सिंह बादल से फोन पर बात करके पंजाब के नए कानून की कॉपी मांगी. मंत्रिपरिषद की बैठक में मुहर लग गई है कि राज्य के कानून में बदलाव किए जाए. अब पंजाब की तर्ज पर ही राजस्थान में कृषि विभाग के अधिकारी व विधि विभाग अगले दो तीन दिन में ड्राफ्ट तैयार करेगा.

केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, कैप्टन जमकर साधा निशाना

केंद्रीय कृषि कानून के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पेश, कैप्टन जमकर साधा निशाना

चंडीगढ़: देश के अलग-अलग हिस्सों में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इस बीच आज पंजाब विधानसभा में इन कानूनों के खिलाफ प्रस्ताव पेश कर दिया है. इसके साथ ही तीन एक्ट भी पेश किए गए. ऐसे में पंजाब ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है. 

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया:
मंगलवार को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया. बिल पेश करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि वे केंद्रीय कृषि कानून की आलोचना करते हैं. केंद्र सरकार इस एक्ट को वापस ले, इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है. इस कानून से किसानों का भला नहीं होगा, बल्कि उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ेगा.

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इलेक्ट्रिसिटी बिल में भी जो बदलाव किए गए: 
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रस्ताव पेश करने के बाद कहा कि तीन कृषि कानूनों के अलावा इलेक्ट्रिसिटी बिल में भी जो बदलाव किए गए हैं, वो भी किसान और मजदूरों के खिलाफ हैं. इससे पंजाब के साथ हरियाणा और वेस्ट यूपी पर भी असर पड़ेगा. 

अब धरना खत्म कर दें और काम पर लौटें:
विधानसभा में केंद्र के कानूनों के खिलाफ तीन नए बिल पेश किए गए, जो केंद्र द्वारा लाए कानूनों के बिल्कुल अलग हैं और एमएसपी को जरूरी करते हैं. पंजाब सीएम ने रेलवे ट्रैक पर बैठे किसानों से अपील की है कि अब धरना खत्म कर दें और काम पर लौटें, इन कानूनों के खिलाफ हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे. 

VIDEO: प्रदेश के किसानों के लिए राहतभरी खबर, समर्थन मूल्य पर मूंग,उड़द,सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद

जयपुर: प्रदेश के किसानों के लिए राहत भरी खबर है. प्रदेश में समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद के लिये ऑनलाइन पंजीकरण 20 अक्टूबर से शुरू किया जा रहा है. 850 से अधिक खरीद केन्द्रों पर मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की 1 नवम्बर से तथा 18 नवम्बर से मूंगफली खरीद की जाएगी. प्रदेश में मूंग के लिए 365, उड़द के लिए 161, मूंगफली के 266 एवं सोयबीन के लिए 79 खरीद केन्द्र चिह्नित किए गए हैं. पूर्व वर्ष की तुलना में इस वर्ष 500 से अधिक खरीद केन्द्र खोले गये है.

सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने दी जानकारी:
सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना ने बताया कि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था ई-मित्र एवं खरीद केन्द्रों पर सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक की गई है. केन्द्र सरकार को मूंग की 3.57 लाख मीट्रिक टन, उडद 71.55 हजार, सोयाबीन 2.92 लाख तथा मूंगफली 3.74 लाख मीट्रिक टन की खरीद  के लक्ष्य की स्वीकृति भारत सरकार ने दी है. पंजीकरण के अभाव में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद संभव नहीं होगी. आंजना ने बताया कि वर्ष 2020-21 के लिए मूंग के लिए 7196 रुपए एवं उड़द के लिए 6000 रुपए, मूंगफली के लिए 5275 रुपए एवं सोयाबीन के लिए 3880 रुपए प्रति क्विंटल प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य घोषित किया है. किसानों को अपनी उपज बेचने में किसी प्रकार की परेशानी न हो इसके लिए खरीद केन्द्रों पर आवश्यकतानुसार तौल-कांटें लगाये जायेंगे एवं पर्याप्त मात्रा में बारदाना उपलब्ध कराया जाएगा. प्रमुख सचिव कुंजीलाल मीणा ने बताया कि किसान को  जनआधार कार्ड नम्बर, खसरा गिरदावरी की प्रति एवं बैंक पासबुक की प्रति पंजीयन फार्म के साथ अपलोड़ करनी होगी. जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जाएगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिये मान्य नहीं होगा. यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किये जाते या तहसील के बाहर पंजीकरण किये जाते है तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

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20 अक्टूबर से शुरू होगा हेल्प लाइन नम्बर: 
रजिस्ट्रार मुक्तानन्द अग्रवाल ने बताया कि किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगा. किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि जिस तहसील में कृषि भूमि में उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केन्द्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण करावें. दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नही होगा. राजफैड की प्रबंध निदेशक सुषमा अरोडा ने बताया कि किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाईल नम्बर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके. किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो. उन्होंने बताया कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प लाइन नम्बर 1800-180-6001 भी 20 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगा. 

मुश्किल समय में कांग्रेस किसानों के साथ, कल होगा किसान सम्मेलन- डोटासरा

मुश्किल समय में कांग्रेस किसानों के साथ, कल होगा किसान सम्मेलन- डोटासरा

जयपुर: बिरला सभागार सज कर तैयार है, कल सुबह यहां कांग्रेस पार्टी किसान सम्मेलन का आयोजन करेगी. सोशल डिस्टेंशिंग के साथ ये कार्यक्रम किया जाएगा. इसी सिलसिले में प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने पी सी सी में प्रेस वार्ता की और केंद्र के कृषि कानूनों को किसान विरोधी बताया.

किसानों को कमजोर करने का काम किया: 
एक बार फिर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने जमकर हमला बोला है. डोटासरा ने कहा कि केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानूनों के जरिए किसानों को कमजोर करने का काम किया है, किसान मुश्किल में हैं और इस मुश्किल समय में कांग्रेस हमेशा किसानों के साथ खड़ी रहेगी.

इन कानूनों से मंडी व्यवस्था खत्म करने का काम किया गया:  
पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने आज प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुजरात के सीएम रहते लाभकारी मूल्य और एमएसपी की पैरवी की थी आज मोदी जी अपनी ही बात से मुकर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों के जरिए किसान की जमीन पर कब्जे का षड्यंत्र, नए-नए बिचौलिए पैदा करने का षड्यंत्र के साथ साथ इन कानूनों से मंडी व्यवस्था खत्म करने का काम किया गया है.

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प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा:
पीसीसी चीफ डोटासरा ने मीडिया से कहा कि इन तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कांग्रेस का 2 अक्टूबर से शुरू हुआ हस्ताक्षर अभियान 30 अक्टूबर तक चलेगा तो वहीं तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ रविवार को बिरला सभागार में प्रदेश स्तरीय किसान सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.

किसान संगठनों के प्रतिनिधी को भी इसमें शिरकत करेंगे:
सुबह 10:30 बजे से आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी शामिल होंगे. इसके अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शिरकत करेंगे. सम्मेलन में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने, मास्क सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई है.

कृषि कानूनों की खामियों को उजागर करने का काम करेंगे:
किसान सम्मेलन में वक्ता कृषि कानूनों की खामियों को उजागर करने का काम करेंगे साथ ही उसमें प्रस्ताव भी पारित किया जाएगा. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, मंत्रिमंडल के सदस्य, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री और पार्टी के पदाधिकारी शामिल होंगे. इसके अलावा किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को भी इसमें शिरकत करेंगे. सम्मेलन में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने, मास्क सेनेटाइजर की व्यवस्था की गई है. 

...फर्स्ट इंडिया के लिये योगेश शर्मा की रिपोर्ट
 

कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

कृषि कानून के विरोध में धरने पर बैठे पंजाब के CM, राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान

नई दिल्ली: कृषि कानून के विरोध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टम अमरिंदर सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती पर उनके जन्मस्थान खटकर कलां गांव में धरना  दे रहे हैं. उनके साथ मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए हैं. धरना शुरू करने से पहले सीएम कैप्टम अमरिंदर सिंह ने भगत सिंह की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी.

विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक': 
इस दौरान उन्होंने कृषि विधेयकों को राष्ट्रपति की मंजूरी को 'दुर्भाग्यपूर्ण और निराशाजनक' बताया है. अमरिंदर सिंह ने कहा कि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को संसद में अपनी चिंताएं जाहिर करने का मौका नहीं दिया गया. ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी उन किसानों के लिए झटका है जो केंद्र के इन कानूनों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. इन कानूनों के लागू होने से पंजाब का कृषि क्षेत्र बर्बाद हो जाएगा. 

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राहुल गांधी ने बताया किसानों की मौत का फरमान: 
वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कृषि कानून को किसानों के मौत का फरमान बताया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि नया कृषि कानून किसानों के लिए मौत का फरमान है. उनकी आवाज को संसद और संसद के बाहर दबाया जा रहा है. ये सबूत है कि देश में लोकतंत्र मर चुका है. 

कांग्रेस सांसद ने दी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती: 
इससे पहले केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

कांग्रेस सांसद ने सुप्रीम कोर्ट में कृषि अधिनियम को दी चुनौती, कानून वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: कृषि बिल के खिलाफ सड़क पर जारी प्रदर्शन का मसला अब सुप्रीम कोर्ट में पहुंच गया है. केरल से कांग्रेस सांसद टीएन प्रतापन ने कृषि अधिनियम को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. संसद द्वारा किसानों से जुड़े बिल को वापस लेने के लिए रिट याचिका दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष टीएन प्रतापन के वकील आशीष जॉर्ज, एडवोकेट जेम्स पी थॉमस और एडवोकेट सीआर रेखेश शर्मा पेश होंगे.

ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया:  
वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने इंडिया गेट के पास ट्रैक्टर में आग मामले में 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इनकी पहचान मनजोत सिंह, रमन सिंह, राहुल, साहिब और सुमित के तौर पर हुई है. ये सभी पंजाब के हैं. उनसे पूछताछ की जा रही है एक गाड़ी भी बरामद हुई है.

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कर्नाटक में जदएस के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली:
कर्नाटक में भी आज कृषि बिल का विरोध देखने को मिल रहा है. कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जदएस) के कार्यकर्ताओं ने शिवमोगा में एक बाइक रैली निकाली, उन्हें पुलिस ने लक्ष्मी थिएटर सर्कल पर रोक दिया. कृषि कानून, भूमि सुधार अध्यादेश, कृषि उपज मंडी समिति में संशोधन और श्रम कानूनों के खिलाफ किसान संगठनों ने आज राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है. 

कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी:
बता दें कि कृषि कानून के खिलाफ देशभर में विरोध प्रदर्शन जारी है. दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में इसका व्यापक असर देखने को मिल रहा है. 

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

कृषि बिल पर बवाल जारी, दिल्ली में संसद भवन के पास किसानों ने लगाई ट्रैक्टर में आग

नई दिल्ली: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन कृषि बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, यानी अब ये कानून बन चुके हैं. ऐसे में आज भी देश के कई हिस्सों में बिल के खिलाफ प्रदर्शन हो रहा है. इसके साथ ही प्रदर्शन की आग देश की राजधानी दिल्ली तक भी पहुंच गई है. आज सुबह दिल्ली में किसानों ने राजपथ के पास एक ट्रैक्टर में आग लगा दी. ये लोग ट्रैक्टर को इंडिया गेट के पास लाकर प्रदर्शन कर रहे थे. मौके पर दिल्ली पुलिस और फायर ब्रिगेड ने पहुंच कर आग पर काबू पाया.  

वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू: 
हालांकि दिल्ली में इंडिया गेट और आस पास के वीआईपी इलाकों में धारा 144 लागू है और कोरोना वायरस के मद्देनजर लोगों को इकट्ठा होने की इजाजत नहीं है.प्रदर्शनकारियों को इक्कठा होने नहीं दिया गया. दूसरी ओर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह आज धरने पर भी बैठेंगे. 

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पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज: 
इसके साथ ही पंजाब में किसानों और सियासी दलों का विरोध और तेज हो रहा है. किसान संगठनों ने पंजाब में रेल रोको प्रदर्शन 29 सितंबर तक बढ़ा दिया है. बिल के खिलाफ अकाली दल जगह-जगह रैली कर रहा है.

कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया:
वहीं कर्नाटक में भी आज किसानों ने फिर राज्य बंद बुलाया है. कृषि बिल के विरोध में राज्य के किसानों ने ये बंद बुलाया है, इस दौरान सोमवार सुबह शिवमोगा में ट्रैफिक सामान्य दिखा.

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

Bharat Bandh: कृषि बिलों के विरोध में आज किसानों का भारत बंद, पंजाब और हरियाणा में ज्यादा असर

नई दिल्ली: किसानों को लेकर हाल ही में संसद से पास तीन कृषि विधेयकों के विरोध में आज किसान संगठनों ने देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. इसमें 31 संगठन शामिल हो रहे हैं. किसान संगठनों को कांग्रेस, RJD, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, AAP, TMC समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है. हालांकि आंदोलन का ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है. इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरुआत हो गई है. किसान रेलवे ट्रैक पर डटे हुए हैं और बिल को वापस लेने की मांग कर रहे हैं.

शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द:
रेल रोको आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने शनिवार तक 20 विशेष ट्रेनें आंशिक रूप से रद्द और पांच को गंतव्य से पहले रोक दिया है. वहीं, हरियाणा में किसानों-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने की भी चेतावनी दी है. उधर, यूपी में भी सपा ने किसान कर्फ्यू और जाम का आह्वान किया है. 

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बिहार के हाजीपुर में भी खास असर:
कृषि बिल के विरोध में बुलाए गए भारत बंद का सबसे खास असर बिहार के हाजीपुर में देखने को मिल रहा है. गांधी सेतु के निकट NH 19 पर जाम लगाया गया है. सुबह से ही पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी के समर्थक सड़क पर डटे हैं. बंद समर्थकों ने NH 19 को बंद करा दिया है. सड़कों पर टायर जला कर नारेबाजी की जा रही है. 

दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया: 
वहीं भारत बंद के चलते दिल्ली-चंडीगढ़ बस सेवा को बंद कर दिया गया है. किसानों के विरोध के चलते ट्रेन के पहिये भी थमे हैं. पंजाब सरकार ने यह हिदायत भी दी है कि पंजाब बंद के दौरान किसानों के प्रति नरम रवैया अपनाया जाए और उन पर कोई सख्त जबरदस्ती न की जाए.

इन विधेयकों का हो रहा विरोध: 
केंद्र सरकार ने हाल ही में कृषि सुधारों से जुड़े तीन बिल संसद से पास कराए हैं. ये हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) बिल-2020, कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता बिल-2020 और कृषि सेवा विधेयक-2020। किसानों को आशंका है कि संसद से पारित बिल के जरिये न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म करने का रास्ता खुल जाएगा और उन्हें बड़े कॉरपोरेट की दया पर रहना पड़ेगा.