मुख्यमंत्री आवास पर लगी मंत्रियों की क्लास, जांचें गए रिपोर्ट कार्ड!

Naresh Sharma Published Date 2019/09/20 11:10

जयपुर: गुरुवार को दिन में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में कांग्रेस की मंथन बैठक के बाद देर शाम को मुख्यमंत्री आवास पर मंत्रियों की क्लास लगी. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पीसीसी चीफ सचिन पायलट व प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे की मौजूदगी में मंत्रियों से दो घंटे तक चर्चा की गई और उनके रिपोर्ट कार्ड पर बात की गई. मंत्रियों की बैठक से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अविनाश पांडे व सचिन पायलट में 40 मिनट तक बंद कमरे में बात हुई.

मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड भी जांचे गए: 
कांग्रेस में आज दिन भर सत्ता व संगठन में समन्वय को लेकर मैराथन चर्चा चली, तो मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड भी जांचे गए. बात राजनीति नियुक्तियों की भी हुई, तो कार्यकर्ताओं की मंत्रियों के खिलाफ नाराजगी पर भी चिंता जाहिर की गई. दोपहर पीसीसी में कांग्रेस की बैठक हुई और शाम को सभी मंत्रियों को मुख्यमंत्री आवास पर तलब कर लिया गया. इस बैठक में मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री व प्रदेश प्रभारी के अलावा सह प्रभारी विवेक बंसल व तरुण कुमार मौजूद रहे. हालांकि यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, खेल मंत्री अशोक चांदना व शिक्षा राज्य मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा बैठक में नहीं आए. प्रदेश में सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाने के मकसद से आज मुख्यमंत्री आवास पर यह बैठक हुई. बैठक में सबसे पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड पर चर्चा की. सीएमओ की ओर से सभी मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड तैयार किए गए थे कि किस मंत्री ने अब तक कैसा काम किया है. कई मंत्रियों के रिपोर्ट कार्ड से मुख्यमंत्री को निराशा हुई. 

मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को कामकाज बेहतर करने के निर्देश दिए: 
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों को कामकाज बेहतर करने के निर्देश दिए हैं. कार्यकर्ताओं व पार्टी पदाधिकारियों द्वारा मंत्रियों की शिकायत करने का मुद्दा भी उठा. जब एक एक मंत्री के बारे में बैठक में बताया गया, तो कुछ मंत्रियों के चेहरे उतर गए. मंत्रियों द्वारा सुनवाई नहीं करने का मामला दिल्ली में संगठन स्तर तक पहुंचा और इसी कारण अविनाश पांडे की मौजूदगी में ही यह बैठक हुई. प्रदेश प्रभारी अविनाश पांडे ने सभी मत्रियों को अपने जिलों में जाने और आम जनता कार्यकर्ता के बीच रहकर उनकी समस्या परेशानी दूर करने के लिए कहा है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि पंचायत और निकाय चुनाव कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती है. इसलिए राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जनता के बीच रखा जाना बेहद जरूरी है. प्रदेश अध्यक्ष व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने भी मंत्रियों से कहा कि जिन कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने उनको जिताकर भेजा है, उनकी अनदेखी किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए. 

राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ: 
पहले चर्चा थी कि बैठक में मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कोई फैसला हो सकता है, लेकिन इस पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई. हां, मंत्रियों को यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया कि अगर उनका परफॉर्मेंस नहीं सुधरा, तो बदलने में भी संकोच नहीं किया जाएगा. फ्लॉप रहने पर दूसरों को मौका मिल सकता है. बैठक के दूसरे चरण में राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक राजस्थान में जल्द राजनीतिक नियुक्तियां की जा सकती हैं. पहले चरण में 20 से 25 नियुक्तियां की जा सकती है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के स्तर पर दो अलग-अलग सूचियां तैयार हैं. लेकिन पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के निर्देशों के बाद अब एक नई सूची तैयार की जा रही है. जिसमें मंत्रियों से भी नाम मांगे गए हैं. आज की बैठक में भी मंत्रियों से कहा गया कि वे राजनीतिक नियुक्ति के लिए अपने क्षेत्र के ऐसे लोगों के नाम दे, तो पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता है, क्षेत्र में उनकी पेठ हैं और विधानसभा व लोकसभा चुनाव में पार्टी के लिए जी तोड़ मेहनत की हो.  

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी मंत्रियों को दिया डिनर:  
इस बैठक में मंत्री रघु शर्मा, बीडी कल्ला, भंवर सिंह भाटी, उदयलाल आंजना, हरीश चौधरी, सुभाष गर्ग, अर्जुन बामणिया, भजन लाल जाटव, लालचंद कटारिया, प्रताप सिंह खाचरियावास, प्रमोद जैन भाया, ममता भूपेश, टीकाराम जूली, साले मोहम्मद, सुखराम विश्नोई, विश्वेंद्र सिंह, परसादी लाल मीणा, राजेंद्र यादव, रमेश मीणा मौजूद थे. बैठक के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सभी मंत्रियों को डिनर भी दिया. इस डिनर पॉलिटिक्स से तो यह हो गया है कि अब सत्ता व संगठन में आपसी समन्वय को लेकर आलाकमान भी पूरी तरह सक्रिय है और मंत्रियों का भविष्य अब रिपोर्ट कार्ड के आधार पर तय होगा. मौजूदा मंत्रिमंडल में से पांच-छह मंत्रियों की रिपोर्ट बेहद खराब बताई जा रही है.  मंत्रियों की बैठक से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अविनाश पांडे व सचिन पायलट में गहन चर्चा हुई. पांडे का प्रयास है कि सत्ता व संगठन में बेहतर तालमेल रखा जाए और कार्यकर्ताओं को भी उचित सम्मान मिले. पायलट गुरुवार को दो बार मुख्यमंत्री आवास गए. अब देखना यह है कि बुधवार को इन मैराथन बैठक का असर आने वाले दिनों में कितना दिखाई देता है. 

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