दो दशकों के राजस्थानी उपन्यासों पर हुआ मंथन, उपन्यासकारों ने कई मुद्दों पर की चर्चा 

FirstIndia Correspondent Published Date 2019/07/29 04:19

रायसिंहनगर: दो दशकों के राजस्थानी उपन्यासों पर देश के राजस्थानी उपन्यासकारों ने लेखा जोखा प्रस्तुत किया. यह कार्यक्रम कल रायसिंहनगर के होटल ब्लैक पैंथर में आयोजित हुआ, जिसमें वरिष्ठ उपन्यासकार देवकिशन राजपृरोहित ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.  

दो उपन्यासों का हुआ विमोचन:
इस अवसर पर मारवाड़ रतन देवकिशन राजपुरोहित के दो उपन्यासों बैकुंठी और बाल उपन्यास भूतनी का विमोचन डॉ मधुआचार्य आशावादी ने किया. डॉ मधुआचार्य राजस्थानी भाषा के केंद्र में कन्वीनर भी हैं. कार्यक्रम में कई गणमान्य अतिथियों ने भी भाग लिया. प्रथम सत्र में डॉ सत्यनारायण सोनी, डॉ नीरज दैया और डॉ मंगत बादल ने पत्रवाचन किया. जबकि सत्र की अध्यक्षता भूपेंद्र सिंह ने की थी. दूसरे सत्र में पत्रवाचन डॉ सीमा भाटी, डॉ कृष्ण कुमार आशु, पूरन शर्मा पूर्ण ने किया. पत्रवचकों ने नारी विमर्श, दलित विमर्श, भाषा शैली आदि पर खुल कर चर्चा की. 

दो दशक में 66 राजस्थानी उपन्यास:
वरिष्ठ कथाकार रामस्वरूप किसान ने उपन्यास की व्याख्या की. कार्यक्रम में बिजवक्तव्य मधु आचार्य द्वारा दिया गया. धन्यवाद ज्ञापन राजेन्द्र गोदारा द्वारा किया गया. मंच संचालन हरीश बी शर्मा ने किया और अकादमी की गतिविधियों पर अकादमी प्रतिनिधि ज्योति कृष्ण नई दिली ने प्रकाश डाला।ज्ञातव्य है विगत दो दशक में 66 राजस्थानी उपन्यास लिखे गए हैं, जिसमें देवकिशन राजपुरोहित द्वारा 7 उपन्यास लिखे गए हैं. 

... रायसिंहनगर से हेमसिंह राजपुरोहित की रिपोर्ट

First India News से जुड़े अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करे!
हर पल अपडेट रहने के लिए अभी डाउनलोड करें First India News Mobile Application
लेटेस्ट वीडियो के लिए हमारे YOUTUBE चैनल को विजिट करें

और पढ़ें

Most Related Stories

Stories You May be Interested in